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जिंदगी: [पुरुषों के लिए छंद]

1 कोरिन्‍थी 15:58
एहि लेल, यौ प्रिय भाइ लोकनि, स्‍थिर और अटल बनल रहू। अपना केँ पूर्ण रूप सँ प्रभुक काजक लेल सदत समर्पित कयने रहू, किएक तँ अहाँ सभ जनैत छी जे अहाँ सभक परिश्रम प्रभु मे व्‍यर्थ नहि अछि।

1 कोरिन्‍थी 16:13
सतर्क रहू, ओहि सिद्धान्‍त पर अटल रहू जाहि पर अहाँ सभक विश्‍वास आधारित अछि। साहसी आ मजगूत बनल रहू।

1 पत्रुस 5:5
एहि तरहेँ, यौ जबान भाइ सभ, अहाँ सभ मण्‍डलीक देख-रेख कयनिहार सभक अधीन रहू। अहाँ सभ केओ नम्रता सँ एक-दोसराक सेवा करू, किएक तँ, “परमेश्‍वर घमण्‍डी सभक विरोध करैत छथि, मुदा नम्र लोक सभ पर कृपा करैत छथि।”

1 तिमुथियुस 4:8
शारीरिक साधना सँ किछु लाभ तँ अछि, मुदा भक्‍ति सँ असीमित लाभ अछि, किएक तँ ओ जीवनक आश्‍वासन दैत अछि इहलोक मे सेहो और परलोक मे सेहो।

1 तिमुथियुस 4:12
युवा अवस्‍थाक कारणेँ केओ अहाँ केँ तुच्‍छ नहि बुझओ, बरु बात-चीत, चालि-चलन, प्रेम, विश्‍वास आ पवित्रता मे विश्‍वासी सभक लेल अहाँ नमूना बनू।

2 कोरिन्‍थी 4:16
यैह कारण अछि जे हम सभ साहस नहि छोड़ैत छी। ओना तँ हमरा सभक बाहरी शारीरिक बल घटल जा रहल अछि तैयो हमरा सभक भितरी आत्‍मिक बल दिन प्रति दिन नव भेल जा रहल अछि।

गलाती 1:10
की आब हम मनुष्‍य सभ सँ प्रशंसा पाबऽ चाहैत छी वा परमेश्‍वर सँ? की हम मनुष्‍य सभ केँ प्रसन्‍न करबाक प्रयास कऽ रहल छी? जँ हम एखनो धरि मनुष्‍य सभ केँ प्रसन्‍न करबाक प्रयत्‍न करैत रहितहुँ तँ हम मसीहक सेवक नहि होइतहुँ।

इब्रानी 4:12
कारण, परमेश्‍वरक वचन जीवित आ फलदायक अछि आ कोनो दूधारी तरुआरिओ सँ तेज अछि। ओ प्राण आ आत्‍मा, जोड़-जोड़ आ हड्डीक भीतरका गुद्दी मे छेदि कऽ ओकरा अलग-अलग कऽ दैत अछि और मोनक विचार आ भावनाक जाँच करैत अछि।

याकूब 5:16
तेँ अहाँ सभ एक-दोसराक सम्‍मुख अपन-अपन पाप मानि लिअ और एक-दोसराक लेल प्रार्थना करू जाहि सँ अहाँ सभ स्‍वस्‍थ कयल जाइ। धार्मिक लोकक प्रार्थना सँ बहुत प्रभावशाली परिणाम होइत अछि।

लूका 10:27
ओ कहलथिन, “ ‘तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ, अपन सम्‍पूर्ण शक्‍ति सँ और अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ प्रेम करह,’ और ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ ”

1 कोरिन्‍थी 10:12-13
[12] तेँ जे केओ अपना केँ मजगूत बुझैत अछि से सावधान रहओ जे कहीं खसि ने पड़य।[13] अहाँ सभ कहियो कोनो एहन परीक्षा मे नहि पड़लहुँ जे मनुष्‍य सभ केँ नहि होइत रहैत अछि। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि। ओ अहाँ सभ केँ एहन परीक्षा मे नहि पड़ऽ देताह जे अहाँ सभक सहनशक्‍ति सँ बाहर होअय। ओ परीक्षाक समय मे तकरा सहबाक साहस दैत अहाँ सभ केँ पार कऽ निकलबाक उपाय सेहो उपलब्‍ध करौताह।

मत्ती 6:19-20
[19] “पृथ्‍वी पर अपना लेल धन जमा नहि करू जतऽ कीड़ा आ बीझ ओकरा नष्‍ट कऽ दैत अछि, और चोर सेन्‍ह काटि कऽ ओकर चोरी कऽ लैत अछि।[20] बल्‍कि अपना लेल स्‍वर्ग मे धन जमा करू, जतऽ ने कीड़ा आ ने बीझ ओकरा नष्‍ट करैत अछि, आ ने चोर सेन्‍ह काटि कऽ ओकर चोरी करैत अछि।

रोमी 12:1-2
[1] तेँ यौ भाइ लोकनि, हम अहाँ सभ सँ आग्रह करैत छी जे, परमेश्‍वरक अपार दयाक कारणेँ जे ओ अपना सभ पर कयने छथि, अहाँ सभ अपना शरीर केँ जीवित, पवित्र आ परमेश्‍वर द्वारा ग्रहणयोग्‍य बलिदानक रूप मे हुनका अर्पित करू। यैह भेल अहाँ सभक लेल परमेश्‍वरक असली आत्‍मिक आराधना कयनाइ।[2] अहाँ सभ एहि संसारक अनुरूप आचरण नहि करू, बल्‍कि परमेश्‍वर केँ अहाँक सोच-विचार केँ नव बनाबऽ दिऔन आ तहिना अहाँ केँ पूर्ण रूप सँ बदलि देबऽ दिऔन। एहि तरहेँ परमेश्‍वर अहाँ सभ सँ की चाहैत छथि, अर्थात् हुनका नजरि मे की नीक अछि, की ग्रहणयोग्‍य अछि आ की सर्वोत्तम अछि, तकरा अहाँ सभ अनुभव सँ जानि जायब।

इब्रानी 10:24-25
[24] प्रेम आ भलाइक काज करऽ मे अपना सभ एक-दोसर केँ कोना प्रेरित कऽ सकी ताहि पर ध्‍यान राखी।[25] अपना सभ एक संग जमा भेनाइ नहि छोड़ी जेना कि किछु लोकक आदत अछि, बल्‍कि एक-दोसर केँ प्रोत्‍साहित करैत रही, विशेष कऽ आब जखन देखैत छी जे ओ दिन लगचिआ गेल अछि जहिया यीशु फेर औताह।

याकूब 1:19-20
[19] यौ हमर प्रिय भाइ सभ, अहाँ सभ एहि बात केँ जानि राखू जे प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति केँ सुनबाक लेल तत्‍पर रहबाक चाही और बाजऽ आ क्रोध करऽ मे देरी करबाक चाही।[20] कारण, मनुष्‍यक क्रोध ओहि धार्मिक जीवन केँ उत्‍पन्‍न नहि करैत अछि जे परमेश्‍वर देखऽ चाहैत छथि।

2 तिमुथियुस 3:16-17
[16] सम्‍पूर्ण धर्मशास्‍त्र परमेश्‍वरक प्रेरणा द्वारा रचल गेल अछि, आ सत्‍य सिखयबाक लेल, गलत शिक्षा देखार करबाक लेल, जीवन केँ सुधारबाक लेल आ धार्मिकताक अनुसार जीवन कोना बिताओल जाय ताहि बातक शिक्षा देबाक लेल उपयोगी अछि,[17] जाहि सँ धर्मशास्‍त्रक प्रयोग द्वारा परमेश्‍वरक भक्‍त सुयोग्‍य भऽ हर प्रकारक नीक काज कुशलतापूर्बक कऽ सकय।

1 तिमुथियुस 6:11-12
[11] मुदा यौ परमेश्‍वरक भक्‍त, अहाँ एहि सभ बात सँ दूर भागू आ धार्मिकता, भक्‍ति, विश्‍वास, प्रेम, धैर्य आ नम्रताक साधना मे लागू।[12] विश्‍वासक नीक लड़ाइ मे लागल रहू, और ओहि अनन्‍त जीवन केँ पकड़ने रहू जे जीवन प्राप्‍त करबाक लेल अहाँ बजाओल गेलहुँ आ जकरा विषय मे अहाँ बहुतो लोकक समक्ष नीक गवाही देलहुँ।

1 पत्रुस 5:8-9
[8] अहाँ सभ अपना पर काबू राखू आ सचेत रहू। अहाँ सभक दुश्‍मन शैतान गर्जैत सिंह जकाँ घुमैत-फिरैत एहि ताक मे रहैत अछि जे ककरा फाड़ि कऽ खा ली।[9] विश्‍वास मे दृढ़ रहि कऽ ओकर सामना करू आ मोन राखू जे पूरा संसार मे अहाँ सभक भाय सभ एही प्रकारक कष्‍ट सहि रहल छथि।

मरकुस 10:43-45
[43] मुदा अहाँ सभ मे एना नहि होअय। बल्‍कि, जे अहाँ सभ मे पैघ होमऽ चाहय से अहाँ सभक सेवक बनय।[44] और जे केओ अहाँ सभ मे प्रमुख व्‍यक्‍ति होमऽ चाहय से सभक टहलू बनय![45] किएक तँ मनुष्‍य-पुत्र सेहो एहि लेल नहि आयल अछि जे अपन सेवा कराबय बल्‍कि एहि लेल जे ओ सेवा करय और बहुतो लोकक छुटकाराक मूल्‍य मे अपन प्राण देअय।”

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT