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बुरा चरित्र: [बदला / प्रतिशोध]


1 पत्रुस 3:9
अधलाह बातक बदला अधलाह बात सँ नहि दिअ, वा अपमानक बदला अपमान सँ नहि, बल्‍कि आशीर्वाद सँ दिअ। किएक तँ अहाँ सभ यैह करबाक लेल बजाओल गेल छी, जाहि सँ अहाँ सभ आशिष प्राप्‍त करब।

1 थिसलुनिकी 5:15
एहि बातक ध्‍यान राखू जे, केओ अधलाह व्‍यवहारक बदला अधलाह व्‍यवहार नहि करी, बल्‍कि सदिखन एक-दोसराक लेल आ सभ लोकक लेल भलाइ करैत रहबाक प्रयास करू।

2 कोरिन्‍थी 13:11
यौ भाइ लोकनि, आब अन्‍त मे ई जे, आनन्‍दित रहू, अपना केँ सुधारू, हमर बात सभ पर ध्‍यान दिअ, आपस मे एक मोनक भऽ कऽ शान्‍तिपूर्बक रहू। तखन प्रेम आ शान्‍ति देबऽ वला परमेश्‍वर अहाँ सभक संग रहताह।

2 थिसलुनिकी 1:8
ओहि समय मे ओ तकरा सभ केँ दण्‍ड देथिन जे सभ परमेश्‍वर केँ स्‍वीकार नहि कयलक आ अपना सभक प्रभु यीशुक शुभ समाचार केँ नहि मानलक।

इब्रानी 10:30
कारण, अपना सभ तिनका चिन्‍हैत छियनि जे ई कहलनि, “बदला लेब हमरे काज अछि; हमहीं प्रतिफल देब।” और फेर इहो जे, “प्रभु अपन लोकक न्‍याय करताह।”

मरकुस 11:25
और जखन अहाँ प्रार्थनाक लेल ठाढ़ होयब, अहाँक हृदय मे जँ ककरो प्रति विरोध होअय तँ ओकरा क्षमा करू जाहि सँ अहाँक पिता जे स्‍वर्ग मे छथि सेहो अहाँक अपराध क्षमा करताह।”

रोमी 12:18-19
[18] जहाँ तक भऽ सकय, और जहाँ तक अहाँक वश मे होअय, सभ लोकक संग मेल सँ रहू।[19] प्रिय भाइ लोकनि, अहाँ सभ स्‍वयं ककरो सँ बदला नहि लिअ, बल्‍कि तकरा परमेश्‍वरक क्रोध पर छोड़ि दिअ, कारण, धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “प्रभु कहैत छथि जे, बदला लेबाक काज हमर अछि, हमहीं बदला लेब।”

रोमी 13:4
किएक तँ ओ अहाँक कल्‍याण करबाक लेल परमेश्‍वरक सेवक छथि। मुदा जँ अहाँ गलत काज करैत छी तँ हुनका सँ अवश्‍य भयभीत होउ, कारण, दण्‍ड देबाक अधिकार हुनका व्‍यर्थे नहि छनि। ओ परमेश्‍वरक सेवक छथि आ गलत काज कयनिहार लोक केँ परमेश्‍वरक इच्‍छाक अनुसार दण्‍ड दैत छथि।

मत्ती 18:21-22
[21] तकरबाद पत्रुस यीशु लग आबि कऽ पुछलथिन, “यौ प्रभु, हमर भाय जँ हमरा संग अपराध करय तँ कतेक बेर हम ओकरा क्षमा करैत रहिऐक? की सात बेर तक?”[22] यीशु कहलथिन, “हम तँ कहैत छी, सात बेर नहि, बल्‍कि सात सँ सत्तरिक जे गुणनफल होयत ततेक बेर।

मत्ती 5:38-39
[38] “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘केओ जँ ककरो आँखि फोड़य तँ ओकरो आँखि फोड़ल जाय, आ केओ जँ ककरो दाँत तोड़य तँ ओकरो दाँत तोड़ल जाय।’[39] मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, जँ कोनो दुष्‍ट लोक अहाँ केँ किछु करओ, तँ ओकर विरोध नहि करू। केओ जँ अहाँक दहिना गाल पर थप्‍पड़ मारय तँ ओकरा सामने दोसरो गाल कऽ दिऔक।

लूका 6:27-28
[27] “मुदा हम अहाँ सभ केँ, जे हमर बात सुनि रहल छी, कहैत छी जे, अपना शत्रु सभ सँ प्रेम करू; जे सभ अहाँ सँ घृणा करैत अछि, तकरा सभक संग भलाइ करू।[28] जे सभ अहाँ केँ सराप दैत अछि, तकरा सभ केँ आशीर्वाद दिऔक। जे सभ अहाँक संग दुर्व्‍यवहार करैत अछि, तकरा सभक लेल प्रभु सँ प्रार्थना करू।

इफिसी 4:31-32
[31] अहाँ सभ हर तरहक कटुता, क्रोध, तामस, चिकरनाइ, दोसराक निन्‍दा कयनाइ और दुष्‍ट भावना केँ अपना सँ दूर करू।[32] एक-दोसराक प्रति दयालु बनू, एक-दोसर केँ करुणा देखाउ, और जहिना परमेश्‍वर मसीहक कारणेँ अहाँ सभ केँ क्षमा कऽ देलनि तहिना अहूँ सभ एक-दोसर केँ क्षमा करू।

1 पत्रुस 2:21-23
[21] नीक काज करबाक कारणेँ कष्‍ट सहबाक लेल अहाँ सभ बजाओलो गेल छी, किएक तँ मसीह सेहो अहाँ सभक लेल दुःख सहि कऽ एक उदाहरण छोड़ि गेलाह, जाहि सँ अहाँ सभ हुनका पद-चिन्‍ह सभ पर चलियनि।[22] “ओ कोनो पाप नहि कयलनि, आ ने हुनका मुँह सँ कोनो छल-कपटक बात निकलल।”[23] जखन हुनका अपशब्‍द कहल गेलनि, तँ ओ उत्तर मे अपशब्‍द नहि बजलाह। जखन ओ सताओल गेलाह, तँ ओ धमकी नहि देलथिन, बल्‍कि अपना केँ तिनका इच्‍छा पर छोड़ि देलनि जे उचित न्‍यायक अनुसार न्‍याय करैत छथि।

रोमी 12:17-21
[17] केओ जँ अहाँक संग अधलाह व्‍यवहार कयलक, तँ बदला मे अहाँ ओकरा संग अधलाह व्‍यवहार नहि करू। सभक नजरि मे जे बात उचित अछि, सैह करबाक चेष्‍टा करू।[18] जहाँ तक भऽ सकय, और जहाँ तक अहाँक वश मे होअय, सभ लोकक संग मेल सँ रहू।[19] प्रिय भाइ लोकनि, अहाँ सभ स्‍वयं ककरो सँ बदला नहि लिअ, बल्‍कि तकरा परमेश्‍वरक क्रोध पर छोड़ि दिअ, कारण, धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे, “प्रभु कहैत छथि जे, बदला लेबाक काज हमर अछि, हमहीं बदला लेब।”[20] बरु, जेना लिखल अछि, “जँ अहाँक शत्रु भूखल अछि तँ ओकरा भोजन करबिऔक, जँ पियासल अछि तँ ओकरा पानि पिअबिऔक। कारण, एहि प्रकारेँ अहाँक प्रेमपूर्ण व्‍यवहार सँ ओ लाजे गलि जायत।”[21] अहाँ सभ दुष्‍टता सँ हारि नहि मानू, बल्‍कि भलाइ द्वारा दुष्‍टता पर विजयी होउ।

मत्ती 5:40-45
[40] केओ जँ अहाँ पर मोकदमा कऽ अहाँक कुर्ता लेबऽ चाहय तँ ओकरा ओढ़नो लेबऽ दिऔक।[41] जँ केओ अहाँ सँ कोनो वस्‍तु जबरदस्‍ती एक कोस उघबाबय तँ अहाँ दू कोस उघि दिऔक।[42] जे केओ अहाँ सँ किछु मँगैत अछि तकरा दिऔक, आ जे केओ अहाँ सँ पैंच लेबऽ चाहैत अछि तकरा सँ मुँह नहि घुमाउ।[43] “अहाँ सभ सुनने छी जे एना कहल गेल छल, ‘अपना पड़ोसी सँ प्रेम करह आ अपन शत्रु सँ दुश्‍मनी राखह।’[44] मुदा हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, अपना शत्रु सभ सँ प्रेम करू आ अहाँ केँ जे सभ सतबैत अछि तकरा सभक लेल प्रभु सँ प्रार्थना करू।[45] तखने अहाँ स्‍वर्ग मे रहऽ वला अपन पिताक सन्‍तान बनब। कारण, ओ दुष्‍ट आ सज्‍जन दूनू पर अपन सूर्यक प्रकाश दैत छथि, आ धर्मी और अधर्मी दूनू पर वर्षा करबैत छथि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT