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जिंदगी: [परिवार]


यूहन्‍ना 15:12-13
[12] हमर आदेश ई अछि जे, जेना हम अहाँ सभ सँ प्रेम कयने छी, तेना अहाँ सभ एक-दोसर सँ प्रेम करू।[13] एहि सँ बड़का प्रेम कोनो नहि अछि जे, केओ अपन मित्रक लेल अपन प्राण देअय।

1 तिमुथियुस 5:8
जे केओ अपन सम्‍बन्‍धी सभक आ विशेष कऽ अपने परिवारक सदस्‍य सभक देख-रेख नहि करैत अछि, से विश्‍वास त्‍यागि देने अछि और अविश्‍वासिओ सँ भ्रष्‍ट अछि।

इफिसी 6:4
यौ पिता लोकनि, अहाँ सभ अपन बच्‍चा सभक संग एहन व्‍यवहार नहि करू जाहि सँ ओ सभ तंग भऽ कऽ खिसिआयल रहि जाय, बल्‍कि ओकरा सभक पालन-पोषण प्रभुक शिक्षा आ निर्देशक अनुसार करिऔक।

मत्ती 12:48-50
[48] यीशु ओकरा उत्तर देलथिन, “के छथि हमर माय? के सभ छथि हमर भाय?”[49] तखन अपना शिष्‍य सभक दिस हाथ सँ इसारा करैत कहलनि, “देखू, यैह सभ हमर माय आ हमर भाय सभ छथि।[50] जे केओ हमर पिता, जे स्‍वर्ग मे छथि, तिनकर इच्‍छाक अनुसार चलैत छथि, वैह हमर भाय, हमर बहिन, हमर माय छथि।”

मत्ती 19:18-19
[18] ओ पुछलकनि, “कोन आज्ञा सभ?” एहि पर यीशु कहलथिन, “ ‘हत्‍या नहि करह, परस्‍त्रीगमन नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह,[19] अपन माय-बाबूक आदर करह’ आ ‘अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ ”

कुलुस्‍सी 3:13
एक-दोसराक संग सहनशील होउ, आ जँ किनको ककरो सँ सिकायत होअय, तँ एक-दोसर केँ क्षमा करू। जहिना प्रभु अहाँ सभ केँ क्षमा कऽ देलनि, तहिना अहूँ सभ क्षमा करू।

गलाती 6:10
एहि लेल जतऽ धरि अवसर भेटय, सभक लेल भलाइ करी, विशेष रूप सँ तिनका सभक लेल जे सभ विश्‍वासक कारणेँ अपना सभक भाय-बहिन छथि।

1 कोरिन्‍थी 15:33-34
[33] धोखा नहि खाउ—“अधलाह संगति नीक चरित्र केँ भ्रष्‍ट कऽ दैत अछि।”[34] सही काज करबाक लेल होश मे आउ आ पाप कयनाइ छोड़ि दिअ। अहाँ सभ मे किछु लोक परमेश्‍वरक सम्‍बन्‍ध मे एकदम अनजान छी। ई अहाँ सभक लेल लाजक बात होयबाक चाही।

1 कोरिन्‍थी 15:33
धोखा नहि खाउ—“अधलाह संगति नीक चरित्र केँ भ्रष्‍ट कऽ दैत अछि।”

लूका 11:13
जखन अहाँ सभ पापी होइतो अपना बच्‍चा सभ केँ नीक वस्‍तु सभ देनाइ जनैत छी, तँ अहाँ सभ सँ बढ़ि कऽ अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि, से मँगनिहार सभ केँ अपन पवित्र आत्‍मा किएक नहि देथिन?”

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT