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जिंदगी: [बांझपन]


इब्रानी 11:11
विश्‍वासेक कारणेँ अब्राहमक स्‍त्री, सारा, अवस्‍था ढरि गेलाक बादो गर्भधारण करबाक सामर्थ्‍य पौलनि, कारण ओ मानलनि जे वचन देबऽ वला परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि।

1 कोरिन्‍थी 3:16
की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभ गोटे मिलि कऽ परमेश्‍वरक मन्‍दिर छी आ परमेश्‍वरक आत्‍मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि?

याकूब 1:17
प्रत्‍येक नीक आ उत्तम दान जे अछि, से ऊपर सँ अबैत अछि। सूर्य, चन्‍द्रमा आ तारा सभक रचनिहार, पिता, जे छाया जकाँ नहि बदलैत छथि, तिनके सँ ई दान सभ भेटैत अछि।

यूहन्‍ना 16:33
“हम अहाँ सभ केँ ई सभ बात कहि देने छी जाहि सँ हमरा मे अहाँ सभ केँ शान्‍ति भेटय। संसार मे अहाँ सभ पर संकट आओत, मुदा साहस राखू! हम संसार पर विजयी भऽ गेल छी।”

मरकुस ๑๑:๒๔
एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, अहाँ प्रार्थना मे जे किछु माँगब, विश्‍वास करू जे ओ भेटि गेल, और अहाँ केँ भेटिए जायत।

फिलिप्‍पी 4:13
जे हमरा बल दैत छथि हम तिनका द्वारा सभ किछु कऽ सकैत छी।

रोमी 12:12
आशा राखि आनन्‍दित रहू, विपत्ति मे धैर्य राखू, प्रार्थना मे लागल रहू।

लूका 1:36-37
[36] एतबे नहि! अहाँक सम्‍बन्‍धी इलीशिबा केँ सेहो, बुढ़ारी अवस्‍था मे बच्‍चा होयतनि! ओ जे बाँझ कहबैत छलीह, तिनका आब छठम मासक गर्भ छनि।[37] परमेश्‍वरक लेल कोनो बात असम्‍भव नहि छनि।”

रोमी 5:3-5
[3] एतबे नहि, बल्‍कि कष्‍टक समय सभ मे सेहो आनन्‍दित होइत छी, किएक तँ अपना सभ जनैत छी जे कष्‍ट सँ धैर्य उत्‍पन्‍न होइत अछि,[4] धैर्य सँ सच्‍चरित्रता आ सच्‍चरित्रता सँ आशा उत्‍पन्‍न होइत अछि।[5] और ई आशा अपना सभ केँ निराश नहि होमऽ दैत अछि, किएक तँ परमेश्‍वर अपन पवित्र आत्‍मा जे अपना सभ केँ देने छथि, तिनका द्वारा अपन प्रेम अपना सभक हृदय मे भरि देने छथि।

लूका 1:13-21
[13] मुदा स्‍वर्गदूत हुनका कहलथिन, “यौ जकरयाह, नहि डेराउ, कारण परमेश्‍वर लग अहाँक प्रार्थना सुनल गेल अछि। अहाँक स्‍त्री इलीशिबा एक पुत्र केँ जन्‍म देतीह। अहाँ ओकर नाम यूहन्‍ना राखब।[14] अहाँ केँ खुशी आ आनन्‍द होयत। ओकर जन्‍म सँ बहुत लोक आनन्‍द मनाओत,[15] कारण, ओ प्रभुक नजरि मे महान् होयत। ओ मदिरा वा आरो कोनो तरहक निसा लागऽ वला वस्‍तु कहियो नहि पीत। ओ मायक पेटे सँ पवित्र आत्‍मा सँ परिपूर्ण होयत।[16] ओ इस्राएलक बहुतो लोक केँ अपना प्रभु-परमेश्‍वर दिस घुमाओत।[17] आत्‍मा आ सामर्थ्‍य मे ओ एलियाह सन भऽ कऽ प्रभुक आगाँ चलत। ओ पिता-सन्‍तान सभक बीच मेल-मिलाप कराओत, आज्ञा उल्‍लंघन करऽ वला सभ केँ ओहन बुद्धि दियाओत जाहि सँ ओ सभ धार्मिकताक अनुसार चलत, आ एहि तरहेँ प्रभुक लेल एक योग्‍य प्रजा तैयार करतनि।”[18] एहि पर जकरयाह स्‍वर्गदूत केँ कहलथिन, “ई बात हम निश्‍चित रूप सँ कोना जानि सकैत छी? हम अपनो बूढ़ छी आ हमर घरवाली सेहो बुढ़ि छथि।”[19] स्‍वर्गदूत हुनका उत्तर देलथिन, “हम जिब्राएल छी। हम परमेश्‍वरक सामने उपस्‍थित रहैत छी। हम अहाँ सँ बात करबाक लेल आ ई खुशीक सम्‍बाद सुनयबाक लेल पठाओल गेल छी।[20] आब सुनू, जाहि दिन धरि ई बात पूरा नहि भऽ जायत, ताहि दिन धरि अहाँ बौक रहब, बाजि नहि सकब। कारण, हमर बात जे ठीक समय अयला पर पूरा होयत, ताहि पर अहाँ विश्‍वास नहि कयलहुँ।”[21] एम्‍हर लोक सभ जकरयाहक प्रतीक्षा कऽ रहल छल आ आश्‍चर्यित छल जे हुनका मन्‍दिर मे एतेक देरी किएक भऽ रहल छनि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT