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चर्च: [झूठे शिक्षक]


लूका 6:26
“धिक्‍कार अहाँ सभ केँ, जखन सभ लोक अहाँ सभक प्रशंसा करत, किएक तँ ठीक एहने व्‍यवहार ओकर सभक पूर्वज सभ ताहि लोकक संग सेहो कयने छलैक जे सभ झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहैत छल।

मत्ती 24:24
कारण, ओहि समय मे झुट्ठा मसीह आ झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहऽ वला सभ प्रगट होयत, और एहन अजगूत बात आ चमत्‍कार सभ देखाओत जे, जँ सम्‍भव रहैत, तँ परमेश्‍वरक चुनल लोक सभ केँ सेहो बहका दैत।

मत्ती 16:11-12
[11] अहाँ सभ हमर एहि बात केँ बुझि किएक नहि रहल छी जे, ‘फरिसी आ सदुकी सभक रोटी फुलाबऽ वला खमीर सँ होसियार रहू,’ से बात हम रोटीक सम्‍बन्‍ध मे नहि कहने छलहुँ?”[12] तखन शिष्‍य सभ केँ बुझऽ मे अयलनि जे यीशु रोटी फुलयबाक लेल प्रयोग होमऽ वला खमीरक सम्‍बन्‍ध मे नहि, बल्‍कि फरिसी आ सदुकी सभक शिक्षा सँ होसियार रहबाक लेल कहने छलाह।

2 तिमुथियुस 4:3-4
[3] किएक तँ एहन समय आबि रहल अछि जखन लोक सभ सही शिक्षाक बात सुनब बरदास्‍त नहि करत, बल्‍कि अपना इच्‍छाक अनुसार अपना चारू कात तेहन शिक्षक सभक भीड़ जमा करत जे ओकरा सभ केँ वैह बात सुनौतैक जे ओ सभ सुनऽ चाहैत अछि।[4] ओ सभ सत्‍य केँ सुनऽ काल मे कान मुनि लेत आ कपोल-कल्‍पित खिस्‍सा-पिहानीक पाछाँ दौड़त।

2 तिमुथियुस 4:3-4
[3] किएक तँ एहन समय आबि रहल अछि जखन लोक सभ सही शिक्षाक बात सुनब बरदास्‍त नहि करत, बल्‍कि अपना इच्‍छाक अनुसार अपना चारू कात तेहन शिक्षक सभक भीड़ जमा करत जे ओकरा सभ केँ वैह बात सुनौतैक जे ओ सभ सुनऽ चाहैत अछि।[4] ओ सभ सत्‍य केँ सुनऽ काल मे कान मुनि लेत आ कपोल-कल्‍पित खिस्‍सा-पिहानीक पाछाँ दौड़त।

मसीह-दूत 20:28-30
[28] “अहाँ सभ जे सभ मण्‍डलीक जिम्‍मेवार लोक छी, अपन आत्‍मिक जीवनक ध्‍यान राखू आ तकरो सभक जकरा सभ केँ पवित्र आत्‍मा अहाँ सभक जिम्‍मा मे राखि देने छथि। परमेश्‍वरक एहि भेँड़ाक मण्‍डली, जकरा ओ अपन पुत्रक खून सँ किनलनि, तकर अहाँ सभ चरबाह छी।[29] हम जनैत छी जे हमरा चल गेलाक बाद अति खतरनाक जंगली जानबर सभ अहाँ सभक बीच मे आओत आ भेँड़ा सभ केँ नहि छोड़त।[30] अहाँ सभक अपनो बीच सँ एहन लोक ठाढ़ होयत जे विश्‍वासी सभ केँ अपना दिस खीचि अपन चेला बनयबाक लेल सत्‍य केँ टेढ़-मेढ़ कऽ देत।

2 पत्रुस 3:14-18
[14] एहि लेल, यौ प्रिय मित्र सभ, जखन अहाँ सभ एहि बात सभक प्रतीक्षा कऽ रहल छी, तँ एहन कोशिश करू जे ओहि दिन अहाँ सभ प्रभुक दृष्‍टि मे निर्दोष आ निष्‍कलंक ठहरी आ हुनका संग मेल-मिलाप सँ रही।[15] मोन राखू जे प्रभुक धैर्य लोक केँ उद्धार पयबाक मौका दैत अछि, जेना कि अपना सभक प्रिय भाय पौलुस सेहो अपन ओहि ज्ञान सँ अहाँ सभ केँ लिखने छथि जे ज्ञान हुनका प्रभु सँ देल गेलनि।[16] ओ अपन सभ पत्र मे एके प्रकार सँ एहि बात सभक सम्‍बन्‍ध मे लिखैत छथि। हुनकर पत्र सभ मे किछु बात सभ एहन अछि जे कठिनाइ सँ बुझऽ मे अबैत अछि। अज्ञानी आ चंचल बुद्धि वला लोक सभ धर्मशास्‍त्रक आन बात सभ जकाँ एहू बात सभ केँ गलत अर्थ लगबैत अछि आ एहि तरहेँ अपन विनाशक कारण बनैत अछि।[17] यौ प्रिय मित्र सभ, अहाँ सभ एहि बात सभ केँ पहिनहि सँ जनैत छी। एहि लेल सावधान रहू। कहीं अधर्मी मनुष्‍य सभक बहकावा मे आबि कऽ अहाँ सभ अपन सुरक्षित स्‍थान सँ डगमगा कऽ खसि ने पड़ी।[18] बल्‍कि अहाँ सभ अपना सभक प्रभु आ उद्धारकर्ता यीशु मसीहक कृपा आ ज्ञान मे बढ़ैत जाउ। हुनकर गुणगान एखनो आ अनन्‍त काल धरि होइत रहनि! आमीन।

1 यूहन्‍ना 4:1-6
[1] प्रिय मित्र सभ, ताहि सभ लोकक विश्‍वास नहि करू जे कहैत अछि जे हमरा मे परमेश्‍वरक आत्‍मा छथि, बल्‍कि ओकरा सभक जाँच करू, ई बुझबाक लेल जे ओकरा मे जे आत्‍मा छैक, से परमेश्‍वरक दिस सँ अछि वा नहि। किएक तँ बहुतो लोक संसार मे निकलि गेल अछि जे झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहैत अछि।[2] परमेश्‍वरक आत्‍मा केँ अहाँ सभ एहि तरहेँ चिन्‍हि सकैत छी—जे केओ स्‍वीकार करैत अछि जे यीशु मसीह मनुष्‍य बनि कऽ अयलाह, तकरा मे परमेश्‍वरक आत्‍मा छथि।[3] मुदा जे केओ यीशु केँ एहि तरहेँ स्‍वीकार नहि करैत अछि, तकरा मे जे आत्‍मा अछि, से परमेश्‍वरक दिस सँ नहि अछि। ओकरा मे “मसीह-विरोधी”क आत्‍मा अछि, जकरा बारे मे अहाँ सभ सुनने छलहुँ जे आबऽ वला अछि, और एखनो ओ संसार मे आबि गेल अछि।[4] प्रिय बौआ सभ, अहाँ सभ ओहि झुट्ठा शिक्षक सभ पर विजयी भऽ गेल छी, कारण अहाँ सभ परमेश्‍वरक छी, और जे अहाँ सभ मे छथि, से तकरा सँ शक्‍तिशाली छथि जे संसार मे अछि।[5] ओ सभ संसारक अछि आ तेँ संसारेक बात कहैत अछि, और संसार ओकरा सभक बात सुनैत छैक।[6] मुदा अपना सभ परमेश्‍वरक छी, और जे केओ परमेश्‍वर केँ चिन्‍हैत छनि, से अपना सभक सुनैत अछि। मुदा जे केओ परमेश्‍वरक नहि अछि से अपना सभक नहि सुनैत अछि। एहि सँ अपना सभ सत्‍यक आत्‍मा और झूठक आत्‍मा चिन्‍हि सकैत छी।

मत्ती 7:15-20
[15] “ओहन लोक सँ सावधान रहू जे झूठ बाजि कऽ अपना केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहैत अछि। ओ सभ अहाँ सभक बीच भेँड़ाक वेष मे अबैत अछि, मुदा भीतर मे ओ सभ चीरि-फाड़ि देबऽ वला जंगली जानबर अछि।[16] ओकर सभक काज सभ सँ अहाँ सभ ओकरा चिन्‍हि जायब। की काँटक गाछ सँ अंगूर तोड़ल जा सकैत अछि, वा कबछुआक लत्ती सँ अंजीर-फल?[17] एहि तरहेँ प्रत्‍येक नीक गाछ मे नीक फल आ खराब गाछ मे खराब फल फड़ैत अछि।[18] ई तँ भइए नहि सकैत अछि जे नीक गाछ मे खराब फल फड़ैक आ खराब गाछ मे नीक फल।[19] जे गाछ नीक फल नहि दैत अछि से काटि कऽ आगि मे फेकल जाइत अछि।[20] तहिना एहन लोक सभ केँ अहाँ सभ ओकर सभक काज सभ सँ चिन्‍हि जायब।

2 पत्रुस 1:12-21
[12] तेँ हम बेर-बेर अहाँ सभ केँ एहि बात सभक स्‍मरण करबैत रहब, ओना तँ अहाँ सभ एहि सभ केँ पहिने सँ जनैत छी, और अहाँ सभ केँ जे सत्‍य प्राप्‍त भेल अछि, ताहि मे स्‍थिर सेहो छी।[13] हम जाबत धरि एहि शरीर रूपी डेरा मे छी, ताबत धरि एहि बात सभक स्‍मरण दिआ कऽ अहाँ सभ केँ उत्‍साहित करैत रही, से हम अपन कर्तव्‍य बुझैत छी,[14] किएक तँ हम जनैत छी जे हमरा अपन एहि शरीर केँ जल्‍दिए छोड़ि देबाक अछि, जेना कि अपना सभक प्रभु यीशु मसीह हमरा कहने छथि।[15] एहि लेल हम पूरा प्रयत्‍न करब जे अहाँ सभ हमरा चल गेलाक बादो सभ दिन एहि बात सभक याद कऽ सकी।[16] जखन हम सभ अहाँ सभ केँ सुनौलहुँ जे अपना सभक प्रभु यीशु मसीह कोना सामर्थ्‍य सँ फेर आबऽ वला छथि, तँ हम सभ चलाकी सँ गढ़ल कथा-पिहानी सभक सहारा नहि लेलहुँ, बल्‍कि हम सभ हुनकर महानता केँ अपना आँखि सँ देखने छलहुँ।[17] कारण, ओ परमेश्‍वर पिता सँ सम्‍मान आ महिमा पौलनि जखन परमेश्‍वरक दिस सँ ई आवाज सुनाइ देलकनि जे, “ई हमर प्रिय पुत्र छथि, हिनका सँ हम अति प्रसन्‍न छी।”[18] हम सभ जखन पवित्र पहाड़ पर हुनका संग छलहुँ, तँ हम सभ स्‍वयं स्‍वर्ग सँ आयल एहि आवाज केँ सुनलहुँ।[19] एहि घटना द्वारा अपना सभ लग जे परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक भविष्‍यवाणी सभ अछि, से सभ आरो विश्‍वसनीय प्रमाणित भेल अछि। हुनका सभक वचन एक प्रकाश जकाँ अछि जे अन्‍हार स्‍थान मे चमकि रहल अछि, और ई नीक होयत जे एहि वचन पर अहाँ सभ ताबत धरि ध्‍यान देने रहब जाबत धरि फरीछ नहि होयत आ अहाँ सभक हृदय मे भोरुकवा तारा नहि उगत।[20] मुदा सभ सँ पहिने अहाँ सभ ई जानि लिअ जे धर्मशास्‍त्रक कोनो भविष्‍यवाणी व्‍यक्‍तिगत विचारधाराक विषय नहि अछि,[21] किएक तँ धर्मशास्‍त्रक कोनो भविष्‍यवाणी मनुष्‍यक इच्‍छा सँ कहियो नहि भेल, बल्‍कि मनुष्‍य परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍मा द्वारा संचालित भऽ कऽ परमेश्‍वरक दिस सँ बजैत छलाह।

तीतुस 1:6-16
[6] ई आवश्‍यक अछि जे मण्‍डलीक देख-रेख कयनिहार निष्‍कलंक होथि, हुनका एकेटा स्‍त्री होनि, हुनकर बाल-बच्‍चा प्रभु पर विश्‍वास करैत होअय आ ओकरा सभ पर बदमास वा बेकहल होयबाक आरोप नहि लगाओल जा सकय।[7] किएक तँ जखन परमेश्‍वरक काज हुनका हाथ मे सौंपल गेल अछि तँ मण्‍डलीक जिम्‍मेवार केँ निष्‍कलंक होयब आवश्‍यक अछि। ओ जिद्दी, क्रोधी, शराबी, मारा-मारी कयनिहार आ अनुचित लाभ कमयबाक इच्‍छुक नहि होथि।[8] बल्‍कि ओ अतिथि-सत्‍कार कयनिहार, नीक बात सँ प्रेम कयनिहार, विचारवान, न्‍यायी, पवित्र चरित्रक आ संयमी होथि।[9] ओ विश्‍वसनीय वचनक ताहि रूप पर दृढ़ रहथि जाहि रूप मे ओ वचन हुनका सिखाओल गेलनि, जाहि सँ ओ सही सिद्धान्‍तक अनुसार लोक केँ शिक्षा दऽ सकथि आ तकर विरोधी सभ केँ निरुत्तर कऽ सकथि।[10] कारण, बहुत एहन लोक अछि जे बेकहल, बक-बक कयनिहार आ धोखेबाज अछि, विशेष रूप सँ खतना प्रथाक कट्टर समर्थक यहूदी सभ मे।[11] एकरा सभक मुँह बन्‍द कयनाइ आवश्‍यक अछि, किएक तँ एहन लोक नीच लक्ष्‍य सँ अपने लाभक लेल अनुचित बात सभ सिखा कऽ घरक-घर बिगाड़ि रहल अछि।[12] क्रेत वासी सभक अपनो एक भविष्‍यवक्‍ता कहने छथि जे, “क्रेत वासी सभ हरदम झूठ बजैत अछि, मरखाह जानबर आ आलसी पेटाह अछि।”[13] ओकरा सभक विषय मे कहल ई गवाही सत्‍य अछि। एहि लेल अहाँ ओकरा सभ केँ कड़ा चेतावनी दिऔक जाहि सँ ओकरा सभक विश्‍वास सही शिक्षा पर आधारित भऽ जाइक,[14] आ ओ सभ यहूदी सभक मनगढ़न्‍त कथा-पिहानी पर और सत्‍य केँ अस्‍वीकार करऽ वला लोक सभक विभिन्‍न नियम सभ पर ध्‍यान नहि दिअय।[15] शुद्ध मोनक लोकक लेल सभ वस्‍तु शुद्ध अछि मुदा जे सभ भ्रष्‍ट भेल अछि आ प्रभु पर विश्‍वास नहि करैत अछि, तकरा सभक लेल कोनो वस्‍तु शुद्ध नहि, कारण ओकरा सभक मोन आ विवेक दूनू दुषित भऽ गेल छैक।[16] ओ सभ अपना केँ परमेश्‍वर केँ जननिहार तँ कहैत अछि, मुदा अपना व्‍यवहार द्वारा हुनका अस्‍वीकार करैत अछि। ओ सभ घृणित अछि, आज्ञा उल्‍लंघन कयनिहार अछि और कोनो प्रकारक नीक काज करबाक जोगरक नहि अछि।

2 पत्रुस 2:1-22
[1] मुदा परमेश्‍वरक ओहि प्रवक्‍ता सभक समय मे लोकक बीच एहनो व्‍यक्‍ति सभ छल जे झूठ बाजि कऽ अपना सभ केँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता कहैत छल। तहिना अहूँ सभक बीच झुट्ठा शिक्षक सभ ठाढ़ होयत। ओ सभ गुप्‍त रूप सँ विनाश मे लऽ जाय वला गलत शिक्षा सभ देबऽ लागत, एतऽ तक जे ओ सभ ओहि स्‍वामी केँ सेहो अस्‍वीकार करतनि जे ओकरा सभक छुटकाराक लेल दाम चुका कऽ किनने छथिन, आ एहि तरहेँ ओ सभ जल्‍दिए अपन विनाशक कारण बनत।[2] बहुतो लोक ओकरा सभक निर्लज्‍ज वला चालि-चलन अपना लेत, आ ओकरा सभक कारणेँ सत्‍यक मार्गक बदनामी होयत।[3] ओ सभ लोभक कारणेँ अपन बनाओल बात सभ द्वारा अहाँ सभ सँ अनुचित लाभ उठाओत। दण्‍डक आज्ञा ओकरा सभ पर बहुत पहिनहि भऽ चुकल अछि; ओ एखनो लागू अछि, और आब ओकरा सभक विनाश नजदीक आबि गेल अछि।[4] मोन राखू जे, जे स्‍वर्गदूत सभ पाप कयलक तकरा सभ केँ परमेश्‍वर नहि छोड़लनि, बल्‍कि ओकरा सभ केँ नरकक अन्‍हार मे जंजीर सँ जकड़ि कऽ न्‍यायक दिनक प्रतीक्षा करबाक लेल राखि देलनि।[5] ओ प्राचीन कालक संसार केँ नहि छोड़ि, ओहि मेहक अधर्मी लोक केँ जल-प्रलय द्वारा नष्‍ट कऽ देलथिन, मुदा धार्मिकताक प्रचार करऽ वला नूह आ हुनका संग सात आरो व्‍यक्‍तिक रक्षा कयलथिन।[6] ओ सदोम आ गमोरा नगर सभ केँ भस्‍म कऽ विनाशक दण्‍ड देलथिन, जाहि सँ ई घटना भविष्‍यक अधर्मी सभक लेल एक चेतावनी होअय।[7] मुदा ओ लूत केँ बचौलथिन, जे धर्मी लोक छलाह आ ओहि अधर्मी लोक सभक कुकर्मी व्‍यवहारक कारणेँ दुखी छलाह।[8] कारण, ओ धर्मी पुरुष ओहि लोक सभक बीच मे रहि कऽ दिन प्रति दिन ओकरा सभक जे अधर्मक काज केँ देखैत आ सुनैत छलाह ताहि सँ हुनकर धर्मनिष्‍ठ आत्‍मा केँ घोर कष्‍ट होइत छलनि।[9] एहि तरहेँ अपना सभ देखैत छी जे प्रभु धर्मी लोक केँ संकट मे सँ बचौनाइ आ अधर्मी सभ केँ दण्‍ड देबाक लेल न्‍यायक दिन तक रखनाइ जनैत छथि,[10] विशेष रूप सँ तकरा सभ केँ, जे सभ अपना पापी स्‍वभावक अशुद्ध इच्‍छा सभक वश मे भऽ तकर सभक पूर्ति करैत अछि आ किनको अधीन मे नहि रहैत अछि। ई झुट्ठा शिक्षक सभ उदण्‍ड आ घमण्‍डी अछि, और स्‍वर्गिक प्राणी सभक निन्‍दा करऽ सँ सेहो नहि डेराइत अछि,[11] जखन कि स्‍वर्गदूत सभ, शक्‍ति आ सामर्थ्‍य मे श्रेष्‍ठ होइतो, प्रभुक सम्‍मुख ओकरा सभक निन्‍दा कऽ कऽ ओकरा सभ पर दोष नहि लगबैत छथि।[12] एहन लोक अविवेकी जानबर जकाँ अछि जे नीक-अधलाह किछु नहि बुझैत अछि आ जे पकड़ल और मारल जयबाक लेल उत्‍पन्‍न होइत अछि। ई लोक जाहि बात सभ केँ बुझितो नहि अछि, तकर निन्‍दा करैत अछि। जानबर सभ जकाँ, एकरो सभ केँ नष्‍ट कयल जयतैक।[13] ई सभ जे दोसर केँ हानि पहुँचौने अछि, तकरा बदला मे एकरा सभ केँ सेहो हानि होयतैक। एकरा सभक लेल मनोरंजनक अर्थ अछि, दिन-दुपहरक समय मे भोग-विलास कयनाइ। ई सभ कलंकित आ दुषित लोक अछि आ अहाँ सभक संग बैसि कऽ खाइत-पिबैत काल सेहो एकरा सभक मोन अपना भोग-विलासक बात सभ मे मग्‍न रहैत छैक।[14] ई सभ बिनु कुकर्मक इच्‍छा राखि, स्‍त्रीगण केँ देखिए नहि सकैत अछि। ई सभ पाप करऽ सँ चुकैत नहि अछि। ई सभ चंचल बुद्धि वला लोक सभ केँ अपना जाल मे फँसा लैत अछि। एकरा सभक मोन केँ लोभ करबाक आदत भऽ गेल छैक। एकरा सभ पर परमेश्‍वरक सराप अछि![15] ई सभ सोझका बाट छोड़ि कऽ भटकि गेल अछि, किएक तँ ई सभ बेओरक पुत्र बिलामक बाट पर चलऽ लागल अछि, जे अधर्मक मजदूरीक लोभ कयने छल।[16] मुदा ओकरा अपन अपराधक लेल एकटा गदहा सँ डाँट-फटकार सुनऽ पड़लैक—एकटा पशु, जे बात नहि करैत अछि, से मनुष्‍य जकाँ बाजऽ लागल आ एहि तरहेँ ओहि भविष्‍यवक्‍ताक पागलपन केँ रोकि देलक।[17] ई झुट्ठा शिक्षक सभ ओहन इनार अछि, जाहि मे पानि नहि छैक, ओहन मेघ अछि, जकरा हवा उड़िआ कऽ लऽ जाइत अछि। एकरा सभक लेल अन्‍हार-गुज स्‍थान निश्‍चित कयल गेल अछि।[18] कारण, ई सभ घमण्‍डक बेकार बात सभ कहैत, लोकक शारीरिक लालसा सभ केँ जगा कऽ काम-वासनाक बात सभ द्वारा ओहन लोक सभ केँ फुसला कऽ फँसा लैत अछि जे सभ हाले मे कुकर्मक बाट पर चलऽ वला सभक संगति सँ बाँचि आयल अछि।[19] ई सभ ओकरा सभ केँ स्‍वतन्‍त्र करबाक वचन दैत अछि, जखन कि ई सभ स्‍वयं भ्रष्‍टताक गुलाम अछि, किएक तँ जँ केओ कोनो बातक वश मे अछि तँ ओ तकर गुलाम भऽ गेल अछि।[20] जँ ई सभ अपना सभक प्रभु आ उद्धारकर्ता यीशु मसीह केँ चिन्‍हि कऽ संसारक अशुद्धता सँ बाँचि कऽ निकलि गेलाक बाद फेर ओहि मे फँसि कऽ ओकरे वश मे भऽ गेल, तँ एकरा सभक ई दशा पहिलुको दशा सँ अधलाह अछि।[21] जे पवित्र शिक्षा एकरा सभ केँ देल गेल छल, तकरा बुझि लेलाक बाद ओहि सँ मुँह मोड़ि लेब, ताहि सँ नीक एकरा सभक लेल ई रहैत जे एकरा सभ केँ धार्मिकताक बाटक ज्ञाने नहि प्राप्‍त भेल रहितैक।[22] एहन लोकक विषय मे ई कहावत सत्‍य ठहरैत अछि जे, “कुकुर अपन बोकरल चटबाक लेल घूमि अबैत अछि” आ “नहाओल-सोन्‍हाओल सुगरनी घूमि कऽ फेर थाल मे ओँघराय लगैत अछि।”

मत्ती 23:1-29
[1] तकरबाद यीशु जमा भेल लोकक भीड़ केँ आ अपना शिष्‍य सभ केँ कहलथिन,[2] “मूसाक धर्म-नियमक बात सिखयबाक अधिकार धर्मशिक्षक आ फरिसी सभक हाथ मे छनि।[3] तेँ ओ सभ जे किछु कहैत छथि, तकरा मानू आ करू, मुदा जे ओ सभ करैत छथि से नहि करू, कारण ओ सभ लोक सभ केँ जे सिखबैत छथि से अपने नहि करैत छथि।[4] ओ सभ भारी बोझ बान्‍हि कऽ लोकक कान्‍ह पर लादि दैत छथि मुदा तकरा उठयबाक लेल ओ सभ स्‍वयं अपन आङुरो नहि भिड़बऽ चाहैत छथि।[5] ओ लोकनि सभ काज मात्र लोकक ध्‍यान आकर्षित करबाक लेल करैत छथि। अपन तावीज सभ नमहर आकारक बनबबैत छथि आ पहिरऽ वला वस्‍त्र सभ मे लम्‍बा-लम्‍बा झालैर सभ लगबबैत छथि।[6] भोज-काज मे सम्‍मानित स्‍थान आ सभाघर सभ मे प्रमुख आसन पसन्‍द करैत छथि।[7] हाट-बजार मे लोक सभ हुनका सभ केँ प्रणाम-पात करैत रहनि आ ‘गुरुजी’ कहि कऽ सम्‍बोधन करैत रहनि, से बात सभ हुनका सभ केँ बहुत नीक लगैत छनि।[8] “मुदा अहाँ सभ ‘गुरु’ नहि कहाउ, कारण अहाँ सभक गुरु एकेटा छथि आ अहाँ सभ आपस मे भाइ-भाइ छी।[9] पृथ्‍वी पर किनको अपन धर्म-पिता नहि मानू, कारण अहाँ सभक एकेटा पिता छथि जे स्‍वर्ग मे रहैत छथि।[10] आ अहाँ सभ ‘आचार्य’ नहि कहाउ, कारण अहाँ सभक आचार्य सेहो एके गोटे छथि, अर्थात् उद्धारकर्ता-मसीह।[11] अहाँ सभ मे जे सभ सँ पैघ होइ से सभक सेवक बनू।[12] कारण, जे केओ अपना केँ पैघ बुझत से छोट बनाओल जायत, मुदा जे केओ अपना केँ छोट बुझत से पैघ बनाओल जायत।[13] “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ स्‍वर्गक राज्‍यक द्वारि लोक सभक लेल बन्‍द कऽ दैत छी। ने अपने ओहि मे प्रवेश करैत छी आ ने तकरा सभ केँ प्रवेश करऽ दैत छिऐक जे सभ प्रवेश करऽ चाहैत अछि।[14] [“यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ विधवा सभक घर-द्वारि सभ हड़पि लैत छिऐक। लोक सभ केँ देखयबाक लेल लम्‍बा-लम्‍बा प्रार्थना करैत छी। तेँ अहाँ सभ केँ बेसी दण्‍ड भेटत।][15] “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ एक गोटे केँ अपना धर्म मे अनबाक लेल पृथ्‍वी आ आकाश एकटार कऽ दैत छी, मुदा जखन ओ आबि जाइत अछि तँ ओकरा अपनो सँ दोबर नरक जयबाक जोगरक बना दैत छिऐक।[16] “यौ आन्‍हर पथ-प्रदर्शक सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ लोक सभ केँ सिखबैत छी जे, ‘जँ केओ मन्‍दिरक नाम लऽ कऽ सपत खायत, तँ तकर कोनो महत्‍व नहि अछि, मुदा जँ मन्‍दिर मे लगाओल सोनक नाम लऽ कऽ सपत खायत, तँ ओकरा अपन सपत केँ पूरा करऽ पड़तैक।’[17] अहाँ सभ आन्‍हर छी! मूर्ख छी! कोन बात पैघ अछि, लगाओल सोन वा ओ मन्‍दिर, जकरा सँ ओ सोन पवित्र भेल अछि?[18] अहाँ सभ सिखबैत छी जे, ‘जँ केओ बलि-वेदीक नाम लऽ कऽ सपत खयलक तँ से कोनो बात नहि, मुदा वेदी पर चढ़ाओल चढ़ौनाक नाम लऽ कऽ सपत खयलक तँ से पकिया बात भेल।’[19] यौ आन्‍हर सभ! कोन बात पैघ अछि, चढ़ौना वा ओ वेदी, जाहि पर अर्पण कयला सँ ओ चढ़ौना पवित्र भेल अछि?[20] तेँ, जे केओ वेदीक सपत खाइत अछि से ओहि वेदी आ ओहि पर जे किछु अछि, सभक सपत खाइत अछि।[21] तहिना, जे केओ मन्‍दिरक सपत खाइत अछि से मन्‍दिर आ ओहि मे जे वास करैत छथि, दूनूक सपत खाइत अछि,[22] और जे केओ स्‍वर्गक सपत खाइत अछि, से परमेश्‍वरक सिंहासन आ ओहि पर जे विराजमान छथि तिनको सपत खाइत अछि।[23] “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी! अहाँ सभ पुदीना, सोंफ आ जीरक दसम भाग तँ परमेश्‍वर केँ अर्पण करैत छी, मुदा धर्म-नियमक मुख्‍य बात सभ, जेना न्‍याय, करुणा आ विश्‍वसनियता सँ कोनो मतलब नहि रखैत छी। होयबाक तँ ई चाहैत छल जे अहाँ सभ बिनु ओ बात सभ छोड़ने इहो बात सभ करितहुँ।[24] यौ आन्‍हर पथ-प्रदर्शक सभ, अहाँ सभ तँ मच्‍छर केँ छानि कऽ फेकि दैत छी, मुदा ऊँट केँ घोँटि लैत छी।[25] “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ थारी-बाटी सभ केँ बाहर सँ तँ मँजैत छी, मुदा ओहि मे लूट-पाट आ स्‍वार्थ द्वारा प्राप्‍त कयल वस्‍तु सभ रखैत छी।[26] यौ आन्‍हर फरिसी, थारी-बाटी केँ पहिने भीतर सँ साफ करू, तखन ओ बाहर सँ सेहो साफ रहत।[27] “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ चून सँ पोतल कबरक चबुतरा जकाँ छी, जे बाहर सँ तँ सुन्‍दर देखाइ दैत रहैत अछि, मुदा ओकरा भीतर मे लासक हाड़ आ सभ तरहक सड़ल वस्‍तु भरल रहैत छैक।[28] तहिना अहूँ सभ बाहर सँ लोक सभ केँ धार्मिक बुझाइत छिऐक, मुदा भीतर मे पाखण्‍ड आ अधर्म सँ भरल छी।[29] “यौ धर्मशिक्षक आ फरिसी सभ, धिक्‍कार अछि अहाँ सभ केँ! अहाँ सभ पाखण्‍डी छी। अहाँ सभ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक कबर पर चबुतराक निर्माण करैत छी, धर्मी लोकक स्‍मारक केँ सजबैत छी,

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT