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जिंदगी: [पेरेंटिंग]


कुलुस्‍सी 3:21
यौ पिता लोकनि, अपना बच्‍चा सभ केँ तंग नहि करिऔक; एना नहि होअय जे ओकरा सभक साहस टुटि जाइक।

इफिसी 6:4
यौ पिता लोकनि, अहाँ सभ अपन बच्‍चा सभक संग एहन व्‍यवहार नहि करू जाहि सँ ओ सभ तंग भऽ कऽ खिसिआयल रहि जाय, बल्‍कि ओकरा सभक पालन-पोषण प्रभुक शिक्षा आ निर्देशक अनुसार करिऔक।

इब्रानी 12:11
जखन कोनो तरहक सजाय ककरो भेटि रहल छैक तँ ताहि समय मे ओ ओकरा सुखदायक नहि, दुःखदायक लगैत छैक, मुदा बाद मे, तकरा द्वारा सुधारल गेलाक बाद, ओकर परिणाम एक धार्मिक आ शान्‍तिपूर्ण जीवन होइत अछि।

मत्ती 6:33-34
[33] बल्‍कि सभ सँ पहिने परमेश्‍वरक राज्‍य पर, आ परमेश्‍वर जाहि प्रकारक धार्मिकता अहाँ सँ चाहैत छथि, ताहि पर मोन लगाउ, तँ ई सभ वस्‍तु सेहो अहाँ केँ देल जायत।[34] “तेँ काल्‍हि की होयत तकर चिन्‍ता नहि करू, किएक तँ काल्‍हि अपन चिन्‍ता अपने कऽ लेत। आजुक लेल तँ अजुके दुःख बहुत अछि।

फिलिप्‍पी 4:6-7
[6] कोनो बातक चिन्‍ता-फिकिर नहि करू, बल्‍कि प्रत्‍येक परिस्‍थिति मे परमेश्‍वर सँ प्रार्थना आ निवेदन करू; अपन विनती धन्‍यवादक संग हुनका सम्‍मुख प्रस्‍तुत करू।[7] तखन परमेश्‍वरक शान्‍ति, जकरा मनुष्‍य केँ बुझि पौनाइ असम्‍भव अछि, से अहाँ सभक हृदय आ अहाँ सभक बुद्धि केँ मसीह यीशु मे सुरक्षित राखत।

1 पत्रुस 5:2-3
[2] अहाँ सभ सँ हमर अनुरोध ई अछि जे, अहाँ सभक जिम्‍मा मे जे परमेश्‍वरक भेँड़ा रूपी झुण्‍ड अछि, तकर अहाँ सभ चरबाह जकाँ रखबारी करू। ओकर देखभाल करू, कोनो दबाब सँ नहि, बल्‍कि जहिना परमेश्‍वर चाहैत छथि, तहिना आनन्‍द सँ करू, और अनुचित लाभक दृष्‍टि सँ नहि करू, बल्‍कि सेवा करबाक मोन सँ।[3] जे लोक सभ अहाँ सभ केँ सौंपल गेल अछि, तकरा सभ पर अधिकार नहि जमाउ, बल्‍कि अपना झुण्‍डक लेल नमूना बनू।

मसीह-दूत 2:38-39
[38] पत्रुस उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ गोटे अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू और यीशु मसीहक नाम सँ बपतिस्‍मा लिअ, जाहि सँ परमेश्‍वर अहाँ सभक पाप केँ क्षमा करथि आ अहाँ सभ केँ पवित्र आत्‍मा प्रदान करथि।[39] कारण, परमेश्‍वर जे वचन देलनि, से अहाँ सभक लेल और अहाँ सभक सन्‍तानक लेल अछि, और तकरो सभक लेल जे दूर-दूर रहैत अछि; हँ, तकरा सभ गोटेक लेल जकरा सभ केँ अपना सभक प्रभु-परमेश्‍वर अपना लग बजौथिन।”

2 तिमुथियुस 3:14-16
[14] परन्‍तु अहाँ जे छी, अहाँ केँ जे शिक्षा देल गेल अछि आ जाहि बात पर अहाँ विश्‍वास कयने छी, ताहि पर अटल रहू। स्‍मरण राखू जे अहाँ किनका सभ सँ ई सभ बात सिखने छी।[15] मोन राखू जे अहाँ बचपने सँ ओहि पवित्र धर्मशास्‍त्रक जानकार छी जे अहाँ केँ बुद्धि दऽ सकैत अछि, आ से बुद्धि अहाँ केँ ओहि मुक्‍ति मे पहुँचबैत अछि जे मसीह यीशु पर विश्‍वास कयला सँ प्राप्‍त होइत अछि।[16] सम्‍पूर्ण धर्मशास्‍त्र परमेश्‍वरक प्रेरणा द्वारा रचल गेल अछि, आ सत्‍य सिखयबाक लेल, गलत शिक्षा देखार करबाक लेल, जीवन केँ सुधारबाक लेल आ धार्मिकताक अनुसार जीवन कोना बिताओल जाय ताहि बातक शिक्षा देबाक लेल उपयोगी अछि,

इफिसी ۶:۱-۴
[۱] हौ धिआ-पुता सभ! तोँ सभ प्रभुक लोक होयबाक कारणेँ अपन माय-बाबूक आज्ञा मानह, किएक तँ यैह उचित छह।[۲] धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, “अपन माय-बाबूक आदर करह”—ई पहिल आज्ञा अछि जकरा संग एक वचनो देल गेल अछि।[۳] ओ वचन ई अछि जे, “...जाहि सँ तोहर कल्‍याण होअओ और तोँ बहुतो साल धरि पृथ्‍वी पर जीबैत रहह।”[۴] यौ पिता लोकनि, अहाँ सभ अपन बच्‍चा सभक संग एहन व्‍यवहार नहि करू जाहि सँ ओ सभ तंग भऽ कऽ खिसिआयल रहि जाय, बल्‍कि ओकरा सभक पालन-पोषण प्रभुक शिक्षा आ निर्देशक अनुसार करिऔक।

इब्रानी ۱۲:۷-۱۱
[۷] कष्‍ट केँ ई बुझि कऽ सहि लिअ जे परमेश्‍वर एहि द्वारा हमरा सुधारि रहल छथि। कारण ओ अहाँ केँ पुत्र मानि अहाँक संग पिता जकाँ व्‍यवहार कऽ रहल छथि। की कोनो एहन पुत्र अछि जकर पिता ओकरा सजाय दऽ कऽ नहि सुधारैत होइक?[۸] जँ अहाँ सभ केँ सुधारल नहि जाइत अछि जखन की सभ बेटा केँ सुधारल जाइत छैक तँ अहाँ सभ पारिवारिक-पुत्र नहि, अनजनुआ-जन्‍मल पुत्र सभ छी।[۹] एतबे नहि, जखन शारीरिक पिता अपना सभ केँ सजाय दैत छलाह आ ताहि लेल अपना सभ हुनका सभक आदर करैत छलहुँ तँ ओहि सँ बढ़ि कऽ अपन आत्‍मिक पिताक अधीन मे रहनाइ अपना सभ किएक नहि स्‍वीकार करी जाहि सँ जीवन पाबी?[۱۰] ओ सभ सीमित समयक लेल जहिना अपना बुद्धिक अनुसार ठीक बुझैत छलाह, तहिना अपना सभ केँ सजाय देलनि, मुदा परमेश्‍वर ई जानि जे अपना सभक कल्‍याणक लेल केहन सजाय ठीक होयत अपना सभ केँ सुधारैत छथि जाहि सँ ओ जहिना पवित्र छथि, तहिना अपनो सभ पवित्र बनी।[۱۱] जखन कोनो तरहक सजाय ककरो भेटि रहल छैक तँ ताहि समय मे ओ ओकरा सुखदायक नहि, दुःखदायक लगैत छैक, मुदा बाद मे, तकरा द्वारा सुधारल गेलाक बाद, ओकर परिणाम एक धार्मिक आ शान्‍तिपूर्ण जीवन होइत अछि।

तीतुस 2:2-8
[2] वृद्ध पुरुष सभ केँ सिखबिऔन जे ओ सभ संयमी, गम्‍भीर आ विचारवान होथि तथा सही विश्‍वास, प्रेम आ धैर्य मे स्‍थिर।[3] एही तरहेँ बुढ़ि स्‍त्रीगण सभ केँ सिखबिऔन जे हुनका सभक चालि-चलन प्रभुक श्रद्धा मानऽ वला लोकक अनुरूप होनि। ओ सभ दोसराक निन्‍दा-शिकायत नहि करथि आ शराबी नहि होथि, बल्‍कि नीक बात सिखौनिहारि होथि,[4] जाहि सँ ओ सभ जबान स्‍त्रीगण सभ केँ सिखा सकथि जे ओ सभ अपना पति आ बच्‍चा सभ सँ प्रेम करथि,[5] आ विचारशील, पवित्र, कुशल गृहणी आ दयालु होथि, और अपन पतिक अधीन रहथि जाहि सँ हुनका सभक व्‍यवहारक कारणेँ केओ परमेश्‍वरक वचनक निन्‍दा नहि करय।[6] तहिना युवक सभ केँ सेहो विचारवान होयबाक लेल समझबिऔक-बुझबिऔक।[7] अहाँ स्‍वयं प्रत्‍येक बात मे नीक व्‍यवहार द्वारा नमूना बनू। अहाँ शुद्ध मोन सँ आ गम्‍भीरता सँ शिक्षा दिअ—[8] एहन सही सिद्धान्‍तक शिक्षा दिअ जकर आलोचना नहि कयल जा सकत जाहि सँ कोनो बातक विषय मे अपना सभक निन्‍दा करबाक अवसर नहि पयबाक कारणेँ विरोधी सभ लज्‍जित भऽ जाय।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT