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जिंदगी: [खाना]

यूहन्‍ना 4:4-34
[4] रस्‍ता मे हुनका सामरिया प्रदेश भऽ कऽ जाय पड़लनि।[5] ओ सामरिया मे सुखार नगर पहुँचलाह। ई नगर ओहि खेत लग अछि जे याकूब अपना बेटा यूसुफ केँ देने छलाह।[6] ओतऽ याकूबक इनार छल, और यीशु यात्रा सँ थाकि कऽ इनार पर बैसि रहलाह। ई दुपहरियाक समय छल।[7] ताबते मे एक सामरी स्‍त्री पानि भरऽ आयल। यीशु ओकरा कहलथिन, “हमरा पानि पिबऽ लेल दैह।”[8] हुनकर शिष्‍य सभ भोजनक सामान किनबाक लेल नगर मे गेल छलाह।[9] सामरी स्‍त्री कहलकनि, “अपने यहूदी भऽ कऽ हमरा सामरी स्‍त्री सँ कोना पानि मँगैत छी?” (कारण, यहूदी सभ सामरी लोक सँ कोनो सम्‍पर्क नहि रखैत अछि।)[10] यीशु उत्तर देलथिन, “जँ तोँ परमेश्‍वरक वरदान केँ जनितह, और ई जनितह जे ओ के छथि जे तोरा कहैत छथुन जे पिबऽ लेल दैह, तँ तोँही हुनके सँ मँगितह और ओ तोरा जीवनक जल दितथुन।”[11] स्‍त्री बाजल, “मालिक, पानि भरऽ लेल अपने केँ डोलो तक नहि अछि, और इनार गहींर अछि। ई जीवनक जल अपने लग आओत कतऽ सँ?[12] की अपने हमरा सभक पुरखा याकूब सँ पैघ छी? ओ तँ हमरा सभ केँ ई इनार प्रदान कयलनि, जाहि मे सँ ओ अपने और हुनकर बालक सभ पिलनि और माल-जाल सभ सेहो पिलक।”[13] यीशु बजलाह, “जे ई पानि पीत, तकरा फेर पियास लगतैक,[14] मुदा जे ओ जल पीत जे हम देबैक, तकरा कहियो फेर पियास नहि लगतैक। कारण, हम ओकरा पिबाक लेल जे जल देबैक, से ओकरा मे सदिखन उमड़ैत रहतैक और अनन्‍त जीवन तक बहतैक।”[15] स्‍त्री कहलकनि, “यौ मालिक! हमरा ई जल दिअ जाहि सँ हमरा कहियो नहि पियास लागय और एहिठाम पानि भरऽ नहि आबऽ पड़य।”[16] ओ कहलथिन, “जा कऽ अपना घरवला केँ बजा लबहुन।”[17] स्‍त्री हुनका जबाब देलकनि, “हमरा घरवला नहि अछि।” यीशु ओकरा कहलथिन, “तोँ ठीके कहैत छह जे हमरा घरवला नहि अछि,[18] कारण तोरा पाँचटा घरवला भेल छलह, और जे तोरा लग एखन छह, सेहो तोहर घरवला नहि छह। ई बात तोँ एकदम सत्‍य कहलह।”[19] स्‍त्री बाजल, “मालिक, हम बुझि गेलहुँ जे अपने परमेश्‍वरक एक प्रवक्‍ता छी! आब कहू।[20] हमरा सभक पुरखा एहि पहाड़ पर आराधना कयलनि, लेकिन अपने यहूदी सभ कहैत छी जे आराधना करबाक स्‍थान मात्र यरूशलेम अछि।”[21] यीशु ओकरा कहलथिन, “हमर विश्‍वास करह। ओ समय आओत जहिया तोँ सभ ने एहि पहाड़ पर पिताक आराधना करबह, ने यरूशलेम मे।[22] तोँ सामरी लोक तकर आराधना करैत छह जकरा जनिते नहि छह। हम सभ जे यहूदी सभ छी तिनकर आराधना करैत छी जिनका जनैत छी, कारण उद्धार यहूदी वंश द्वारा अबैत अछि।[23] मुदा ओ समय आबि रहल अछि, हँ, आबिओ गेल, जे सत्‍य आराधक पिताक आराधना आत्‍मा और सत्‍य सँ करतनि, किएक तँ पिता एहने आराधक चाहैत छथि।[24] परमेश्‍वर आत्‍मा छथि, और ई आवश्‍यक अछि जे हुनकर आराधक आत्‍मा आओर सत्‍य सँ हुनकर आराधना करनि।”[25] स्‍त्री कहलकनि, “हम जनैत छी जे मसीह, जे ख्रिष्‍ट कहबैत छथि, से आबऽ वला छथि। ओ जखन औताह तखन हमरा सभ केँ सभ बात बुझा देताह।”[26] यीशु ओकरा कहलथिन, “हम, जे तोरा सँ बात कऽ रहल छिअह, वैह छी।”[27] ओहि क्षण हुनकर शिष्‍य सभ घूमि अयलाह। हुनका सभ केँ बहुत आश्‍चर्य भेलनि जे यीशु एक स्‍त्री सँ बात कऽ रहल छथि, मुदा केओ नहि पुछलथिन जे, अहाँ की चाहैत छी, वा ओकरा सँ किएक बात कऽ रहल छी?[28] तखन स्‍त्री अपन घैल छोड़ि नगर मे जा कऽ लोक सभ केँ कहऽ लागल जे,[29] “आउ, एक आदमी केँ देखू! जे किछु हम कहियो कयने छी, से सभ बात ओ हमरा कहलनि। की ई उद्धारकर्ता-मसीह तँ नहि छथि?”[30] लोक सभ नगर सँ बहरायल और यीशु लग आबऽ लागल।[31] एहि बीच मे शिष्‍य सभ यीशु केँ आग्रह कयलथिन जे, “गुरुजी, किछु खा लिअ।”[32] मुदा ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमरा लग एहन भोजन अछि जकरा बारे मे अहाँ सभ नहि किछु जनैत छी।”[33] शिष्‍य सभ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह, “केओ हिनका लेल भोजन तँ नहि आनि देने छनि?”[34] यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हमर भोजन ई अछि जे हम अपन पठाबऽ वलाक इच्‍छाक अनुसार चली और जे काज हमरा देने छथि तकरा पूरा करी।

यूहन्‍ना 6:27-35
[27] जे भोजन नहि टिकैत अछि, ताहि लेल परिश्रम नहि करू, बल्‍कि ओहि भोजनक लेल परिश्रम करू जे अनन्‍त जीवन तक टिकैत अछि और जे मनुष्‍य-पुत्र अहाँ सभ केँ प्रदान करताह, कारण हुनका पर पिता-परमेश्‍वर अपन छाप लगा देने छथिन।”[28] तखन ओ सभ हुनका पुछलकनि, “परमेश्‍वरक काज करबाक लेल, हम सभ की करू?”[29] यीशु बजलाह, “परमेश्‍वर अहाँ सभ सँ जे काज चाहैत छथि, से ई अछि जे जकरा ओ पठौने छथि तकरा पर विश्‍वास करू।”[30] एहि पर ओ सभ हुनका कहलकनि, “तखन अहाँ कोन चिन्‍ह देखायब, जकरा देखि कऽ हम सभ अहाँ पर विश्‍वास कऽ सकी? अहाँ की काज करैत छी?[31] हमरा सभक पुरखा निर्जन क्षेत्र मे मन्‍ना वला रोटी खयने छल, जेना धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, ‘ओ ओकरा सभ केँ खयबाक लेल स्‍वर्ग सँ रोटी देलथिन।’ ”[32] एहि पर यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ विश्‍वास दिअबैत छी जे, बात ई नहि जे अहाँ सभ केँ मूसा स्‍वर्ग सँ रोटी देलनि, बल्‍कि ई जे हमर पिता अहाँ सभ केँ स्‍वर्ग सँ वास्‍तविक रोटी दऽ रहल छथि।[33] हँ, परमेश्‍वर जे रोटी दैत छथि, से ओ अछि जे स्‍वर्ग सँ उतरि कऽ संसार केँ जीवन दैत अछि।”[34] ओ सभ हुनका कहलकनि, “यौ मालिक, हमरा सभ केँ ई रोटी एखनो आ सभ दिन दैत रहू!”[35] यीशु बजलाह, “जीवनक रोटी हमहीं छी। जे हमरा लग आओत से कहियो भूखल नहि रहत। जे हमरा पर विश्‍वास करत, तकरा कहियो पियास नहि लगतैक।

मत्ती 4:4
यीशु उत्तर देलथिन, “धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, ‘मनुष्‍य मात्र रोटी सँ नहि, बल्‍कि परमेश्‍वरक मुँह सँ निकलल प्रत्‍येक वचन सँ जीवित रहत।’ ”

मत्ती 5:6
धन्‍य अछि ओ सभ जे धार्मिकताक भूखल-पियासल अछि, किएक तँ ओ सभ तृप्‍त कयल जायत।

मत्ती 6:25
“एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, अपना प्राणक लेल चिन्‍ता नहि करू जे हम की खायब वा की पीब, आ ने शरीरक लेल चिन्‍ता करू जे की पहिरब। की भोजन सँ प्राण, आ वस्‍त्र सँ शरीर बेसी मूल्‍यवान नहि अछि?

1 कोरिन्‍थी 6:13
“भोजन पेटक लेल अछि आ पेट भोजनक लेल”—मुदा परमेश्‍वर दूनू केँ समाप्‍त कऽ देताह। शरीर अनैतिक सम्‍बन्‍धक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक सेवाक लेल अछि आ प्रभु शरीरक कल्‍याणक लेल।

1 कोरिन्‍थी 8:8
भोजनक वस्‍तु अपना सभ केँ परमेश्‍वरक नजदीक नहि पहुँचा सकैत अछि। जँ ओकरा नहि खाइ तँ ताहि सँ कोनो हानि नहि होयत आ जँ ओकरा खाइ तँ ओहि सँ कोनो लाभ नहि होयत।

1 कोरिन्‍थी 10:31
अहाँ सभ खाइ वा पिबी वा जे किछु करी, सभ किछु एहि लेल करू जाहि सँ परमेश्‍वरक महिमा प्रगट होनि।

1 तिमुथियुस 4:4-5
[4] परमेश्‍वरक सृष्‍टि कयल प्रत्‍येक वस्‍तु नीक अछि। कोनो वस्‍तु अस्‍वीकार कयल जाय जोगरक नहि होइत अछि, जँ ओकरा धन्‍यवादक संग स्‍वीकार कयल जाइत छैक तँ,[5] कारण, ओ परमेश्‍वरक कहल बात द्वारा आ प्रार्थना सँ पवित्र ठहराओल जाइत अछि।

मरकुस 7:14-23
[14] तखन यीशु भीड़क लोक केँ अपना लग बजा कऽ कहलथिन, “अहाँ सभ गोटे हमर बात सुनू और बुझू![15] कोनो एहन वस्‍तु नहि होइत छैक जे बाहर सँ मनुष्‍य मे प्रवेश कऽ कऽ ओकरा अशुद्ध बना सकय, बल्‍कि जे मनुष्‍यक मोनक भीतर सँ बहराइत छैक से ओकरा अशुद्ध बनबैत छैक।[16] [जे सुनि सकैत अछि से सुनए!] ”[17] बाद मे भीड़ केँ छोड़ि यीशु घर गेलाह। हुनकर शिष्‍य सभ एहि उदाहरणक बारे मे हुनका सँ पुछलथिन।[18] यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “की, अहूँ सभ नहि बुझैत छी? की ई बुझऽ मे नहि अबैत अछि जे, जे किछु खाइत काल मनुष्‍य मे प्रवेश करैत अछि से ओकरा अशुद्ध नहि कऽ सकैत अछि?[19] किएक तँ ओ मोन मे नहि प्रवेश करैत अछि, ओ पेट मे जाइत अछि और फेर देह सँ बहरा जाइत अछि।” (ओ ई कहि कऽ सभ भोजन-वस्‍तु केँ शुद्ध ठहरा देलथिन।)[20] ओ आगाँ कहऽ लगलाह, “जे मनुष्‍य मे सँ निकलैत छैक से ओकरा अशुद्ध करैत छैक।[21] किएक तँ मनुष्‍यक भीतर मे सँ, अर्थात्‌ हृदय मे सँ सभ प्रकारक अधलाह बात सभ निकलैत छैक, जेना गलत विचार सभ, गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, चोरी, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन,[22] लोभ, दुष्‍कर्म, धोखा, निर्लज्‍जता, ईर्ष्‍या, निन्‍दा, घमण्‍ड, और मूर्खता।[23] ई सभ बात मनुष्‍यक भीतर मे सँ निकलैत अछि और ओकरा अशुद्ध करैत अछि।”

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT