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बुरा चरित्र: [हिंसा]


1 पत्रुस 3:9
अधलाह बातक बदला अधलाह बात सँ नहि दिअ, वा अपमानक बदला अपमान सँ नहि, बल्‍कि आशीर्वाद सँ दिअ। किएक तँ अहाँ सभ यैह करबाक लेल बजाओल गेल छी, जाहि सँ अहाँ सभ आशिष प्राप्‍त करब।

1 तिमुथियुस 3:3
ओ शराबी नहि होथि, आ मारा-मारी करऽ वला नहि, बल्‍कि नम्र होथि। ओ झगड़ा कयनिहार वा धनक लोभी नहि होथि।

इब्रानी 10:10
और परमेश्‍वरक ओही इच्‍छा द्वारा अपना सभ यीशु मसीहक शरीरक बलिदान सँ, जे सदाकालक लेल एके बेर सम्‍पन्‍न भेल, पवित्र कयल गेल छी।

रोमी 13:4
किएक तँ ओ अहाँक कल्‍याण करबाक लेल परमेश्‍वरक सेवक छथि। मुदा जँ अहाँ गलत काज करैत छी तँ हुनका सँ अवश्‍य भयभीत होउ, कारण, दण्‍ड देबाक अधिकार हुनका व्‍यर्थे नहि छनि। ओ परमेश्‍वरक सेवक छथि आ गलत काज कयनिहार लोक केँ परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार दण्‍ड दैत छथि।

रोमी 14:1
जे व्‍यक्‍ति विश्‍वास मे कमजोर अछि, तकरा स्‍वीकार करू और व्‍यक्‍तिगत विचारधाराक कारण ओकरा सँ वाद-विवाद नहि करू।

तीतुस 3:2
ककरो बदनामी नहि करथि, झगड़ा नहि करथि, विचारशील होथि आ सदिखन सभक संग नम्र व्‍यवहार करथि।

मरकुस 7:21-22
[21] किएक तँ मनुष्‍यक भीतर मे सँ, अर्थात्‌ हृदय मे सँ सभ प्रकारक अधलाह बात सभ निकलैत छैक, जेना गलत विचार सभ, गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, चोरी, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन,[22] लोभ, दुष्‍कर्म, धोखा, निर्लज्‍जता, ईर्ष्‍या, निन्‍दा, घमण्‍ड, और मूर्खता।

मत्ती 5:38-39
[38] “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘केओ जँ ककरो आँखि फोड़य तँ ओकरो आँखि फोड़ल जाय, आ केओ जँ ककरो दाँत तोड़य तँ ओकरो दाँत तोड़ल जाय।’[39] मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जँ कोनो दुष्‍ट लोक अहाँ केँ किछु करओ, तँ ओकर विरोध नहि करू। केओ जँ अहाँक दहिना गाल पर थप्‍पड़ मारय तँ ओकरा सामने दोसरो गाल कऽ दिऔक।

मत्ती 7:1-2
[1] “ककरो दोषी नहि ठहराउ जाहि सँ अहूँ सभ दोषी नहि ठहराओल जाइ।[2] जाहि तरहेँ अहाँ दोषी ठहरायब ताहि तरहेँ अहूँ दोषी ठहराओल जायब, आ जाहि नाप सँ अहाँ नापब, सैह नाप अहूँ पर लागू होयत।

गलाती 5:19-21
[19] आब देखू, पापी स्‍वभावक काज सभ स्‍पष्‍ट अछि, जेना गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, अशुद्ध विचार-व्‍यवहार, निर्लज्‍जता,[20] मुरुतक पूजा, जादू-टोना, दुश्‍मनी, लड़ाइ-झगड़ा, ईर्ष्‍या, क्रोध, स्‍वार्थ, मनमोटाब, दलबन्‍दी,[21] द्वेष, मतवालापन आ भोग-विलास आ एहि प्रकारक आन बात सभ। हम अहाँ सभ केँ एहि विषय सभ मे चेतावनी दैत छी, जेना कि पहिनो दऽ चुकल छी जे, एहन काज करऽ वला लोक सभ परमेश्‍वरक राज्‍यक उत्तराधिकारी नहि होयत।

मत्ती 26:52-54
[52] यीशु अपना शिष्‍य केँ कहलथिन, “अपन तरुआरि म्‍यान मे राखि लिअ। जे केओ तरुआरि चलबैत अछि से तरुआरि सँ मारल जायत।[53] की अहाँ ई सोचैत छी, जे हम अपन पिता सँ एहि बातक लेल निवेदन नहि कऽ सकैत छी जे ओ एही क्षण हमरा सहायताक लेल स्‍वर्गदूतक बारह सेना सँ बेसिओ पठबथि?[54] मुदा तखन धर्मशास्‍त्रक जे लेख अछि, जे ई सभ भेनाइ जरूरी अछि, से कोना पूरा होइत?”

रोमी 14:10-13
[10] तखन अहाँ अपना भाय पर किएक दोष लगबैत छी? और एम्‍हर, अहाँ जे छी, अहाँ अपना भाय केँ हेय दृष्‍टि सँ किएक देखैत छी? कारण, अपना सभ गोटे केँ तँ परमेश्‍वरक न्‍याय-सिंहासनक सम्‍मुख ठाढ़ होयबाक अछि,[11] किएक तँ धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “प्रभु कहैत छथि जे, हमर जीवनक सपत प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति हमरा समक्ष ठेहुनिया देत, आ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अपना मुँह सँ स्‍वीकार करत जे हमहीं परमेश्‍वर छी।”[12] एहि सँ ई स्‍पष्‍ट अछि जे अपना सभ मे सँ प्रत्‍येक गोटे केँ अपन जीवनक लेखा परमेश्‍वर केँ देबऽ पड़त।[13] तेँ आब सँ अपना सभ एक-दोसर पर दोष लगौनाइ छोड़ि दी। निश्‍चय कऽ लिअ जे अपन भायक बाट पर रोड़ा नहि अटकायब वा जाल नहि ओछायब।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT