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दिन का पद्य

गलाती 4:19
यौ हमर बौआ सभ, जाबत धरि मसीहक स्‍वरूप अहाँ सभ मे नहि बनि जायत, ताबत धरि हम अहाँ सभक लेल फेर प्रसव-पीड़ा सहि रहल छी।