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生活: [性别]


2 कोरिन्‍थी 12:21
又怕我再来的时候,我的 神使我在你们面前羞愧; 并且我要为许多从前犯罪的人哀痛,因为他们行了污秽、奸淫、邪荡的事,却不肯悔改。

इफिसी 5:3
अहाँ सभ मे कोनो तरहक अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध नहि होअय, कोनो प्रकारक अपवित्र विचार-व्‍यवहार नहि होअय, कोनो लोभ नहि होअय—एहि सभक चर्चो तक नहि। कारण, ई सभ बात परमेश्‍वरक पवित्र लोकक लेल उचित नहि अछि।

इफिसी 5:33
तैयो एकर व्‍यक्‍तिगत रूप मे सेहो अर्थ होइत अछि—अहाँ सभ मे सँ हर व्‍यक्‍ति जहिना अपना सँ प्रेम करैत छी तहिना अपना स्‍त्री सँ प्रेम करू, और स्‍त्री अपन पतिक आदर करथि।

गलाती 5:19
आब देखू, पापी स्‍वभावक काज सभ स्‍पष्‍ट अछि, जेना गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, अशुद्ध विचार-व्‍यवहार, निर्लज्‍जता,

इब्रानी 13:4
सभ केओ विवाह-बन्‍धन केँ आदरक दृष्‍टि सँ देखथि। वैवाहिक सम्‍बन्‍ध दुषित नहि कयल जाय कारण, जे अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि, चाहे ओ विवाहित होअय वा अविवाहित, परमेश्‍वर तकरा दण्‍ड देताह।

1 कोरिन्‍थी 6:9
की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अधर्मी लोक परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत? अपना केँ धोखा नहि दिअ! अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखनिहार, मूर्तिक पूजा कयनिहार, परस्‍त्रीगमन कयनिहार, वेश्‍या सनक काज कयनिहार पुरुष, समलैंगिक सम्‍बन्‍ध रखनिहार लोक,

1 कोरिन्‍थी 6:18
अनैतिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रहू। आरो सभ पाप जे मनुष्‍य करैत अछि, से शरीर सँ हटल अछि, मुदा जे ककरो संग अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि से अपना शरीरेक विरुद्ध पाप करैत अछि।

1 यूहन्‍ना 1:9
मुदा जँ अपना सभ अपन पाप केँ मानि लेब तँ ओ जे विश्‍वासयोग्‍य और न्‍यायी छथि अपना सभ केँ पापक क्षमा करताह और अपना सभ केँ सभ अधर्म सँ शुद्ध करताह।

मत्ती 5:28
मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जे कोनो पुरुष कोनो स्‍त्री केँ अधलाह इच्‍छा सँ देखैत अछि, से तखने अपना मोन मे ओकरा संग परस्‍त्रीगमन कऽ लेलक।

मरकुस 7:22-23
[22] लोभ, दुष्‍कर्म, धोखा, निर्लज्‍जता, ईर्ष्‍या, निन्‍दा, घमण्‍ड, और मूर्खता।[23] ई सभ बात मनुष्‍यक भीतर मे सँ निकलैत अछि और ओकरा अशुद्ध करैत अछि।”

1 थिसलुनिकी 4:3-5
[3] परमेश्‍वरक इच्‍छा ई छनि जे अहाँ सभ पवित्र बनी। ओ चाहैत छथि जे अहाँ सभ दोसराक संग सभ तरहक अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रही,[4] अहाँ सभ मे सँ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अपना शरीर केँ पवित्रता और मर्यादाक संग नियन्‍त्रण मे राखी,[5] आ नहि कि प्रभुक शिक्षा सँ अपरिचित जातिक लोक सभ, जे सभ परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हैत अछि, तकरा सभ जकाँ अपना शरीर केँ वासनाक पूर्ति करबाक साधन बुझी।

मरकुस 10:6-9
[6] लेकिन सृष्‍टिक शुरुए सँ परमेश्‍वर मनुष्‍य केँ ‘पुरुष आ स्‍त्री बनौलनि।’[7] ‘एहि कारणेँ पुरुष अपन माय-बाबू केँ छोड़ि अपन स्‍त्रीक संग रहत और दूनू एक शरीर भऽ जायत।’[8] आब ओ सभ दू नहि अछि—एके भऽ गेल।[9] तेँ जकरा परमेश्‍वर जोड़ि देलथिन तकरा मनुष्‍य अलग नहि करओ।”

1 कोरिन्‍थी 13:4-8
[4] प्रेम सहनशील आ दयालु होइत अछि। प्रेम डाह नहि करैत अछि, प्रेम अपन बड़ाइ नहि करैत अछि आ ने घमण्‍ड करैत अछि।[5] प्रेम अभद्र व्‍यवहार नहि करैत अछि, ओ स्‍वार्थी नहि अछि, जल्‍दी सँ खौंझाइत नहि अछि आ ने अपराधक हिसाब रखैत अछि।[6] प्रेम अधर्म सँ प्रसन्‍न नहि होइत अछि, बल्‍कि सत्‍य सँ आनन्‍दित होइत अछि।[7] प्रेम सभ बात सहन करैत अछि, सभ स्‍थिति मे विश्‍वास रखैत अछि, सभ स्‍थिति मे आशा रखैत अछि आ सभ स्‍थिति मे लगनशील रहैत अछि।[8] प्रेमक अन्‍त कहियो नहि होयत। परमेश्‍वरक दिस सँ सम्‍बाद पौनाइ समाप्‍त भऽ जायत, अनजान भाषा सभ बजनाइ बन्‍द भऽ जायत आ ज्ञान लुप्‍त भऽ जायत।

1 कोरिन्‍थी 6:13-20
[13] “भोजन पेटक लेल अछि आ पेट भोजनक लेल”—मुदा परमेश्‍वर दूनू केँ समाप्‍त कऽ देताह। शरीर अनैतिक सम्‍बन्‍धक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक सेवाक लेल अछि आ प्रभु शरीरक कल्‍याणक लेल।[14] परमेश्‍वर जहिना अपना सामर्थ्‍य सँ प्रभु यीशु केँ मृत्‍यु मे सँ जिऔलथिन तहिना ओ हमरो सभ केँ जिऔताह।[15] की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर मसीहक अंग सभ अछि? तँ की हम मसीहक अंग लऽ कऽ तकरा वेश्‍याक अंग बना दिऐक? किन्‍नहुँ नहि![16] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे वेश्‍याक संग जे केओ अपन शरीर जोड़ैत अछि से ओकरा संग एक शरीर भऽ जाइत अछि? किएक तँ धर्मशास्‍त्र कहैत अछि जे, “दूनू एक शरीर भऽ जायत।”[17] मुदा जे प्रभु सँ संयुक्‍त भऽ जाइत अछि से हुनका संग आत्‍मा मे एक बनि जाइत अछि।[18] अनैतिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रहू। आरो सभ पाप जे मनुष्‍य करैत अछि, से शरीर सँ हटल अछि, मुदा जे ककरो संग अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि से अपना शरीरेक विरुद्ध पाप करैत अछि।[19] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍माक मन्‍दिर अछि, जे आत्‍मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि आ जे अहाँ सभ केँ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त भेल छथि? अहाँ सभ अपन नहि छी।[20] अहाँ सभ दाम दऽ कऽ किनल गेल छी। एहि लेल अपना शरीर द्वारा परमेश्‍वरक सम्‍मान करू।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT