A A A A A

पाप: [व्यभिचार]


1 कोरिन्‍थी 6:18
अनैतिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रहू। आरो सभ पाप जे मनुष्‍य करैत अछि, से शरीर सँ हटल अछि, मुदा जे ककरो संग अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि से अपना शरीरेक विरुद्ध पाप करैत अछि।

इब्रानी 13:4
सभ केओ विवाह-बन्‍धन केँ आदरक दृष्‍टि सँ देखथि। वैवाहिक सम्‍बन्‍ध दुषित नहि कयल जाय कारण, जे अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि, चाहे ओ विवाहित होअय वा अविवाहित, परमेश्‍वर तकरा दण्‍ड देताह।

याकूब 4:17
एहि लेल, जे केओ ई जनैत अछि जे की कयनाइ उचित होइत मुदा करैत नहि अछि से पाप करैत अछि।

1 यूहन्‍ना 1:9
मुदा जँ अपना सभ अपन पाप केँ मानि लेब तँ ओ जे विश्‍वासयोग्‍य और न्‍यायी छथि अपना सभ केँ पापक क्षमा करताह और अपना सभ केँ सभ अधर्म सँ शुद्ध करताह।

लूका 16:18
“जे केओ अपना स्‍त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से परस्‍त्रीगमन करैत अछि। आ जे कोनो पुरुष पति द्वारा तलाक देल गेल स्‍त्री सँ विवाह करैत अछि, सेहो परस्‍त्रीगमन करैत अछि।

मत्ती 19:9
हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जे केओ एहि कारण केँ छोड़ि जे ओकर स्‍त्री दोसराक संग गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखने अछि, कोनो आन कारण सँ अपना स्‍त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से परस्‍त्रीगमन करैत अछि।”

रोमी 7:2-3
[2] उदाहरणक लेल, विवाहित स्‍त्री तहिया धरि कानून द्वारा अपन पुरुषक बन्‍हन मे रहैत अछि जहिया धरि ओकर पुरुष जीवित छैक। जँ पुरुष मरि जाइत छैक तँ ओ विवाह-कानूनक बन्‍हन सँ मुक्‍त भऽ जाइत अछि।[3] एहि लेल, जँ ओ पतिक जीवन काल मे कोनो दोसर पुरुष सँ विवाह करैत अछि तँ ओ परपुरुषगमन करऽ वाली कहबैत अछि, मुदा जँ ओकर पति मरि जाइत छैक तँ ओ ओहि विवाह सम्‍बन्‍ध सँ मुक्‍त भऽ जाइत अछि और कोनो दोसर पुरुषक स्‍त्री बनिओ कऽ परपुरुषगमन करऽ वाली नहि होइत अछि।

मरकुस 10:11-12
[11] ओ उत्तर देलथिन जे, “जे केओ अपना स्‍त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से ओहि स्‍त्रीक संग परस्‍त्रीगमन करैत अछि।[12] और जे स्‍त्री अपना पति केँ तलाक दऽ कऽ दोसर पुरुष सँ विवाह करैत अछि, सेहो परपुरुषगमन करैत अछि।”

मत्ती 5:27-32
[27] “अहाँ सभ सुनने छी जे कहल गेल, ‘परस्‍त्रीगमन नहि करह।’[28] मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जे कोनो पुरुष कोनो स्‍त्री केँ अधलाह इच्‍छा सँ देखैत अछि, से तखने अपना मोन मे ओकरा संग परस्‍त्रीगमन कऽ लेलक।[29] जँ अहाँक दहिना आँखि अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा निकालि कऽ फेकि दिअ। अहाँक शरीरक एके अंग नष्‍ट भऽ जाओ, से अहाँक लेल एहि सँ नीक होयत जे सम्‍पूर्ण शरीर नरक मे फेकि देल जाय।[30] जँ अहाँक दहिना हाथ अहाँ केँ पाप मे फँसबैत अछि तँ ओकरा काटि कऽ फेकि दिअ। अहाँक शरीरक एके अंग नष्‍ट भऽ जाओ, से अहाँक लेल एहि सँ नीक होयत जे सम्‍पूर्ण शरीर नरक मे फेकि देल जाय।[31] “कहल गेल अछि जे, ‘जे पुरुष अपना स्‍त्री केँ तलाक दैत अछि, से तलाकनामा लिखि कऽ दैक।’[32] मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, स्‍त्री केँ दोसराक संग गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखबाक कारण केँ छोड़ि कऽ जँ कोनो दोसर कारण सँ कोनो पुरुष अपना स्‍त्री केँ तलाक दैत अछि, तँ ओ अपना स्‍त्री केँ परपुरुषगमन करऽ वाली बनबाक लेल विवश करैत अछि, और जे केओ ओहि तलाक देल स्‍त्री सँ विवाह करैत अछि, सेहो परस्‍त्रीगमन करैत अछि।

1 कोरिन्‍थी 6:9-16
[9] की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अधर्मी लोक परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत? अपना केँ धोखा नहि दिअ! अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखनिहार, मूर्तिक पूजा कयनिहार, परस्‍त्रीगमन कयनिहार, वेश्‍या सनक काज कयनिहार पुरुष, समलैंगिक सम्‍बन्‍ध रखनिहार लोक,[10] चोर, लोभी, पिअक्‍कड़, गारि पढ़निहार आ धोखेबाज सभ परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत।[11] आ से अहाँ सभ मे सँ किछु गोटे छलहुँ, मुदा अहाँ सभ आब प्रभु यीशु मसीहक नाम सँ आ अपना सभक परमेश्‍वरक आत्‍मा द्वारा धोअल गेलहुँ, पवित्र कयल गेलहुँ आ निर्दोष ठहराओल गेलहुँ।[12] “सभ किछु करबाक हमरा स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा सभ किछु हितकर नहि अछि। “सभ किछु करबाक हमरा स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा हम कोनो बातक गुलाम नहि बनब।[13] “भोजन पेटक लेल अछि आ पेट भोजनक लेल”—मुदा परमेश्‍वर दूनू केँ समाप्‍त कऽ देताह। शरीर अनैतिक सम्‍बन्‍धक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक सेवाक लेल अछि आ प्रभु शरीरक कल्‍याणक लेल।[14] परमेश्‍वर जहिना अपना सामर्थ्‍य सँ प्रभु यीशु केँ मृत्‍यु मे सँ जिऔलथिन तहिना ओ हमरो सभ केँ जिऔताह।[15] की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर मसीहक अंग सभ अछि? तँ की हम मसीहक अंग लऽ कऽ तकरा वेश्‍याक अंग बना दिऐक? किन्‍नहुँ नहि![16] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे वेश्‍याक संग जे केओ अपन शरीर जोड़ैत अछि से ओकरा संग एक शरीर भऽ जाइत अछि? किएक तँ धर्मशास्‍त्र कहैत अछि जे, “दूनू एक शरीर भऽ जायत।”

लूका 18:18-20
[18] एकटा ऊँच अधिकारी यीशु सँ पुछलथिन, “यौ उत्तम गुरुजी! अनन्‍त जीवन प्राप्‍त करबाक लेल हम की करू?”[19] यीशु कहलथिन, “अहाँ हमरा ‘उत्तम’ किएक कहैत छी? परमेश्‍वर केँ छोड़ि आरो केओ उत्तम नहि अछि।[20] अहाँ धर्म-नियमक आज्ञा सभ तँ जनैत छी—‘परस्‍त्रीगमन नहि करह, हत्‍या नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह, अपन माय-बाबूक आदर करह।’ ”

1 थिसलुनिकी 4:3-5
[3] परमेश्‍वरक इच्‍छा ई छनि जे अहाँ सभ पवित्र बनी। ओ चाहैत छथि जे अहाँ सभ दोसराक संग सभ तरहक अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रही,[4] अहाँ सभ मे सँ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अपना शरीर केँ पवित्रता और मर्यादाक संग नियन्‍त्रण मे राखी,[5] आ नहि कि प्रभुक शिक्षा सँ अपरिचित जातिक लोक सभ, जे सभ परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हैत अछि, तकरा सभ जकाँ अपना शरीर केँ वासनाक पूर्ति करबाक साधन बुझी।

मरकुस 7:20-23
[20] ओ आगाँ कहऽ लगलाह, “जे मनुष्‍य मे सँ निकलैत छैक से ओकरा अशुद्ध करैत छैक।[21] किएक तँ मनुष्‍यक भीतर मे सँ, अर्थात्‌ हृदय मे सँ सभ प्रकारक अधलाह बात सभ निकलैत छैक, जेना गलत विचार सभ, गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, चोरी, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन,[22] लोभ, दुष्‍कर्म, धोखा, निर्लज्‍जता, ईर्ष्‍या, निन्‍दा, घमण्‍ड, और मूर्खता।[23] ई सभ बात मनुष्‍यक भीतर मे सँ निकलैत अछि और ओकरा अशुद्ध करैत अछि।”

मत्ती 15:17-20
[17] की अहाँ सभ नहि बुझैत छी जे, जे किछु मुँह मे जाइत अछि से पेट मे जा कऽ देह सँ बाहर भऽ जाइत अछि?[18] मुदा जे बात मुँह सँ बहराइत अछि से हृदय सँ निकलि कऽ अबैत अछि आ से मनुष्‍य केँ अशुद्ध बनबैत अछि।[19] कारण, हृदय सँ निकलैत अछि विभिन्‍न तरहक गलत विचार, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन, अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध, चोरी, झूठ गवाही, निन्‍दाक बात,[20] आ यैह बात सभ मनुष्‍य केँ अशुद्ध करैत अछि, नहि कि बिनु हाथ धोने भोजन करब, से।”

यूहन्‍ना 8:4-11
[4] यीशु केँ कहलथिन, “गुरुजी, ई स्‍त्रीगण पुरुषक संग कुकर्म करिते मे पकड़ा गेल।[5] धर्म-नियम मे मूसा हमरा सभ केँ आज्ञा देलनि जे एहन स्‍त्रीगण केँ पाथर मारि कऽ मारि देबाक चाही। आब अहाँ की कहैत छी?”[6] ई बात ओ सभ हुनका फँसाबऽ लेल पुछलनि, जाहि सँ हुनका पर दोष लगयबाक आधार भेटनि। यीशु नीचाँ झुकि कऽ अपन आङुर सँ जमीन पर लिखऽ लगलाह।[7] ओ सभ जखन हुनका सँ पुछिते रहलाह, तखन ओ मूड़ी उठा कऽ हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ मे सँ जे निष्‍पाप होथि, वैह सभ सँ पहिने पाथर मारथि।”[8] और फेर झुकि कऽ जमीन पर लिखऽ लगलाह।[9] ई बात जखन ओ सभ सुनलनि तँ पहिने बूढ़ सभ आ तखन एक-एक कऽ सभ केओ चल गेलाह। आब मात्र यीशु रहि गेलाह, और ओ स्‍त्रीगण जे ओहिठाम ठाढ़ छलि।[10] यीशु मूड़ी उठा कऽ ओकरा कहलथिन, “बहिन, ओ सभ कतऽ अछि? की तोरा केओ नहि दण्‍ड देलकह?”[11] ओ बाजल, “नहि, मालिक, केओ नहि।” यीशु बजलाह, “हमहूँ तोरा दण्‍ड नहि दैत छिअह। आब जाह, आ फेर पाप नहि करह।”]

1 कोरिन्‍थी 7:1-40
[1] आब ओहि बात सभक विषय मे जे अहाँ सभ पत्र मे लिखि कऽ पुछने छी—हँ, पुरुषक लेल स्‍त्री केँ नहि छुबी से नीक बात अछि।[2] मुदा एतेक अनैतिक सम्‍बन्‍ध चलि रहल अछि जे ताहि सँ बचबाक लेल प्रत्‍येक पुरुष केँ अपन स्‍त्री होअय आ प्रत्‍येक स्‍त्री केँ अपन पति।[3] पति अपना स्‍त्रीक प्रति अपन वैवाहिक कर्तव्‍य पूरा करय, आ तहिना स्‍त्री सेहो अपना पतिक प्रति।[4] स्‍त्री केँ अपना शरीर पर अधिकार नहि छैक; ओहि पर ओकर पतिक अधिकार छैक। आ तहिना पति केँ ओकर अपना शरीर पर अधिकार नहि छैक; ओहि पर ओकर स्‍त्रीक अधिकार छैक।[5] अहाँ सभ एक-दोसर केँ एहि अधिकार सँ वंचित नहि करू। जँ अपना केँ प्रार्थना मे समर्पित करबाक लेल से करबो करी तँ दूनूक सहमत सँ आ किछुए समयक लेल। तखन फेर पहिने जकाँ एक संग रहू जाहि सँ एना नहि होअय जे अहाँ सभ केँ अपना पर काबू नहि राखि सकबाक कारणेँ अहाँ सभ केँ शैतान प्रलोभन मे फँसाबय।[6] हमर कहबाक अर्थ ई नहि जे एक-दोसर सँ अलग रहबे करू, बल्‍कि जँ रही तँ कोना आ किएक।[7] हम ई चुनितहुँ जे सभ मनुष्‍य हमरा जकाँ अविवाहित रहय । मुदा प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति केँ परमेश्‍वरक दिस सँ अपन विशेष वरदान भेटल अछि—ककरो एक प्रकारक तँ ककरो दोसर प्रकारक।[8] हम अविवाहित सभ केँ आ विधवा सभ केँ ई कहैत छी जे हमरे जकाँ ओहिना रहनाइ अहाँ सभक लेल उत्तम बात होयत।[9] मुदा जँ अहाँ सभ अपना पर काबू नहि राखि सकैत छी तँ विवाह कऽ लिअ, किएक तँ काम-वासना सँ जरैत रहबाक अपेक्षा विवाह कयनाइ नीक अछि।[10] विवाहित सभक लेल हमर नहि, बल्‍कि प्रभुक ई आदेश अछि जे स्‍त्री अपन पति केँ नहि छोड़ि दओ।[11] आ जँ ओ छोड़िओ दय तँ ओकरा अविवाहित रूप मे रहऽ पड़त अथवा अपन पति सँ फेर मेल कऽ लेबाक अछि। पति सेहो अपन स्‍त्रीक परित्‍याग नहि करओ।[12] बाँकी लोक सभ सँ प्रभुक नहि, बल्‍कि हमर कथन अछि, जे जँ कोनो विश्‍वासी भायक स्‍त्री विश्‍वास नहि करैत होअय आ ओ ओहि भायक संग रहबाक लेल सहमत अछि तँ ओ भाय स्‍त्रीक परित्‍याग नहि करओ।[13] जँ कोनो स्‍त्री केँ एहन पति होअय जे विश्‍वास नहि करैत होअय आ स्‍त्रीक संग रहबाक लेल सहमत होअय तँ ओ पतिक परित्‍याग नहि करओ[14] किएक तँ अविश्‍वासी पति अपन स्‍त्री द्वारा पवित्र बनाओल गेल अछि आ तहिना अविश्‍वासी स्‍त्री अपन पति द्वारा पवित्र बनाओल गेल अछि। नहि तँ अहाँ सभक बाल-बच्‍चा अशुद्ध होइत, मुदा आब ओहो सभ पवित्र अछि।[15] मुदा जँ कोनो अविश्‍वासी अलग होमऽ चाहैत अछि तँ ओकरा अलग होमऽ दिऔक। एहन परिस्‍थिति मे विश्‍वास कयनिहार भाइ वा बहिन अपना पति वा स्‍त्रीक संग रहबाक बन्‍हन मे नहि अछि। परमेश्‍वर तँ अपना सभ केँ शान्‍तिक जीवन व्‍यतीत करबाक लेल बजौने छथि।[16] हे स्‍त्री, अहाँ की जानऽ गेलहुँ जे अहाँ अपन पतिक उद्धारक कारण बनब वा नहि बनब? वा हे पति, अहाँ की जानऽ गेलहुँ जे अहाँ अपन स्‍त्रीक उद्धारक कारण बनब वा नहि बनब?[17] तैयो प्रभु जकरा जाहि स्‍थिति मे रखने छथि, परमेश्‍वर जकरा जाहि स्‍थिति मे अपना लग बजौने छथि, से ताही प्रकारक जीवन बिताबय। सभ मण्‍डलीक लेल हम यैह आदेश दैत छी।[18] जँ बजाओल गेलाक समय मे ककरो खतना भऽ चुकल होइक तँ ओ तकरा नहि बदलओ। जँ बजाओल गेलाक समय मे ककरो खतना नहि भेल होइक तँ ओ खतना नहि कराबओ।[19] कारण, ने तँ खतना करयबाक कोनो महत्‍व अछि आ ने ओकर अभावक। महत्‍व अछि परमेश्‍वरक आज्ञा सभक पालन करबाक।[20] हरेक व्‍यक्‍ति जाहि स्‍थिति मे परमेश्‍वर द्वारा बजाओल गेल छल, ओ ताही मे रहओ।[21] की अहाँ बजाओल जयबाक समय मे ककरो गुलाम छलहुँ? कोनो चिन्‍ता नहि करू—ओना तँ जँ स्‍वतन्‍त्र भेनाइ सम्‍भव भऽ जाय तँ अवसर सँ फायदा लिअ।[22] हँ, कोनो चिन्‍ता नहि करू, किएक तँ जे गुलाम भऽ कऽ प्रभु मे अयबाक लेल बजाओल गेल से प्रभुक स्‍वतन्‍त्र कयल व्‍यक्‍ति भऽ गेल अछि। तहिना जे व्‍यक्‍ति स्‍वतन्‍त्र रहि कऽ बजाओल गेल से मसीहक गुलाम भऽ गेल अछि।[23] अहाँ सभ दाम दऽ कऽ किनल गेल छी, आब मनुष्‍यक गुलाम नहि बनू।[24] यौ भाइ लोकनि, अहाँ सभ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति जाहि स्‍थिति मे प्रभु लग बजाओल गेलहुँ, परमेश्‍वरक संग ताही मे रहू।[25] कुमार और कुमारि सभक विषय मे प्रभुक दिस सँ हमरा कोनो आदेश नहि भेटल अछि, तैयो प्रभुक दया सँ विश्‍वासयोग्‍य रहि हम अपन विचार दऽ रहल छी।[26] हमर विचार अछि जे आइ-काल्‍हिक समयक कठिन परिस्‍थिति मे कोनो मनुष्‍यक लेल यैह नीक अछि जे ओ जाहि स्‍थिति मे अछि ताही स्‍थिति मे रहय।[27] की अहाँ केँ स्‍त्री छथि? अहाँ हुनका सँ मुक्‍त होयबाक प्रयत्‍न नहि करू। की अहाँ केँ स्‍त्री नहि अछि? तँ अहाँ विवाह करबाक प्रयत्‍न नहि करू।[28] मुदा जँ अहाँ विवाह करी तँ एहि मे कोनो पाप नहि अछि आ जँ कोनो कुमारि विवाह करय तँ ओ पाप नहि करैत अछि। मुदा जे सभ विवाह करत तकरा सभ केँ सांसारिक जीवन मे कष्‍ट सहऽ पड़तैक आ हम अहाँ सभ केँ ओहि सँ बँचाबऽ चाहैत छी।[29] यौ भाइ लोकनि, हमर कहबाक अर्थ ई अछि जे समय थोड़बे रहि गेल अछि। आब जकरा स्‍त्री अछि से एना रहओ जेना स्‍त्री नहि होअय।[30] जे कनैत अछि से एना रहओ जेना नहि कनैत होअय। जे आनन्‍द मनबैत अछि से एना रहओ जेना आनन्‍द नहि मनबैत होअय। जे चीज-वस्‍तु मोल लैत अछि से एना रहओ जेना ओ चीज ओकर नहि होइक।[31] जे संसारक चीज-वस्‍तुक उपभोग करैत अछि से एना रहओ जेना ओहि मे लिप्‍त नहि भऽ गेल होअय, किएक तँ ई संसार जे देखैत छी से समाप्‍त भऽ रहल अछि।[32] हम चाहैत छी जे अहाँ सभ चिन्‍ता-मुक्‍त रहू। अविवाहित पुरुष ई सोचैत प्रभुक सेवा मे व्‍यस्‍त रहैत अछि जे “प्रभु केँ कोना प्रसन्‍नता भेटतनि?”[33] मुदा विवाहित पुरुष ई सोचैत सांसारिक बात सभ मे व्‍यस्‍त रहैत अछि जे, “स्‍त्री केँ कोना प्रसन्‍न करी?”[34] एहन मनुष्‍यक मोन दू दिस लागल रहैत छैक। जकरा पति नहि छैक वा जे कुमारि अछि, से एहि इच्‍छा सँ प्रभुक बात पर ध्‍यान रखैत अछि जे अपना केँ पूर्ण रूप सँ, तन-मन सँ, प्रभु केँ अर्पण करी। मुदा विवाहिता केँ सांसारिक बात सभक चिन्‍ता रहैत छैक जे अपना पति केँ कोना प्रसन्‍न राखी।[35] हम अहाँ सभ केँ ई बात स्‍वतन्‍त्रता पर रोक लगयबाक लेल नहि कहि रहल छी, बल्‍कि अहाँ सभक भलाइक लेल, जाहि सँ अहाँ सभ उचित ढंग सँ रहैत बाधा सँ बाँचि कऽ पूरा मोन सँ प्रभुक सेवाक लेल समर्पित होइ।[36] मुदा जँ ककरो ई बुझाइत होइक जे विवाह नहि कयला सँ ओ अपन विवाहक लेल ठीक कयल गेल लड़कीक लेल उचित नहि कऽ रहल अछि आ आत्‍मसंयम कयनाइ सेहो कठिन भऽ रहल छैक, आ ई बुझैत होअय जे विवाह कयनाइ उचित होइत, तँ ओ जेना करऽ चाहैत अछि, तेना करय—ओ सभ विवाह कऽ लय। एहि मे पाप नहि अछि।[37] मुदा जकर मोन एहि विषय मे स्‍थिर भऽ गेल छैक, आ कोनो तरहेँ बाध्‍य नहि अछि, बल्‍कि अपन इच्‍छाक अनुसार चलबाक अधिकारी अछि, आ अपना लेल ठीक भेल कुमारिक संग विवाह नहि करबाक निश्‍चय कऽ लेने अछि, सेहो ठीक करैत अछि।[38] एहि तरहेँ जे अपना लेल ठीक भेल कुमारिक संग विवाह करैत अछि से ठीक करैत अछि, मुदा जे विवाह नहि करैत अछि से आरो ठीक करैत अछि।[39] जाबत धरि कोनो स्‍त्रीक पति जीवित अछि ताबत धरि ओ अपन पतिक संग विवाहक बन्‍हन मे बान्‍हल अछि। मुदा पतिक मृत्‍यु भऽ गेला पर ओ स्‍वतन्‍त्र भऽ जाइत अछि आ जकरा सँ चाहय विवाह कऽ सकैत अछि, मुदा आवश्‍यक ई अछि जे विवाह प्रभुक लोक सँ होअय ।[40] तैयो जँ ओ ओहिना रहि जाय तँ आरो आनन्‍दित रहत। ई हमर विचार अछि, आ हमरा विश्‍वास अछि जे परमेश्‍वरक आत्‍मा हमरो संग छथि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT