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अच्छा चरित्र : [विनम्र / विनम्रता]


कुलुस्‍सी ۳:۱۲
तेँ अहाँ सभ परमेश्‍वरक चुनल लोक, हुनकर पवित्र और प्रिय लोक सभ भऽ कऽ, दयालुता, करुणा, नम्रता, कोमलता आ सहनशीलता केँ धारण करू।

इफिसी 4:2
पूर्ण रूप सँ विनम्र भऽ कऽ कोमलताक संग एक-दोसराक संग धैर्य राखू। प्रेम सँ एक-दोसराक संग सहनशील होउ।

याकूब 4:6-10
[6] नहि, ओ निरर्थक बात नहि अछि आ तेँ ओ प्रशस्‍त मात्रा मे कृपा कऽ कऽ अपना सभक सहायता करैत छथि। एहि कारणेँ धर्मशास्‍त्रक कथन अछि जे, “परमेश्‍वर घमण्‍डी सभक विरोध करैत छथि, मुदा नम्र लोक सभ पर कृपा करैत छथि।”[7] तेँ अहाँ सभ परमेश्‍वरक अधीन होउ। शैतानक आक्रमण केँ सामना करिऔक तँ ओ अहाँ सभ लग सँ पड़ायत।[8] परमेश्‍वरक लग मे आउ तँ ओहो अहाँ सभक लग मे आबि जयताह। यौ पापी लोक सभ, अपन हाथ शुद्ध करू। यौ दूमतिया लोक सभ, अपन हृदय पवित्र करू।[9] शोक मनाउ, कानू आ विलाप करू। अपन हँसी केँ शोक मे आ अपन आनन्‍द केँ उदासी मे बदलि लिअ।[10] प्रभुक समक्ष विनम्र बनू और ओ अहाँ सभ केँ सम्‍मानित करताह।

1 पत्रुस 5:5
एहि तरहेँ, यौ जबान भाइ सभ, अहाँ सभ मण्‍डलीक देख-रेख कयनिहार सभक अधीन रहू। अहाँ सभ केओ नम्रता सँ एक-दोसराक सेवा करू, किएक तँ, “परमेश्‍वर घमण्‍डी सभक विरोध करैत छथि, मुदा नम्र लोक सभ पर कृपा करैत छथि।”

लूका 14:11
हँ, जे केओ अपना केँ पैघ बनाबऽ चाहैत अछि, से छोट बनाओल जायत, और जे केओ अपना केँ छोट बुझैत अछि, से पैघ बनाओल जायत।”

रोमी 12:3
हम ओहि वरदानक अधिकार सँ जे प्रभु अपना कृपा सँ हमरा देलनि, अहाँ सभ मे सँ प्रत्‍येक केँ ई कहैत छी जे, केओ अपना केँ जतेक बुझक चाही, ताहि सँ बेसी महत्‍वपूर्ण नहि बुझू, बल्‍कि परमेश्‍वर सँ देल गेल विश्‍वासक नाप सँ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अपन सन्‍तुलित मूल्‍यांकन करू।

रोमी 12:16
आपस मे मेल-मिलापक भावना राखू। घमण्‍डी नहि बनू, बल्‍कि दीन-हीन सभक संगति करू। अपना केँ बड़का बुद्धिआर नहि बुझऽ लागू।

2 कोरिन्‍थी ۱۲:۹-۱۰
[۹] मुदा ओ हमरा कहलनि, “हमर कृपा तोरा लेल प्रशस्‍त छह, किएक तँ हमर सामर्थ्‍यक पूर्णता मनुष्यक दुर्बलता मे सिद्ध होइत अछि।” एहि लेल हम खुशी सँ अपन दुर्बलता सभ पर गर्व करब, जाहि सँ ओहि दुर्बलता सभक द्वारा हमरा मे मसीहक सामर्थ्‍य क्रियाशील रहय।[۱۰] तेँ मसीहक लेल हम अपन दुर्बलता सभ मे, अपमान सभ मे, कष्‍ट सभ मे, सतावट सभ मे आ विपत्ति सभ मे प्रसन्‍न रहैत छी, किएक तँ जखन हम दुर्बल छी तखने बलगर होइत छी।

फिलिप्‍पी 2:3-4
[3] स्‍वार्थपूर्ण अभिलाषा सँ वा अपना केँ किछु बनयबाक लेल कोनो काज नहि करू, बल्‍कि नम्र भऽ कऽ दोसर केँ अपना सँ श्रेष्‍ठ मानू।[4] अहाँ सभ मे सँ प्रत्‍येक लोक अपनेटा नहि, बल्‍कि दोसरो लोकक हितक ध्‍यान राखू।

मत्ती 23:10-12
[10] आ अहाँ सभ ‘आचार्य’ नहि कहाउ, कारण अहाँ सभक आचार्य सेहो एके गोटे छथि, अर्थात् उद्धारकर्ता-मसीह।[11] अहाँ सभ मे जे सभ सँ पैघ होइ से सभक सेवक बनू।[12] कारण, जे केओ अपना केँ पैघ बुझत से छोट बनाओल जायत, मुदा जे केओ अपना केँ छोट बुझत से पैघ बनाओल जायत।

याकूब 4:14-16
[14] काल्‍हि की होयत से अहाँ सभ नहि जनैत छी। अहाँ सभक जीवन अछिए कतेक? अहाँ सभ मेघक धुइन छी जे कनेक काल देखाइ दैत अछि आ फेर लुप्‍त भऽ जाइत अछि।[15] अहाँ सभ केँ एकर बदला मे तँ ई कहबाक चाही जे, “जँ प्रभुक इच्‍छा होनि तँ हम सभ जीवित रहब आ ई वा ओ काज करब।”[16] मुदा ई केहन बात भेल जे अहाँ सभ अपन अहंकार सँ नियारल बात सभ पर घमण्‍ड करैत छी? एहन सभ घमण्‍ड कयनाइ अधलाह बात अछि।

फिलिप्‍पी 2:5-8
[5] अहाँ सभ वैह भावना राखू जे मसीह यीशु मे छलनि—[6] ओ वास्‍तव मे परमेश्‍वर छलाह, मुदा तैयो ओ परमेश्‍वरक तुल्‍य रहबाक अधिकार केँ पकड़ने रहऽ वला वस्‍तु नहि बुझलनि।[7] तकरा बदला मे ओ अपन सभ किछु त्‍यागि देलनि आ दासक स्‍वरूप धारण कऽ मनुष्‍य बनि गेलाह।[8] एहि तरहेँ मनुष्‍यक रूप मे रहि कऽ ओ अपना केँ विनम्र बनौलनि आ एतऽ तक आज्ञाकारी बनलाह जे मृत्‍यु, हँ, क्रूस परक मृत्‍यु सेहो, स्‍वीकार कयलनि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT