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जिंदगी: [प्यार ढूंढना]

यूहन्‍ना 3:16
“हँ, परमेश्‍वर संसार सँ एहन प्रेम कयलनि जे ओ अपन एकमात्र बेटा केँ दऽ देलनि, जाहि सँ जे केओ हुनका पर विश्‍वास करैत अछि से नाश नहि होअय, बल्‍कि अनन्‍त जीवन पाबय।

1 यूहन्‍ना 4:8
जे प्रेम नहि करैत अछि, से परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हैत अछि, किएक तँ परमेश्‍वर प्रेम छथि।

यूहन्‍ना 15:3
अहाँ सभ तँ हमर ओहि वचन द्वारा, जे हम अहाँ सभ केँ कहने छी, शुद्ध छीहे।

1 कोरिन्‍थी 13:13
आब विश्‍वास, आशा आ प्रेम, ई तीनू टिकैत अछि मुदा सभ सँ श्रेष्‍ठ अछि प्रेम।

1 पत्रुस 4:8
सभ सँ पैघ बात ई जे अहाँ सभ आपस मे अटूट प्रेम राखू, किएक तँ प्रेम असंख्‍य पाप केँ झाँपि दैत अछि।

1 यूहन्‍ना 4:7
प्रिय मित्र सभ, अपना सभ एक-दोसर सँ प्रेम करी, किएक तँ प्रेम परमेश्‍वर सँ उत्‍पन्‍न होइत अछि। जे प्रेम करैत अछि, से परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि और परमेश्‍वर केँ चिन्‍हैत अछि।

1 कोरिन्‍थी 13:4-8
[4] प्रेम सहनशील आ दयालु होइत अछि। प्रेम डाह नहि करैत अछि, प्रेम अपन बड़ाइ नहि करैत अछि आ ने घमण्‍ड करैत अछि।[5] प्रेम अभद्र व्‍यवहार नहि करैत अछि, ओ स्‍वार्थी नहि अछि, जल्‍दी सँ खौंझाइत नहि अछि आ ने अपराधक हिसाब रखैत अछि।[6] प्रेम अधर्म सँ प्रसन्‍न नहि होइत अछि, बल्‍कि सत्‍य सँ आनन्‍दित होइत अछि।[7] प्रेम सभ बात सहन करैत अछि, सभ स्‍थिति मे विश्‍वास रखैत अछि, सभ स्‍थिति मे आशा रखैत अछि आ सभ स्‍थिति मे लगनशील रहैत अछि।[8] प्रेमक अन्‍त कहियो नहि होयत। परमेश्‍वरक दिस सँ सम्‍बाद पौनाइ समाप्‍त भऽ जायत, अनजान भाषा सभ बजनाइ बन्‍द भऽ जायत आ ज्ञान लुप्‍त भऽ जायत।

इफिसी 5:25
यौ पति लोकनि, ओहि तरहेँ अपना स्‍त्री सँ प्रेम करू जाहि तरहेँ मसीह मण्‍डली सँ कयलनि और ओकरा लेल अपना केँ अर्पित कऽ देलनि,

1 यूहन्‍ना 4:19
अपना सभ एहि लेल प्रेम करैत छी जे ओ पहिने अपना सभ सँ प्रेम कयलनि।

रोमी 5:8
मुदा परमेश्‍वर अपना प्रेम केँ अपना सभक प्रति एहि तरहेँ देखबैत छथि जे, जखन अपना सभ पापिए छलहुँ तखने मसीह अपना सभक लेल मरलाह।

यूहन्‍ना 14:15
“जँ हमरा सँ प्रेम करैत छी तँ हमर आज्ञाक पालन करब।

1 यूहन्‍ना 4:10
प्रेमक अर्थ ई नहि, जे अपना सभ परमेश्‍वर सँ प्रेम कयलियनि, बल्‍कि ई, जे ओ अपना सभ सँ प्रेम कयलनि और अपन पुत्र केँ अपना सभक पापक प्रायश्‍चित्त करऽ वला बलि बना कऽ पठा देलनि।

कुलुस्‍सी 3:14
आ सभ सँ पैघ बात ई अछि जे आपस मे प्रेम भाव बनौने रहू। प्रेम सभ केँ एकता मे बान्‍हि कऽ पूर्णता धरि पहुँचा दैत अछि।

1 कोरिन्‍थी 16:14
जे किछु करी से प्रेम सँ करू।

2 तिमुथियुस 2:22
जवानीक अधलाह लालसा सभ सँ दूर भागू और ओहन लोक जे सभ निष्‍कपट हृदय सँ प्रभु सँ प्रार्थना करैत छथि, तिनका सभक संग अहूँ धार्मिकता, विश्‍वास, प्रेम आ शान्‍तिक जीवन बितौनाइ अपन लक्ष्‍य बनाउ।

1 यूहन्‍ना 4:16
परमेश्‍वरक प्रेम जे अपना सभक प्रति छनि, तकरा अपना सभ जानि गेल छी और ताही पर भरोसा करैत छी। परमेश्‍वर प्रेम छथि। जे केओ प्रेम मे रहैत अछि से परमेश्‍वर मे रहैत अछि, और परमेश्‍वर ओकरा मे।

यूहन्‍ना 17:24
“हे पिता, हम चाहैत छी जे, जिनका सभ केँ अहाँ हमरा देने छी, से सभ हमरा संग ओतऽ रहथि जतऽ हम रहब और हम चाहैत छी जे ओ सभ हमर ओहि महिमा केँ देखथि जे अहाँ हमरा एहि लेल देने छी जे अहाँ संसारक सृष्‍टि सँ पहिनहि हमरा सँ प्रेम कयलहुँ।

यूहन्‍ना 13:35
एहि सँ सभ लोक जानत जे अहाँ सभ हमर शिष्‍य छी, अर्थात्‌ अहाँ सभ जँ एक-दोसर सँ प्रेम करब, ताहि सँ।”

मत्ती 5:43-48
[43] “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘अपना पड़ोसी सँ प्रेम करह आ अपन शत्रु सँ दुश्‍मनी राखह।’[44] मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, अपना शत्रु सभ सँ प्रेम करू आ अहाँ केँ जे सभ सतबैत अछि तकरा सभक लेल प्रभु सँ प्रार्थना करू।[45] तखने अहाँ स्‍वर्ग मे रहऽ वला अपन पिताक सन्‍तान बनब। कारण, ओ दुष्‍ट आ सज्‍जन दूनू पर अपन सूर्यक प्रकाश दैत छथि, आ धर्मी और अधर्मी दूनू पर वर्षा करबैत छथि।[46] “जँ अहाँ मात्र ओकरे सभ सँ प्रेम करी जे अहाँ सँ प्रेम करैत अछि तँ अहाँ केँ परमेश्‍वर सँ की इनाम भेटत? की कर असूल कयनिहार ठकहारो सभ एहिना नहि करैत अछि?[47] आ जँ अहाँ मात्र अपने लोक सभक कुशल-मङलक पुछारी करैत छी तँ अहाँ कोन बड़का काज करैत छी? की परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हऽ वला जातिक लोक सभ सेहो एहिना नहि करैत अछि?[48] तेँ अहाँ सभ सिद्ध बनू जेना स्‍वर्ग मे रहऽ वला अहाँ सभक पिता परमेश्‍वर सिद्ध छथि।

1 कोरिन्‍थी 13:1-3
[1] जँ हम मनुष्‍य सभक आ स्‍वर्गदूत सभक भाषा सभ बाजी मुदा हम प्रेम नहि करी तँ हम टनटन करऽ वला घण्‍टा वा झनझन करऽ वला झालि मात्र छी।[2] जँ परमेश्‍वर सँ सम्‍बाद पयबाक और सुनयबाक वरदान हमरा भेटल होअय, जँ सभ रहस्‍य आ समस्‍त ज्ञान केँ जानि लेने होइ, आ हमर विश्‍वास एतेक परिपूर्ण होअय जे पहाड़ सभ केँ सेहो ओकर स्‍थान सँ हटा सकी, मुदा हम प्रेम नहि करी तँ हम किछु नहि छी।[3] जँ हम अपन सम्‍पूर्ण सम्‍पत्ति बाँटि कऽ दान कऽ दी आ अपन शरीर भस्‍म होयबाक लेल अर्पित करी, मुदा हम प्रेम नहि करी तँ हमरा कोनो लाभ नहि अछि।

रोमी 13:8
एक-दोसराक लेल प्रेमक ऋण केँ छोड़ि अन्‍य कोनो बात मे ककरो ऋणी बनल नहि रहू, किएक तँ जे अपन पड़ोसी सँ प्रेम करैत अछि से पूरा धर्म-नियमक पालन कयने अछि।

1 यूहन्‍ना 4:7-8
[7] प्रिय मित्र सभ, अपना सभ एक-दोसर सँ प्रेम करी, किएक तँ प्रेम परमेश्‍वर सँ उत्‍पन्‍न होइत अछि। जे प्रेम करैत अछि, से परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि और परमेश्‍वर केँ चिन्‍हैत अछि।[8] जे प्रेम नहि करैत अछि, से परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हैत अछि, किएक तँ परमेश्‍वर प्रेम छथि।

1 यूहन्‍ना 3:1
सोचू! पिता अपना सभ सँ कतेकटा प्रेम कयने छथि, जे अपना सभ परमेश्‍वरक सन्‍तान कहाबी! और वास्‍तव मे सैह छीहो। संसार अपना सभ केँ नहि चिन्‍हैत अछि, से एहि कारणेँ जे हुनको नहि चिन्‍हलकनि।

लूका 6:35
नहि! अपना दुश्‍मनो सभ सँ प्रेम करू! ओकरा सभक संग भलाइ करू, और फेर फिरता पयबाक आशा नहि राखि कऽ पैंच-उधार दिऔक। अहाँक इनाम पैघ होयत, और परम-परमेश्‍वरक सन्‍तान ठहरब। कारण, जे सभ धन्‍यवाद देबाक भावना नहि रखैत अछि आ दुष्‍ट अछि, तकरो सभ पर ओ कृपा करैत छथिन।

रोमी 12:10
एक-दोसर सँ भाय-बहिन वला प्रेम राखि एक-दोसराक लेल समर्पित रहू। आपस मे एक-दोसर केँ आदरक संग अपना सँ श्रेष्‍ठ मानू।

मत्ती 6:24
“कोनो खबास दूटा मालिकक सेवा एक संग नहि कऽ सकैत अछि। कारण, ओ एकटा सँ घृणा करत आ दोसर सँ प्रेम, अथवा पहिल केँ खूब मानत और दोसर केँ तुच्‍छ बुझत। अहाँ सभ परमेश्‍वर आ धन-सम्‍पत्ति दूनूक सेवा नहि कऽ सकैत छी।

रोमी 13:8-10
[8] एक-दोसराक लेल प्रेमक ऋण केँ छोड़ि अन्‍य कोनो बात मे ककरो ऋणी बनल नहि रहू, किएक तँ जे अपन पड़ोसी सँ प्रेम करैत अछि से पूरा धर्म-नियमक पालन कयने अछि।[9] कारण, “परस्‍त्रीगमन नहि करह, हत्‍या नहि करह, चोरी नहि करह, लोभ नहि करह,” आ एकर बादो आओर जे कोनो आज्ञा सभ अछि, तकर सभक सारांश एहि कथन मे पाओल जाइत अछि जे, “अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करह।”[10] प्रेम पड़ोसीक संग अन्‍याय नहि करैत अछि, तेँ प्रेम कयनाइ भेल धर्म-नियमक सम्‍पूर्ण बातक पालन कयनाइ।

1 कोरिन्‍थी 13:2
जँ परमेश्‍वर सँ सम्‍बाद पयबाक और सुनयबाक वरदान हमरा भेटल होअय, जँ सभ रहस्‍य आ समस्‍त ज्ञान केँ जानि लेने होइ, आ हमर विश्‍वास एतेक परिपूर्ण होअय जे पहाड़ सभ केँ सेहो ओकर स्‍थान सँ हटा सकी, मुदा हम प्रेम नहि करी तँ हम किछु नहि छी।

2 तिमुथियुस 3:16
सम्‍पूर्ण धर्मशास्‍त्र परमेश्‍वरक प्रेरणा द्वारा रचल गेल अछि, आ सत्‍य सिखयबाक लेल, गलत शिक्षा देखार करबाक लेल, जीवन केँ सुधारबाक लेल आ धार्मिकताक अनुसार जीवन कोना बिताओल जाय ताहि बातक शिक्षा देबाक लेल उपयोगी अछि,

मत्ती 6:33
बल्‍कि सभ सँ पहिने परमेश्‍वरक राज्‍य पर, आ परमेश्‍वर जाहि प्रकारक धार्मिकता अहाँ सँ चाहैत छथि, ताहि पर मोन लगाउ, तँ ई सभ वस्‍तु सेहो अहाँ केँ देल जायत।

2 कोरिन्‍थी 6:14
अहाँ सभ मसीह पर विश्‍वास नहि कयनिहार लोक सभक संग बेमेल जुआ मे नहि जोताउ। अधर्म सँ धार्मिकताक कोन मेल? अन्‍हार सँ इजोतक कोन मेल?

मत्ती 19:5
और कहलनि, ‘एहि कारणेँ पुरुष अपन माय-बाबू केँ छोड़ि अपन स्‍त्रीक संग रहत, आ दूनू एक शरीर भऽ जायत।’?

रोमी 4:22
एही विश्‍वासक कारणेँ ओ धार्मिक मानल गेलाह।

प्रकाशित-वाक्‍य 22:19
और जँ केओ भविष्‍यवाणीक एहि पुस्‍तकक बात सभ मे सँ कोनो बात हटा देत, तँ परमेश्‍वर जीवनक गाछ आ पवित्र नगर, जाहि सभक वर्णन एहि पुस्‍तक मे कयल गेल, ताहि मे सँ ओकर हिस्‍सा हटा देथिन।”

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT