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परमेश्वर: [आज्ञाओं]


मरकुस 10:19
मुदा अहाँ धर्म-नियमक आज्ञा सभ तँ जनिते छी—‘हत्‍या नहि करह, परस्‍त्रीगमन नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह, ककरो नहि ठकह, अपन माय-बाबूक आदर करह।’ ”

लूका 18:20
अहाँ धर्म-नियमक आज्ञा सभ तँ जनैत छी—‘परस्‍त्रीगमन नहि करह, हत्‍या नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह, अपन माय-बाबूक आदर करह।’ ”

मत्ती 22:34-40
[34] फरिसी सभ जखन सुनलनि जे यीशु सदुकी पंथक लोक सभ केँ निरुत्तर कऽ देलथिन तँ ओ सभ जमा भऽ कऽ एक संग यीशु लग अयलाह।[35] हुनका सभ मे सँ एक गोटे जे धर्म-नियमक पंडित छलाह से हुनका जँचबाक लेल पुछलथिन,[36] “यौ गुरुजी, धर्म-नियमक सभ सँ पैघ आज्ञा कोन अछि?”[37] यीशु उत्तर देलथिन, “ ‘तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ आ अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ प्रेम करह।’[38] यैह पहिल आ सभ सँ पैघ आज्ञा अछि।[39] आ दोसर सेहो ओही जकाँ अछि जे, ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’[40] सम्‍पूर्ण धर्म-नियम आ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख एही दू आज्ञा पर केन्‍द्रित अछि।”

रोमी 13:9
कारण, “परस्‍त्रीगमन नहि करह, हत्‍या नहि करह, चोरी नहि करह, लोभ नहि करह,” आ एकर बादो आओर जे कोनो आज्ञा सभ अछि, तकर सभक सारांश एहि कथन मे पाओल जाइत अछि जे, “अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करह।”

मत्ती 19:16-19
[16] यीशु लग एक युवक अयलनि आ कहलकनि, “यौ गुरुजी, हम कोन उत्तम काज करू, जाहि सँ हमरा अनन्‍त जीवन भेटत?”[17] यीशु कहलथिन, “अहाँ हमरा सँ उत्तमक विषय मे किएक पुछैत छी? उत्तम तँ मात्र एकेटा छथि। जँ अहाँ अनन्‍त जीवन मे प्रवेश करऽ चाहैत छी तँ परमेश्‍वरक आज्ञा सभक पालन करू।”[18] ओ पुछलकनि, “कोन आज्ञा सभ?” एहि पर यीशु कहलथिन, “ ‘हत्‍या नहि करह, परस्‍त्रीगमन नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह,[19] अपन माय-बाबूक आदर करह’ आ ‘अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ ”

मत्ती 22:36-40
[36] “यौ गुरुजी, धर्म-नियमक सभ सँ पैघ आज्ञा कोन अछि?”[37] यीशु उत्तर देलथिन, “ ‘तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ आ अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ प्रेम करह।’[38] यैह पहिल आ सभ सँ पैघ आज्ञा अछि।[39] आ दोसर सेहो ओही जकाँ अछि जे, ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’[40] सम्‍पूर्ण धर्म-नियम आ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख एही दू आज्ञा पर केन्‍द्रित अछि।”

मत्ती 10:17-22
[17] “लोक सभ सँ सावधान रहू। कारण, ओ सभ अहाँ सभ केँ पकड़ि कऽ पंचायत मे पंच सभक समक्ष लऽ जायत आ अपना सभाघर सभ मे अहाँ सभ केँ कोड़ा सँ पिटबाओत।[18] हमरा कारणेँ राज्‍यपाल आ राजा सभक समक्ष अहाँ सभ केँ ठाढ़ कयल जायत और अहाँ सभ हुनका सभक सामने आ गैर-यहूदी सभक सामने हमरा बारे मे गवाही देब।[19] मुदा जखन ओ सभ अहाँ सभ केँ पकड़बाओत तँ अहाँ सभ चिन्‍ता नहि करू जे हम सभ कोना बाजब वा की बाजब। जे किछु अहाँ सभ केँ बजबाक होयत, से ओही क्षण अहाँ सभ केँ मोन मे दऽ देल जायत;[20] कारण, बाजऽ वला अहाँ सभ नहि, बल्‍कि अहाँ सभक पिता-परमेश्‍वरक आत्‍मा होयताह। ओ अहाँ सभक द्वारा बजताह।[21] “भाय भाय केँ, बाबू अपना बेटा केँ मृत्‍युदण्‍डक लेल पकड़बाओत, आ बेटा-बेटी अपन माय-बाबूक विरोध मे ठाढ़ भऽ कऽ मरबाओत।[22] “अहाँ सभ सँ सभ केओ घृणा करत, एहि लेल जे अहाँ सभ हमर लोक छी। मुदा जे व्‍यक्‍ति अन्‍त तक अपना विश्‍वास मे स्‍थिर रहत से उद्धार पाओत।

रोमी 13:8-14
[8] एक-दोसराक लेल प्रेमक ऋण केँ छोड़ि अन्‍य कोनो बात मे ककरो ऋणी बनल नहि रहू, किएक तँ जे अपन पड़ोसी सँ प्रेम करैत अछि से पूरा धर्म-नियमक पालन कयने अछि।[9] कारण, “परस्‍त्रीगमन नहि करह, हत्‍या नहि करह, चोरी नहि करह, लोभ नहि करह,” आ एकर बादो आओर जे कोनो आज्ञा सभ अछि, तकर सभक सारांश एहि कथन मे पाओल जाइत अछि जे, “अपना पड़ोसी सँ अपने जकाँ प्रेम करह।”[10] प्रेम पड़ोसीक संग अन्‍याय नहि करैत अछि, तेँ प्रेम कयनाइ भेल धर्म-नियमक सम्‍पूर्ण बातक पालन कयनाइ।[11] अपना सभ कतेक महत्‍वपूर्ण समय मे रहि रहल छी, से बुझि, एहि बात सभ पर ध्‍यान दिअ। निन्‍न सँ जागि कऽ उठबाक समय आबि गेल अछि, कारण, अपना सभ जाहि समय मे विश्‍वास मे अयलहुँ, तकर अपेक्षा आब अपना सभक उद्धार पूर्ण होयबाक समय बेसी लग अछि।[12] राति समाप्‍त होमऽ-होमऽ पर अछि आ दिन होमऽ वला अछि। तेँ अपना सभ अन्‍हारक दुष्‍कर्म केँ त्‍यागि कऽ प्रकाशक अस्‍त्र केँ धारण करी।[13] अपना सभ उचित आचरण करी, जे दिनक समय मे शोभनीय होइत अछि। अपना सभ भोग-विलास आ नशेबाजी सँ, गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध आ निर्लज्‍जता सँ, झगड़ा आ ईर्ष्‍याक बात सभ सँ दूरे रही।[14] प्रभु यीशु मसीह केँ धारण करू, आ अपन पापी स्‍वभावक इच्‍छा सभ केँ तृप्‍त करबाक विचार छोड़ि दिअ।

मरकुस 12:28-34
[28] एक धर्मशिक्षक ई वाद-विवाद सुनि कऽ देखलनि जे यीशु सदूकी सभ केँ बहुत नीक जबाब देने छथिन, तँ ओ यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन जे, “सभ सँ पैघ आज्ञा कोन अछि?”[29] यीशु उत्तर देलथिन जे, “सभ सँ पैघ आज्ञा यैह अछि—‘हे इस्राएल, सुनह, प्रभु, अपना सभक परमेश्‍वर, सैह एकमात्र प्रभु छथि।[30] तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ, अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ और अपन सम्‍पूर्ण शक्‍ति सँ प्रेम करह।’[31] और दोसर पैघ आज्ञा यैह अछि जे, ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’ एहि सँ पैघ आरो कोनो आज्ञा नहि अछि।”[32] धर्मशिक्षक हुनका कहलथिन, “गुरुजी, कतेक नीक जबाब देलहुँ! अहाँ ठीके कहलहुँ जे एकेटा परमेश्‍वर छथि और हुनका छोड़ि आरो केओ नहि छथि।[33] हुनका अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ और अपन सम्‍पूर्ण शक्‍ति सँ प्रेम कयनाइ, और अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम कयनाइ सभ प्रकारक पशु-बलिदान, अग्‍नि-बलिदान और चढ़ौना सँ पैघ अछि।”[34] यीशु ई देखि कऽ जे ओ बहुत बुद्धिपूर्बक उत्तर देलनि ताहि पर हुनका कहलथिन, “अहाँ परमेश्‍वरक राज्‍य सँ दूर नहि छी।” तकरबाद ककरो हुनका आरो प्रश्‍न पुछबाक साहस नहि भेलैक।

यूहन्‍ना 14:15
“जँ हमरा सँ प्रेम करैत छी तँ हमर आज्ञाक पालन करब।

मत्ती 19:18
ओ पुछलकनि, “कोन आज्ञा सभ?” एहि पर यीशु कहलथिन, “ ‘हत्‍या नहि करह, परस्‍त्रीगमन नहि करह, चोरी नहि करह, झूठ गवाही नहि दैह,

यूहन्‍ना 15:10
अहाँ सभ जँ हमर आदेश केँ मानब तँ हमरा प्रेम मे रहब, जेना हम पिताक आदेश केँ मानने छी और हुनकर प्रेम मे रहैत छी।

मत्ती 5:17
“ई नहि सोचू जे हम मूसा द्वारा देल धर्म-नियम अथवा परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख सभ केँ रद्द करबाक लेल आयल छी। हम ओहि सभ केँ रद्द नहि, बल्‍कि पूरा करबाक लेल आयल छी।

यूहन्‍ना 15:12-17
[12] हमर आदेश ई अछि जे, जेना हम अहाँ सभ सँ प्रेम कयने छी, तेना अहाँ सभ एक-दोसर सँ प्रेम करू।[13] एहि सँ बड़का प्रेम कोनो नहि अछि जे, केओ अपन मित्रक लेल अपन प्राण देअय।[14] जँ अहाँ सभ हमर आदेश केँ पालन करैत छी तँ अहाँ सभ हमर मित्रे छी।[15] आब हम अहाँ सभ केँ ‘दास’ नहि कहब, कारण दास नहि जनैत अछि जे ओकर मालिक की करैत छथि। मुदा अहाँ सभ केँ हम ‘मित्र’ कहने छी, किएक तँ जे किछु हम अपना पिता सँ सुनने छी, से सभ अहाँ सभ केँ कहि देने छी।[16] अहाँ सभ हमरा नहि चुनलहुँ। हमहीं अहाँ सभ केँ चुनलहुँ, और नियुक्‍त कयलहुँ जे अहाँ सभ जा कऽ फड़ैत रही, तथा अहाँ सभक फल स्‍थायी रहय, जाहि सँ जे किछु अहाँ सभ हमरा नाम सँ पिता सँ माँगब, से ओ पूरा करताह।[17] हम अहाँ सभ केँ ई आदेश दैत छी, जे एक-दोसर सँ प्रेम करू।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT