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पाप: [लोलुपता]

1 कोरिन्‍थी 6:12
“सभ किछु करबाक हमरा स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा सभ किछु हितकर नहि अछि। “सभ किछु करबाक हमरा स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा हम कोनो बातक गुलाम नहि बनब।

1 कोरिन्‍थी 10:7
हुनका सभ मे सँ किछु लोक जकाँ अहाँ सभ मूर्तिक पूजा कयनिहार नहि बनू, जिनका सभक विषय मे धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “लोक सभ खयबाक-पिबाक लेल बैसल आ मौज-मजा करबाक लेल उठल।”

1 कोरिन्‍थी 15:32
जँ हम इफिसुस मे हिंसक पशु सभ सँ लड़लहुँ तँ मनुष्‍यक दृष्‍टिकोण सँ हमरा की लाभ भेल? जँ मरल सभ जिआओल नहि जायत तँ, “आउ, खाइ आ पिबी, किएक तँ काल्‍हि तँ मरहेक अछि।”

फिलिप्‍पी 3:19
ओकरा सभक सर्वनाश निश्‍चित अछि। ओ सभ पेट केँ अपन ईश्‍वर बना लेने अछि आ एहन बात सभ पर गर्व करैत अछि जाहि पर लाज होयबाक चाहिऐक। ओ सभ सांसारिक वस्‍तु सभ पर मोन लगौने अछि।

रोमी 13:14
प्रभु यीशु मसीह केँ धारण करू, आ अपन पापी स्‍वभावक इच्‍छा सभ केँ तृप्‍त करबाक विचार छोड़ि दिअ।

तीतुस 1:12
क्रेत वासी सभक अपनो एक भविष्‍यवक्‍ता कहने छथि जे, “क्रेत वासी सभ हरदम झूठ बजैत अछि, मरखाह जानबर आ आलसी पेटाह अछि।”

1 कोरिन्‍थी 6:19-20
[19] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍माक मन्‍दिर अछि, जे आत्‍मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि आ जे अहाँ सभ केँ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त भेल छथि? अहाँ सभ अपन नहि छी।[20] अहाँ सभ दाम दऽ कऽ किनल गेल छी। एहि लेल अपना शरीर द्वारा परमेश्‍वरक सम्‍मान करू।

रोमी 14:13-17
[13] तेँ आब सँ अपना सभ एक-दोसर पर दोष लगौनाइ छोड़ि दी। निश्‍चय कऽ लिअ जे अपन भायक बाट पर रोड़ा नहि अटकायब वा जाल नहि ओछायब।[14] हम प्रभु यीशुक लोक होयबाक कारणेँ जनैत छी, हमरा एहि बातक पूर्ण निश्‍चय अछि, जे कोनो भोजन अपने मे अशुद्ध नहि अछि। मुदा जँ कोनो व्‍यक्‍ति ओकरा अशुद्ध मानैत अछि तँ ओ वस्‍तु ओकरा लेल अशुद्ध अछि।[15] अहाँ जे वस्‍तु खाइत छी ताहि कारणेँ जँ अहाँक भाय केँ चोट लगैत छैक तँ अहाँ अपना भायक संग प्रेमपूर्ण आचरण नहि कऽ रहल छी। ओहि भायक लेल मसीह अपन प्राण देलनि, तँ अहाँ अपन भोजन द्वारा ओकर विनाशक कारण नहि बनू।[16] जे बात अहाँ नीक मानैत छी तकरा निन्‍दाक विषय नहि बनऽ दिअ।[17] कारण, परमेश्‍वरक राज्‍य खयनाइ-पिनाइक बात नहि अछि, बल्‍कि परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍मा सँ प्राप्‍त धार्मिकता, शान्‍ति आ आनन्‍दक बात अछि।

2 तिमुथियुस 3:1-9
[1] मुदा अहाँ ई निश्‍चित रूप सँ जानि लिअ जे अन्‍तिम दिन सभ मे संकटपूर्ण समय आओत।[2] किएक तँ लोक स्‍वार्थी, धनक लोभी, अहंकारी, उदण्‍ड, परमेश्‍वरक निन्‍दा कयनिहार होयत। माय-बाबूक आज्ञा नहि मानत, धन्‍यवाद देबाक भावना नहि राखत, आ परमेश्‍वर सँ ओकरा सभ केँ कोनो मतलब नहि रहतैक।[3] ओकरा सभ मे ने स्‍नेह रहत आ ने ककरो लेल दया, ओ सभ दोसराक निन्‍दा कयनिहार होयत, अपना पर काबू नहि राखत, आ क्रूर होयत। जे किछु नीक अछि, ताहि सँ घृणा करत।[4] ओ सभ विश्‍वासघाती, दुःसाहसी आ घमण्‍डी होयत। परमेश्‍वर सँ प्रेम करबाक बदला मे भोग-विलास सँ प्रेम करत।[5] ओ सभ भक्‍तिक ढोङ रचत मुदा भक्‍तिक भितरी शक्‍ति केँ अस्‍वीकार करत। अहाँ एहन लोक सभ सँ हटि कऽ रहू।[6] एहन लोक सभ कोनो बहाना सँ लोकक घर मे ढुकि कऽ ओहन कमजोर स्‍त्रीगण सभ केँ अपना वश मे कऽ लैत अछि जे सभ पापक बोझ सँ पिचायल अछि और अनेक प्रकारक अधलाह इच्‍छा सभक नियन्‍त्रण मे अछि।[7] एहन स्‍त्रीगण सभ सदिखन किछु सिखैत तँ अछि, मुदा सत्‍यक ज्ञान तक कहियो नहि पहुँचैत अछि।[8] जहिना यन्‍नेस आ यम्‍ब्रेस मूसाक विरोध कयलक, तहिना इहो लोक सभ सत्‍यक विरोध करैत अछि। एकरा सभक बुद्धि भ्रष्‍ट भऽ गेल छैक और एकरा सभक विश्‍वास नकली छैक।[9] मुदा ई सभ बेसी आगाँ नहि बढ़ि सकत, किएक तँ मूसाक विरोध कयनिहार जकाँ एकरो सभक मूर्खता सभक सामने मे देखार भऽ जयतैक।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT