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परमेश्वर: [योजनाओं]

लूका 14:28
“तहिना, मानि लिअ जे अहाँ सभ मे सँ केओ बड़का घर बनाबऽ चाहत, तँ की ओ पहिने बैसि कऽ हिसाब नहि करत जे एहि मे कतेक खर्च लागत, पूरा करबाक लेल हमरा लग पाइ अछि वा नहि?

रोमी 8:28
अपना सभ जनैत छी जे परमेश्‍वर सँ प्रेम कयनिहार लोक, अर्थात् हुनका उद्देश्‍यक अनुरूप बजाओल गेल लोक सभक लेल प्रत्‍येक परिस्‍थिति मे परमेश्‍वर भलाइ उत्‍पन्‍न करैत छथि।

फिलिप्‍पी 1:6
हमरा एहि बातक निश्‍चयता अछि जे, जे परमेश्‍वर अहाँ सभ मे नीक काज शुरू कयने छथि, से मसीह यीशुक अयबाक दिन धरि ओकरा पूरा सेहो करताह।

यूहन्‍ना 6:44
केओ हमरा लग ताबत तक नहि आबि सकैत अछि जाबत तक हमर पिता जे हमरा पठौलनि, से ओकरा हमरा लग नहि खीचि दैत छथि। और हम ओकरा अन्‍तिम दिन मे जिआ देब।

यूहन्‍ना 1:12-13
[12] तैयो जे सभ हुनका स्‍वीकार कयलक, अर्थात् जे सभ हुनका पर विश्‍वास कयलक, तकरा सभ केँ ओ परमेश्‍वरक सन्‍तान बनबाक अधिकार देलथिन।[13] ओ सभ ने मनुष्‍यक वंशज सँ जनमल, ने शारीरिक इच्‍छा सँ, और ने कोनो पुरुषक कल्‍पना सँ, बल्‍कि परमेश्‍वर द्वारा जनमल।

प्रकाशित-वाक्‍य 17:8
जाहि जानबर केँ अहाँ देखलहुँ से पहिने छल, आब नहि अछि, आ अथाह कुण्‍ड मे सँ निकलऽ वला अछि; ओ निकलत आ नष्‍ट कयल जायत। मुदा पृथ्‍वीक ओ निवासी सभ जकरा सभक नाम सृष्‍टिक आरम्‍भहि सँ जीवनक पुस्‍तक मे नहि लिखल गेल अछि, से सभ ई देखि कऽ आश्‍चर्य मे पड़ि जायत जे ओ जानबर पहिने छल, तखन नहि छल, और फेर आबि गेल अछि।

याकूब 4:1-17
[1] अहाँ सभक बीच होमऽ वला लड़ाइ-झगड़ा सभक कारण की अछि? की एकर कारण ओ भोग-विलासक अभिलाषा सभ नहि अछि जे अहाँ सभक भीतर मे संघर्ष करैत रहैत अछि?[2] अहाँ सभ कोनो बातक इच्‍छा करैत छी मुदा ओ पूरा नहि होइत अछि, तखन अहाँ सभ हत्‍या करैत छी। अहाँ सभ डाह करैत छी, मुदा अहाँ सभक लालसा पूरा नहि होइत अछि तँ लड़ैत-झगड़ैत छी। अहाँ सभ केँ एहि लेल नहि भेटैत अछि जे अहाँ सभ परमेश्‍वर सँ मँगैत नहि छियनि।[3] और जखन अहाँ सभ मँगितो छी तखन एहि लेल नहि भेटैत अछि जे अहाँ सभ गलत उद्देश्‍य सँ मँगैत छी जे, जे किछु भेटत तकरा द्वारा भोग-विलासक अभिलाषा सभ केँ तृप्‍त करी।[4] यौ बइमान लोक सभ, अहाँ सभ परमेश्‍वरक संग विश्‍वासघात कऽ रहल छी! की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे संसार सँ दोस्‍ती कयनाइ परमेश्‍वर सँ दुश्‍मनी कयनाइ अछि? तेँ जे केओ संसारक दोस्‍त बनऽ चाहैत अछि से अपना केँ परमेश्‍वरक शत्रु बना लैत अछि।[5] वा की अहाँ सभक विचार मे धर्मशास्‍त्रक ई कथन निरर्थक अछि जे, परमेश्‍वर जाहि आत्‍मा केँ अपना सभ मे वास करौलनि तकरा ओ अपने लेल चाहैत छथि?[6] नहि, ओ निरर्थक बात नहि अछि आ तेँ ओ प्रशस्‍त मात्रा मे कृपा कऽ कऽ अपना सभक सहायता करैत छथि। एहि कारणेँ धर्मशास्‍त्रक कथन अछि जे, “परमेश्‍वर घमण्‍डी सभक विरोध करैत छथि, मुदा नम्र लोक सभ पर कृपा करैत छथि।”[7] तेँ अहाँ सभ परमेश्‍वरक अधीन होउ। शैतानक आक्रमण केँ सामना करिऔक तँ ओ अहाँ सभ लग सँ पड़ायत।[8] परमेश्‍वरक लग मे आउ तँ ओहो अहाँ सभक लग मे आबि जयताह। यौ पापी लोक सभ, अपन हाथ शुद्ध करू। यौ दूमतिया लोक सभ, अपन हृदय पवित्र करू।[9] शोक मनाउ, कानू आ विलाप करू। अपन हँसी केँ शोक मे आ अपन आनन्‍द केँ उदासी मे बदलि लिअ।[10] प्रभुक समक्ष विनम्र बनू और ओ अहाँ सभ केँ सम्‍मानित करताह।[11] यौ भाइ लोकनि, अहाँ सभ एक-दोसराक निन्‍दा नहि करू। जे केओ अपन भायक निन्‍दा करैत अछि वा अपना भाय पर दोष लगबैत अछि से धर्म-नियमक निन्‍दा करैत अछि और धर्म-नियम पर दोष लगबैत अछि। जँ अहाँ धर्म-नियम पर दोष लगबैत छी तँ अहाँ ओकर पालन कयनिहार नहि, बल्‍कि ओकर न्‍याय कयनिहार भऽ गेलहुँ।[12] धर्म-नियम देबऽ वला और न्‍याय करऽ वला तँ एकेटा छथि जिनका उद्धार करबाक अथवा नाश करबाक सामर्थ्‍य छनि। तखन फेर अहाँ के छी जे अपन पड़ोसीक न्‍याय करैत छी?[13] अहाँ सभ जे कहैत छी जे, “आइ वा काल्‍हि हम सभ फलना शहर जायब, ओतऽ एक वर्ष रहब आ व्‍यापार कऽ कऽ धन कमायब,” से सुनू हमर बात।[14] काल्‍हि की होयत से अहाँ सभ नहि जनैत छी। अहाँ सभक जीवन अछिए कतेक? अहाँ सभ मेघक धुइन छी जे कनेक काल देखाइ दैत अछि आ फेर लुप्‍त भऽ जाइत अछि।[15] अहाँ सभ केँ एकर बदला मे तँ ई कहबाक चाही जे, “जँ प्रभुक इच्‍छा होनि तँ हम सभ जीवित रहब आ ई वा ओ काज करब।”[16] मुदा ई केहन बात भेल जे अहाँ सभ अपन अहंकार सँ नियारल बात सभ पर घमण्‍ड करैत छी? एहन सभ घमण्‍ड कयनाइ अधलाह बात अछि।[17] एहि लेल, जे केओ ई जनैत अछि जे की कयनाइ उचित होइत मुदा करैत नहि अछि से पाप करैत अछि।

2 पत्रुस 3:9
प्रभु अपन देल वचन पूरा करबा मे देरी नहि करैत छथि, जेना कि किछु लोक बुझैत अछि, बल्‍कि ओ अहाँ सभक प्रति धैर्य रखने छथि। ओ ई नहि चाहैत छथि जे केओ नाश होअय, बल्‍कि ई चाहैत छथि जे सभ केओ अपना पापक लेल पश्‍चात्ताप कऽ कऽ हृदय-परिवर्तन करय।

1 तिमुथियुस 2:4
कारण, हुनकर इच्‍छा ई छनि जे, सभ मनुष्‍य उद्धार पाबय आ सत्‍य केँ जानय।

मत्ती 28:18-20
[18] तखन यीशु हुनका सभक लग आबि कहलथिन, “स्‍वर्ग आ पृथ्‍वीक सम्‍पूर्ण अधिकार हमरा देल गेल अछि।[19] एहि लेल अहाँ सभ आब जा कऽ सभ जातिक लोक केँ हमर शिष्‍य बनाउ और ओकरा सभ केँ पिता, पुत्र आ पवित्र आत्‍माक नाम सँ बपतिस्‍मा दिऔक।[20] हम जतेक आदेश अहाँ सभ केँ देने छी तकर सभक पालन करबाक लेल ओकरा सभ केँ सिखाउ। मोन राखू, संसारक अन्‍त तक हम सदिखन अहाँ सभक संग छी।”

इफिसी 1:4
ओ तँ संसारक सृष्‍टिओ सँ पहिने मसीह मे अपना सभ केँ चुनलनि, जाहि सँ अपना सभ मसीह मे संयुक्‍त भऽ कऽ हुनका नजरि मे पवित्र आ निष्‍कलंक होइ।

इब्रानी 4:3
आब अपना सभ विश्‍वास करबाक कारणेँ एहि विश्राम मे प्रवेश कयनिहार छी। अविश्‍वासी पूर्वज सभक सम्‍बन्‍ध मे परमेश्‍वर ई कहलनि, “तेँ हम क्रोध मे सपत खाइत कहलहुँ जे, ई सभ हमर विश्राम मे कहियो नहि प्रवेश कऽ पाओत,” ओना तँ विश्रामक व्‍यवस्‍था कयल गेल छल, कारण, सृष्‍टिक रचनाक समय सँ हुनकर काज समाप्‍त भऽ गेल छनि।

रोमी 3:10-18
[10] जेना कि धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “कोनो मनुष्‍य धार्मिक नहि अछि, एको गोटे नहि।[11] कोनो मनुष्‍य बुझनिहार नहि अछि। एको गोटे तेहन नहि अछि जे परमेश्‍वर केँ खोजैत होअय।[12] सभ केओ भटकि गेल अछि, सभ केओ भ्रष्‍ट भऽ गेल अछि। केओ नीक काज नहि करैत अछि, एको गोटे नहि।”[13] “ओकर सभक कण्‍ठ खुजल कबर जकाँ छैक, ओकरा सभक मुँह मे छल-कपट छैक” आ “ठोर मे साँपक विष भरल छैक।”[14] “ओकर सभक मुँह सराप आ कटुता सँ भरल छैक।”[15] “ओकर सभक पयर खून करबाक लेल दौड़ैत छैक।[16] ओ सभ जतऽ-कतौ जाइत अछि ततऽ विनाश आ दुःख लऽ जाइत अछि।[17] ओ सभ शान्‍तिक बाट सँ अपरिचित अछि।”[18] “ओकरा सभक मोन मे परमेश्‍वरक डर-भय नहि छैक।”

रोमी 9:22-24
[22] जँ परमेश्‍वर अपन क्रोध देखयबाक और अपन सामर्थ्‍य प्रगट करबाक इच्‍छा रखितो कोप मे पड़ऽ वला ओहि लोक सभ केँ अधिक समय धरि सहन कयलनि जे सभ विनाशक लेल तैयार कयल गेल छल, तँ की, हुनकर से अधिकार नहि छलनि?[23] ओ एहि लेल एना कयलनि जे ओ जाहि लोक सभ पर दया कयने छथि तकरा सभ पर अपन महान्‌ महिमा प्रगट करऽ चाहलनि। ओकरा सभ केँ आरम्‍भहि सँ ओ अपन महिमा पयबाक लेल तैयार कयने छलाह।[24] हुनकर ओ दया पौनिहार लोक अपना सभ छी जकरा सभ केँ ओ मात्र यहूदीए सभ मे सँ नहि, बल्‍कि आन जाति सभ मे सँ सेहो बजौने छथि।

1 पत्रुस 2:9-10
[9] मुदा अहाँ सभ परमेश्‍वरक चुनल वंश, राज-पुरोहितक समाज, पवित्र राष्‍ट्र आ परमेश्‍वरक अपन निज प्रजा छी, जाहि सँ अहाँ सभ तिनकर महान् गुण सभक बखान करियनि जे अहाँ सभ केँ अन्‍हार मे सँ निकालि कऽ अपन अद्‌भुत इजोत मे बजा अनने छथि।[10] पहिने अहाँ सभ “प्रजा” नहि छलहुँ, मुदा आब अहाँ सभ परमेश्‍वरक प्रजा छी। पहिने अहाँ सभ पर दया नहि कयल गेल छल, मुदा आब अहाँ सभ परमेश्‍वरक दया प्राप्‍त कयने छी।

रोमी 8:18-25
[18] हम ई मानैत छी जे, जे महिमा अपना सभ मे प्रगट होमऽ वला अछि तकरा तुलना मे वर्तमान समयक कष्‍ट किछु नहि अछि।[19] ई सृष्‍टि बहुत जिज्ञासाक संग ओहि समयक प्रतीक्षा कऽ रहल अछि जहिया परमेश्‍वरक सन्‍तान सभ केँ प्रगट कयल जायत।[20] ई सृष्‍टि तँ व्‍यर्थताक अधीन कऽ देल गेल, मुदा से अपन इच्‍छा सँ नहि, बल्‍कि हुनकर इच्‍छा सँ जे एकरा अधीन कऽ देलथिन, मुदा ई आशा बनल रहल जे,[21] एक दिन आओत जहिया सृष्‍टि सरनाइ आ मरनाइक बन्‍हन सँ मुक्‍त भऽ ओहि महिमामय स्‍वतन्‍त्रता मे सहभागी बनत जे परमेश्‍वरक सन्‍तान सभक होयतैक।[22] हम सभ जनैत छी जे सम्‍पूर्ण सृष्‍टि मिलि कऽ आइ तक ओहि प्रकारक कष्‍ट सँ कुहरैत आयल अछि जेना प्रसव-पीड़ाक कष्‍ट होइत अछि।[23] मात्र वैह नहि, बल्‍कि अपनो सभ, जकरा सभ केँ परमेश्‍वरक वचनक पूर्तिक पहिल भागक रूप मे पवित्र आत्‍मा भेटल छथि, भीतरे-भीतर कुहरैत छी और एहि बातक प्रतीक्षा करैत छी जे अपना सभ पूर्ण रूप सँ परमेश्‍वरक पोषपुत्र बनाओल जायब आ शरीर सरनाइ आ मरनाइक बन्‍हन सँ छुटकारा पाबि नव कयल जायत।[24] जहिया सँ अपना सभक उद्धार भेल, तहिया सँ अपना सभ मे ई आशा बनल रहल अछि। मुदा जँ अपना सभ ओहि वस्‍तु केँ प्राप्‍त कैए लेने छी जकर आशा रखैत छी, तँ ओकरा “आशा” नहि कहल जाइत अछि। जकरा कोनो वस्‍तु प्राप्‍त भऽ गेल छैक, से तकर आशा किएक करत?[25] मुदा अपना सभ ओहि वस्‍तुक आशा करैत छी जे देखैत नहि छी, आ तेँ धैर्यपूर्बक ओकर प्रतीक्षा करैत छी।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT