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बुरा चरित्र: [अप्रसन्नता]


मसीह-दूत 8:23
हम देखैत छी जे तोँ ईर्ष्‍याक विष सँ भरल आ पाप मे जकड़ल छेँ।”

कुलुस्‍सी 3:8-13
[8] मुदा आब अहाँ सभ एहि बात सभ केँ, अर्थात् तामस, क्रोध, दुष्‍ट भावना, दोसराक निन्‍दा कयनाइ आ गारि बजनाइ, छोड़ि दिअ।[9] एक-दोसर सँ झूठ नहि बाजू, किएक तँ अहाँ सभ अपन पुरान स्‍वभाव केँ ओकर अधलाह आचरण समेत त्‍यागि देने छी,[10] आ नव स्‍वभाव केँ धारण कऽ लेने छी। ई नव स्‍वभाव जँ-जँ अपना सृष्‍टिकर्ताक स्‍वरूपक अनुसार नव बनैत जाइत अछि, तँ-तँ सत्‍य ज्ञान मे बढ़ैत जाइत अछि।[11] एहि मे कोनो भेद नहि रहि गेल अछि—एहि मे ने केओ यूनानी जातिक अछि आ ने यहूदी, ने केओ खतना कराओल अछि आ ने खतना नहि कराओल, ने केओ अशिक्षित वा जंगली जातिक अछि, ने केओ गुलाम अछि आ ने स्‍वतन्‍त्र। एतऽ मसीहे सभ किछु छथि आ अपन सभ लोक मे वास करैत छथि।[12] तेँ अहाँ सभ परमेश्‍वरक चुनल लोक, हुनकर पवित्र और प्रिय लोक सभ भऽ कऽ, दयालुता, करुणा, नम्रता, कोमलता आ सहनशीलता केँ धारण करू।[13] एक-दोसराक संग सहनशील होउ, आ जँ किनको ककरो सँ सिकायत होअय, तँ एक-दोसर केँ क्षमा करू। जहिना प्रभु अहाँ सभ केँ क्षमा कऽ देलनि, तहिना अहूँ सभ क्षमा करू।

इफिसी 4:26
“जँ क्रोधित भऽ जाइ, तँ अपना क्रोध केँ पापक कारण नहि बनऽ दिअ” —सूर्य डुबऽ सँ पहिनहि अपना क्रोध सँ मुक्‍त होउ।

मरकुस 11:25
और जखन अहाँ प्रार्थनाक लेल ठाढ़ होयब, अहाँक हृदय मे जँ ककरो प्रति विरोध होअय तँ ओकरा क्षमा करू जाहि सँ अहाँक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि सेहो अहाँक अपराध क्षमा करताह।”

रोमी 3:14
“ओकर सभक मुँह सराप आ कटुता सँ भरल छैक।”

मत्ती 6:14-15
[14] अहाँ सभ जँ लोकक अपराध क्षमा करब तँ अहाँ सभक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि सेहो अहूँ सभक अपराध क्षमा करताह।[15] मुदा अहाँ सभ जँ लोकक अपराध क्षमा नहि करबैक, तँ अहाँ सभक पिता सेहो अहाँ सभक अपराध क्षमा नहि करताह।

याकूब 1:19-20
[19] यौ हमर प्रिय भाइ सभ, अहाँ सभ एहि बात केँ जानि राखू जे प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति केँ सुनबाक लेल तत्‍पर रहबाक चाही और बाजऽ आ क्रोध करऽ मे देरी करबाक चाही।[20] कारण, मनुष्‍यक क्रोध ओहि धार्मिक जीवन केँ उत्‍पन्‍न नहि करैत अछि जे परमेश्‍वर देखऽ चाहैत छथि।

इब्रानी 12:14-15
[14] सभक संग मेल-मिलाप सँ रहबाक लेल आ पवित्र जीवन बितयबाक लेल पूरा मोन सँ प्रयत्‍न करू, कारण, पवित्रताक बिना केओ परमेश्‍वर केँ नहि देखऽ पाओत।[15] सावधान रहू जाहि सँ अहाँ सभ मे सँ केओ परमेश्‍वरक कृपा सँ वंचित नहि रही, और जाहि सँ एना नहि होअय जे ककरो मोन मे ईर्ष्‍याक बीया जनमि कऽ कष्‍टक कारण बनय आ ओकर विष बहुतो केँ दुषित करय।

इफिसी 4:31-32
[31] अहाँ सभ हर तरहक कटुता, क्रोध, तामस, चिकरनाइ, दोसराक निन्‍दा कयनाइ और दुष्‍ट भावना केँ अपना सँ दूर करू।[32] एक-दोसराक प्रति दयालु बनू, एक-दोसर केँ करुणा देखाउ, और जहिना परमेश्‍वर मसीहक कारणेँ अहाँ सभ केँ क्षमा कऽ देलनि तहिना अहूँ सभ एक-दोसर केँ क्षमा करू।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT