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जिंदगी: [परीक्षण]


याकूब 1:2-4
[2] यौ हमर भाइ लोकनि, अहाँ सभ पर जखन अनेक प्रकारक आपत्ति-विपत्ति आबय तँ ओकरा महा आनन्‍दक बात बुझू।[3] कारण, अहाँ सभ जनैत छी जे अहाँ सभक विश्‍वासक जाँच भेला सँ धैर्य उत्‍पन्‍न होइत अछि।[4] मुदा धैर्य केँ ओकर अपन काज पूरा करऽ दिऔक, जाहि सँ अहाँ सभ आत्‍मिक रूप सँ बच्‍चा नहि रहि कऽ सभ तरहेँ पूर्ण भऽ जाइ आ अहाँ सभ मे कोनो बातक कमी नहि रहय।

1 पत्रुस 1:6
ई अहाँ सभक लेल बड़का आनन्‍दक विषय अछि, ओना तँ भऽ सकैत अछि जे एखन किछु समयक लेल अहाँ सभ अनेक प्रकारक कष्‍ट मे पड़ि कऽ दुखी होइ।

यूहन्‍ना 16:33
“हम अहाँ सभ केँ ई सभ बात कहि देने छी जाहि सँ हमरा मे अहाँ सभ केँ शान्‍ति भेटय। संसार मे अहाँ सभ पर संकट आओत, मुदा साहस राखू! हम संसार पर विजयी भऽ गेल छी।”

रोमी 8:28
अपना सभ जनैत छी जे परमेश्‍वर सँ प्रेम कयनिहार लोक, अर्थात् हुनका उद्देश्‍यक अनुरूप बजाओल गेल लोक सभक लेल प्रत्‍येक परिस्‍थिति मे परमेश्‍वर भलाइ उत्‍पन्‍न करैत छथि।

रोमी 12:12
आशा राखि आनन्‍दित रहू, विपत्ति मे धैर्य राखू, प्रार्थना मे लागल रहू।

याकूब 1:12
धन्‍य अछि ओ मनुष्‍य जे आपत्ति-विपत्ति केँ धैर्यपूर्बक सामना करैत अछि, किएक तँ परीक्षा मे स्‍थिर रहला पर ओकरा ओ जीवन-मुकुट भेटतैक जे परमेश्‍वर अपना सँ प्रेम करऽ वला सभ केँ देबाक वचन देने छथि।

1 पत्रुस 5:10
अहाँ सभ केँ कनेक काल धरि कष्‍ट सहन कऽ लेलाक बाद, परमेश्‍वर, जे सम्‍पूर्ण कृपाक स्रोत छथि, से अपने अहाँ सभ केँ सिद्ध, दृढ़, बलवन्‍त आ स्‍थिर करताह। ओ तँ यीशु मसीह मे अहाँ सभ केँ अपन अनन्‍त कालीन महिमा मे सहभागी होयबाक लेल बजौने छथि।

रोमी 8:18
हम ई मानैत छी जे, जे महिमा अपना सभ मे प्रगट होमऽ वला अछि तकरा तुलना मे वर्तमान समयक कष्‍ट किछु नहि अछि।

1 पत्रुस 4:12
प्रिय भाइ लोकनि, अपन अग्‍नि-परीक्षा पर, जे अहाँ सभ केँ जँचबाक लेल भऽ रहल अछि, आश्‍चर्य नहि मानू, जेना कोनो असाधारण बात भऽ रहल होअय।

1 थिसलुनिकी 5:16-18
[16] सदिखन आनन्‍दित रहू,[17] लगातार प्रार्थना करैत रहू।[18] प्रत्‍येक परिस्‍थिति मे परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद दिऔन, कारण, अहाँ सभ जे मसीह यीशु मे छी तिनका सभ सँ परमेश्‍वर यैह बात चाहैत छथि।

1 कोरिन्‍थी 10:13
अहाँ सभ कहियो कोनो एहन परीक्षा मे नहि पड़लहुँ जे मनुष्‍य सभ केँ नहि होइत रहैत अछि। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि। ओ अहाँ सभ केँ एहन परीक्षा मे नहि पड़ऽ देताह जे अहाँ सभक सहनशक्‍ति सँ बाहर होअय। ओ परीक्षाक समय मे तकरा सहबाक साहस दैत अहाँ सभ केँ पार कऽ निकलबाक उपाय सेहो उपलब्‍ध करौताह।

फिलिप्‍पी 4:6-7
[6] कोनो बातक चिन्‍ता-फिकिर नहि करू, बल्‍कि प्रत्‍येक परिस्‍थिति मे परमेश्‍वर सँ प्रार्थना आ निवेदन करू; अपन विनती धन्‍यवादक संग हुनका सम्‍मुख प्रस्‍तुत करू।[7] तखन परमेश्‍वरक शान्‍ति, जकरा मनुष्‍य केँ बुझि पौनाइ असम्‍भव अछि, से अहाँ सभक हृदय आ अहाँ सभक बुद्धि केँ मसीह यीशु मे सुरक्षित राखत।

रोमी 5:3-5
[3] एतबे नहि, बल्‍कि कष्‍टक समय सभ मे सेहो आनन्‍दित होइत छी, किएक तँ अपना सभ जनैत छी जे कष्‍ट सँ धैर्य उत्‍पन्‍न होइत अछि,[4] धैर्य सँ सच्‍चरित्रता आ सच्‍चरित्रता सँ आशा उत्‍पन्‍न होइत अछि।[5] और ई आशा अपना सभ केँ निराश नहि होमऽ दैत अछि, किएक तँ परमेश्‍वर अपन पवित्र आत्‍मा जे अपना सभ केँ देने छथि, तिनका द्वारा अपन प्रेम अपना सभक हृदय मे भरि देने छथि।

मरकुस 4:17
मुदा ओ वचन ओकरा मे जड़ि नहि पकड़ैत छैक और तेँ कनेके काल तक स्‍थिर रहैत अछि। जखन वचनक कारणेँ ओकरा कष्‍ट और अत्‍याचार सहबाक स्‍थिति अबैत छैक तखन ओ सभ तुरत विश्‍वास केँ छोड़ि दैत अछि।

रोमी 8:35
अपना सभ केँ मसीहक प्रेम सँ के अलग कऽ सकैत अछि? की कष्‍ट, वा संकट, वा अत्‍याचार, वा अकाल, वा गरीबी, वा खतरा, वा तरुआरि?

1 पत्रुस 4:12-13
[12] प्रिय भाइ लोकनि, अपन अग्‍नि-परीक्षा पर, जे अहाँ सभ केँ जँचबाक लेल भऽ रहल अछि, आश्‍चर्य नहि मानू, जेना कोनो असाधारण बात भऽ रहल होअय।[13] बल्‍कि आनन्‍द मनाउ जे अहाँ सभ मसीहक दुःख-भोग मे सहभागी छी। तखन जाहि दिन मसीह अपना महिमा मे फेर औताह, ताहि दिन अहाँ सभ आओर आनन्‍दित होयब।

याकूब 4:7
तेँ अहाँ सभ परमेश्‍वरक अधीन होउ। शैतानक आक्रमण केँ सामना करिऔक तँ ओ अहाँ सभ लग सँ पड़ायत।

2 कोरिन्‍थी 1:3-4
[3] अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक जे परमेश्‍वर आ पिता छथि, तिनकर स्‍तुति होनि, जे दया करऽ वला पिता छथि आ सभ प्रकारक सान्‍त्‍वना देबऽ वला परमेश्‍वर छथि।[4] ओ अपना सभ केँ सभ प्रकारक दुःख-तकलीफ मे सान्‍त्‍वना दैत छथि जाहि सँ अपनो सभ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त एहि सान्‍त्‍वना द्वारा सभ प्रकारक दुःख मे पड़ल लोक सभ केँ सान्‍त्‍वना दऽ सकिऐक।

फिलिप्‍पी 4:13
जे हमरा बल दैत छथि हम तिनका द्वारा सभ किछु कऽ सकैत छी।

फिलिप्‍पी 4:19
हमर परमेश्‍वर सेहो अपन ओहि असीम महिमाक भण्‍डार सँ जे मसीह यीशु मे रहैत अछि, अहाँ सभक प्रत्‍येक आवश्‍यकता पूरा करताह।

रोमी 5:3-4
[3] एतबे नहि, बल्‍कि कष्‍टक समय सभ मे सेहो आनन्‍दित होइत छी, किएक तँ अपना सभ जनैत छी जे कष्‍ट सँ धैर्य उत्‍पन्‍न होइत अछि,[4] धैर्य सँ सच्‍चरित्रता आ सच्‍चरित्रता सँ आशा उत्‍पन्‍न होइत अछि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT