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अतिरिक्त: [हैलोवीन]


1 यूहन्‍ना 1:5
जे सम्‍बाद हम सभ हुनका सँ सुनलहुँ और अहाँ सभ केँ सुनबैत छी से यैह अछि—परमेश्‍वर इजोत छथि। हुनका मे एको रत्ती अन्‍हार नहि छनि।

1 पत्रुस 5:8
अहाँ सभ अपना पर काबू राखू आ सचेत रहू। अहाँ सभक दुश्‍मन शैतान गर्जैत सिंह जकाँ घुमैत-फिरैत एहि ताक मे रहैत अछि जे ककरा फाड़ि कऽ खा ली।

2 कोरिन्‍थी 11:14
ई कोनो आश्‍चर्यक बात नहि अछि, किएक तँ शैतान स्‍वयं चमकैत स्‍वर्गदूतक रूप धारण कऽ लैत अछि।

3 यूहन्‍ना 1:11
प्रिय मित्र, अहाँ अधलाह काज देखि कऽ तेना नहि करू, बल्‍कि जे नीक अछि, तेना करू। जे केओ नीक काज करैत अछि से परमेश्‍वरक लोक अछि, मुदा जे केओ अधलाह काज करैत अछि, से परमेश्‍वर केँ कहियो नहि देखने अछि।

रोमी 14:9
एही लेल मसीह मरलाह आ जीवित भऽ उठलाह जाहि सँ ओ मरल सभ आ जीवित सभ, दूनूक प्रभु होथि।

रोमी 12:2
अहाँ सभ एहि संसारक अनुरूप आचरण नहि करू, बल्‍कि परमेश्‍वर केँ अहाँक सोच-विचार केँ नव बनाबऽ दिऔन आ तहिना अहाँ केँ पूर्ण रूप सँ बदलि देबऽ दिऔन। एहि तरहेँ परमेश्‍वर अहाँ सभ सँ की चाहैत छथि, अर्थात् हुनका नजरि मे की नीक अछि, की ग्रहणयोग्‍य अछि आ की सर्वोत्तम अछि, तकरा अहाँ सभ अनुभव सँ जानि जायब।

गलाती 5:19-21
[19] आब देखू, पापी स्‍वभावक काज सभ स्‍पष्‍ट अछि, जेना गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, अशुद्ध विचार-व्‍यवहार, निर्लज्‍जता,[20] मुरुतक पूजा, जादू-टोना, दुश्‍मनी, लड़ाइ-झगड़ा, ईर्ष्‍या, क्रोध, स्‍वार्थ, मनमोटाब, दलबन्‍दी,[21] द्वेष, मतवालापन आ भोग-विलास आ एहि प्रकारक आन बात सभ। हम अहाँ सभ केँ एहि विषय सभ मे चेतावनी दैत छी, जेना कि पहिनो दऽ चुकल छी जे, एहन काज करऽ वला लोक सभ परमेश्‍वरक राज्‍यक उत्तराधिकारी नहि होयत।

रोमी 8:38-39
[38] किएक तँ हमरा पूर्ण विश्‍वास अछि जे, ने मृत्‍यु आ ने जीवन, ने स्‍वर्गदूत आ ने नरकदूत, ने वर्तमान आ ने भविष्‍य, ने कोनो तरहक शक्‍ति,[39] ने आकाश आ ने पाताल, और ने सौंसे सृष्‍टि मे आरो कोनो वस्‍तु अपना सभ केँ परमेश्‍वरक ओहि प्रेम सँ अलग कऽ सकत जे ओ अपना सभक प्रभु, मसीह यीशु, द्वारा प्रगट कयलनि।

तीतुस 1:15
शुद्ध मोनक लोकक लेल सभ वस्‍तु शुद्ध अछि मुदा जे सभ भ्रष्‍ट भेल अछि आ प्रभु पर विश्‍वास नहि करैत अछि, तकरा सभक लेल कोनो वस्‍तु शुद्ध नहि, कारण ओकरा सभक मोन आ विवेक दूनू दुषित भऽ गेल छैक।

1 थिसलुनिकी 5:22
सभ तरहक अधलाह बात सँ दूर रहू।

इफिसी 6:12
कारण, अपना सभक संघर्ष मनुष्‍य सँ नहि अछि, बल्‍कि एहि अन्‍हार संसारक अदृश्‍य अधिपति सभ, अधिकारी सभ आ शासन करऽ वला सभ सँ अछि, आत्‍मिक क्षेत्र सभक दुष्‍ट शक्‍ति सभ सँ अछि।

मत्ती 12:43-45
[43] “दुष्‍टात्‍मा जखन कोनो मनुष्‍य मे सँ बहरा जाइत अछि तँ ओ निर्जन-स्‍थान मे आराम करबाक स्‍थानक खोज मे घुमैत रहैत अछि, मुदा ओकरा भेटैत नहि छैक।[44] तखन ओ कहैत अछि जे, ‘हम अपन पहिलुके घर मे, जतऽ सँ बहरा कऽ आयल छलहुँ, ततहि फेर जायब।’ तँ ओ जखन ओहिठाम पहुँचैत अछि तँ देखैत अछि जे ओहि घर मे केओ नहि अछि, घर झाड़ल-बहारल अछि, आ सभ वस्‍तु ढंग सँ राखल अछि।[45] तखन ओ जा कऽ अपनो सँ दुष्‍टाह सातटा आरो दुष्‍टात्‍मा केँ अपना संग लऽ अनैत अछि आ ओहि घर मे अपन डेरा खसा लैत अछि। एहि तरहेँ ओहि मनुष्‍यक ई दशा पहिलुको दशा सँ खराब भऽ जाइत छैक। एहि भ्रष्‍ट पीढ़ीक लोकक संग सेहो तहिना होयतैक।”

इफिसी 5:15-16
[15] एहि लेल, अपन आचरणक पूरा-पूरा ध्‍यान राखू। निर्बुद्धि लोक जकाँ नहि, बल्‍कि बुद्धिमान जकाँ आचरण करू।[16] हर अवसरक पूरा सदुपयोग करू, कारण, ई वर्तमान समय खराब अछि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT