A A A A A

जिंदगी: [ध्यान केंद्रित]


2 कोरिन्‍थी 3:18
मुदा अपना सभक मुँह पर परदा नहि अछि आ जहिना अएना मे देखल जाइत अछि, तहिना अपना सभ प्रभुक महिमाक प्रतिबिम्‍ब देखैत छी। संगहि अपना सभ क्रमशः बढ़ैत मात्रा मे ओहि महिमामय रूप मे बदलल जाइत छी। ई रूपान्‍तर प्रभुक, अर्थात्‌ पवित्र आत्‍माक, काज छनि।

फिलिप्‍पी 4:8
अन्‍त मे, यौ भाइ लोकनि, जे बात सभ सत्‍य अछि, जे बात सभ प्रतिष्‍ठित अछि, जे बात सभ न्‍यायसंगत अछि, जे बात सभ पवित्र अछि, जे बात सभ प्रेम करबाक योग्‍य अछि, जे बात सभ आदरयोग्‍य अछि, अर्थात्, जे कोनो बात उत्तम वा प्रशंसनीय अछि ताही पर ध्‍यान लगौने रहू।

रोमी 12:2
अहाँ सभ एहि संसारक अनुरूप आचरण नहि करू, बल्‍कि परमेश्‍वर केँ अहाँक सोच-विचार केँ नव बनाबऽ दिऔन आ तहिना अहाँ केँ पूर्ण रूप सँ बदलि देबऽ दिऔन। एहि तरहेँ परमेश्‍वर अहाँ सभ सँ की चाहैत छथि, अर्थात् हुनका नजरि मे की नीक अछि, की ग्रहणयोग्‍य अछि आ की सर्वोत्तम अछि, तकरा अहाँ सभ अनुभव सँ जानि जायब।

1 पत्रुस 1:13
एहि लेल अहाँ सभ अपन बुद्धि केँ काज करबाक लेल तैयार करू। अपना पर नियन्‍त्रण राखू आ पूर्ण रूप सँ अपन आशा ओहि कृपा पर रखने रहू जे यीशु मसीह केँ फेर अयला पर अहाँ सभ पर कयल जायत।

रोमी 12:10
एक-दोसर सँ भाय-बहिन वला प्रेम राखि एक-दोसराक लेल समर्पित रहू। आपस मे एक-दोसर केँ आदरक संग अपना सँ श्रेष्‍ठ मानू।

कुलुस्‍सी 3:2
अपन ध्‍यान पृथ्‍वी परक वस्‍तु सभ पर नहि, बल्‍कि स्‍वर्गीय वस्‍तु सभ पर लगाउ,

इब्रानी 3:1
तेँ यौ पवित्र भाइ लोकनि जे सभ परमेश्‍वरक बजाओल लोक मे सम्‍मिलित छी, अहाँ सभ अपन ध्‍यान यीशु पर केन्‍द्रित करू, जिनका अपना सभ परमेश्‍वरक विशिष्‍ट दूत आ अपना सभक महापुरोहितक रूप मे खुलि कऽ स्‍वीकार करैत छी।

फिलिप्‍पी 4:13
जे हमरा बल दैत छथि हम तिनका द्वारा सभ किछु कऽ सकैत छी।

इब्रानी 12:1-2
[1] तेँ जखन गवाही देबऽ वला सभक एहन विशाल समूह सँ अपना सभ घेरल छी तँ अबैत जाउ, अपना सभ प्रत्‍येक विघ्‍न-वाधा उतारि कऽ फेकि दी, आ पापो, जे अपना सभ केँ तुरत्ते ओझरबैत अछि, आ ई दौड़, जाहि मे अपना सभ केँ दौड़बाक अछि, नहि छोड़ि धैर्यपूर्बक अन्‍त तक दौड़ी।[2] अपन नजरि अपना सभक विश्‍वास केँ शुरुआत आ सिद्ध कयनिहार यीशु पर राखी जे सामने राखल आनन्‍दक कारणेँ क्रूसक कलंक पर ध्‍यान नहि दऽ तकर दुःख सहलनि आ आब परमेश्‍वरक सिंहासनक दहिना कात बैसल छथि।

1 पत्रुस 5:8
अहाँ सभ अपना पर काबू राखू आ सचेत रहू। अहाँ सभक दुश्‍मन शैतान गर्जैत सिंह जकाँ घुमैत-फिरैत एहि ताक मे रहैत अछि जे ककरा फाड़ि कऽ खा ली।

रोमी 12:16
आपस मे मेल-मिलापक भावना राखू। घमण्‍डी नहि बनू, बल्‍कि दीन-हीन सभक संगति करू। अपना केँ बड़का बुद्धिआर नहि बुझऽ लागू।

2 कोरिन्‍थी 10:4-5
[4] किएक तँ हमरा सभक युद्धक हथियार सांसारिक नहि, बल्‍कि परमेश्‍वरक शक्‍तिशाली हथियार अछि जाहि द्वारा शक्‍ति-केन्‍द्र सभ केँ ध्‍वस्‍त कयल जाइत अछि।[5] हम सभ परमेश्‍वर सम्‍बन्‍धी सत्‍य ज्ञानक विरोध मे ठाढ़ होमऽ वला कल्‍पना सभ और प्रत्‍येक कुतर्क केँ नष्‍ट करैत छी आ प्रत्‍येक विचार केँ बन्‍दी बना कऽ मसीहक अधीनता मे लबैत छी।

फिलिप्‍पी 3:12-14
[12] हम ई नहि कहैत छी जे एखन तक हमरा एहि लक्ष्‍यक प्राप्‍ति भऽ गेल अछि वा हमरा सिद्धी भऽ चुकल अछि। मुदा हम आगाँ बढ़ैत जाइत रहैत छी जाहि सँ हम ओहि लक्ष्‍य केँ प्राप्‍त करी जाहि लक्ष्‍यक लेल मसीह यीशु हमरा अपन बना लेने छथि।[13] यौ भाइ लोकनि, हम नहि मानैत छी जे एखन तक हम ओहि लक्ष्‍य धरि पहुँचि गेल छी। मुदा हम एकटा काज करैत छी—जे पाछाँ अछि तकरा बिसरि कऽ आगाँ वला बातक लेल प्रयत्‍नशील रहैत छी।[14] हम ओहि लक्ष्‍यक दिस बढ़ैत जा रहल छी जाहि सँ हम ओ पुरस्‍कार प्राप्‍त कऽ सकी जकरा लेल परमेश्‍वर मसीह यीशु द्वारा हमरा स्‍वर्ग दिस बजौने छथि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT