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दिन का पद्य

2 कोरिन्‍थी ४:१८
तेँ हमरा सभक नजरि ओहि वस्‍तु सभ पर टिकल नहि अछि जे देखाइ दैत अछि, बल्‍कि ओहि वस्‍तु सभ पर जे आँखि सँ नहि देखल जा सकैत अछि, किएक तँ देखाइ पड़ऽ वला वस्‍तु सभ तँ कनेके काल टिकैत अछि, मुदा जे वस्‍तु सभ देखल नहि जा सकैत अछि, से अनन्‍त काल तक बनल रहैत अछि।