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अच्छा चरित्र : [सत्कार]


इब्रानी 3:2
जहिना मूसा परमेश्‍वरक घरक लोकक बीच सभ काज मे विश्‍वासयोग्‍य बनल रहलाह तहिना यीशु अपन नियुक्‍त कयनिहारक, अर्थात् परमेश्‍वरक, प्रति विश्‍वासयोग्‍य बनल रहलाह।

1 तिमुथियुस 5:10
और भलाइक काज कयनिहारिक रूप मे चिन्‍हल-जानल जाइत होथि, अर्थात् अपन बाल-बच्‍चा सभक नीक सँ पालन-पोषण कयने होथि, अतिथि सभक सत्‍कार कयने होथि, प्रभुक लोक सभक पयर धोने होथि, दीन-दुखी सभक सहायता कयने होथि आ सभ प्रकारक भलाइक काज मे अपना केँ समर्पित कयने होथि।

तीतुस 1:8
बल्‍कि ओ अतिथि-सत्‍कार कयनिहार, नीक बात सँ प्रेम कयनिहार, विचारवान, न्‍यायी, पवित्र चरित्रक आ संयमी होथि।

1 पत्रुस 4:8-9
[8] सभ सँ पैघ बात ई जे अहाँ सभ आपस मे अटूट प्रेम राखू, किएक तँ प्रेम असंख्‍य पाप केँ झाँपि दैत अछि।[9] बिनु कुड़बुड़ा कऽ एक-दोसराक अतिथि-सत्‍कार करू।

मसीह-दूत 16:33-34
[33] तखन तुरत्ते रातिए मे, जहलक हाकिम हुनका सभ केँ लऽ जा कऽ घाव धो देलथिन। तकरबाद ओ अपन पूरा परिवारक संग बपतिस्‍मा लेलनि।[34] तखन जहलक हाकिम पौलुस आ सिलास केँ अपना डेरा मे आनि कऽ भोजन करौलनि। ओ अपन पूरा परिवारक संग परमेश्‍वर पर विश्‍वास करबाक कारणेँ बहुत आनन्‍दित छलाह।

लूका 14:7-14
[7] यीशु जखन निमन्‍त्रित लोक सभ केँ अपना लेल मुख्‍य-मुख्‍य आसन चुनैत देखलनि, तँ हुनका सभ केँ ई दृष्‍टान्‍त दऽ कऽ सिखाबऽ लगलथिन जे,[8] “अहाँ सभ केँ जखन केओ विवाह मे निमन्‍त्रित करय तँ मुख्‍य आसन पर नहि बैसू। कतौ एना नहि होअय जे अहूँ सँ प्रतिष्‍ठित व्‍यक्‍ति सेहो आमन्‍त्रित होथि[9] और जे घरबैआ अहाँ दूनू गोटे केँ नोत देने छथि से आबि कऽ अहाँ केँ कहथि जे, ‘एहिठाम हिनका बैसऽ दिऔन।’ तखन अहाँ केँ लाजक अनुभव होयत आ सभ सँ नीच स्‍थान पर बैसऽ पड़त।[10] नहि, अहाँ केँ जखन केओ नोत दिअय, तँ जा कऽ सभ सँ नीच स्‍थान पर बैसू जाहि सँ घरबैआ जखन औताह तँ अहाँ केँ कहथि, ‘यौ संगी, चलू, एम्‍हर नीक आसन पर बैसू।’ एहि तरहेँ अतिथि सभक सामने अहाँक आदर कयल जायत।[11] हँ, जे केओ अपना केँ पैघ बनाबऽ चाहैत अछि, से छोट बनाओल जायत, और जे केओ अपना केँ छोट बुझैत अछि, से पैघ बनाओल जायत।”[12] तखन यीशु घरबैआ केँ कहलथिन, “जखन लोक केँ भोजन करबाक वा भोज खयबाक नोत दैत छी, तँ अपना संगी-साथी, कुटुम्‍ब-परिवारक लोक वा धनी-मनी पड़ोसी सभ केँ नहि बजाउ। ओकरा सभ केँ जँ बजायब तँ बहुत सम्‍भावना अछि जे ओ सभ अहूँ केँ फेर बजाओत, और एहि तरहेँ अहाँ केँ तकर बदला भेटि जायत।[13] नहि, अहाँ जखन भोज करी तँ गरीब, लुल्‍ह-नाङड़ और आन्‍हर सभ केँ बजाउ।[14] अहाँ धन्‍य होयब, कारण ओ सभ अहाँ केँ फेर बजा कऽ तकर बदला नहि दऽ सकत; अहाँ तकर बदला तहिया पायब जहिया धर्मी सभ मृत्‍यु सँ जीबि उठताह।”

मत्ती 25:34-46
[34] “तकरबाद राजा अपन दहिना कात ठाढ़ भेल लोक सभ केँ कहथिन, ‘हे हमर पिताक कृपापात्र सभ! आउ, ओहि राज्‍यक अधिकारी बनू, जकरा सृष्‍टिक आरम्‍भ सँ अहाँ सभक लेल तैयार कयल गेल अछि।[35] कारण, हम भूखल छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा भोजन करौलहुँ। हम पियासल छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा पानि पिऔलहुँ। हम परदेशी छलहुँ आ अहाँ सभ अपना घर मे हमर सेवा-सत्‍कार कयलहुँ।[36] हम नाङट छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा वस्‍त्र पहिरौलहुँ। हम बिमार छलहुँ आ अहाँ सभ हमर रेख-देख कयलहुँ। हम जहल मे छलहुँ आ अहाँ सभ हमरा सँ भेँट करबाक लेल अयलहुँ।’[37] “ताहि पर ओ धर्मी लोक सभ हुनका कहथिन, ‘यौ प्रभु, हम सभ अहाँ केँ कहिया भूखल देखलहुँ आ भोजन करौलहुँ, पियासल देखलहुँ आ पानि पिऔलहुँ?[38] हम सभ अहाँ केँ कहिया परदेशी देखलहुँ आ अपना घर मे सेवा-सत्‍कार कयलहुँ, नाङट देखलहुँ आ वस्‍त्र पहिरौलहुँ?[39] कहिया हम सभ अहाँ केँ बिमार वा जहल मे देखलहुँ आ अहाँ सँ भेँट करबाक लेल गेलहुँ?’[40] एहि पर राजा हुनका सभ केँ उत्तर देथिन, ‘हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी जे, जे किछु अहाँ सभ हमर एहि भाय सभ मे सँ ककरो लेल, छोटो सँ छोटक लेल कयलहुँ, से हमरा लेल कयलहुँ।’[41] “तकरबाद राजा अपन बामा कात ठाढ़ लोक सभ केँ कहथिन, ‘हे सरापित लोक सभ! तोँ सभ हमरा लग सँ दूर हटि जाह और कहियो नहि मिझाय वला ओहि आगिक कुण्‍ड मे पड़ल रहह, जे शैतान आ ओकर दूत सभक लेल तैयार कयल गेल अछि।[42] कारण, हम भूखल छलहुँ आ तोँ सभ हमरा खयबाक लेल किछु नहि देलह, पियासल छलहुँ आ तोँ सभ पानि नहि पिऔलह।[43] हम परदेशी छलहुँ आ तोँ सभ अपना ओतऽ हमर स्‍वागत नहि कयलह, नाङट छलहुँ आ वस्‍त्र नहि पहिरौलह। हम बिमार छलहुँ, जहल मे छलहुँ, मुदा तोँ सभ हमरा देखबाक लेल नहि अयलह।’[44] “एहि पर ओहो सभ पुछतनि जे, ‘यौ प्रभु, हम सभ अहाँ केँ कहिया भूखल, पियासल, परदेशी, नाङट, बिमार वा जहल मे बन्‍द देखलहुँ आ अहाँक सेवा नहि कयलहुँ?’[45] ताहि पर राजा ओकरा सभ केँ उत्तर देथिन, ‘हम तोरा सभ केँ सत्‍य कहैत छिअह जे, जे किछु तोँ सभ हमर एहि भाय सभ मे सँ ककरो लेल, छोटो सँ छोटक लेल नहि कयलह से हमरो लेल नहि कयलह।’ ”[46] तखन यीशु कहलनि, “ई सभ अनन्‍त दण्‍ड भोगबाक लेल चल जायत, मुदा धर्मी सभ अनन्‍त जीवन मे प्रवेश करत।”

रोमी 12:13-20
[13] परमेश्‍वरक लोक सभ केँ जाहि बातक आवश्‍यकता होनि ताहि मे हुनकर सहायता करिऔन। अतिथि-सत्‍कार करऽ मे तत्‍पर रहू।[14] अहाँ सभ पर जे अत्‍याचार करय तकरा आशीर्वाद दिअ; हँ, आशीर्वाद दिअ, सराप नहि।[15] जे केओ आनन्‍दित अछि, तकरा संग आनन्‍द मनाउ, आ जे केओ शोकित अछि तकरा संग शोक।[16] आपस मे मेल-मिलापक भावना राखू। घमण्‍डी नहि बनू, बल्‍कि दीन-हीन सभक संगति करू। अपना केँ बड़का बुद्धिआर नहि बुझऽ लागू।[17] केओ जँ अहाँक संग अधलाह व्‍यवहार कयलक, तँ बदला मे अहाँ ओकरा संग अधलाह व्‍यवहार नहि करू। सभक नजरि मे जे बात उचित अछि, सैह करबाक चेष्‍टा करू।[18] जहाँ तक भऽ सकय, और जहाँ तक अहाँक वश मे होअय, सभ लोकक संग मेल सँ रहू।[19] प्रिय भाइ लोकनि, अहाँ सभ स्‍वयं ककरो सँ बदला नहि लिअ, बल्‍कि तकरा परमेश्‍वरक क्रोध पर छोड़ि दिअ, कारण, धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “प्रभु कहैत छथि जे, बदला लेबाक काज हमर अछि, हमहीं बदला लेब।”[20] बरु, जेना लिखल अछि, “जँ अहाँक शत्रु भूखल अछि तँ ओकरा भोजन करबिऔक, जँ पियासल अछि तँ ओकरा पानि पिअबिऔक। कारण, एहि प्रकारेँ अहाँक प्रेमपूर्ण व्‍यवहार सँ ओ लाजे गलि जायत।”

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT