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जिंदगी: [ईश्वर को पहले रखना]

रोमी 1:16
हम ई शुभ समाचार सुनाबऽ सँ लज्‍जित नहि होइत छी, किएक तँ ई शुभ समाचार ओ माध्‍यम अछि जाहि द्वारा परमेश्‍वर अपना सामर्थ्‍य सँ प्रत्‍येक विश्‍वास कयनिहार लोकक उद्धार करैत छथि, पहिने यहूदी सभक आ फेर आन जातिक लोक सभक।

मत्ती 6:33
बल्‍कि सभ सँ पहिने परमेश्‍वरक राज्‍य पर, आ परमेश्‍वर जाहि प्रकारक धार्मिकता अहाँ सँ चाहैत छथि, ताहि पर मोन लगाउ, तँ ई सभ वस्‍तु सेहो अहाँ केँ देल जायत।

मत्ती 22:37
यीशु उत्तर देलथिन, “ ‘तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ आ अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ प्रेम करह।’

गलाती 2:20
हम मसीहक संग क्रूस पर मरि गेल छी। आब हम जीवित नहि रहलहुँ, बल्‍कि मसीह हमरा मे जीबैत छथि। जे जीवन हम आब एहि शरीर मे जीबैत छी से विश्‍वास सँ जीबैत छी। ई विश्‍वास परमेश्‍वरक पुत्र पर टिकल अछि, जे हमरा सँ प्रेम कयलनि आ हमरा लेल अपना केँ अर्पित कऽ देलनि।

यूहन्‍ना 3:16
“हँ, परमेश्‍वर संसार सँ एहन प्रेम कयलनि जे ओ अपन एकमात्र बेटा केँ दऽ देलनि, जाहि सँ जे केओ हुनका पर विश्‍वास करैत अछि से नाश नहि होअय, बल्‍कि अनन्‍त जीवन पाबय।

मत्ती 6:31-33
[31] “एहि लेल चिन्‍ता नहि करू जे हम सभ की खायब, की पीब वा की पहिरब।[32] कारण, एहि सभ बातक पाछाँ तँ परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हऽ वला जातिक लोक सभ पड़ल रहैत अछि। अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि से जनैत छथि जे अहाँ सभ केँ एहि बात सभक आवश्‍यकता अछि।[33] बल्‍कि सभ सँ पहिने परमेश्‍वरक राज्‍य पर, आ परमेश्‍वर जाहि प्रकारक धार्मिकता अहाँ सँ चाहैत छथि, ताहि पर मोन लगाउ, तँ ई सभ वस्‍तु सेहो अहाँ केँ देल जायत।

1 कोरिन्‍थी 10:13
अहाँ सभ कहियो कोनो एहन परीक्षा मे नहि पड़लहुँ जे मनुष्‍य सभ केँ नहि होइत रहैत अछि। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि। ओ अहाँ सभ केँ एहन परीक्षा मे नहि पड़ऽ देताह जे अहाँ सभक सहनशक्‍ति सँ बाहर होअय। ओ परीक्षाक समय मे तकरा सहबाक साहस दैत अहाँ सभ केँ पार कऽ निकलबाक उपाय सेहो उपलब्‍ध करौताह।

1 कोरिन्‍थी 1:18
विनाश भेनिहार लोक क्रूसक शिक्षा केँ मूर्खताक बात बुझैत अछि। मुदा अपना सभक लेल, जे सभ उद्धार पाबि रहल छी, क्रूसक शिक्षा परमेश्‍वरक सामर्थ्‍य अछि।

प्रकाशित-वाक्‍य 2:4
मुदा हमरा अहाँक विरोध मे ई कहबाक अछि जे अहाँ अपन पहिलुका प्रेम छोड़ि देने छी।

इब्रानी 12:2
अपन नजरि अपना सभक विश्‍वास केँ शुरुआत आ सिद्ध कयनिहार यीशु पर राखी जे सामने राखल आनन्‍दक कारणेँ क्रूसक कलंक पर ध्‍यान नहि दऽ तकर दुःख सहलनि आ आब परमेश्‍वरक सिंहासनक दहिना कात बैसल छथि।

मत्ती 6:24
“कोनो खबास दूटा मालिकक सेवा एक संग नहि कऽ सकैत अछि। कारण, ओ एकटा सँ घृणा करत आ दोसर सँ प्रेम, अथवा पहिल केँ खूब मानत और दोसर केँ तुच्‍छ बुझत। अहाँ सभ परमेश्‍वर आ धन-सम्‍पत्ति दूनूक सेवा नहि कऽ सकैत छी।

कुलुस्‍सी 3:1-4
[1] एहि लेल, जँ अहाँ सभ मसीहक संग जीवित कयल गेल छी, तँ ओहन बात सभ पर मोन लगाउ जे स्‍वर्ग सँ सम्‍बन्‍ध रखैत अछि, जतऽ मसीह परमेश्‍वरक दहिना कात मे विराजमान छथि।[2] अपन ध्‍यान पृथ्‍वी परक वस्‍तु सभ पर नहि, बल्‍कि स्‍वर्गीय वस्‍तु सभ पर लगाउ,[3] किएक तँ जहाँ तक अहाँ सभक पुरान जीवनक बात अछि, अहाँ सभ तँ मरि गेल छी आ अहाँ सभक नव जीवन आब मसीहक संग परमेश्‍वर मे नुकायल अछि।[4] मसीहे अहाँ सभक जीवन छथि, और ओ जहिया फेर औताह, तहिया अहूँ सभ हुनका महिमाक वैभव मे सहभागी होयब आ ई बात प्रगट होयत जे अहाँ सभ हुनके लोक छिऐन।

रोमी 1:20
किएक तँ परमेश्‍वरक अदृश्‍य गुण, अर्थात् हुनकर अनन्‍त कालीन शक्‍ति आ ईश्‍वरीय स्‍वभाव, संसारक सृष्‍टिएक समय सँ हुनका रचना मे साफ-साफ देखाइ दैत अछि। तेँ ओकरा सभ केँ अपन आचरणक सफाइ देबाक कोनो बहाना नहि चलतैक।

रोमी 15:13-19
[13] परमेश्‍वर, जे आशाक स्रोत छथि, अहाँ सभ केँ परमेश्‍वर परक भरोसाक कारणेँ अत्‍यन्‍त आनन्‍द आ शान्‍ति सँ भरि देथि, जाहि सँ पवित्र आत्‍माक सामर्थ्‍य सँ अहाँ सभक मोन आशा सँ भरल रहय।[14] यौ हमर भाइ लोकनि, हमरा दृढ़ विश्‍वास अछि जे अहाँ सभ सदभाव आ हर प्रकारक ज्ञान सँ परिपूर्ण भऽ एक-दोसर केँ परामर्श देबऽ मे समर्थ छी।[15] तैयो किछु बात सभक स्‍मरण करयबाक लेल हम अहाँ सभ केँ ओहि बात सभक विषय मे साफ-साफ लिखलहुँ। कारण, परमेश्‍वरक कृपा सँ हमरा एहि बातक वरदान भेटल अछि जे,[16] हम गैर-यहूदी सभक बीच मसीह यीशुक सेवक बनी आ परमेश्‍वरक शुभ समाचार सुनयबाक सेवा करी, जाहि सँ गैर-यहूदी सभ परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍मा द्वारा पवित्र कयल जाय आ परमेश्‍वर केँ ग्रहणयोग्‍य चढ़ौना बनय।[17] एहि लेल हम परमेश्‍वरक जे सेवा कऽ रहल छी ताहि पर मसीह यीशु द्वारा हमरा गर्व अछि।[18] हम आन बातक विषय मे नहि बाजब—हम खाली ओही बात सभक चर्चा करबाक साहस करब जे मसीह गैर-यहूदी सभ केँ परमेश्‍वरक बात माननिहार बनयबाक लेल हमरा द्वारा की सभ कयने छथि, अर्थात्, हमर शब्‍द आ काजक माध्‍यम सँ,[19] चमत्‍कारपूर्ण चिन्‍ह सभक सामर्थ्‍य द्वारा आ पवित्र आत्‍माक सामर्थ्‍य द्वारा। एहि क्रम मे हम यरूशलेम आ ओकर लग-पासक प्रदेश सँ लऽ कऽ इल्‍लुरिकुम धरि मसीहक शुभ समाचार-प्रचार करबाक अपन काज पूरा कयलहुँ।

इफिसी 3:7
परमेश्‍वरक सामर्थ्‍यक प्रभाव द्वारा हुनका कृपा सँ हमरा ई वरदान देल गेल जे हम एहि शुभ समाचारक प्रचार करैत हुनकर सेवा करी।

रोमी 9:22
जँ परमेश्‍वर अपन क्रोध देखयबाक और अपन सामर्थ्‍य प्रगट करबाक इच्‍छा रखितो कोप मे पड़ऽ वला ओहि लोक सभ केँ अधिक समय धरि सहन कयलनि जे सभ विनाशक लेल तैयार कयल गेल छल, तँ की, हुनकर से अधिकार नहि छलनि?

यूहन्‍ना 3:30
ई जरूरी अछि जे ओ बढ़ैत रहथि आ हम घटैत रही।

मत्ती 6:19-21
[19] “पृथ्‍वी पर अपना लेल धन जमा नहि करू जतऽ कीड़ा आ बीझ ओकरा नष्‍ट कऽ दैत अछि, और चोर सेन्‍ह काटि कऽ ओकर चोरी कऽ लैत अछि।[20] बल्‍कि अपना लेल स्‍वर्ग मे धन जमा करू, जतऽ ने कीड़ा आ ने बीझ ओकरा नष्‍ट करैत अछि, आ ने चोर सेन्‍ह काटि कऽ ओकर चोरी करैत अछि।[21] कारण, जतऽ अहाँक धन अछि ततहि अहाँक मोनो लागल रहत।

यूहन्‍ना 15:5
“हम अंगूर-लत्ती छी। अहाँ सभ ठाढ़ि छी। जे हमरा मे रहैत अछि और हम ओकरा मे, सैह बहुत फड़ैत अछि, कारण हमरा बिनु अहाँ सभ किछु नहि कऽ सकैत छी।

मत्ती 24:12
अधर्मक वृद्धि भेला सँ अनेक लोकक आपसी प्रेम मन्‍द पड़ि जायत।

मसीह-दूत 20:35
हम अपन सभ काज मे अहाँ सभ केँ देखा देलहुँ जे कोना एहि तरहक परिश्रम कऽ कऽ अपना सभ केँ निर्बल सभक सहयोग करबाक अछि, आ प्रभु यीशुक कहल बात केँ मोन रखबाक अछि जे ओ अपने बाजल छलाह, ‘लेबऽ सँ देबऽ मे आशिष अछि।’ ”

रोमी 8:5
कारण, मानवीय पाप-स्‍वभावक अनुसार चलनिहार लोक सभ ताहि बात सभ पर मोन लगबैत अछि जाहि बातक लेल पाप-स्‍वभाव इच्‍छा रखैत अछि, मुदा पवित्र आत्‍माक अनुसार चलनिहार लोक सभ ताहि बात सभ पर जे पवित्र आत्‍मा चाहैत छथि।

फिलिप्‍पी 4:13
जे हमरा बल दैत छथि हम तिनका द्वारा सभ किछु कऽ सकैत छी।

2 कोरिन्‍थी 12:7-10
[7] हमरा पर प्रगट कयल एहि बहुत अद्‌भुत रहस्‍य सभक कारणेँ हम घमण्‍ड नहि करऽ लागी, ताहि लेल हमरा शरीर मे एकटा काँट गरा देल गेल। अर्थात्‌, शैतानक एक “दूत” हमरा कष्‍ट देबाक लेल राखि देल गेल जाहि सँ हम घमण्‍डी नहि भऽ जाइ।[8] हम एकरा विषय मे प्रभु सँ तीन बेर नेहोरा-विनती कयलहुँ जे ई हमरा सँ दूर भऽ जाय।[9] मुदा ओ हमरा कहलनि, “हमर कृपा तोरा लेल प्रशस्‍त छह, किएक तँ हमर सामर्थ्‍यक पूर्णता मनुष्यक दुर्बलता मे सिद्ध होइत अछि।” एहि लेल हम खुशी सँ अपन दुर्बलता सभ पर गर्व करब, जाहि सँ ओहि दुर्बलता सभक द्वारा हमरा मे मसीहक सामर्थ्‍य क्रियाशील रहय।[10] तेँ मसीहक लेल हम अपन दुर्बलता सभ मे, अपमान सभ मे, कष्‍ट सभ मे, सतावट सभ मे आ विपत्ति सभ मे प्रसन्‍न रहैत छी, किएक तँ जखन हम दुर्बल छी तखने बलगर होइत छी।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT