A A A A A

जिंदगी: [दर्द]


प्रकाशित-वाक्‍य 21:4
ओ ओकरा सभक आँखिक सभ नोर पोछि देथिन। तकरबाद ने मृत्‍यु रहत, ने शोक, ने विलाप आ ने कष्‍ट, किएक तँ पहिलुका बात सभ समाप्‍त भऽ गेल अछि।”

मत्ती 4:23-25
[23] यीशु सम्‍पूर्ण गलील प्रदेश मे घूमि-घूमि कऽ यहूदी सभक सभाघर सभ मे शिक्षा देबऽ लगलाह, परमेश्‍वरक राज्‍यक शुभ समाचार सुनाबऽ लगलाह, आ लोक सभ केँ सभ तरहक बिमारी सँ छुटकारा देबऽ लगलाह।[24] एहि तरहेँ हुनकर यश सम्‍पूर्ण सीरिया प्रदेश मे पसरि गेलनि। लोक बिमार सभ केँ जे विभिन्‍न प्रकारक रोग वा कष्‍ट सँ पीड़ित छल, वा जकरा सभ मे दुष्‍टात्‍मा छलैक, मिर्गी सँ पीड़ित छल वा लकवा मारल छल—सभ केँ यीशु लग अनैत छल, और यीशु ओकरा सभ केँ स्‍वस्‍थ कऽ दैत छलथिन।[25] गलील प्रदेश, “दस नगर” क्षेत्र, यरूशलेम नगर, यहूदिया प्रदेश और यरदन नदीक ओहि पारक क्षेत्र सँ लोकक विशाल भीड़ हुनका पाछाँ चलऽ लगलनि।

2 कोरिन्‍थी 1:3-8
[3] अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक जे परमेश्‍वर आ पिता छथि, तिनकर स्‍तुति होनि, जे दया करऽ वला पिता छथि आ सभ प्रकारक सान्‍त्‍वना देबऽ वला परमेश्‍वर छथि।[4] ओ अपना सभ केँ सभ प्रकारक दुःख-तकलीफ मे सान्‍त्‍वना दैत छथि जाहि सँ अपनो सभ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त एहि सान्‍त्‍वना द्वारा सभ प्रकारक दुःख मे पड़ल लोक सभ केँ सान्‍त्‍वना दऽ सकिऐक।[5] किएक तँ जाहि तरहेँ मसीहक कष्‍ट प्रशस्‍त मात्रा मे अपना सभक जीवन मे अबैत रहैत अछि ताहि तरहेँ मसीह द्वारा सान्‍त्‍वना सेहो प्रशस्‍त मात्रा मे अबैत रहैत अछि।[6] जँ हमरा सभ केँ दुःख-कष्‍ट भोगऽ पड़ैत अछि तँ ई अहाँ सभक सान्‍त्‍वना आ उद्धारक लेल अछि। कारण, जखन हम सभ सान्‍त्‍वना पबैत छी तँ से एहि लेल जे हम सभ अहूँ सभ केँ सान्‍त्‍वना दऽ सकी, जाहि सँ अहाँ सभ धैर्यपूर्बक ओहि सभ कष्‍ट केँ सहबाक लेल साहस करी जकरा हमहूँ सभ सहैत छी।[7] अहाँ सभक विषय मे हमरा सभ केँ पूरा विश्‍वास अछि जे अहाँ सभ स्‍थिर रहब, किएक तँ हम सभ ई जनैत छी जे जहिना अहाँ सभ कष्‍ट मे सहभागी छी तहिना सान्‍त्‍वना मे सेहो सहभागी छी।[8] यौ भाइ लोकनि, हम सभ अहाँ सभ सँ ई नहि नुकाबऽ चाहैत छी जे आसिया प्रदेश मे हमरा सभ केँ केहन-केहन कष्‍ट उठाबऽ पड़ल। एहि कष्‍टक भार एतेक भारी छल जे ओ हमरा सभक सहनशक्‍तिक सीमा सँ बाहर छल, एतऽ तक जे हमरा सभ केँ जीवित बचबाक कोनो आशा नहि रहि गेल छल।

1 पत्रुस 4:12-19
[12] प्रिय भाइ लोकनि, अपन अग्‍नि-परीक्षा पर, जे अहाँ सभ केँ जँचबाक लेल भऽ रहल अछि, आश्‍चर्य नहि मानू, जेना कोनो असाधारण बात भऽ रहल होअय।[13] बल्‍कि आनन्‍द मनाउ जे अहाँ सभ मसीहक दुःख-भोग मे सहभागी छी। तखन जाहि दिन मसीह अपना महिमा मे फेर औताह, ताहि दिन अहाँ सभ आओर आनन्‍दित होयब।[14] जँ अहाँ सभक अपमान एहि लेल कयल जाइत अछि जे अहाँ सभ मसीहक लोक छी, तँ ई अहाँ सभक लेल सौभाग्‍यक बात अछि, किएक तँ एहि सँ स्‍पष्‍ट होइत अछि जे महिमाक आत्‍मा, जे परमेश्‍वरक आत्‍मा छथि, से अहाँ सभ मे वास करैत छथि।[15] एना नहि होअय जे अहाँ सभ मे सँ कोनो व्‍यक्‍ति हत्‍यारा, चोर वा आओर कोनो तरहक अपराधी बनि कऽ, वा दोसराक काज मे टाँग अड़यबाक कारणेँ दुःख भोगय।[16] मुदा जँ केओ मसीही होयबाक कारणेँ दुःख उठबैत छी तँ लज्‍जित नहि होउ, बल्‍कि परमेश्‍वरक स्‍तुति करू जे मसीहक लोकक रूप मे परिचित छी।[17] किएक तँ न्‍यायक समय आबि गेल अछि आ से परमेश्‍वरक परिवारे सँ शुरू भऽ रहल अछि। जँ न्‍यायक शुरुआत अपना सभ सँ भऽ रहल अछि, तँ तकरा सभ केँ की होयतैक जे सभ अनाज्ञाकारी भऽ परमेश्‍वरक शुभ समाचार केँ नहि मानैत अछि?[18] जेना लिखल अछि, “जँ धार्मिक लोक सभ मुश्‍किल सँ उद्धार प्राप्‍त करत, तँ अधर्मी आ पापी मनुष्‍य सभक दशा की होयतैक?”[19] एहि लेल जे सभ परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार दुःख उठा रहल छथि, से सभ अपना केँ विश्‍वासयोग्‍य सृष्‍टिकर्ताक हाथ मे सौंपि देथि आ उचित काज करैत रहथि।

यूहन्‍ना 16:16-24
[16] “आब कनेक काल मे अहाँ सभ हमरा नहि देखब, तखन फेर कनेक कालक बाद हमरा देखब।”[17] एहि पर हुनकर किछु शिष्‍य एक-दोसर सँ कहऽ लगलाह, “हुनकर एहि कथनक की अर्थ भेल जे ‘कनेक काल मे अहाँ सभ हमरा नहि देखब’, और, ‘तखन तकरा कनेक कालक बाद हमरा फेर देखब’, और एकर जे, ‘कारण, हम पिता लग जा रहल छी’?”[18] ओ सभ कहऽ लगलाह, “हुनकर एहि ‘कनेक काल’क की कहबाक मतलब छनि? हम सभ नहि बुझि पबैत छी जे ओ की कहि रहल छथि।”[19] यीशु जनैत छलाह जे ओ सभ हुनका सँ पुछऽ चाहैत छथि, तेँ ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “की अहाँ सभ एक-दोसर सँ पुछि रहल छी जे हमर की कहबाक अर्थ छल जखन हम कहलहुँ जे, कनेक काल मे अहाँ सभ हमरा नहि देखब, और, तखन तकरा कनेक कालक बाद हमरा फेर देखब?[20] हम अहाँ सभ केँ सत्‍ये कहैत छी जे अहाँ सभ कन्‍ना-रोहटि आ विलाप करब जखन कि संसार आनन्‍द मनाओत। अहाँ सभ शोक मनायब, मुदा अहाँ सभक शोक आनन्‍द मे बदलि जायत।[21] जखन स्‍त्री बच्‍चा केँ जन्‍म दैत अछि तँ ओकरा दर्द होइत छैक, कारण ओकर समय आबि गेल रहैत छैक, मुदा जखन ओ बच्‍चा केँ जन्‍म दऽ दैत अछि तँ ओ एहि खुशी मे जे एक नव बच्‍चा संसार मे जन्‍म लेलक, अपना पीड़ा केँ बिसरि जाइत अछि।[22] तहिना, अहाँ सभ एखन शोक मनबैत छी, मुदा हम अहाँ सभ केँ फेर देखब आ तखन अहाँ सभक मोन आनन्‍द सँ भरि जायत, और अहाँ सभक आनन्‍द केओ नहि अहाँ सभ सँ छिनत।[23] ओहि समय मे अहाँ सभ हमरा सँ कोनो प्रश्‍न नहि पुछब। “हम अहाँ सभ केँ विश्‍वास दिअबैत छी जे, जँ अहाँ सभ पिता सँ किछु माँगब तँ ओ अहाँ सभ केँ हमरा नाम सँ देताह।[24] एखन तक अहाँ सभ हमरा नाम सँ नहि किछु मँगने छी। माँगू और अहाँ सभ प्राप्‍त करब, आ ताहि सँ अहाँ सभक आनन्‍द पूर्ण भऽ जायत।

इब्रानी 12:1-11
[1] तेँ जखन गवाही देबऽ वला सभक एहन विशाल समूह सँ अपना सभ घेरल छी तँ अबैत जाउ, अपना सभ प्रत्‍येक विघ्‍न-वाधा उतारि कऽ फेकि दी, आ पापो, जे अपना सभ केँ तुरत्ते ओझरबैत अछि, आ ई दौड़, जाहि मे अपना सभ केँ दौड़बाक अछि, नहि छोड़ि धैर्यपूर्बक अन्‍त तक दौड़ी।[2] अपन नजरि अपना सभक विश्‍वास केँ शुरुआत आ सिद्ध कयनिहार यीशु पर राखी जे सामने राखल आनन्‍दक कारणेँ क्रूसक कलंक पर ध्‍यान नहि दऽ तकर दुःख सहलनि आ आब परमेश्‍वरक सिंहासनक दहिना कात बैसल छथि।[3] ओ जे पापी सभक हाथ सँ कतेक घोर विरोध सहलनि तिनका पर ध्‍यान दिअ, जाहि सँ एना नहि होअय जे अहाँ सभ थाकि कऽ हिम्‍मत हारी।[4] पाप सँ संघर्ष करैत अहाँ सभ केँ एखन तक अपन खून नहि बहाबऽ पड़ल अछि।[5] की अहाँ सभ धर्मशास्‍त्रक ई उपदेश बिसरि गेलहुँ जाहि मे अहाँ सभ केँ पुत्र कहि कऽ सम्‍बोधन कयल गेल अछि?— “हे हमर पुत्र, प्रभुक सजाय केँ तुच्‍छ नहि मानह, और जखन ओ तोरा कोनो गलती देखा कऽ डँटैत छथुन तँ हिम्‍मत नहि हारह।[6] कारण, जकरा सँ प्रभु प्रेम करैत छथि तकरा ओ सजाय दऽ कऽ सुधारैत छथिन, जकरा ओ पुत्र मानैत छथि तकरा ओ कोड़ा लगबैत छथिन।”[7] कष्‍ट केँ ई बुझि कऽ सहि लिअ जे परमेश्‍वर एहि द्वारा हमरा सुधारि रहल छथि। कारण ओ अहाँ केँ पुत्र मानि अहाँक संग पिता जकाँ व्‍यवहार कऽ रहल छथि। की कोनो एहन पुत्र अछि जकर पिता ओकरा सजाय दऽ कऽ नहि सुधारैत होइक?[8] जँ अहाँ सभ केँ सुधारल नहि जाइत अछि जखन की सभ बेटा केँ सुधारल जाइत छैक तँ अहाँ सभ पारिवारिक-पुत्र नहि, अनजनुआ-जन्‍मल पुत्र सभ छी।[9] एतबे नहि, जखन शारीरिक पिता अपना सभ केँ सजाय दैत छलाह आ ताहि लेल अपना सभ हुनका सभक आदर करैत छलहुँ तँ ओहि सँ बढ़ि कऽ अपन आत्‍मिक पिताक अधीन मे रहनाइ अपना सभ किएक नहि स्‍वीकार करी जाहि सँ जीवन पाबी?[10] ओ सभ सीमित समयक लेल जहिना अपना बुद्धिक अनुसार ठीक बुझैत छलाह, तहिना अपना सभ केँ सजाय देलनि, मुदा परमेश्‍वर ई जानि जे अपना सभक कल्‍याणक लेल केहन सजाय ठीक होयत अपना सभ केँ सुधारैत छथि जाहि सँ ओ जहिना पवित्र छथि, तहिना अपनो सभ पवित्र बनी।[11] जखन कोनो तरहक सजाय ककरो भेटि रहल छैक तँ ताहि समय मे ओ ओकरा सुखदायक नहि, दुःखदायक लगैत छैक, मुदा बाद मे, तकरा द्वारा सुधारल गेलाक बाद, ओकर परिणाम एक धार्मिक आ शान्‍तिपूर्ण जीवन होइत अछि।

रोमी 8:18-28
[18] हम ई मानैत छी जे, जे महिमा अपना सभ मे प्रगट होमऽ वला अछि तकरा तुलना मे वर्तमान समयक कष्‍ट किछु नहि अछि।[19] ई सृष्‍टि बहुत जिज्ञासाक संग ओहि समयक प्रतीक्षा कऽ रहल अछि जहिया परमेश्‍वरक सन्‍तान सभ केँ प्रगट कयल जायत।[20] ई सृष्‍टि तँ व्‍यर्थताक अधीन कऽ देल गेल, मुदा से अपन इच्‍छा सँ नहि, बल्‍कि हुनकर इच्‍छा सँ जे एकरा अधीन कऽ देलथिन, मुदा ई आशा बनल रहल जे,[21] एक दिन आओत जहिया सृष्‍टि सरनाइ आ मरनाइक बन्‍हन सँ मुक्‍त भऽ ओहि महिमामय स्‍वतन्‍त्रता मे सहभागी बनत जे परमेश्‍वरक सन्‍तान सभक होयतैक।[22] हम सभ जनैत छी जे सम्‍पूर्ण सृष्‍टि मिलि कऽ आइ तक ओहि प्रकारक कष्‍ट सँ कुहरैत आयल अछि जेना प्रसव-पीड़ाक कष्‍ट होइत अछि।[23] मात्र वैह नहि, बल्‍कि अपनो सभ, जकरा सभ केँ परमेश्‍वरक वचनक पूर्तिक पहिल भागक रूप मे पवित्र आत्‍मा भेटल छथि, भीतरे-भीतर कुहरैत छी और एहि बातक प्रतीक्षा करैत छी जे अपना सभ पूर्ण रूप सँ परमेश्‍वरक पोषपुत्र बनाओल जायब आ शरीर सरनाइ आ मरनाइक बन्‍हन सँ छुटकारा पाबि नव कयल जायत।[24] जहिया सँ अपना सभक उद्धार भेल, तहिया सँ अपना सभ मे ई आशा बनल रहल अछि। मुदा जँ अपना सभ ओहि वस्‍तु केँ प्राप्‍त कैए लेने छी जकर आशा रखैत छी, तँ ओकरा “आशा” नहि कहल जाइत अछि। जकरा कोनो वस्‍तु प्राप्‍त भऽ गेल छैक, से तकर आशा किएक करत?[25] मुदा अपना सभ ओहि वस्‍तुक आशा करैत छी जे देखैत नहि छी, आ तेँ धैर्यपूर्बक ओकर प्रतीक्षा करैत छी।[26] एही तरहेँ पवित्र आत्‍मा सेहो अपना सभक दुर्बलता मे सहायता करैत छथि, किएक तँ अपना सभ नहि जनैत छी जे अपना सभ केँ प्रार्थना कोन तरहेँ करबाक चाही, मुदा आत्‍मा अपने कुहरि-कुहरि कऽ अपना सभक लेल विनती करैत छथि, जकरा शब्‍द मे व्‍यक्‍त नहि कयल जा सकैत अछि।[27] और परमेश्‍वर, जे अपना सभक हृदयक भेद केँ जनैत छथि, से जनैत छथि जे आत्‍माक अभिप्राय की छनि, कारण, आत्‍मा परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार हुनकर लोक सभक लेल विनती करैत छथि।[28] अपना सभ जनैत छी जे परमेश्‍वर सँ प्रेम कयनिहार लोक, अर्थात् हुनका उद्देश्‍यक अनुरूप बजाओल गेल लोक सभक लेल प्रत्‍येक परिस्‍थिति मे परमेश्‍वर भलाइ उत्‍पन्‍न करैत छथि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT