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दिन का पद्य

रोमी 5:5
और ई आशा अपना सभ केँ निराश नहि होमऽ दैत अछि, किएक तँ परमेश्‍वर अपन पवित्र आत्‍मा जे अपना सभ केँ देने छथि, तिनका द्वारा अपन प्रेम अपना सभक हृदय मे भरि देने छथि।