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दिन का पद्य

फिलिप्‍पी 2:3
स्‍वार्थपूर्ण अभिलाषा सँ वा अपना केँ किछु बनयबाक लेल कोनो काज नहि करू, बल्‍कि नम्र भऽ कऽ दोसर केँ अपना सँ श्रेष्‍ठ मानू।