A A A A A

जिंदगी: [आचार विचार]


मसीह-दूत 2:38
पत्रुस उत्तर देलथिन, “अहाँ सभ गोटे अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू और यीशु मसीहक नाम सँ बपतिस्‍मा लिअ, जाहि सँ परमेश्‍वर अहाँ सभक पाप केँ क्षमा करथि आ अहाँ सभ केँ पवित्र आत्‍मा प्रदान करथि।

कुलुस्‍सी 3:17-23
[17] अहाँ सभ जे किछु कही वा करी, से सभ प्रभु यीशुक नाम सँ करू आ हुनका द्वारा परमेश्‍वर पिता केँ धन्‍यवाद दैत रहू।[18] हे स्‍त्री सभ, जहिना प्रभु केँ मानऽ वाली सभक लेल उचित अछि, तहिना अपन-अपन पतिक अधीन रहू।[19] हे पति लोकनि, अपन-अपन स्‍त्री सँ प्रेम करू आ हुनका संग कठोर व्‍यवहार नहि करू।[20] हौ धिआ-पुता सभ, सभ बात मे अपन माय-बाबूक आज्ञा मानह, किएक तँ एहि सँ प्रभु प्रसन्‍न होइत छथि।[21] यौ पिता लोकनि, अपना बच्‍चा सभ केँ तंग नहि करिऔक; एना नहि होअय जे ओकरा सभक साहस टुटि जाइक।[22] यौ दास सभ, एहि संसार मे जे अहाँ सभक मालिक छथि, सभ बात मे तिनकर आज्ञा मानू। मालिक केँ खुश करबाक उद्देश्‍य सँ, जखन ओ देखिते छथि तखने मात्र नहि, बल्‍कि शुद्ध मोन सँ और प्रभु पर श्रद्धा राखि कऽ आज्ञा मानू।[23] अहाँ सभ जे किछु करी, मोन लगा कऽ करू, ई मानि कऽ जे मनुष्‍यक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक लेल कऽ रहल छी,

यूहन्‍ना 16:13
सत्‍यक आत्‍मा जखन औताह तखन ओ अहाँ सभ केँ पूर्ण सत्‍य बुझौताह, कारण ओ अपना तरफ सँ नहि बजताह, बल्‍कि जे ओ सुनताह सैह बजताह, और भविष्‍य मे होमऽ वला बात अहाँ सभ केँ कहि देताह।

लूका 6:31
जेहन व्‍यवहार अहाँ चाहैत छी जे लोक अहाँक संग करय, तेहने व्‍यवहार अहूँ लोकक संग करू।

लूका 16:10
“जे छोट बात सभ मे विश्‍वासपात्र अछि, से पैघो बात सभ मे विश्‍वासपात्र रहत। जे छोट बात मे बइमान अछि, से पैघो बात मे बइमान रहत।

रोमी 1:26
यैह कारण अछि जे परमेश्‍वर ओकरा सभ केँ नीच वासना सभ मे छोड़ि देलथिन। ओकरा सभक स्‍त्रिओ स्‍वभाविक सम्‍बन्‍धक स्‍थान पर अस्‍वभाविक सम्‍बन्‍ध राखऽ लागलि।

रोमी 2:1
तेँ यौ दोष लगौनिहार, अहाँ जे केओ होइ, निरुत्तर छी, किएक तँ जाहि बात मे अहाँ अनका पर दोष लगबैत छी ताही मे अहाँ अपने केँ दोषी ठहरबैत छी, कारण, जे दोष अहाँ अनका पर लगबैत छी सैह काज अपनो करैत छी।

मत्ती 7:12-21
[12] “जेहन व्‍यवहार अहाँ चाहैत छी जे लोक अहाँक संग करय, तेहने व्‍यवहार अहूँ लोकक संग करू, किएक तँ धर्म-नियमक आ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक शिक्षाक निचोड़ यैह अछि।[13] “छोट द्वारि सँ प्रवेश करू, कारण नमहर अछि ओ द्वारि आ चौरगर अछि ओ बाट जे विनाश मे लऽ जाइत अछि, और बहुतो लोक ओहि द्वारि सँ प्रवेश करैत अछि।[14] मुदा छोट अछि ओ द्वारि आ कम चौड़ा अछि ओ बाट जे जीवन मे लऽ जाइत अछि। और थोड़बे लोक ओहि द्वारि केँ ताकि पबैत अछि।[15] “ओहन लोक सँ सावधान रहू जे झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहैत अछि। ओ सभ अहाँ सभक बीच भेँड़ाक वेष मे अबैत अछि, मुदा भीतर मे ओ सभ चीरि-फाड़ि देबऽ वला जंगली जानबर अछि।[16] ओकर सभक काज सभ सँ अहाँ सभ ओकरा चिन्‍हि जायब। की काँटक गाछ सँ अंगूर तोड़ल जा सकैत अछि, वा कबछुआक लत्ती सँ अंजीर-फल?[17] एहि तरहेँ प्रत्‍येक नीक गाछ मे नीक फल आ खराब गाछ मे खराब फल फड़ैत अछि।[18] ई तँ भइए नहि सकैत अछि जे नीक गाछ मे खराब फल फड़ैक आ खराब गाछ मे नीक फल।[19] जे गाछ नीक फल नहि दैत अछि से काटि कऽ आगि मे फेकल जाइत अछि।[20] तहिना एहन लोक सभ केँ अहाँ सभ ओकर सभक काज सभ सँ चिन्‍हि जायब।[21] “ई बात नहि अछि जे, जतेक लोक हमरा ‘हे प्रभु, हे प्रभु’ कहैत अछि, ताहि मे सँ सभ केओ स्‍वर्गक राज्‍य मे प्रवेश करत, बल्‍कि मात्र वैह सभ प्रवेश करत जे सभ हमर पिता जे स्‍वर्ग मे छथि तिनकर इच्‍छानुरूप चलैत अछि।

यूहन्‍ना 13:34-35
[34] एक नव आज्ञा हम अहाँ सभ केँ दैत छी—एक-दोसर सँ प्रेम करू। जेना हम अहाँ सभ सँ प्रेम कयने छी तेना अहूँ सभ एक-दोसर सँ प्रेम करू।[35] एहि सँ सभ लोक जानत जे अहाँ सभ हमर शिष्‍य छी, अर्थात्‌ अहाँ सभ जँ एक-दोसर सँ प्रेम करब, ताहि सँ।”

2 तिमुथियुस 3:16-17
[16] सम्‍पूर्ण धर्मशास्‍त्र परमेश्‍वरक प्रेरणा द्वारा रचल गेल अछि, आ सत्‍य सिखयबाक लेल, गलत शिक्षा देखार करबाक लेल, जीवन केँ सुधारबाक लेल आ धार्मिकताक अनुसार जीवन कोना बिताओल जाय ताहि बातक शिक्षा देबाक लेल उपयोगी अछि,[17] जाहि सँ धर्मशास्‍त्रक प्रयोग द्वारा परमेश्‍वरक भक्‍त सुयोग्‍य भऽ हर प्रकारक नीक काज कुशलतापूर्बक कऽ सकय।

गलाती 5:19-21
[19] आब देखू, पापी स्‍वभावक काज सभ स्‍पष्‍ट अछि, जेना गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, अशुद्ध विचार-व्‍यवहार, निर्लज्‍जता,[20] मुरुतक पूजा, जादू-टोना, दुश्‍मनी, लड़ाइ-झगड़ा, ईर्ष्‍या, क्रोध, स्‍वार्थ, मनमोटाब, दलबन्‍दी,[21] द्वेष, मतवालापन आ भोग-विलास आ एहि प्रकारक आन बात सभ। हम अहाँ सभ केँ एहि विषय सभ मे चेतावनी दैत छी, जेना कि पहिनो दऽ चुकल छी जे, एहन काज करऽ वला लोक सभ परमेश्‍वरक राज्‍यक उत्तराधिकारी नहि होयत।

1 कोरिन्‍थी 6:9-11
[9] की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अधर्मी लोक परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत? अपना केँ धोखा नहि दिअ! अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखनिहार, मूर्तिक पूजा कयनिहार, परस्‍त्रीगमन कयनिहार, वेश्‍या सनक काज कयनिहार पुरुष, समलैंगिक सम्‍बन्‍ध रखनिहार लोक,[10] चोर, लोभी, पिअक्‍कड़, गारि पढ़निहार आ धोखेबाज सभ परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश करबाक अधिकारी नहि होयत।[11] आ से अहाँ सभ मे सँ किछु गोटे छलहुँ, मुदा अहाँ सभ आब प्रभु यीशु मसीहक नाम सँ आ अपना सभक परमेश्‍वरक आत्‍मा द्वारा धोअल गेलहुँ, पवित्र कयल गेलहुँ आ निर्दोष ठहराओल गेलहुँ।

रोमी 13:8-10
[8] एक-दोसराक लेल प्रेमक ऋण केँ छोड़ि अन्‍य कोनो बात मे ककरो ऋणी बनल नहि रहू, किएक तँ जे अपन पड़ोसी सँ प्रेम करैत अछि से पूरा धर्म-नियमक पालन कयने अछि।[9] कारण, “परस्‍त्रीगमन नहि करह, हत्‍या नहि करह, चोरी नहि करह, लोभ नहि करह,” आ एकर बादो आओर जे कोनो आज्ञा सभ अछि, तकर सभक सारांश एहि कथन मे पाओल जाइत अछि जे, “अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करह।”[10] प्रेम पड़ोसीक संग अन्‍याय नहि करैत अछि, तेँ प्रेम कयनाइ भेल धर्म-नियमक सम्‍पूर्ण बातक पालन कयनाइ।

याकूब 1:12-15
[12] धन्‍य अछि ओ मनुष्‍य जे आपत्ति-विपत्ति केँ धैर्यपूर्बक सामना करैत अछि, किएक तँ परीक्षा मे स्‍थिर रहला पर ओकरा ओ जीवन-मुकुट भेटतैक जे परमेश्‍वर अपना सँ प्रेम करऽ वला सभ केँ देबाक वचन देने छथि।[13] प्रलोभन मे पड़ल कोनो व्‍यक्‍ति ई नहि कहय जे, “परमेश्‍वर हमरा प्रलोभन मे राखि देने छथि,” कारण, परमेश्‍वर अधलाह बात सभ सँ ने तँ स्‍वयं प्रलोभन मे पड़ि सकैत छथि आ ने अनका ककरो प्रलोभन मे रखैत छथि,[14] बल्‍कि जे प्रलोभन मे पड़ैत अछि से अपने खराब अभिलाषा सँ खिचल आ फँसाओल जाइत अछि।[15] तखन अभिलाषाक गर्भ सँ पापक जन्‍म होइत अछि और पाप बढ़ि कऽ मृत्‍यु केँ उत्‍पन्‍न करैत अछि।

मरकुस 12:28-31
[28] एक धर्मशिक्षक ई वाद-विवाद सुनि कऽ देखलनि जे यीशु सदूकी सभ केँ बहुत नीक जबाब देने छथिन, तँ ओ यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन जे, “सभ सँ पैघ आज्ञा कोन अछि?”[29] यीशु उत्तर देलथिन जे, “सभ सँ पैघ आज्ञा यैह अछि—‘हे इस्राएल, सुनह, प्रभु, अपना सभक परमेश्‍वर, सैह एकमात्र प्रभु छथि।[30] तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ, अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ और अपन सम्‍पूर्ण शक्‍ति सँ प्रेम करह।’[31] और दोसर पैघ आज्ञा यैह अछि जे, ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ एहि सँ पैघ आरो कोनो आज्ञा नहि अछि।”

लूका 10:10-28
[10] मुदा जखन कोनो नगर मे जायब और ओहि ठामक लोक सभ अहाँ सभक स्‍वागत नहि करय तँ ओहि नगरक सड़क-ग‍ली सभ मे जा कऽ कहिऔक,[11] ‘अहाँ सभक नगरक गर्दो जे हमरा सभक पयर मे लागल अछि से अहाँ सभक विरोध मे झाड़ैत छी। तैयो ई बात जानि लिअ जे परमेश्‍वरक राज्‍य लग मे आबि गेल अछि।’[12] हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, न्‍यायक दिन मे ओहि नगर सँ सदोम नगरक दशा सहबा जोगरक रहतैक।[13] “है खुराजीन नगर, तोरा धिक्‍कार छौक! हे बेतसैदा नगर, तोरा धिक्‍कार छौक! जे चमत्‍कार सभ तोरा सभक बीच कयल गेल, से जँ सूर और सीदोन नगर सभ मे कयल गेल रहैत तँ ओहिठामक निवासी सभ बहुत पहिनहि चट्टी ओढ़ि और छाउर पर बैसि अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन कऽ लेने रहैत।[14] न्‍यायक दिन मे तोरा सभक अपेक्षा सूर आ सीदोन नगरक दशा सहबा जोगरक रहतैक।[15] और हे कफरनहूम नगर! की तोँ स्‍वर्ग तक उठाओल जयबेँ? नहि! तोँ तँ पाताल मे खसाओल जयबेँ।[16] “जे केओ अहाँ सभक बात सुनैत अछि से हमर बात सुनैत अछि। जे केओ अहाँ सभ केँ अस्‍वीकार करैत अछि, से हमरा अस्‍वीकार करैत अछि, और जे केओ हमरा अस्‍वीकार करैत अछि से तिनका अस्‍वीकार करैत छनि जे हमरा पठौलनि।”[17] ओ बहत्तरि लोक सभ जखन अपन प्रचारक काज कऽ कऽ अयलाह तँ बहुत खुशीपूर्बक बजलाह, “प्रभुजी, अहाँक नामक शक्‍ति सँ दुष्‍टात्‍मा सभ सेहो हमरा सभक बात मानलक।”[18] यीशु उत्तर देलथिन, “हम शैतान केँ बिजुली जकाँ आकाश सँ खसैत देखलहुँ।[19] हँ, हम अहाँ सभ केँ साँप और बीछ केँ पिचबाक सामर्थ्‍य और शत्रुक समस्‍त शक्‍ति पर अधिकार देने छी। कोनो वस्‍तु अहाँ सभक हानि नहि कऽ सकत।[20] तैयो, एहि लेल आनन्‍द नहि मनाउ जे दुष्‍टात्‍मा सभ अहाँ सभक बात मानैत अछि, बल्‍कि एही लेल आनन्‍दित होउ जे अहाँ सभक नाम स्‍वर्ग मे लिखायल अछि।”[21] तखने यीशु पवित्र आत्‍मा सँ अत्‍यन्‍त आनन्‍दित भऽ कऽ बजलाह, “हे पिता, स्‍वर्ग आ पृथ्‍वीक मालिक, हम अहाँ केँ एहि लेल धन्‍यवाद दैत छी जे अहाँ ई बात सभ बुद्धिमान और विद्वान सभ सँ नुका कऽ रखलहुँ मुदा बच्‍चा सभ पर प्रगट कयलहुँ। हँ पिता, कारण, अहाँ केँ एही बात सँ प्रसन्‍नता भेल।[22] “हमरा पिता द्वारा सभ किछु हमरा हाथ मे सौंपल गेल अछि। पुत्र के छथि, से पिता केँ छोड़ि आरो केओ नहि जनैत अछि, और पिता के छथि, सेहो केओ नहि जनैत अछि—मात्र पुत्र और जकरा सभ पर पुत्र हुनका प्रगट करऽ चाहय, से जनैत अछि।”[23] तखन ओ अपना शिष्‍य सभक दिस घूमि कऽ नहुएँ जोर सँ कहलथिन, “अहाँ सभ धन्‍य छी जे, जे बात सभ देखि रहल छी से देखि पौलहुँ।[24] कारण, हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे अपना समय मे एहन बहुत राजा और परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता लोकनि रहथि, जे सभ चाहलनि जे, जाहि बात सभ केँ अहाँ सभ देखि रहल छी, तकरा देखी, मुदा नहि देखलनि; और जे बात सभ अहाँ सभ सुनि रहल छी, से सुनी, मुदा नहि सुनलनि।”[25] एक बेर धर्म-नियमक एक पंडित उठि कऽ यीशु केँ जँचबाक लेल पुछलथिन, “गुरुजी, अनन्‍त जीवन प्राप्‍त करबाक लेल हम की करू?”[26] यीशु उत्तर देलथिन, “धर्म-नियम मे की लिखल अछि? ओहि मे की पढ़ैत छी?”[27] ओ कहलथिन, “ ‘तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ, अपन सम्‍पूर्ण शक्‍ति सँ और अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ प्रेम करह,’ और ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ ”[28] यीशु कहलथिन, “अहाँ ठीक कहलहुँ। एना करू तँ जीवन पायब।”

इफिसी 6:5-9
[5] यौ दास सभ! अहाँ सभ जहिना मसीहक सेवा करितहुँ तहिना निष्‍कपट मोन सँ भय आ आदरक संग तिनका सभक आज्ञा मानू जे सभ एहि संसार मे अहाँ सभक मालिक छथि।[6] मालिक केँ खुश करबाक उद्देश्‍य सँ, जखन ओ देखैत छथि तखने मात्र अपन काज नहि करू, बल्‍कि पूरा मोन सँ परमेश्‍वरक इच्‍छा पूरा करैत अपना केँ मसीहेक दास बुझि कऽ करू।[7] अपन सेवा-काज खुशी मोन सँ करू, ई बुझैत जे मनुष्‍यक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक लेल करैत छी,[8] कारण, अहाँ सभ तँ जनिते छी जे प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति, ओ चाहे दास होअय वा स्‍वतन्‍त्र, ओ जे कोनो नीक काज करत, तकर प्रतिफल प्रभु सँ पाओत।[9] आब अहाँ सभ, जे मालिक छी, अहूँ सभ उचिते व्‍यवहार अपन दास सभक संग करू। डेरौनाइ-धमकौनाइ छोड़ि दिअ, एहि बातक मोन रखैत जे स्‍वर्ग मे ओकरा सभक आ अहाँ सभक एके मालिक छथि, और ओ ककरो संग पक्षपात नहि करैत छथि।

1 कोरिन्‍थी 13:1-13
[1] जँ हम मनुष्‍य सभक आ स्‍वर्गदूत सभक भाषा सभ बाजी मुदा हम प्रेम नहि करी तँ हम टनटन करऽ वला घण्‍टा वा झनझन करऽ वला झालि मात्र छी।[2] जँ परमेश्‍वर सँ सम्‍बाद पयबाक और सुनयबाक वरदान हमरा भेटल होअय, जँ सभ रहस्‍य आ समस्‍त ज्ञान केँ जानि लेने होइ, आ हमर विश्‍वास एतेक परिपूर्ण होअय जे पहाड़ सभ केँ सेहो ओकर स्‍थान सँ हटा सकी, मुदा हम प्रेम नहि करी तँ हम किछु नहि छी।[3] जँ हम अपन सम्‍पूर्ण सम्‍पत्ति बाँटि कऽ दान कऽ दी आ अपन शरीर भस्‍म होयबाक लेल अर्पित करी, मुदा हम प्रेम नहि करी तँ हमरा कोनो लाभ नहि अछि।[4] प्रेम सहनशील आ दयालु होइत अछि। प्रेम डाह नहि करैत अछि, प्रेम अपन बड़ाइ नहि करैत अछि आ ने घमण्‍ड करैत अछि।[5] प्रेम अभद्र व्‍यवहार नहि करैत अछि, ओ स्‍वार्थी नहि अछि, जल्‍दी सँ खौंझाइत नहि अछि आ ने अपराधक हिसाब रखैत अछि।[6] प्रेम अधर्म सँ प्रसन्‍न नहि होइत अछि, बल्‍कि सत्‍य सँ आनन्‍दित होइत अछि।[7] प्रेम सभ बात सहन करैत अछि, सभ स्‍थिति मे विश्‍वास रखैत अछि, सभ स्‍थिति मे आशा रखैत अछि आ सभ स्‍थिति मे लगनशील रहैत अछि।[8] प्रेमक अन्‍त कहियो नहि होयत। परमेश्‍वरक दिस सँ सम्‍बाद पौनाइ समाप्‍त भऽ जायत, अनजान भाषा सभ बजनाइ बन्‍द भऽ जायत आ ज्ञान लुप्‍त भऽ जायत।[9] किएक तँ अपना सभक ज्ञान अपूर्ण अछि आ परमेश्‍वर सँ सम्‍बाद पौनाइ आ सुनौनाइ अपूर्ण अछि।[10] मुदा जखन पूर्णता आबि जायत तँ जे अपूर्ण अछि से लुप्‍त भऽ जायत।[11] जखन हम बच्‍चा छलहुँ तँ बच्‍चा जकाँ बजैत छलहुँ, बच्‍चा जकाँ सोचैत छलहुँ आ बच्‍चा जकाँ विचार करैत छलहुँ। मुदा पैघ भऽ गेला पर बचकानी बात सभ छोड़ि देलहुँ।[12] तहिना एखन अपना सभ केँ अएना मे धोनाह सन देखाइ दैत अछि, मुदा तखन प्रत्‍यक्ष देखब। एखन हमर ज्ञान अपूर्ण अछि, मुदा तखन ओही तरहेँ पूर्ण रूप सँ जानब जाहि तरहेँ परमेश्‍वर पूर्ण रूप सँ हमरा एखनो जनैत छथि।[13] आब विश्‍वास, आशा आ प्रेम, ई तीनू टिकैत अछि मुदा सभ सँ श्रेष्‍ठ अछि प्रेम।

रोमी 6:1-23
[1] तखन की, अपना सभ आओर पाप करैत रही जाहि सँ परमेश्‍वर आओर कृपा करथि?[2] किन्‍नहुँ नहि! अपना सभ जे पापक लेखेँ मरि गेल छी, आब पाप मे जीवन कोना व्‍यतीत करब?[3] की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे, अपना सभ गोटे जे बपतिस्‍मा लऽ कऽ मसीह यीशु मे सहभागी भेलहुँ से हुनका मृत्‍यु मे सेहो सहभागी भेलहुँ?[4] तेँ अपना सभ बपतिस्‍मा द्वारा हुनका मृत्‍यु मे सहभागी भऽ हुनका संग गाड़ल सेहो गेल छी जाहि सँ जहिना यीशु मसीह पिता परमेश्‍वरक महिमा द्वारा मुइल सभ मे सँ जिआओल गेलाह तहिना अपनो सभ एक नव जीवन जीबी।[5] जँ हुनका मृत्‍यु मे अपना सभ हुनका सँ संयुक्‍त भऽ गेल छी, तँ निश्‍चय हुनका जीबि उठनाइ मे सेहो अपना सभ हुनका सँ संयुक्‍त भऽ जायब।[6] अपना सभ केँ ई कखनो नहि बिसरबाक चाही जे अपना सभक पहिलुका स्‍वभाव हुनके संग क्रूस पर चढ़ा देल गेल, जाहि सँ अपना सभ मेहक पापपूर्ण “हम” मरि जाय आ अपना सभ फेर पापक दास नहि बनी,[7] किएक तँ मरल आदमी पर पाप केँ कोनो शक्‍ति नहि रहि जाइत छैक।[8] आब जँ अपना सभ मसीहक संग मरलहुँ तँ अपना सभ विश्‍वास करैत छी जे हुनका संग जीवित सेहो रहब।[9] किएक तँ अपना सभ जनैत छी जे मसीह मुइल सभ मे सँ जिआओल गेलाक बाद फेर कहियो नहि मरताह। आब मृत्‍यु केँ हुनका पर कोनो अधिकार नहि रहल।[10] ओ जखन मरलाह तँ पाप केँ पराजित करबाक लेल सदाक लेल एके बेर मरलाह, आ जीबि उठि कऽ ओ आब परमेश्‍वरेक लेल जीबैत छथि।[11] एही तरहेँ अहाँ सभ सेहो अपना केँ पापक लेखेँ मुइल आ मसीह यीशु मे परमेश्‍वरक लेल जीवित बुझू।[12] एहि लेल आब अहाँ सभ अपन नश्‍वर शरीर मे पाप केँ राज्‍य नहि करऽ दिअ जे ओकर अभिलाषा सभक अनुसार जीवन व्‍यतीत करी।[13] अहाँ सभ अपना शरीरक अंग सभ केँ दुष्‍टताक साधनक रूप मे पाप करबाक लेल समर्पित नहि करू। बल्‍कि मृत्‍यु सँ जीवन मे लाओल लोक सभ जकाँ अपना केँ परमेश्‍वर केँ समर्पित कऽ दिअ आ शरीरक अंग सभ केँ नीक काज करबाक साधनक रूप मे परमेश्‍वर केँ अर्पित करू।[14] तखन पाप अहाँ सभ पर राज्‍य नहि कऽ पाओत, किएक तँ अहाँ सभ धर्म-नियमक अधीन नहि, बल्‍कि परमेश्‍वरक कृपाक अधीन छी।[15] तखन की? की अपना सभ जँ धर्म-नियमक अधीन नहि, बल्‍कि परमेश्‍वरक कृपाक अधीन छी, तँ एहि कारणेँ पाप करी? किन्‍नहुँ नहि![16] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे जकर आज्ञा मानबाक लेल अहाँ सभ अपना केँ दासक रूप मे समर्पित करैत छी, अहाँ सभ तकरे दास छी?—ओ चाहे पापक होइ, जकर परिणाम मृत्‍यु अछि, चाहे आज्ञाकारिताक, जकर परिणाम धार्मिकता अछि।[17] परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद जे अहाँ सभ, जे सभ एक समय मे पापक दास छलहुँ, आब पूरा मोन सँ ओहि शिक्षाक आज्ञाकारी भऽ गेल छी जाहि मे अहाँ सभ सौंपल गेलहुँ।[18] अहाँ सभ पाप सँ मुक्‍त कयल गेलहुँ और आब धार्मिकताक दास भऽ गेल छी।[19] हम ई साधारण मानव जीवनक उदाहरण, अर्थात्‌ दास आ मालिकक उदाहरण, एहि लेल प्रयोग कऽ रहल छी जे अहाँ सभक मानवीय दुर्बलताक कारणेँ बात बुझनाइ अहाँ सभक लेल कठिन अछि। अहाँ सभ जहिना पहिने अपना शरीरक अंग केँ अशुद्धता आ अधर्मक अधीन कयने छलहुँ, जाहि सँ दुराचार बढ़ल, तहिना आब अपना शरीरक अंग केँ धार्मिकताक अधीन करू, जाहि सँ अहाँ सभ पवित्र बनी।[20] किएक तँ जखन अहाँ सभ पापक दास छलहुँ तँ धार्मिकताक नियन्‍त्रण सँ अहाँ सभ स्‍वतन्‍त्र छलहुँ।[21] ओहि समय मे अहाँ सभ केँ ओहि कर्म सँ की लाभ भेल? आब ओहि बात सँ लज्‍जित होइत छी, कारण, ओकर परिणाम मृत्‍यु अछि।[22] मुदा आब अहाँ सभ पाप सँ छुटकारा पाबि परमेश्‍वरक दास बनि गेल छी, जकर फल अछि पवित्रता आ जकर परिणाम अछि अनन्‍त जीवन।[23] किएक तँ पापक मजदूरी अछि मृत्‍यु, मुदा परमेश्‍वरक वरदान अछि अनन्‍त जीवन जे अपना सभक प्रभु, मसीह यीशुक माध्‍यम सँ प्राप्‍त होइत अछि।

मत्ती 19:1-30
[1] ई सभ बात जखन कहल भऽ गेलनि तँ यीशु गलील प्रदेश सँ विदा भऽ कऽ यरदन नदीक दोसर कात यहूदिया प्रदेश मे गेलाह।[2] लोकक बड़का भीड़ हुनका पाछाँ आबि गेलनि। यीशु ओहिठाम ओकरा सभक रोग-बिमारी सभ केँ ठीक कऽ देलनि।[3] ओहिठाम किछु फरिसी सभ यीशु लग अयलाह आ हुनका जँचबाक लेल पुछलथिन, “की धर्म-नियमक अनुसार पुरुष केँ केहनो कारण सँ अपना स्‍त्री केँ तलाक देनाइ उचित अछि?”[4] यीशु उत्तर देलथिन, “की अहाँ सभ नहि पढ़ने छी जे, सृष्‍टि कयनिहार शुरुए सँ मनुष्‍य केँ ‘पुरुष आ स्‍त्री बनौलनि’,[5] और कहलनि, ‘एहि कारणेँ पुरुष अपन माय-बाबू केँ छोड़ि अपन स्‍त्रीक संग रहत, आ दूनू एक शरीर भऽ जायत।’?[6] एहि तरहेँ ओ सभ आब दू नहि अछि, एके भऽ गेल। तेँ जकरा परमेश्‍वर जोड़ि देलथिन, तकरा मनुष्‍य अलग नहि करओ।”[7] फरिसी सभ पुछलथिन, “तखन तलाकनामा दऽ कऽ तलाक देबाक आज्ञा मूसा किएक देलनि?”[8] यीशु कहलथिन, “अहाँ सभक मोनक कठोरताक कारणेँ मूसा अहाँ सभ केँ स्‍त्री केँ तलाक देबाक अनुमति देलनि, मुदा शुरू सँ एहन नहि छल।[9] हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जे केओ एहि कारण केँ छोड़ि जे ओकर स्‍त्री दोसराक संग गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध रखने अछि, कोनो आन कारण सँ अपना स्‍त्री केँ तलाक दऽ कऽ दोसर सँ विवाह करैत अछि, से परस्‍त्रीगमन करैत अछि।”[10] यीशुक शिष्‍य सभ हुनका कहलथिन, “जँ स्‍त्री-पुरुषक सम्‍बन्‍ध एहन अछि, तँ विवाह नहिए कयनाइ नीक बात।”[11] यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “सभ केओ एहि बात केँ स्‍वीकार नहि कऽ सकैत अछि, मात्र ओ सभ जकरा एहि बातक लेल वरदान भेटल छैक।[12] किएक तँ किछु लोक मे जन्‍मे सँ विवाह करबाक योग्‍यता नहि अछि, किछु लोक केँ दोसर मनुष्‍य अयोग्‍य बनबैत अछि, और किछु लोक एहनो अछि जे स्‍वर्गक राज्‍यक लेल विवाह कयनाइ त्‍यागि देने अछि। जे केओ एहि बात केँ स्‍वीकार कऽ सकैत अछि से एकरा स्‍वीकार करओ।”[13] तकरबाद किछु गोटे बच्‍चा सभ केँ यीशु लग अनलकनि जाहि सँ ओ ओकरा सभ पर हाथ राखि कऽ ओकरा सभक लेल प्रार्थना कऽ देथिन, मुदा हुनकर शिष्‍य सभ ओकरा सभ केँ डाँटि देलथिन।[14] यीशु कहलथिन, “बच्‍चा सभ केँ हमरा लग आबऽ दिऔक, ओकरा सभ केँ नहि रोकिऔक, किएक तँ स्‍वर्गक राज्‍य एहने सभक अछि।”[15] यीशु ओहि बच्‍चा सभक माथ पर हाथ राखि कऽ आशीर्वाद देलथिन आ ओतऽ सँ विदा भऽ गेलाह।[16] यीशु लग एक युवक अयलनि आ कहलकनि, “यौ गुरुजी, हम कोन उत्तम काज करू, जाहि सँ हमरा अनन्‍त जीवन भेटत?”[17] यीशु कहलथिन, “अहाँ हमरा सँ उत्तमक विषय मे किएक पुछैत छी? उत्तम तँ मात्र एकेटा छथि। जँ अहाँ अनन्‍त जीवन मे प्रवेश करऽ चाहैत छी तँ परमेश्‍वरक आज्ञा सभक पालन करू।”[18] ओ पुछलकनि, “कोन आज्ञा सभ?” एहि पर यीशु कहलथिन, “ ‘हत्‍या नहि करह, परस्‍त्रीगमन नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह,[19] अपन माय-बाबूक आदर करह’ आ ‘अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ ”[20] ओ युवक उत्तर देलकनि, “एहि सभ आज्ञाक पालन तँ हम कऽ रहल छी, तखन फेर हमरा मे कोन बातक कमी रहि गेल?”[21] यीशु ओकरा कहलथिन, “अहाँ जँ पूर्ण सिद्ध बनऽ चाहैत छी, तँ अपन धन-सम्‍पत्ति बेचि कऽ ओकरा गरीब सभ मे बाँटि दिअ; अहाँ केँ स्‍वर्ग मे धन भेटत। तकरबाद आउ आ हमरा पाछाँ चलू।”[22] ई बात सुनि युवक उदास भऽ ओतऽ सँ चल गेल, कारण, ओकरा बहुत धन-सम्‍पत्ति छलैक।[23] एहि पर यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, धनिक सभक लेल स्‍वर्गक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ कठिन अछि।[24] हम अहाँ सभ केँ फेर कहैत छी जे, धनिक केँ परमेश्‍वरक राज्‍य मे प्रवेश कयनाइ सँ ऊँट केँ सुइक भूर दऽ कऽ निकलनाइ आसान अछि।”[25] ई सुनि हुनकर शिष्‍य सभ अवाक भऽ कऽ कहलथिन, “तखन उद्धार ककर भऽ सकैत छैक?!”[26] यीशु हुनका सभक दिस एकटक देखैत कहलथिन, “मनुष्‍यक लेल तँ ई असम्‍भव अछि, मुदा परमेश्‍वरक लेल सभ किछु सम्‍भव अछि।”[27] एहि पर पत्रुस कहलथिन, “देखू, हम सभ तँ सभ किछु त्‍यागि कऽ अहाँक पाछाँ आयल छी। हमरा सभ केँ की भेटत?”[28] यीशु हुनका सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, नव सृष्‍टि मे, जहिया मनुष्‍य-पुत्र अपन महिमामय सिंहासन पर विराजमान होयत, तहिया अहूँ सभ, जे सभ हमरा पाछाँ आयल छी, बारहटा सिंहासन पर बैसब आ इस्राएलक बारहो कुलक न्‍याय करब।[29] जे केओ हमरा कारणेँ अपन घर, भाय, बहिन, माय-बाबू, बाल-बच्‍चा वा जमीन-जालक त्‍याग कयने अछि, से तकर सय गुना पाओत और अनन्‍त जीवनक अधिकारी होयत।[30] मुदा बहुतो लोक जे एखन आगाँ अछि से पाछाँ भऽ जायत, आ जे एखन पाछाँ अछि से आगाँ भऽ जायत।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT