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अच्छा चरित्र : [अनुशासन]


2 तिमुथियुस 1:7
परमेश्‍वर तँ अपना सभ केँ डरपोकक आत्‍मा नहि, बल्‍कि सामर्थ्‍य, प्रेम आ आत्‍मसंयमक आत्‍मा प्रदान कयने छथि।

इफिसी 6:4
यौ पिता लोकनि, अहाँ सभ अपन बच्‍चा सभक संग एहन व्‍यवहार नहि करू जाहि सँ ओ सभ तंग भऽ कऽ खिसिआयल रहि जाय, बल्‍कि ओकरा सभक पालन-पोषण प्रभुक शिक्षा आ निर्देशक अनुसार करिऔक।

प्रकाशित-वाक्‍य 3:19
हम जकरा सभ सँ प्रेम करैत छी, तकरा सभ केँ डँटैत छिऐक आ सजाय दऽ कऽ सुधारैत छिऐक। एहि लेल तन-मन-धन सँ हमर बात मानू आ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करू।

तीतुस ١:٨
बल्‍कि ओ अतिथि-सत्‍कार कयनिहार, नीक बात सँ प्रेम कयनिहार, विचारवान, न्‍यायी, पवित्र चरित्रक आ संयमी होथि।

इब्रानी ١٢:١٠-١١
[١٠] ओ सभ सीमित समयक लेल जहिना अपना बुद्धिक अनुसार ठीक बुझैत छलाह, तहिना अपना सभ केँ सजाय देलनि, मुदा परमेश्‍वर ई जानि जे अपना सभक कल्‍याणक लेल केहन सजाय ठीक होयत अपना सभ केँ सुधारैत छथि जाहि सँ ओ जहिना पवित्र छथि, तहिना अपनो सभ पवित्र बनी।[١١] जखन कोनो तरहक सजाय ककरो भेटि रहल छैक तँ ताहि समय मे ओ ओकरा सुखदायक नहि, दुःखदायक लगैत छैक, मुदा बाद मे, तकरा द्वारा सुधारल गेलाक बाद, ओकर परिणाम एक धार्मिक आ शान्‍तिपूर्ण जीवन होइत अछि।

1 कोरिन्‍थी 9:25-27
[25] खेल प्रतियोगिता मे भाग लेबऽ वला खेलाड़ी सभ प्रत्‍येक बातक संयम रखैत अछि। ओ सभ ओहन जय-माला पयबाक लेल ई सभ करैत अछि जे टिकत नहि, मुदा अपना सभ अविनाशी मुकुट पयबाक लेल एना करैत छी।[26] एहि लेल हम एहन खेलाड़ी जकाँ छी जे सामने राखल लक्ष्‍य पर सँ नजरि नहि हटा कऽ दौड़ैत अछि। हम एहन मुक्‍केबाजीक खेलाड़ी जकाँ नहि छी जे हवे मे मुक्‍का मारैत अछि।[27] हम अपना शरीर केँ कष्‍ट दऽ कऽ वश मे रखैत छी। नहि तँ कतौ एना नहि भऽ जाय जे दोसर लोक केँ उपदेश देलाक बाद हम स्‍वयं पुरस्‍कार पयबाक लेल अयोग्‍य ठहरी।

2 कोरिन्‍थी 7:9-11
[9] मुदा आब हमरा प्रसन्‍नता अछि। हमरा एहि लेल प्रसन्‍नता नहि अछि जे अहाँ सभ केँ दुःख भेल, बल्‍कि एहि लेल जे ओहि दुःखक परिणाम ई भेल जे अहाँ सभ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन कयलहुँ। अहाँ सभ परमेश्‍वरक श्रद्धा मानि हुनका सम्‍मुख दुखी भेलहुँ, तेँ ओहि पत्र द्वारा हमरा सभक दिस सँ अहाँ सभ केँ कोनो हानि नहि पहुँचाओल गेल।[10] किएक तँ परमेश्‍वरक सम्‍मुख जे श्रद्धापूर्ण दुःख होइत अछि से पापक लेल एहन पश्‍चात्ताप और हृदय-परिवर्तन उत्‍पन्‍न करबैत अछि, जकर परिणाम होइत अछि उद्धार, आ ओहि सँ लोक केँ पछताय नहि पड़ैत छैक, मुदा सांसारिक दुःखक परिणाम मृत्‍यु होइत अछि।[11] अहाँ सभ देखि सकैत छी जे परमेश्‍वरक सम्‍मुख अहाँ सभक ओ दुःख अहाँ सभ केँ कतेक गम्‍भीर बनौलक, अपन सफाइ देबाक लेल कतेक उत्‍सुक बनौलक आ अहाँ सभ मे कतेक क्रोध, कतेक भय, कतेक अभिलाषा आ कतेक धुन उत्‍पन्‍न कयलक, और न्‍याय होअय ताहि बातक लेल कतेक इच्‍छा बढ़ा देलक। एहि तरहेँ अहाँ सभ एहि विषयक हर-एक बात मे अपना केँ निर्दोष प्रमाणित कऽ सकलहुँ।

इब्रानी 12:5-9
[5] की अहाँ सभ धर्मशास्‍त्रक ई उपदेश बिसरि गेलहुँ जाहि मे अहाँ सभ केँ पुत्र कहि कऽ सम्‍बोधन कयल गेल अछि?— “हे हमर पुत्र, प्रभुक सजाय केँ तुच्‍छ नहि मानह, और जखन ओ तोरा कोनो गलती देखा कऽ डँटैत छथुन तँ हिम्‍मत नहि हारह।[6] कारण, जकरा सँ प्रभु प्रेम करैत छथि तकरा ओ सजाय दऽ कऽ सुधारैत छथिन, जकरा ओ पुत्र मानैत छथि तकरा ओ कोड़ा लगबैत छथिन।”[7] कष्‍ट केँ ई बुझि कऽ सहि लिअ जे परमेश्‍वर एहि द्वारा हमरा सुधारि रहल छथि। कारण ओ अहाँ केँ पुत्र मानि अहाँक संग पिता जकाँ व्‍यवहार कऽ रहल छथि। की कोनो एहन पुत्र अछि जकर पिता ओकरा सजाय दऽ कऽ नहि सुधारैत होइक?[8] जँ अहाँ सभ केँ सुधारल नहि जाइत अछि जखन की सभ बेटा केँ सुधारल जाइत छैक तँ अहाँ सभ पारिवारिक-पुत्र नहि, अनजनुआ-जन्‍मल पुत्र सभ छी।[9] एतबे नहि, जखन शारीरिक पिता अपना सभ केँ सजाय दैत छलाह आ ताहि लेल अपना सभ हुनका सभक आदर करैत छलहुँ तँ ओहि सँ बढ़ि कऽ अपन आत्‍मिक पिताक अधीन मे रहनाइ अपना सभ किएक नहि स्‍वीकार करी जाहि सँ जीवन पाबी?

इफिसी 6:1-9
[1] हौ धिआ-पुता सभ! तोँ सभ प्रभुक लोक होयबाक कारणेँ अपन माय-बाबूक आज्ञा मानह, किएक तँ यैह उचित छह।[2] धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि, “अपन माय-बाबूक आदर करह”—ई पहिल आज्ञा अछि जकरा संग एक वचनो देल गेल अछि।[3] ओ वचन ई अछि जे, “...जाहि सँ तोहर कल्‍याण होअओ और तोँ बहुतो साल धरि पृथ्‍वी पर जीबैत रहह।”[4] यौ पिता लोकनि, अहाँ सभ अपन बच्‍चा सभक संग एहन व्‍यवहार नहि करू जाहि सँ ओ सभ तंग भऽ कऽ खिसिआयल रहि जाय, बल्‍कि ओकरा सभक पालन-पोषण प्रभुक शिक्षा आ निर्देशक अनुसार करिऔक।[5] यौ दास सभ! अहाँ सभ जहिना मसीहक सेवा करितहुँ तहिना निष्‍कपट मोन सँ भय आ आदरक संग तिनका सभक आज्ञा मानू जे सभ एहि संसार मे अहाँ सभक मालिक छथि।[6] मालिक केँ खुश करबाक उद्देश्‍य सँ, जखन ओ देखैत छथि तखने मात्र अपन काज नहि करू, बल्‍कि पूरा मोन सँ परमेश्‍वरक इच्‍छा पूरा करैत अपना केँ मसीहेक दास बुझि कऽ करू।[7] अपन सेवा-काज खुशी मोन सँ करू, ई बुझैत जे मनुष्‍यक लेल नहि, बल्‍कि प्रभुक लेल करैत छी,[8] कारण, अहाँ सभ तँ जनिते छी जे प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति, ओ चाहे दास होअय वा स्‍वतन्‍त्र, ओ जे कोनो नीक काज करत, तकर प्रतिफल प्रभु सँ पाओत।[9] आब अहाँ सभ, जे मालिक छी, अहूँ सभ उचिते व्‍यवहार अपन दास सभक संग करू। डेरौनाइ-धमकौनाइ छोड़ि दिअ, एहि बातक मोन रखैत जे स्‍वर्ग मे ओकरा सभक आ अहाँ सभक एके मालिक छथि, और ओ ककरो संग पक्षपात नहि करैत छथि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT