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दिन का पद्य

इफिसी ४:२९
अहाँ सभक मुँह सँ कोनो हानि पहुँचाबऽ वला बात नहि निकलय, बल्‍कि एहन बात जे दोसराक उन्‍नतिक लेल होअय और अवसरक अनुरूप होअय, जाहि सँ ओहि सँ सुननिहारक हित होयतैक।