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अच्छा चरित्र : [शील]


1 कोरिन्‍थी 12:23
शरीरक जाहि-जाहि अंग केँ अपना सभ कम आदरक योग्‍य बुझैत छी तकरे सभ पर विशेष ध्‍यान दैत छी। जे-जे अंग अशोभनीय अछि तकरा झाँपि कऽ शोभनीय बनबैत छी

1 तिमुथियुस 2:8-10
[8] एहि लेल हम चाहैत छी जे सभ ठाम पुरुष सभ, क्रोध आ विवाद मे नहि पड़ि, अपन निर्दोष हाथ ऊपर उठा कऽ प्रार्थना करथि।[9] तहिना स्‍त्रीगण सभ सेहो अपन ओढ़न-पहिरन वला बात मे मर्यादा आ शालीनताक ध्‍यान राखथि। अपन श्रृंगार केशक सजावट, सोना वा मोतीक गहना और दामी-दामी वस्‍त्र सँ नहि,[10] बल्‍कि भलाइक काज सभ द्वारा करथि। ई बात ओहि स्‍त्रीगण सभ केँ शोभा दैत छनि जे सभ अपना केँ परमेश्‍वरक भक्‍तिनि कहैत छथि।

1 पत्रुस 3:3-4
[3] अहाँ सभक सुन्‍दरता बाहरी श्रृंगार सँ नहि आबय, जेना केशक गुहनाइ, वा सोनाक गहना-गुड़िया सभ आ बढ़ियाँ-बढ़ियाँ कपड़ा पहिरनाइ सँ,[4] बल्‍कि अहाँ सभक भितरी चरित्र सँ आबय, अर्थात् नम्र आ शान्‍त स्‍वभावक सुन्‍दरता होअय। एहन सुन्‍दरता टिकैत अछि, और परमेश्‍वरक नजरि मे बहुत मूल्‍यवान अछि।

रोमी 12:2
अहाँ सभ एहि संसारक अनुरूप आचरण नहि करू, बल्‍कि परमेश्‍वर केँ अहाँक सोच-विचार केँ नव बनाबऽ दिऔन आ तहिना अहाँ केँ पूर्ण रूप सँ बदलि देबऽ दिऔन। एहि तरहेँ परमेश्‍वर अहाँ सभ सँ की चाहैत छथि, अर्थात् हुनका नजरि मे की नीक अछि, की ग्रहणयोग्‍य अछि आ की सर्वोत्तम अछि, तकरा अहाँ सभ अनुभव सँ जानि जायब।

मत्ती 5:28
मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी जे, जे कोनो पुरुष कोनो स्‍त्री केँ अधलाह इच्‍छा सँ देखैत अछि, से तखने अपना मोन मे ओकरा संग परस्‍त्रीगमन कऽ लेलक।

1 पत्रुस 3:3
अहाँ सभक सुन्‍दरता बाहरी श्रृंगार सँ नहि आबय, जेना केशक गुहनाइ, वा सोनाक गहना-गुड़िया सभ आ बढ़ियाँ-बढ़ियाँ कपड़ा पहिरनाइ सँ,

1 कोरिन्‍थी 6:19-20
[19] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍माक मन्‍दिर अछि, जे आत्‍मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि आ जे अहाँ सभ केँ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त भेल छथि? अहाँ सभ अपन नहि छी।[20] अहाँ सभ दाम दऽ कऽ किनल गेल छी। एहि लेल अपना शरीर द्वारा परमेश्‍वरक सम्‍मान करू।

1 कोरिन्‍थी 10:31
अहाँ सभ खाइ वा पिबी वा जे किछु करी, सभ किछु एहि लेल करू जाहि सँ परमेश्‍वरक महिमा प्रगट होनि।

1 तिमुथियुस 3:2
तेँ ई आवश्‍यक अछि जे जिम्‍मेवार लोक निष्‍कलंक होथि, हुनका एकेटा स्‍त्री होनि, ओ संयमी, विचारवान, भद्र, अतिथि-सत्‍कार कयनिहार और शिक्षा देबऽ मे निपुण होथि।

लूका 17:1
यीशु अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “ई निश्‍चित अछि जे लोक सभ केँ पाप मे फँसाबऽ वला बात सभ होयत, मुदा धिक्‍कार ताहि मनुष्‍य केँ, जकरा द्वारा ओहन बात सभ अबैत अछि!

इफिसी ২:১০
किएक तँ अपना सभ परमेश्‍वरेक हाथक कारीगरी छी—ओ अपना सभ केँ मसीह यीशु मे संयुक्‍त कऽ कऽ अपना सभक नव सृष्‍टि कयलनि, आ से एहि लेल जे अपना सभ ओ नीक काज सभ करी, जे काज ओ अपना सभक लेल पहिने सँ तैयार कयने छथि।

रोमी 14:13
तेँ आब सँ अपना सभ एक-दोसर पर दोष लगौनाइ छोड़ि दी। निश्‍चय कऽ लिअ जे अपन भायक बाट पर रोड़ा नहि अटकायब वा जाल नहि ओछायब।

1 पत्रुस 3:3-5
[3] अहाँ सभक सुन्‍दरता बाहरी श्रृंगार सँ नहि आबय, जेना केशक गुहनाइ, वा सोनाक गहना-गुड़िया सभ आ बढ़ियाँ-बढ़ियाँ कपड़ा पहिरनाइ सँ,[4] बल्‍कि अहाँ सभक भितरी चरित्र सँ आबय, अर्थात् नम्र आ शान्‍त स्‍वभावक सुन्‍दरता होअय। एहन सुन्‍दरता टिकैत अछि, और परमेश्‍वरक नजरि मे बहुत मूल्‍यवान अछि।[5] किएक तँ प्राचीन काल मे परमेश्‍वर पर भरोसा राखऽ वाली आ अपना पतिक अधीन रहऽ वाली पवित्र स्‍त्रीगण सभ एही तरहेँ अपन श्रृंगार करैत छलीह।

1 पत्रुस 1:14
अहाँ सभ आज्ञाकारी धिआ-पुता जकाँ अपन आचरण राखू, नहि कि पहिने जकाँ, जखन अहाँ सभ अज्ञानी छलहुँ आ अपन अधलाह इच्‍छा सभक अनुसार आचरण करैत छलहुँ।

1 पत्रुस 3:1-4
[1] एही तरहेँ, हे स्‍त्री सभ, अहाँ सभ अपन-अपन पतिक अधीन रहू, जाहि सँ जँ हुनका सभ मे सँ केओ प्रभुक वचन केँ नहि मानैत होथि, तँ अहाँ सभक पवित्र आ श्रद्धापूर्ण चालि-चलन केँ देखि कऽ हुनका सभक हृदय मे परिवर्तन भऽ जानि आ ओ सभ विश्‍वास मे अबथि—ककरो किछु कहबाक कारणेँ नहि, बल्‍कि अहाँ सभक व्‍यवहारक कारणेँ।[2] ***[3] अहाँ सभक सुन्‍दरता बाहरी श्रृंगार सँ नहि आबय, जेना केशक गुहनाइ, वा सोनाक गहना-गुड़िया सभ आ बढ़ियाँ-बढ़ियाँ कपड़ा पहिरनाइ सँ,[4] बल्‍कि अहाँ सभक भितरी चरित्र सँ आबय, अर्थात् नम्र आ शान्‍त स्‍वभावक सुन्‍दरता होअय। एहन सुन्‍दरता टिकैत अछि, और परमेश्‍वरक नजरि मे बहुत मूल्‍यवान अछि।

1 यूहन्‍ना 2:16
कारण, जे किछु संसार मे छैक, अर्थात् मनुष्‍यक पापी स्‍वभावक इच्‍छा, ओकर आँखिक लालसा और धन-सम्‍पत्ति पर ओकर घमण्‍ड, से पिताक दिस सँ नहि, बल्‍कि संसारक दिस सँ अबैत अछि।

रोमी 12:1
तेँ यौ भाइ लोकनि, हम अहाँ सभ सँ आग्रह करैत छी जे, परमेश्‍वरक अपार दयाक कारणेँ जे ओ अपना सभ पर कयने छथि, अहाँ सभ अपना शरीर केँ जीवित, पवित्र आ परमेश्‍वर द्वारा ग्रहणयोग्‍य बलिदानक रूप मे हुनका अर्पित करू। यैह भेल अहाँ सभक लेल परमेश्‍वरक असली आत्‍मिक आराधना कयनाइ।

1 तिमुथियुस ৪:৮
शारीरिक साधना सँ किछु लाभ तँ अछि, मुदा भक्‍ति सँ असीमित लाभ अछि, किएक तँ ओ जीवनक आश्‍वासन दैत अछि इहलोक मे सेहो और परलोक मे सेहो।

फिलिप्‍पी 2:5
अहाँ सभ वैह भावना राखू जे मसीह यीशु मे छलनि—

1 पत्रुस 3:4
बल्‍कि अहाँ सभक भितरी चरित्र सँ आबय, अर्थात् नम्र आ शान्‍त स्‍वभावक सुन्‍दरता होअय। एहन सुन्‍दरता टिकैत अछि, और परमेश्‍वरक नजरि मे बहुत मूल्‍यवान अछि।

1 तिमुथियुस 2:10
बल्‍कि भलाइक काज सभ द्वारा करथि। ई बात ओहि स्‍त्रीगण सभ केँ शोभा दैत छनि जे सभ अपना केँ परमेश्‍वरक भक्‍तिनि कहैत छथि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT