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पाप: [अपशब्द]


कुलुस्‍सी 3:8
मुदा आब अहाँ सभ एहि बात सभ केँ, अर्थात् तामस, क्रोध, दुष्‍ट भावना, दोसराक निन्‍दा कयनाइ आ गारि बजनाइ, छोड़ि दिअ।

कुलुस्‍सी 4:6
जखन ओकरा सभ सँ बात-चीत करैत छी, तँ नम्रता और विचारशीलता सँ करू, तखन अहाँ सभ प्रत्‍येक लोक केँ समुचित उत्तर देनाइ सिखब।

इफिसी 4:29
अहाँ सभक मुँह सँ कोनो हानि पहुँचाबऽ वला बात नहि निकलय, बल्‍कि एहन बात जे दोसराक उन्‍नतिक लेल होअय और अवसरक अनुरूप होअय, जाहि सँ ओहि सँ सुननिहारक हित होयतैक।

इफिसी 5:4
आ ने निर्लज्‍जता, मूर्खतापूर्ण बात-चीत वा अभद्र मजाक होअय—अहाँ सभ केँ एहन बात सभ शोभा नहि दैत अछि, बल्‍कि एहि सभक बदला मे प्रभु केँ धन्‍यवादे देबाक काज होयबाक चाही।

याकूब 1:26
जँ केओ अपना केँ धार्मिक बुझैत अछि मुदा अपन मुँह काबू मे नहि रखैत अछि तँ ओ अपना केँ धोखा दैत अछि और ओकर ओ धर्म बेकार छैक।

याकूब 3:10
एके मुँह सँ प्रशंसा आ सराप दूनू निकलैत अछि। यौ हमर भाइ लोकनि, एना तँ होयबाक नहि चाही।

याकूब 3:5-12
[5] तहिना जीह शरीरक एक छोटे अंग अछि, मुदा बात बहुत पैघ-पैघ बजैत घमण्‍ड करैत अछि। सोचू, नान्‍हिएटा आगिक लुत्ती कतेकटा वन मे आगि लगा दैत अछि।[6] जीह सेहो एक आगि अछि। अपना सभक शरीरक अंग सभ मे जीहे मे अधर्मक एक विशाल संसार भरल अछि। ई सम्‍पूर्ण शरीर केँ दुषित कऽ दैत अछि, आ नरकक आगि सँ पजरि कऽ अपना सभक सम्‍पूर्ण जीवनक गति मे आगि लगा दैत अछि।[7] सभ प्रकारक पशु-पक्षी, जमीन मे ससरऽ वला जीव-जन्‍तु, जल मे पाओल जाय वला जीव—सभ केँ मनुष्‍य द्वारा वश मे कयल जा सकैत अछि आ कयलो गेल अछि।[8] मुदा जीह केँ केओ वश मे नहि कऽ सकैत अछि। ई एक एहन अधलाह वस्‍तु अछि जे कखनो स्‍थिर नहि रहैत अछि। प्राण-घातक विष एकरा मे भरल छैक।[9] अपना सभ जीह द्वारा अपन प्रभु आ पिताक प्रशंसा करैत छियनि आ एही जीह द्वारा परमेश्‍वरक स्‍वरूप मे रचना कयल मनुष्‍य केँ सराप दैत छिऐक।[10] एके मुँह सँ प्रशंसा आ सराप दूनू निकलैत अछि। यौ हमर भाइ लोकनि, एना तँ होयबाक नहि चाही।[11] की पानिक झड़नाक एके मुँह सँ मिठाह पानि आ तिताह पानि, दूनू बहराइत अछि?[12] यौ हमर भाइ लोकनि, की अंजीरक गाछ पर जैतून फड़ि सकैत अछि वा अंगूरक लत्ती मे अंजीर? तहिना नूनियाह झड़नाक मुँह बाटे मिठाह पानि सेहो नहि बहरा सकैत अछि।

लूका 6:28
जे सभ अहाँ केँ सराप दैत अछि, तकरा सभ केँ आशीर्वाद दिऔक। जे सभ अहाँक संग दुर्व्‍यवहार करैत अछि, तकरा सभक लेल प्रभु सँ प्रार्थना करू।

मत्ती 5:22
मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जे केओ अपना भाय पर क्रोधो करत तकरा कचहरी मे दण्‍डक योग्‍य ठहराओल जयतैक। जे अपन भाय केँ ‘रे मूर्ख’ कहत, तकरा धर्म-महासभा मे ठाढ़ होमऽ पड़तैक, और जे केओ अपना भाय केँ सराप देत, से नरकक आगि मे खसयबा जोगरक अछि।

1 पत्रुस 3:10
जेना धर्मशास्‍त्र कहैत अछि, “जे केओ जीवन मे आनन्‍द उठाबऽ चाहैत अछि आ नीक दिन देखऽ चाहैत अछि, से अपना जीह केँ अधलाह बात सभ बाजऽ सँ आ अपना ठोर केँ कपटपूर्ण बात सभ बाजऽ सँ रोकय।

मत्ती 15:11
जे कोनो वस्‍तु मुँह मे जाइत अछि, से मनुष्‍य केँ अशुद्ध नहि करैत अछि, बल्‍कि जे मुँह सँ बहराइत अछि से ओकरा अशुद्ध करैत अछि।”

रोमी 12:14
अहाँ सभ पर जे अत्‍याचार करय तकरा आशीर्वाद दिअ; हँ, आशीर्वाद दिअ, सराप नहि।

मत्ती 15:10-11
[10] यीशु भीड़क लोक केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “अहाँ सभ सुनू आ बुझू।[11] जे कोनो वस्‍तु मुँह मे जाइत अछि, से मनुष्‍य केँ अशुद्ध नहि करैत अछि, बल्‍कि जे मुँह सँ बहराइत अछि से ओकरा अशुद्ध करैत अछि।”

याकूब 3:8-10
[8] मुदा जीह केँ केओ वश मे नहि कऽ सकैत अछि। ई एक एहन अधलाह वस्‍तु अछि जे कखनो स्‍थिर नहि रहैत अछि। प्राण-घातक विष एकरा मे भरल छैक।[9] अपना सभ जीह द्वारा अपन प्रभु आ पिताक प्रशंसा करैत छियनि आ एही जीह द्वारा परमेश्‍वरक स्‍वरूप मे रचना कयल मनुष्‍य केँ सराप दैत छिऐक।[10] एके मुँह सँ प्रशंसा आ सराप दूनू निकलैत अछि। यौ हमर भाइ लोकनि, एना तँ होयबाक नहि चाही।

मत्ती 15:18-20
[18] मुदा जे बात मुँह सँ बहराइत अछि से हृदय सँ निकलि कऽ अबैत अछि आ से मनुष्‍य केँ अशुद्ध बनबैत अछि।[19] कारण, हृदय सँ निकलैत अछि विभिन्‍न तरहक गलत विचार, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन, अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध, चोरी, झूठ गवाही, निन्‍दाक बात,[20] आ यैह बात सभ मनुष्‍य केँ अशुद्ध करैत अछि, नहि कि बिनु हाथ धोने भोजन करब, से।”

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT