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जिंदगी: [युद्ध]


इफिसी 6:11
परमेश्‍वर सँ भेटल सम्‍पूर्ण अस्‍त्र-शस्‍त्र धारण करू जाहि सँ शैतानक छल-कपट वला चालि सभक सामना कऽ सकी।

मत्ती 24:6
अहाँ सभ लड़ाइक समाचार आ लड़ाइक हल्‍ला सभ सुनब। मुदा देखू, ताहि सँ घबड़ायब नहि। ई सभ होयब आवश्‍यक अछि, मुदा संसारक अन्‍त तहियो नहि होयत।

प्रकाशित-वाक्‍य 21:7
जे सभ विजयी होयत, से सभ ई बात सभ प्राप्‍त करबाक अधिकारी होयत। हम ओकरा सभक परमेश्‍वर होयबैक आ ओ सभ हमर पुत्र होयत।

रोमी 8:37
नहि! अपना सभ सँ जे प्रेम कयने छथि तिनका द्वारा अपना सभ एहि सभ बात मे पूर्ण विजय पबैत छी।

रोमी 12:19
प्रिय भाइ लोकनि, अहाँ सभ स्‍वयं ककरो सँ बदला नहि लिअ, बल्‍कि तकरा परमेश्‍वरक क्रोध पर छोड़ि दिअ, कारण, धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “प्रभु कहैत छथि जे, बदला लेबाक काज हमर अछि, हमहीं बदला लेब।”

1 तिमुथियुस 6:12
विश्‍वासक नीक लड़ाइ मे लागल रहू, और ओहि अनन्‍त जीवन केँ पकड़ने रहू जे जीवन प्राप्‍त करबाक लेल अहाँ बजाओल गेलहुँ आ जकरा विषय मे अहाँ बहुतो लोकक समक्ष नीक गवाही देलहुँ।

2 कोरिन्‍थी 10:4
किएक तँ हमरा सभक युद्धक हथियार सांसारिक नहि, बल्‍कि परमेश्‍वरक शक्‍तिशाली हथियार अछि जाहि द्वारा शक्‍ति-केन्‍द्र सभ केँ ध्‍वस्‍त कयल जाइत अछि।

रोमी 13:4
किएक तँ ओ अहाँक कल्‍याण करबाक लेल परमेश्‍वरक सेवक छथि। मुदा जँ अहाँ गलत काज करैत छी तँ हुनका सँ अवश्‍य भयभीत होउ, कारण, दण्‍ड देबाक अधिकार हुनका व्‍यर्थे नहि छनि। ओ परमेश्‍वरक सेवक छथि आ गलत काज कयनिहार लोक केँ परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार दण्‍ड दैत छथि।

याकूब 4:1-2
[1] अहाँ सभक बीच होमऽ वला लड़ाइ-झगड़ा सभक कारण की अछि? की एकर कारण ओ भोग-विलासक अभिलाषा सभ नहि अछि जे अहाँ सभक भीतर मे संघर्ष करैत रहैत अछि?[2] अहाँ सभ कोनो बातक इच्‍छा करैत छी मुदा ओ पूरा नहि होइत अछि, तखन अहाँ सभ हत्‍या करैत छी। अहाँ सभ डाह करैत छी, मुदा अहाँ सभक लालसा पूरा नहि होइत अछि तँ लड़ैत-झगड़ैत छी। अहाँ सभ केँ एहि लेल नहि भेटैत अछि जे अहाँ सभ परमेश्‍वर सँ मँगैत नहि छियनि।

रोमी 13:1-5
[1] प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति शासन कयनिहार अधिकारी सभक अधीन रहओ। किएक तँ कोनो अधिकार एहन नहि अछि जे परमेश्‍वर द्वारा स्‍थापित नहि कयल गेल होअय—जे सभ शासन कऽ रहल छथि, तिनकर सभक अधिकार परमेश्‍वर सँ भेटल छनि।[2] एहि लेल, जे केओ शासनक विरोध करैत अछि से तकर विरोध करैत अछि जे परमेश्‍वर स्‍थापित कयने छथि, आ अपना पर दण्‍डक आज्ञा केँ बजबैत अछि।[3] कारण, अधिकारी सभ उचित काज कयनिहार सभक लेल नहि, बल्‍कि गलत काज कयनिहार सभक लेल भय उत्‍पन्‍न करैत छथि। की अहाँ अधिकारी सँ निर्भय रहऽ चाहैत छी? तखन उचित काज करैत रहू आ ओ अहाँक प्रशंसा करताह।[4] किएक तँ ओ अहाँक कल्‍याण करबाक लेल परमेश्‍वरक सेवक छथि। मुदा जँ अहाँ गलत काज करैत छी तँ हुनका सँ अवश्‍य भयभीत होउ, कारण, दण्‍ड देबाक अधिकार हुनका व्‍यर्थे नहि छनि। ओ परमेश्‍वरक सेवक छथि आ गलत काज कयनिहार लोक केँ परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार दण्‍ड दैत छथि।[5] तेँ अधिकारी सभक अधीन रहनाइ आवश्‍यक अछि—मात्र दण्‍ड सँ बचबाक लेल नहि, बल्‍कि अपना विवेकक समक्ष निर्दोष रहबाक लेल सेहो।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT