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अच्छा चरित्र : [अखंडता]


1 पत्रुस ३:१६
एहन चालि-चलन राखि कऽ जकरा कारणेँ अहाँक विवेक अहाँ केँ दोषी नहि ठहराओत, जाहि सँ जे लोक सभ अहाँ सभ केँ बदनाम करैत अछि आ अहाँ सभक नीक मसीही आचरणक निन्‍दा करैत अछि, तकरा सभ केँ लज्‍जित होमऽ पड़ैक।

2 कोरिन्‍थी 8:21
किएक तँ हम सभ मात्र प्रभुएक दृष्‍टि मे नहि, बल्‍कि मनुष्‍य सभक दृष्‍टि मे सेहो ठीक सँ काज करबाक ध्‍यान रखैत छी।

यूहन्‍ना 14:6
यीशु बजलाह, “रस्‍ता हमहीं छी, हँ, और सत्‍य और जीवन सेहो छी। हमरा बिनु केओ पिता लग नहि अबैत अछि।

इब्रानी 13:18
हमरा सभक लेल प्रार्थना करैत रहू, कारण, हम सभ अपन मोन शुद्ध बुझैत छी। हम सभ हर बात मे वैह करऽ चाहैत छी जे सही अछि।

लूका 6:31
जेहन व्‍यवहार अहाँ चाहैत छी जे लोक अहाँक संग करय, तेहने व्‍यवहार अहूँ लोकक संग करू।

फिलिप्‍पी 4:8
अन्‍त मे, यौ भाइ लोकनि, जे बात सभ सत्‍य अछि, जे बात सभ प्रतिष्‍ठित अछि, जे बात सभ न्‍यायसंगत अछि, जे बात सभ पवित्र अछि, जे बात सभ प्रेम करबाक योग्‍य अछि, जे बात सभ आदरयोग्‍य अछि, अर्थात्, जे कोनो बात उत्तम वा प्रशंसनीय अछि ताही पर ध्‍यान लगौने रहू।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT