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अच्छा चरित्र : [आत्म - संयम]


1 कोरिन्‍थी 9:25
खेल प्रतियोगिता मे भाग लेबऽ वला खेलाड़ी सभ प्रत्‍येक बातक संयम रखैत अछि। ओ सभ ओहन जय-माला पयबाक लेल ई सभ करैत अछि जे टिकत नहि, मुदा अपना सभ अविनाशी मुकुट पयबाक लेल एना करैत छी।

1 कोरिन्‍थी 10:13
अहाँ सभ कहियो कोनो एहन परीक्षा मे नहि पड़लहुँ जे मनुष्‍य सभ केँ नहि होइत रहैत अछि। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि। ओ अहाँ सभ केँ एहन परीक्षा मे नहि पड़ऽ देताह जे अहाँ सभक सहनशक्‍ति सँ बाहर होअय। ओ परीक्षाक समय मे तकरा सहबाक साहस दैत अहाँ सभ केँ पार कऽ निकलबाक उपाय सेहो उपलब्‍ध करौताह।

1 थिसलुनिकी 5:6
एहि लेल अपना सभ आन लोक सभ जकाँ सुतल नहि रही, बल्‍कि सतर्क रही आ अपना केँ वश मे राखी।

2 तिमुथियुस 1:7
परमेश्‍वर तँ अपना सभ केँ डरपोकक आत्‍मा नहि, बल्‍कि सामर्थ्‍य, प्रेम आ आत्‍मसंयमक आत्‍मा प्रदान कयने छथि।

फिलिप्‍पी 4:13
जे हमरा बल दैत छथि हम तिनका द्वारा सभ किछु कऽ सकैत छी।

तीतुस 1:8
बल्‍कि ओ अतिथि-सत्‍कार कयनिहार, नीक बात सँ प्रेम कयनिहार, विचारवान, न्‍यायी, पवित्र चरित्रक आ संयमी होथि।

रोमी 12:1-2
[1] तेँ यौ भाइ लोकनि, हम अहाँ सभ सँ आग्रह करैत छी जे, परमेश्‍वरक अपार दयाक कारणेँ जे ओ अपना सभ पर कयने छथि, अहाँ सभ अपना शरीर केँ जीवित, पवित्र आ परमेश्‍वर द्वारा ग्रहणयोग्‍य बलिदानक रूप मे हुनका अर्पित करू। यैह भेल अहाँ सभक लेल परमेश्‍वरक असली आत्‍मिक आराधना कयनाइ।[2] अहाँ सभ एहि संसारक अनुरूप आचरण नहि करू, बल्‍कि परमेश्‍वर केँ अहाँक सोच-विचार केँ नव बनाबऽ दिऔन आ तहिना अहाँ केँ पूर्ण रूप सँ बदलि देबऽ दिऔन। एहि तरहेँ परमेश्‍वर अहाँ सभ सँ की चाहैत छथि, अर्थात् हुनका नजरि मे की नीक अछि, की ग्रहणयोग्‍य अछि आ की सर्वोत्तम अछि, तकरा अहाँ सभ अनुभव सँ जानि जायब।

फिलिप्‍पी 4:8-9
[8] अन्‍त मे, यौ भाइ लोकनि, जे बात सभ सत्‍य अछि, जे बात सभ प्रतिष्‍ठित अछि, जे बात सभ न्‍यायसंगत अछि, जे बात सभ पवित्र अछि, जे बात सभ प्रेम करबाक योग्‍य अछि, जे बात सभ आदरयोग्‍य अछि, अर्थात्, जे कोनो बात उत्तम वा प्रशंसनीय अछि ताही पर ध्‍यान लगौने रहू।[9] अहाँ सभ जे बात सभ हमरा सँ सिखलहुँ, पौलहुँ, सुनलहुँ आ हमरा मे देखलहुँ, तकरे अनुरूप आचरण करू। आ परमेश्‍वर जे शान्‍तिक स्रोत छथि, से अहाँ सभक संग रहताह।

याकूब 1:19-21
[19] यौ हमर प्रिय भाइ सभ, अहाँ सभ एहि बात केँ जानि राखू जे प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति केँ सुनबाक लेल तत्‍पर रहबाक चाही और बाजऽ आ क्रोध करऽ मे देरी करबाक चाही।[20] कारण, मनुष्‍यक क्रोध ओहि धार्मिक जीवन केँ उत्‍पन्‍न नहि करैत अछि जे परमेश्‍वर देखऽ चाहैत छथि।[21] तेँ सभ प्रकारक गन्‍दा आचार-व्‍यवहार आ सभ तरहक अधलाह बात केँ पूर्ण रूप मे अपना सँ दूर कऽ कऽ हृदय मे रोपल गेल परमेश्‍वरक ओहि वचन केँ नम्रतापूर्बक स्‍वीकार करू जे वचन अहाँ सभक उद्धार कऽ सकैत अछि।

1 पत्रुस 5:6-8
[6] एहि लेल परमेश्‍वरक सामर्थी हाथक नीचाँ नम्र बनू, जाहि सँ ओ अहाँ सभ केँ उचित समय पर सम्‍मानित करथि।[7] अपन सम्‍पूर्ण चिन्‍ता हुनका पर राखि दिअ, किएक तँ हुनका अहाँ सभक चिन्‍ता छनि।[8] अहाँ सभ अपना पर काबू राखू आ सचेत रहू। अहाँ सभक दुश्‍मन शैतान गर्जैत सिंह जकाँ घुमैत-फिरैत एहि ताक मे रहैत अछि जे ककरा फाड़ि कऽ खा ली।

1 कोरिन्‍थी 9:24-27
[24] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे दौड़ प्रतियोगिता मे सभ प्रतियोगी दौड़ैत अछि, मुदा पुरस्‍कार मात्र एके गोटे केँ भेटैत छैक? तेँ अहाँ सभ एहि तरहेँ दौड़ू जे पुरस्‍कार प्राप्‍त करी।[25] खेल प्रतियोगिता मे भाग लेबऽ वला खेलाड़ी सभ प्रत्‍येक बातक संयम रखैत अछि। ओ सभ ओहन जय-माला पयबाक लेल ई सभ करैत अछि जे टिकत नहि, मुदा अपना सभ अविनाशी मुकुट पयबाक लेल एना करैत छी।[26] एहि लेल हम एहन खेलाड़ी जकाँ छी जे सामने राखल लक्ष्‍य पर सँ नजरि नहि हटा कऽ दौड़ैत अछि। हम एहन मुक्‍केबाजीक खेलाड़ी जकाँ नहि छी जे हवे मे मुक्‍का मारैत अछि।[27] हम अपना शरीर केँ कष्‍ट दऽ कऽ वश मे रखैत छी। नहि तँ कतौ एना नहि भऽ जाय जे दोसर लोक केँ उपदेश देलाक बाद हम स्‍वयं पुरस्‍कार पयबाक लेल अयोग्‍य ठहरी।

1 कोरिन्‍थी 6:12-20
[12] “सभ किछु करबाक हमरा स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा सभ किछु हितकर नहि अछि। “सभ किछु करबाक हमरा स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा हम कोनो बातक गुलाम नहि बनब।[13] “भोजन पेटक लेल अछि आ पेट भोजनक लेल”—मुदा परमेश्‍वर दूनू केँ समाप्‍त कऽ देताह। शरीर अनैतिक सम्‍बन्‍धक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक सेवाक लेल अछि आ प्रभु शरीरक कल्‍याणक लेल।[14] परमेश्‍वर जहिना अपना सामर्थ्‍य सँ प्रभु यीशु केँ मृत्‍यु मे सँ जिऔलथिन तहिना ओ हमरो सभ केँ जिऔताह।[15] की अहाँ सभ ई नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर मसीहक अंग सभ अछि? तँ की हम मसीहक अंग लऽ कऽ तकरा वेश्‍याक अंग बना दिऐक? किन्‍नहुँ नहि![16] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे वेश्‍याक संग जे केओ अपन शरीर जोड़ैत अछि से ओकरा संग एक शरीर भऽ जाइत अछि? किएक तँ धर्मशास्‍त्र कहैत अछि जे, “दूनू एक शरीर भऽ जायत।”[17] मुदा जे प्रभु सँ संयुक्‍त भऽ जाइत अछि से हुनका संग आत्‍मा मे एक बनि जाइत अछि।[18] अनैतिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रहू। आरो सभ पाप जे मनुष्‍य करैत अछि, से शरीर सँ हटल अछि, मुदा जे ककरो संग अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि से अपना शरीरेक विरुद्ध पाप करैत अछि।[19] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍माक मन्‍दिर अछि, जे आत्‍मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि आ जे अहाँ सभ केँ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त भेल छथि? अहाँ सभ अपन नहि छी।[20] अहाँ सभ दाम दऽ कऽ किनल गेल छी। एहि लेल अपना शरीर द्वारा परमेश्‍वरक सम्‍मान करू।

2 पत्रुस 1:3-11
[3] परमेश्‍वर अपन ईश्‍वरीय सामर्थ्‍य सँ अपना सभ केँ ओ सभ बात देने छथि जे जीवन आ भक्‍तिक लेल आवश्‍यक अछि। ओ जे अपन महिमा आ सद्‌गुण द्वारा अपना सभ केँ बजौने छथि, तिनका चिन्‍हबाक द्वारा अपना सभ केँ ई सभ बात प्राप्‍त भेल।[4] एहि महिमा आ सद्‌गुण द्वारा ओ अपना सभ केँ बहुमूल्‍य आ उत्तम बात सभ देबाक वचन देने छथि, जाहि सँ ई बात सभ प्राप्‍त कऽ कऽ अहाँ सभ भ्रष्‍ट करऽ वला ओहि अधलाह इच्‍छा सभ सँ बाँचि सकी जे संसार मे अछि, आ ईश्‍वरीय स्‍वभाव मे सहभागी भऽ सकी।[5] एहि लेल पूरा-पूरा प्रयत्‍न करू जे अहाँ सभ अपना विश्‍वास मे सद्‌गुण केँ बढ़बैत चली, अपना सद्‌गुण मे ज्ञान केँ,[6] अपना ज्ञान मे संयम केँ, अपना संयम मे धैर्य केँ, अपना धैर्य मे भक्‍ति केँ,[7] अपना भक्‍ति मे भाय-बहिन वला स्‍नेह केँ, आ अपना भाय-बहिन वला स्‍नेह मे प्रेम केँ बढ़बैत चली।[8] किएक तँ जँ अहाँ सभ मे ई गुण सभ अछि, आ बढ़ल जा रहल अछि, तँ ई सभ अपना सभक प्रभु यीशु मसीह केँ आओर नीक जकाँ चिन्‍हऽ-जानऽ मे अहाँ सभ केँ निष्‍क्रिय आ निष्‍फल नहि होमऽ देत।[9] मुदा जाहि व्‍यक्‍ति मे ई गुण सभ नहि अछि, से कनेको दूर नहि देखि सकैत अछि। ओ आन्‍हर अछि, और ई बिसरि गेल अछि जे ओ पहिलुका पाप सभ सँ शुद्ध कयल गेल अछि।[10] तेँ, यौ भाइ लोकनि, अहाँ सभ वास्‍तव मे परमेश्‍वर द्वारा बजाओल गेल छी आ चुनल गेल छी, तकरा सिद्ध करबाक लेल पूरा प्रयत्‍न करू। ई बात सभ जाबत धरि करैत रहब, ताबत धरि अहाँ सभ कहियो विश्‍वासक बाट सँ नहि भटकब,[11] बल्‍कि अपना सभक प्रभु आ उद्धारकर्ता यीशु मसीहक अनन्‍त कालीन राज्‍य मे प्रवेश करबाक लेल अहाँ सभक बड़का स्‍वागत होयत।

इफिसी 6:10-20
[10] अन्‍त मे ई जे, प्रभुक असीम सामर्थ्‍य द्वारा हुनका मे बलवन्‍त होउ।[11] परमेश्‍वर सँ भेटल सम्‍पूर्ण अस्‍त्र-शस्‍त्र धारण करू जाहि सँ शैतानक छल-कपट वला चालि सभक सामना कऽ सकी।[12] कारण, अपना सभक संघर्ष मनुष्‍य सँ नहि अछि, बल्‍कि एहि अन्‍हार संसारक अदृश्‍य अधिपति सभ, अधिकारी सभ आ शासन करऽ वला सभ सँ अछि, आत्‍मिक क्षेत्र सभक दुष्‍ट शक्‍ति सभ सँ अछि।[13] एहि लेल, परमेश्‍वरक सम्‍पूर्ण अस्‍त्र-शस्‍त्र धारण करू, जाहि सँ दुष्‍ट वला दुर्दिन जखन आओत, तँ अहाँ सभ दुष्‍टताक सामना कऽ सकी, आ अन्‍त धरि लड़ि कऽ ठाढ़ रहि सकी।[14] तेँ डाँड़ मे सत्‍यक फाँड़ बान्‍हि कऽ, धार्मिकताक कवच धारण कऽ आ शान्‍तिक सुसमाचार सुनयबाक लेल उत्‍साहक जुत्ता पयर मे पहिरि दृढ़ भऽ कऽ ठाढ़ होउ।[15] ***[16] संगहि विश्‍वासक ढाल हाथ मे लेने रहू, जकरा द्वारा अहाँ सभ दुष्‍ट शैतानक सभ अग्‍निवाण मिझा सकब।[17] उद्धारक टोप लगाउ आ पवित्र आत्‍माक तरुआरि, अर्थात् परमेश्‍वरक वचन, सेहो लऽ लिअ।[18] हर समय मे परमेश्‍वरक आत्‍माक सहायता सँ सभ प्रकारक प्रार्थना और विनती प्रभु सँ करैत रहू। प्रार्थना करऽ मे सदिखन सचेत आ लगनशील रहू। परमेश्‍वरक सभ लोकक लेल प्रार्थना कयनाइ नहि छोड़ू।[19] हमरो लेल प्रार्थना करू। प्रार्थना ई करू जे हमरा जखन बजबाक अवसर भेटय, तखन कहऽ वला शब्‍द हमरा देल जाय, जाहि सँ हम निडर भऽ कऽ लोक केँ शुभ समाचारक ओहि सत्‍य केँ सुना सकी, जे पहिने गुप्‍त छल मुदा आब प्रगट कयल गेल अछि।[20] हम ओही शुभ समाचारक लेल राजदूत छी, आ जहल मे कैदी छी । ई प्रार्थना करू जे, जहिना हमरा साहसक संग शुभ समाचार सुनयबाक चाही, तहिना हम सुना सेहो सकी।

गलाती 5:13-26
[13] यौ भाइ लोकनि, स्‍वतन्‍त्र होयबाक लेल अहाँ सभ बजाओल गेल छी। एहि स्‍वतन्‍त्रता केँ अपन पापी स्‍वभावक इच्‍छा पूरा करबाक साधन नहि बनाउ, बल्‍कि प्रेम सँ एक दोसराक सेवा करू।[14] किएक तँ सम्‍पूर्ण धर्म-नियमक निचोड़ एहि आज्ञा मे भेटैत अछि जे “अहाँ अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करू।”[15] मुदा जँ अहाँ सभ एक-दोसर केँ चीरि-फाड़ि कऽ घोँटि लेबाक लेल तत्‍पर रहैत छी तँ सावधान भऽ जाउ। कतौ एना नहि होअय जे अहाँ सभ एक-दोसराक द्वारा नष्‍ट कयल जाइ।[16] तेँ हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे अहाँ सभ परमेश्‍वरक आत्‍माक प्रेरणाक अनुसार चलू, तखन अहाँ सभ पापी स्‍वभावक इच्‍छा सभक पूर्ति करऽ वला नहि होयब।[17] किएक तँ पापी स्‍वभावक लालसा परमेश्‍वरक आत्‍माक लालसाक विरुद्ध अछि आ परमेश्‍वरक आत्‍माक लालसा पापी स्‍वभावक विरुद्ध। ई दूनू एक दोसराक विरोधी अछि। एही कारणेँ अहाँ सभ जे करऽ चाहैत छी से नहि कऽ पबैत छी।[18] मुदा जँ अहाँ सभक संचालन परमेश्‍वरक आत्‍मा द्वारा होइत अछि तँ अहाँ सभ धर्म-नियमक अधीन नहि छी।[19] आब देखू, पापी स्‍वभावक काज सभ स्‍पष्‍ट अछि, जेना गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, अशुद्ध विचार-व्‍यवहार, निर्लज्‍जता,[20] मुरुतक पूजा, जादू-टोना, दुश्‍मनी, लड़ाइ-झगड़ा, ईर्ष्‍या, क्रोध, स्‍वार्थ, मनमोटाब, दलबन्‍दी,[21] द्वेष, मतवालापन आ भोग-विलास आ एहि प्रकारक आन बात सभ। हम अहाँ सभ केँ एहि विषय सभ मे चेतावनी दैत छी, जेना कि पहिनो दऽ चुकल छी जे, एहन काज करऽ वला लोक सभ परमेश्‍वरक राज्‍यक उत्तराधिकारी नहि होयत।[22] मुदा परमेश्‍वरक आत्‍माक फल ई अछि—प्रेम, आनन्‍द, शान्‍ति, सहनशीलता, दयालुता, भलाइ, विश्‍वस्‍तता,[23] नम्रता आ आत्‍मसंयम। एहि गुण सभक विरुद्ध कोनो नियम नहि अछि।[24] जे लोक मसीह यीशुक छथि से सभ अपना पापी स्‍वभाव केँ ओकर अधलाह इच्‍छा आ लालसा सभक संग क्रूस पर चढ़ा लेने छथि।[25] जखन अपना सभ परमेश्‍वरक आत्‍मा सँ जीवन प्राप्‍त कयने छी तँ परमेश्‍वरक आत्‍माक निर्देशनक अनुसार चली।[26] अपना सभ घमण्‍डी नहि बनी, एक-दोसर केँ क्रोधित नहि करी आ ने एक-दोसर सँ ईर्ष्‍या करी।

तीतुस 2:1-15
[1] मुदा अहाँ सही शिक्षाक अनुकूल जे बात अछि सैह सिखाउ।[2] वृद्ध पुरुष सभ केँ सिखबिऔन जे ओ सभ संयमी, गम्‍भीर आ विचारवान होथि तथा सही विश्‍वास, प्रेम आ धैर्य मे स्‍थिर।[3] एही तरहेँ बुढ़ि स्‍त्रीगण सभ केँ सिखबिऔन जे हुनका सभक चालि-चलन प्रभुक श्रद्धा मानऽ वला लोकक अनुरूप होनि। ओ सभ दोसराक निन्‍दा-शिकायत नहि करथि आ शराबी नहि होथि, बल्‍कि नीक बात सिखौनिहारि होथि,[4] जाहि सँ ओ सभ जबान स्‍त्रीगण सभ केँ सिखा सकथि जे ओ सभ अपना पति आ बच्‍चा सभ सँ प्रेम करथि,[5] आ विचारशील, पवित्र, कुशल गृहणी आ दयालु होथि, और अपन पतिक अधीन रहथि जाहि सँ हुनका सभक व्‍यवहारक कारणेँ केओ परमेश्‍वरक वचनक निन्‍दा नहि करय।[6] तहिना युवक सभ केँ सेहो विचारवान होयबाक लेल समझबिऔक-बुझबिऔक।[7] अहाँ स्‍वयं प्रत्‍येक बात मे नीक व्‍यवहार द्वारा नमूना बनू। अहाँ शुद्ध मोन सँ आ गम्‍भीरता सँ शिक्षा दिअ—[8] एहन सही सिद्धान्‍तक शिक्षा दिअ जकर आलोचना नहि कयल जा सकत जाहि सँ कोनो बातक विषय मे अपना सभक निन्‍दा करबाक अवसर नहि पयबाक कारणेँ विरोधी सभ लज्‍जित भऽ जाय।[9] गुलाम सभ केँ सिखबिऔक जे ओ सभ प्रत्‍येक बात मे अपन मालिकक अधीन रहय, मालिक केँ प्रसन्‍न राखय आ बिनु मुँह लगबैत अपन मालिकक आज्ञाक पालन करय,[10] चोरी-चपाटी नहि करय, बल्‍कि स्‍पष्‍ट सँ देखाबय जे ओ पूर्ण रूप सँ इमानदार अछि जाहि सँ सभ बात मे ओ सभ अपना सभक उद्धारकर्ता-परमेश्‍वरक शिक्षाक शोभा बढ़बय।[11] किएक तँ परमेश्‍वरक कृपा सभ मनुष्‍यक उद्धारक लेल प्रगट भेल अछि।[12] ई कृपा अपना सभ केँ ई सिखबैत अछि जे अधर्म आ सांसारिक अभिलाषा सभ केँ त्‍यागि कऽ एहि संसार मे विचारवान भऽ कऽ और उचित व्‍यवहार कऽ कऽ एहन जीवन व्‍यतीत करी जकरा सँ परमेश्‍वर प्रसन्‍न होथि।[13] कारण, अपना सभ ओहि दिनक बाट तकैत छी जहिया अपना सभक आनन्‍दपूर्ण आशा पूरा भऽ जायत, अर्थात्, जहिया अपना सभक महान् परमेश्‍वर आ उद्धारकर्ता, यीशु मसीह, महिमाक संग प्रगट होयताह।[14] ओ वैह छथि जे अपना केँ अर्पित कऽ देलनि जाहि सँ ओ अपना सभ केँ सभ प्रकारक दुष्‍कर्म सँ छुटकारा देबाक मोल चुकबथि आ अपना सभ केँ शुद्ध कऽ कऽ ओ अपना लेल एहन प्रजा बनबथि जे हुनकर अपन निज लोक होनि और नीक काज करबाक लेल सदत उत्‍सुक रहनि।[15] एहि सभ बातक शिक्षा अहाँ दैत रहू, पूरा अधिकारक संग लोक सभ केँ सिखाउ और ओकरा सभ केँ सुधारू। केओ अहाँ केँ तुच्‍छ नहि बुझय।

याकूब 3:1-18
[1] यौ हमर भाइ लोकनि, अहाँ सभ मे सँ बहुत केओ शिक्षक बनबाक लेल उत्‍सुक नहि होउ। अहाँ सभ ई बात निश्‍चय जानि लिअ जे, हम सभ जे शिक्षक छी, तकरा सभक न्‍याय आरो कठोरताक संग कयल जायत।[2] अपना सभ गोटे सँ कतेको बेर गलती होइत अछि। जँ केओ कहियो गलत बात नहि बजैत अछि, तँ ओ सिद्ध मनुष्‍य अछि आ ओ अपन सम्‍पूर्ण शरीर पर नियन्‍त्रण राखि सकैत अछि।[3] अपना सभ घोड़ा सभ केँ अपना वश मे करबाक लेल जँ ओकरा मुँह मे लगाम लगा दिऐक तँ ओकरा जेम्‍हर चाही तेम्‍हर घुमा-फिरा सकैत छी।[4] वा पानि जहाज केँ देखू—ओ कतेक पैघ होइत अछि और तेज हवाक बहाव सँ चलाओल जाइत अछि, तैयो एक छोट पतवार द्वारा नाविक ओकरा अपन इच्‍छाक अनुसार जेम्‍हर मोन होइत छैक तेम्‍हर मोड़ि लैत अछि।[5] तहिना जीह शरीरक एक छोटे अंग अछि, मुदा बात बहुत पैघ-पैघ बजैत घमण्‍ड करैत अछि। सोचू, नान्‍हिएटा आगिक लुत्ती कतेकटा वन मे आगि लगा दैत अछि।[6] जीह सेहो एक आगि अछि। अपना सभक शरीरक अंग सभ मे जीहे मे अधर्मक एक विशाल संसार भरल अछि। ई सम्‍पूर्ण शरीर केँ दुषित कऽ दैत अछि, आ नरकक आगि सँ पजरि कऽ अपना सभक सम्‍पूर्ण जीवनक गति मे आगि लगा दैत अछि।[7] सभ प्रकारक पशु-पक्षी, जमीन मे ससरऽ वला जीव-जन्‍तु, जल मे पाओल जाय वला जीव—सभ केँ मनुष्‍य द्वारा वश मे कयल जा सकैत अछि आ कयलो गेल अछि।[8] मुदा जीह केँ केओ वश मे नहि कऽ सकैत अछि। ई एक एहन अधलाह वस्‍तु अछि जे कखनो स्‍थिर नहि रहैत अछि। प्राण-घातक विष एकरा मे भरल छैक।[9] अपना सभ जीह द्वारा अपन प्रभु आ पिताक प्रशंसा करैत छियनि आ एही जीह द्वारा परमेश्‍वरक स्‍वरूप मे रचना कयल मनुष्‍य केँ सराप दैत छिऐक।[10] एके मुँह सँ प्रशंसा आ सराप दूनू निकलैत अछि। यौ हमर भाइ लोकनि, एना तँ होयबाक नहि चाही।[11] की पानिक झड़नाक एके मुँह सँ मिठाह पानि आ तिताह पानि, दूनू बहराइत अछि?[12] यौ हमर भाइ लोकनि, की अंजीरक गाछ पर जैतून फड़ि सकैत अछि वा अंगूरक लत्ती मे अंजीर? तहिना नूनियाह झड़नाक मुँह बाटे मिठाह पानि सेहो नहि बहरा सकैत अछि।[13] अहाँ सभ मे बुद्धिमान और ज्ञानी के छी? जे केओ एहन होइ से अपन नीक आचरण द्वारा और ओ विनम्रता जे बुद्धि सँ उत्‍पन्‍न होइत अछि ताहि विनम्रता सँ कयल अपन काज द्वारा अपन बुद्धि केँ प्रमाणित करू।[14] मुदा जँ अहाँ सभक हृदय कटुता, जरनि आ स्‍वार्थ सँ भरल होअय तँ अपन बुद्धि पर घमण्‍ड नहि करू। एना सत्‍य केँ झूठ सँ नहि झाँपू।[15] एहन “बुद्धि” ऊपर सँ नहि अबैत अछि, बल्‍कि संसार सँ, मानवीय स्‍वभाव सँ आ शैतान सँ अबैत अछि।[16] किएक तँ जतऽ डाह और स्‍वार्थ अछि ततऽ अशान्‍ति और सभ प्रकारक दुष्‍ट काज सभ होइत अछि।[17] मुदा जे बुद्धि ऊपर सँ अबैत अछि से सभ सँ पहिने पवित्र होइत अछि, तकरबाद ओ शान्‍तिप्रिय, नम्र, विचारशील, आ करुणा सँ भरल अछि आ नीक काज द्वारा प्रगट होइत अछि। ओहि मे कोनो पक्षपात वला बात वा छल-कपट नहि रहैत अछि।[18] शान्‍तिक बीया जे मेल-मिलाप करौनिहार व्‍यक्‍ति सभ बाउग करैत अछि, ताहि बीया सँ धार्मिक आचरण उपजैत अछि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT