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मठ के संकेत: [नंबर 5]


प्रकाशित-वाक्‍य 13:5-18
[5] ओहि जानबर केँ अहंकारी आ परमेश्‍वरक निन्‍दा वला बात सभ बजबाक मुँह देल गेलैक आ बयालीस महिना तक ओकरा अपन काज करैत रहबाक अधिकार भेटलैक।[6] एहि पर ओ परमेश्‍वरक निन्‍दा करऽ लागल आ हुनकर नामक, हुनकर निवास-स्‍थानक आ ओहि सभ लोकक जे स्‍वर्ग मे रहैत छथि, अपमान करऽ लागल।[7] परमेश्‍वरक लोक सभक संग युद्ध करबाक आ हुनका सभ पर विजय पयबाक शक्‍ति ओकरा देल गेलैक, और प्रत्‍येक कुल, राष्‍ट्र, भाषा आ जातिक लोक पर ओकरा अधिकार भेटलैक।[8] ओहि जानबरक पूजा पृथ्‍वीक सभ लोक करत, अर्थात्, ओ सभ लोक जकरा सभक नाम ओहि बलि-भेँड़ाक, जे सृष्‍टिक आरम्‍भ सँ पहिने वध कयल गेल छलाह, तिनकर जीवनक पुस्‍तक मे नहि लिखल गेल छैक।[9] जकरा सभ केँ कान होइक से सभ सुनि लओ।[10] “जकरा बन्‍दी बनबाक छैक, से बन्‍दी बनाओल जायत। जकरा तरुआरि सँ मरबाक छैक, से तरुआरि सँ मारल जायत।” एकर अर्थ अछि जे परमेश्‍वरक लोक सभ केँ धैर्यक संग साहस रखैत विश्‍वास मे स्‍थिर रहनाइ जरूरी अछि।[11] तकरबाद हम एक दोसर जानबर केँ देखलहुँ; ओ धरती मे सँ बहराइत छल। ओकरा भेँड़ा जकाँ दूटा सीँग छलैक, मुदा ओ अजगर जकाँ बजैत छल।[12] ओ पहिल जानबरक सेवा मे ओकर सम्‍पूर्ण अधिकार प्रयोग मे लबैत छल। ओ पृथ्‍वी आ ओहि परक सभ निवासी सँ ओहि पहिल जानबरक, जकर प्राण-घातक घाव ठीक भऽ गेल छलैक, पूजा करबबैत छल।[13] ओ बड़का-बड़का चमत्‍कार देखबैत छल, एहनो चमत्‍कार जे लोकक देखिते-देखिते मे आकाश सँ पृथ्‍वी पर आगि बरसा दैत छल।[14] पहिल जानबरक सेवा मे जे चमत्‍कार सभ देखयबाक शक्‍ति ओकरा भेटल छलैक, ताहि द्वारा ओ पृथ्‍वीक निवासी सभ केँ बहकबैत छल। ओ ओकरा सभ सँ ओहि पहिल जानबर, जकरा पर तरुआरिक प्रहार भेल छल आ तैयो जीवित छल, तकरा सम्‍मान मे ओकर मूर्ति बनबौलक।[15] ओकरा जानबरक प्रतिमा मे प्राण राखि देबाक अधिकार भेटलैक जाहि सँ ओ प्रतिमा बाजऽ लागय आ जे सभ प्रतिमाक पूजा नहि करत तकरा मरबा दय।[16] ओ छोट-पैघ, धनिक-गरीब, स्‍वतन्‍त्र-दास, सभ लोक केँ दहिना हाथ पर वा कपार पर छाप लगबयबाक लेल बाध्‍य कयलकैक।[17] ओ एहि प्रकारक नियम बना देलक जे जकरा पर ओ छाप नहि लागल छलैक से सभ कोनो प्रकारक किनऽ-बेचऽ वला काज नहि कऽ सकैत छल। ओ छाप जानबरक नाम वा ओकरा नाम सँ सम्‍बन्‍धित अंक छल।[18] एतऽ बुद्धिक आवश्‍यकता अछि। जे बुद्धिमान होअय, से जानबरक नामक अंकक हिसाब लगाबओ, किएक तँ ई अंक मनुष्‍यक नामक संकेत अछि। ई अंक 666 अछि।

मत्ती 19:9
हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जे केओ एहि कारण केँ छोड़ि जे ओकर स्‍त्री दोसराक संग गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखने अछि, कोनो आन कारण सँ अपना स्‍त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से परस्‍त्रीगमन करैत अछि।”

प्रकाशित-वाक्‍य 11:2-3
[2] मुदा मन्‍दिरक बाहरी आङन केँ छोड़ि दहक, ओकरा नहि नापह, किएक तँ ओ परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हऽ वला जातिक लोक सभ केँ देल गेल अछि। ओ सभ बयालीस महिना तक पवित्र नगर केँ लतमरदनि करैत रहत।[3] हम अपन दूनू गवाह केँ अधिकार देबैक जे ओ सभ चट्टी ओढ़ि कऽ एक हजार दू सय साठि दिन तक हमरा सँ पाओल सम्‍बादक प्रचार करथि।”

मत्ती 5:32
मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, स्‍त्री केँ दोसराक संग गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखबाक कारण केँ छोड़ि कऽ जँ कोनो दोसर कारण सँ कोनो पुरुष अपना स्‍त्री केँ तलाक दैत अछि, तँ ओ अपना स्‍त्री केँ परपुरुषगमन करऽ वाली बनबाक लेल विवश करैत अछि, और जे केओ ओहि तलाक देल स्‍त्री सँ विवाह करैत अछि, सेहो परस्‍त्रीगमन करैत अछि।

2 तिमुथियुस 3:16
सम्‍पूर्ण धर्मशास्‍त्र परमेश्‍वरक प्रेरणा द्वारा रचल गेल अछि, आ सत्‍य सिखयबाक लेल, गलत शिक्षा देखार करबाक लेल, जीवन केँ सुधारबाक लेल आ धार्मिकताक अनुसार जीवन कोना बिताओल जाय ताहि बातक शिक्षा देबाक लेल उपयोगी अछि,

प्रकाशित-वाक्‍य 4:6-8
[6] सिंहासनक आगाँ मे सीसाक समुद्र जकाँ बुझाइत छल, जे आर-पार देखाय वला संगमरमर जकाँ साफ छल। बीच मे सिंहासनक चारू कात चारिटा जीवित प्राणी छल जकरा आगाँ-पाछाँ सभतरि आँखिए-आँखि छलैक।[7] पहिल प्राणी शेर सन छल, दोसर बड़द सन, तेसराक मुँह मनुष्‍यक मुँह जकाँ आ चारिम उड़ैत गरुड़ सन छल।[8] एहि चारू प्राणी मे प्रत्‍येक केँ छओ-छओटा पाँखि छल। ओकरा सभक सम्‍पूर्ण शरीर मे आ पाँखिक तर मे सेहो आँखिए-आँखि छल। ओ सभ दिन-राति बिनु अटकि कऽ ई कहैत रहैत अछि, “सर्वशक्‍तिमान प्रभु-परमेश्‍वर, पवित्र, पवित्र, पवित्र छथि। ओ वैह छथि, जे छलाह, जे छथि आ जे आबहो वला समय मे रहताह।”

1 कोरिन्‍थी 10:13
अहाँ सभ कहियो कोनो एहन परीक्षा मे नहि पड़लहुँ जे मनुष्‍य सभ केँ नहि होइत रहैत अछि। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि। ओ अहाँ सभ केँ एहन परीक्षा मे नहि पड़ऽ देताह जे अहाँ सभक सहनशक्‍ति सँ बाहर होअय। ओ परीक्षाक समय मे तकरा सहबाक साहस दैत अहाँ सभ केँ पार कऽ निकलबाक उपाय सेहो उपलब्‍ध करौताह।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT