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अच्छा चरित्र : [प्रेम]

1 कोरिन्‍थी 16:14
जे किछु करी से प्रेम सँ करू।

1 यूहन्‍ना 4:8-18
[8] जे प्रेम नहि करैत अछि, से परमेश्‍वर केँ नहि चिन्‍हैत अछि, किएक तँ परमेश्‍वर प्रेम छथि।[9] परमेश्‍वर अपन प्रेम अपना सभक बीच एहि प्रकारेँ प्रगट कयलनि—ओ अपन एकलौता पुत्र केँ संसार मे पठा देलनि जाहि सँ अपना सभ हुनका द्वारा जीवन प्राप्‍त करी।[10] प्रेमक अर्थ ई नहि, जे अपना सभ परमेश्‍वर सँ प्रेम कयलियनि, बल्‍कि ई, जे ओ अपना सभ सँ प्रेम कयलनि और अपन पुत्र केँ अपना सभक पापक प्रायश्‍चित्त करऽ वला बलि बना कऽ पठा देलनि।[11] प्रिय मित्र सभ, जँ परमेश्‍वर अपना सभ सँ एहन प्रेम कयलनि, तँ अपनो सभ केँ एक-दोसर सँ प्रेम करबाक चाही।[12] परमेश्‍वर केँ केओ कहियो नहि देखने छनि, मुदा अपना सभ जँ एक-दोसर सँ प्रेम करैत छी तँ ओ अपना सभ मे वास करैत छथि और अपना सभ मे हुनकर प्रेम सिद्ध होइत अछि।[13] अपना सभ हुनका मे रहैत छी और ओ अपना सभ मे, तकर प्रमाण ई भेल जे ओ अपना सभ केँ अपन आत्‍मा मे सहभागी बना लेने छथि।[14] अपना सभ देखने छी और गवाही दैत छी जे पिता अपना पुत्र केँ संसारक उद्धारकर्ताक रूप मे पठौलनि।[15] जँ केओ स्‍वीकार करैत अछि जे यीशु परमेश्‍वरक पुत्र छथि, तँ परमेश्‍वर ओकरा मे रहैत छथि और ओ परमेश्‍वर मे।[16] परमेश्‍वरक प्रेम जे अपना सभक प्रति छनि, तकरा अपना सभ जानि गेल छी और ताही पर भरोसा करैत छी। परमेश्‍वर प्रेम छथि। जे केओ प्रेम मे रहैत अछि से परमेश्‍वर मे रहैत अछि, और परमेश्‍वर ओकरा मे।[17] अपना सभ मे प्रेम सिद्ध होयबाक उद्देश्‍य ई अछि जे अपना सभ न्‍यायक दिन मे निर्भय रही, और एहि कारण निर्भय रही जे संसार मे अपना सभ तेहन छी जेहन यीशु छथि।[18] प्रेम मे डर नहि होइत अछि। सिद्ध प्रेम डर केँ भगा दैत अछि, कारण डर दण्‍ड सँ सम्‍बन्‍धित अछि। जे डेराइत अछि, से प्रेम मे सिद्ध नहि भेल अछि।

यूहन्‍ना 3:16
“हँ, परमेश्‍वर संसार सँ एहन प्रेम कयलनि जे ओ अपन एकमात्र बेटा केँ दऽ देलनि, जाहि सँ जे केओ हुनका पर विश्‍वास करैत अछि से नाश नहि होअय, बल्‍कि अनन्‍त जीवन पाबय।

1 पत्रुस 4:8
सभ सँ पैघ बात ई जे अहाँ सभ आपस मे अटूट प्रेम राखू, किएक तँ प्रेम असंख्‍य पाप केँ झाँपि दैत अछि।

कुलुस्‍सी 3:14
आ सभ सँ पैघ बात ई अछि जे आपस मे प्रेम भाव बनौने रहू। प्रेम सभ केँ एकता मे बान्‍हि कऽ पूर्णता धरि पहुँचा दैत अछि।

यूहन्‍ना 13:34-35
[34] एक नव आज्ञा हम अहाँ सभ केँ दैत छी—एक-दोसर सँ प्रेम करू। जेना हम अहाँ सभ सँ प्रेम कयने छी तेना अहूँ सभ एक-दोसर सँ प्रेम करू।[35] एहि सँ सभ लोक जानत जे अहाँ सभ हमर शिष्‍य छी, अर्थात्‌ अहाँ सभ जँ एक-दोसर सँ प्रेम करब, ताहि सँ।”

यूहन्‍ना 15:13
एहि सँ बड़का प्रेम कोनो नहि अछि जे, केओ अपन मित्रक लेल अपन प्राण देअय।

1 कोरिन्‍थी 13:13
आब विश्‍वास, आशा आ प्रेम, ई तीनू टिकैत अछि मुदा सभ सँ श्रेष्‍ठ अछि प्रेम।

1 यूहन्‍ना 4:19
अपना सभ एहि लेल प्रेम करैत छी जे ओ पहिने अपना सभ सँ प्रेम कयलनि।

1 यूहन्‍ना 4:7
प्रिय मित्र सभ, अपना सभ एक-दोसर सँ प्रेम करी, किएक तँ प्रेम परमेश्‍वर सँ उत्‍पन्‍न होइत अछि। जे प्रेम करैत अछि, से परमेश्‍वरक सन्‍तान अछि और परमेश्‍वर केँ चिन्‍हैत अछि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT