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जिंदगी: [सुंदरता]


1 पत्रुस 3:3-4
[3] अहाँ सभक सुन्‍दरता बाहरी श्रृंगार सँ नहि आबय, जेना केशक गुहनाइ, वा सोनाक गहना-गुड़िया सभ आ बढ़ियाँ-बढ़ियाँ कपड़ा पहिरनाइ सँ,[4] बल्‍कि अहाँ सभक भितरी चरित्र सँ आबय, अर्थात् नम्र आ शान्‍त स्‍वभावक सुन्‍दरता होअय। एहन सुन्‍दरता टिकैत अछि, और परमेश्‍वरक नजरि मे बहुत मूल्‍यवान अछि।

2 कोरिन्‍थी 4:16
यैह कारण अछि जे हम सभ साहस नहि छोड़ैत छी। ओना तँ हमरा सभक बाहरी शारीरिक बल घटल जा रहल अछि तैयो हमरा सभक भितरी आत्‍मिक बल दिन प्रति दिन नव भेल जा रहल अछि।

इफिसी 2:10
किएक तँ अपना सभ परमेश्‍वरेक हाथक कारीगरी छी—ओ अपना सभ केँ मसीह यीशु मे संयुक्‍त कऽ कऽ अपना सभक नव सृष्‍टि कयलनि, आ से एहि लेल जे अपना सभ ओ नीक काज सभ करी, जे काज ओ अपना सभक लेल पहिने सँ तैयार कयने छथि।

फिलिप्‍पी 4:8
अन्‍त मे, यौ भाइ लोकनि, जे बात सभ सत्‍य अछि, जे बात सभ प्रतिष्‍ठित अछि, जे बात सभ न्‍यायसंगत अछि, जे बात सभ पवित्र अछि, जे बात सभ प्रेम करबाक योग्‍य अछि, जे बात सभ आदरयोग्‍य अछि, अर्थात्, जे कोनो बात उत्तम वा प्रशंसनीय अछि ताही पर ध्‍यान लगौने रहू।

रोमी 8:6
मानवीय पाप-स्‍वभावक इच्‍छा सभ पर मोन लगौनाइक परिणाम अछि मृत्‍यु, मुदा पवित्र आत्‍माक इच्‍छा पर मोन लगौनाइक परिणाम अछि जीवन आ शान्‍ति,

मत्ती 6:28-29
[28] “वस्‍त्रक लेल अहाँ चिन्‍ता किएक करैत छी? जंगलक फूल सभ केँ देखू जे ओ सभ कोन तरहेँ फुलाइत अछि। ओ सभ ने खटैत अछि, आ ने चर्खा कटैत अछि।[29] हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, राजा सुलेमान सेहो अपन राजसी वस्‍त्र पहिरि कऽ एहि फूल सन सुन्‍दर नहि लगैत छलाह।

1 तिमुथियुस 2:9-10
[9] तहिना स्‍त्रीगण सभ सेहो अपन ओढ़न-पहिरन वला बात मे मर्यादा आ शालीनताक ध्‍यान राखथि। अपन श्रृंगार केशक सजावट, सोना वा मोतीक गहना और दामी-दामी वस्‍त्र सँ नहि,[10] बल्‍कि भलाइक काज सभ द्वारा करथि। ई बात ओहि स्‍त्रीगण सभ केँ शोभा दैत छनि जे सभ अपना केँ परमेश्‍वरक भक्‍तिनि कहैत छथि।

गलाती 3:26-27
[26] अहाँ सभ केओ मसीह यीशु पर विश्‍वास करबाक कारणेँ परमेश्‍वरक सन्‍तान छी।[27] किएक तँ अहाँ सभ, जकरा सभ केँ मसीहक बपतिस्‍मा भेटल अछि से सभ मसीह केँ धारण कयने छी।

याकूब 1:23
जे केओ वचन केँ सुनैत अछि मुदा तकर पालन नहि करैत अछि, से ओहन मनुष्‍य जकाँ अछि जे अपन मुँह अएना मे देखैत अछि,

मत्ती 23:28
तहिना अहूँ सभ बाहर सँ लोक सभ केँ धार्मिक बुझाइत छिऐक, मुदा भीतर मे पाखण्‍ड आ अधर्म सँ भरल छी।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT