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जिंदगी: [डिप्रेशन]

फिलिप्‍पी 4:8
अन्‍त मे, यौ भाइ लोकनि, जे बात सभ सत्‍य अछि, जे बात सभ प्रतिष्‍ठित अछि, जे बात सभ न्‍यायसंगत अछि, जे बात सभ पवित्र अछि, जे बात सभ प्रेम करबाक योग्‍य अछि, जे बात सभ आदरयोग्‍य अछि, अर्थात्, जे कोनो बात उत्तम वा प्रशंसनीय अछि ताही पर ध्‍यान लगौने रहू।

1 पत्रुस 5:6-7
[6] एहि लेल परमेश्‍वरक सामर्थी हाथक नीचाँ नम्र बनू, जाहि सँ ओ अहाँ सभ केँ उचित समय पर सम्‍मानित करथि।[7] अपन सम्‍पूर्ण चिन्‍ता हुनका पर राखि दिअ, किएक तँ हुनका अहाँ सभक चिन्‍ता छनि।

यूहन्‍ना 16:33
“हम अहाँ सभ केँ ई सभ बात कहि देने छी जाहि सँ हमरा मे अहाँ सभ केँ शान्‍ति भेटय। संसार मे अहाँ सभ पर संकट आओत, मुदा साहस राखू! हम संसार पर विजयी भऽ गेल छी।”

रोमी 8:38-39
[38] किएक तँ हमरा पूर्ण विश्‍वास अछि जे, ने मृत्‍यु आ ने जीवन, ने स्‍वर्गदूत आ ने नरकदूत, ने वर्तमान आ ने भविष्‍य, ने कोनो तरहक शक्‍ति,[39] ने आकाश आ ने पाताल, और ने सौंसे सृष्‍टि मे आरो कोनो वस्‍तु अपना सभ केँ परमेश्‍वरक ओहि प्रेम सँ अलग कऽ सकत जे ओ अपना सभक प्रभु, मसीह यीशु, द्वारा प्रगट कयलनि।

1 पत्रुस 4:12-13
[12] प्रिय भाइ लोकनि, अपन अग्‍नि-परीक्षा पर, जे अहाँ सभ केँ जँचबाक लेल भऽ रहल अछि, आश्‍चर्य नहि मानू, जेना कोनो असाधारण बात भऽ रहल होअय।[13] बल्‍कि आनन्‍द मनाउ जे अहाँ सभ मसीहक दुःख-भोग मे सहभागी छी। तखन जाहि दिन मसीह अपना महिमा मे फेर औताह, ताहि दिन अहाँ सभ आओर आनन्‍दित होयब।

2 कोरिन्‍थी 1:3-4
[3] अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक जे परमेश्‍वर आ पिता छथि, तिनकर स्‍तुति होनि, जे दया करऽ वला पिता छथि आ सभ प्रकारक सान्‍त्‍वना देबऽ वला परमेश्‍वर छथि।[4] ओ अपना सभ केँ सभ प्रकारक दुःख-तकलीफ मे सान्‍त्‍वना दैत छथि जाहि सँ अपनो सभ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त एहि सान्‍त्‍वना द्वारा सभ प्रकारक दुःख मे पड़ल लोक सभ केँ सान्‍त्‍वना दऽ सकिऐक।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT