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अतिरिक्त: [बुराई]


1 कोरिन्‍थी 13:6
प्रेम अधर्म सँ प्रसन्‍न नहि होइत अछि, बल्‍कि सत्‍य सँ आनन्‍दित होइत अछि।

1 यूहन्‍ना 5:19
अपना सभ जनैत छी जे परमेश्‍वरक सन्‍तान छी और सौंसे संसार शैतानक वश मे अछि।

1 पत्रुस 3:9
अधलाह बातक बदला अधलाह बात सँ नहि दिअ, वा अपमानक बदला अपमान सँ नहि, बल्‍कि आशीर्वाद सँ दिअ। किएक तँ अहाँ सभ यैह करबाक लेल बजाओल गेल छी, जाहि सँ अहाँ सभ आशिष प्राप्‍त करब।

1 थिसलुनिकी 5:22
सभ तरहक अधलाह बात सँ दूर रहू।

2 तिमुथियुस ๒:๒๒
जवानीक अधलाह लालसा सभ सँ दूर भागू और ओहन लोक जे सभ निष्‍कपट हृदय सँ प्रभु सँ प्रार्थना करैत छथि, तिनका सभक संग अहूँ धार्मिकता, विश्‍वास, प्रेम आ शान्‍तिक जीवन बितौनाइ अपन लक्ष्‍य बनाउ।

यूहन्‍ना 3:20
जे अधलाह काज करैत अछि से इजोत सँ घृणा करैत अछि और इजोत लग नहि अबैत अछि जाहि सँ ओकर काज कतौ प्रगट नहि भऽ जाइक।

रोमी 6:12
एहि लेल आब अहाँ सभ अपन नश्‍वर शरीर मे पाप केँ राज्‍य नहि करऽ दिअ जे ओकर अभिलाषा सभक अनुसार जीवन व्‍यतीत करी।

रोमी 12:21
अहाँ सभ दुष्‍टता सँ हारि नहि मानू, बल्‍कि भलाइ द्वारा दुष्‍टता पर विजयी होउ।

मरकुस 7:21-22
[21] किएक तँ मनुष्‍यक भीतर मे सँ, अर्थात्‌ हृदय मे सँ सभ प्रकारक अधलाह बात सभ निकलैत छैक, जेना गलत विचार सभ, गलत शारीरिक सम्‍बन्‍ध, चोरी, हत्‍या, परस्‍त्रीगमन,[22] लोभ, दुष्‍कर्म, धोखा, निर्लज्‍जता, ईर्ष्‍या, निन्‍दा, घमण्‍ड, और मूर्खता।

मत्ती 12:34-35
[34] “है साँपक सन्‍तान सभ, अहाँ सभ दुष्‍ट भऽ नीक बात बाजि कोना सकैत छी? कारण, जे किछु ककरो हृदय मे भरल अछि, सैह मुँह सँ बहराइत छैक।[35] नीक मनुष्‍यक मोन मे नीके बातक भण्‍डार रहैत छैक आ ओ अपन भण्‍डार मे सँ नीक वस्‍तु सभ बाहर करैत अछि। अधलाह मनुष्‍यक मोन मे अधलाहे बातक भण्‍डार रहैत छैक आ ओ अपन भण्‍डार मे सँ अधलाह वस्‍तु सभ बाहर करैत अछि।

याकूब 1:13-14
[13] प्रलोभन मे पड़ल कोनो व्‍यक्‍ति ई नहि कहय जे, “परमेश्‍वर हमरा प्रलोभन मे राखि देने छथि,” कारण, परमेश्‍वर अधलाह बात सभ सँ ने तँ स्‍वयं प्रलोभन मे पड़ि सकैत छथि आ ने अनका ककरो प्रलोभन मे रखैत छथि,[14] बल्‍कि जे प्रलोभन मे पड़ैत अछि से अपने खराब अभिलाषा सँ खिचल आ फँसाओल जाइत अछि।

याकूब 3:6-8
[6] जीह सेहो एक आगि अछि। अपना सभक शरीरक अंग सभ मे जीहे मे अधर्मक एक विशाल संसार भरल अछि। ई सम्‍पूर्ण शरीर केँ दुषित कऽ दैत अछि, आ नरकक आगि सँ पजरि कऽ अपना सभक सम्‍पूर्ण जीवनक गति मे आगि लगा दैत अछि।[7] सभ प्रकारक पशु-पक्षी, जमीन मे ससरऽ वला जीव-जन्‍तु, जल मे पाओल जाय वला जीव—सभ केँ मनुष्‍य द्वारा वश मे कयल जा सकैत अछि आ कयलो गेल अछि।[8] मुदा जीह केँ केओ वश मे नहि कऽ सकैत अछि। ई एक एहन अधलाह वस्‍तु अछि जे कखनो स्‍थिर नहि रहैत अछि। प्राण-घातक विष एकरा मे भरल छैक।

रोमी 2:29-32
[29] असल यहूदी तँ ओ अछि जे मोन सँ यहूदी अछि, और असल खतना वैह अछि जे हृदय पर कयल गेल अछि। एहन खतना लिखित धर्म-नियम पर निर्भर नहि रहैत अछि, बल्‍कि पवित्र आत्‍मा द्वारा कयल जाइत अछि। एहन लोकक प्रशंसा मनुष्‍यक दिस सँ नहि, बल्‍कि परमेश्‍वरक दिस सँ होइत अछि।[30] तखन यहूदी भेला सँ की लाभ? वा खतना करौला सँ की लाभ?[31] हर तरहेँ बहुत लाभ! पहिल बात तँ ई जे, परमेश्‍वरक वचन यहूदी सभ केँ जिम्‍मा देल गेलैक।[32] जँ ओकरा सभ मे सँ किछु लोक विश्‍वास नहि कयलक तँ तकर मतलब की भेल? की ओकरा सभक अविश्‍वास कयनाइ परमेश्‍वरक विश्‍वासयोग्‍यता केँ व्‍यर्थ ठहराओत?

रोमी 2:8-12
[8] मुदा जे केओ स्‍वार्थी लालसा सभक वश मे रहैत अछि आ सत्‍य केँ स्‍वीकार नहि करैत अछि, बल्‍कि अधर्म पर चलैत अछि, तकरा पर परमेश्‍वरक दण्‍ड आ क्रोध बरसत।[9] दुष्‍कर्म कयनिहार प्रत्‍येक मनुष्‍य पर कष्‍ट आ संकट आओत, पहिने यहूदी पर आ फेर आन जातिक लोक पर।[10] मुदा सत्‍कर्म कयनिहार प्रत्‍येक मनुष्‍य केँ सम्‍मान, आदर आ शान्‍ति भेटतैक, पहिने यहूदी केँ आ फेर आन जातिक लोक केँ।[11] किएक तँ परमेश्‍वर ककरो संग पक्षपात नहि करैत छथि।[12] ओ लोक, जकरा लग मूसा द्वारा देल गेल धर्म-नियम नहि छलैक आ ओहि अवस्‍था मे पाप कयलक से सभ बिनु धर्म-नियमक आधार पर नाश होयत, और ओ लोक, जकरा लग धर्म-नियम छलैक आ पाप कयलक तकर न्‍याय धर्म-नियमक अनुरूप कयल जयतैक।

इफिसी 6:12-16
[12] कारण, अपना सभक संघर्ष मनुष्‍य सँ नहि अछि, बल्‍कि एहि अन्‍हार संसारक अदृश्‍य अधिपति सभ, अधिकारी सभ आ शासन करऽ वला सभ सँ अछि, आत्‍मिक क्षेत्र सभक दुष्‍ट शक्‍ति सभ सँ अछि।[13] एहि लेल, परमेश्‍वरक सम्‍पूर्ण अस्‍त्र-शस्‍त्र धारण करू, जाहि सँ दुष्‍ट वला दुर्दिन जखन आओत, तँ अहाँ सभ दुष्‍टताक सामना कऽ सकी, आ अन्‍त धरि लड़ि कऽ ठाढ़ रहि सकी।[14] तेँ डाँड़ मे सत्‍यक फाँड़ बान्‍हि कऽ, धार्मिकताक कवच धारण कऽ आ शान्‍तिक सुसमाचार सुनयबाक लेल उत्‍साहक जुत्ता पयर मे पहिरि दृढ़ भऽ कऽ ठाढ़ होउ।[15] ***[16] संगहि विश्‍वासक ढाल हाथ मे लेने रहू, जकरा द्वारा अहाँ सभ दुष्‍ट शैतानक सभ अग्‍निवाण मिझा सकब।

रोमी 7:19-25
[19] कारण, जाहि नीक काज केँ हम करऽ चाहैत छी तकरा नहि करैत छी, आ जाहि अधलाह काज केँ करऽ नहि चाहैत छी तकरे करैत रहैत छी।[20] जँ हम जे नहि करऽ चाहैत छी सैह करैत छी, तँ ओ करऽ वला हम नहि, बल्‍कि पाप अछि, जे हमरा मे वास करैत अछि।[21] एहि तरहेँ हम अपना मे ई नियम पबैत छी जे, जखन हम नीक काज करबाक इच्‍छा करैत छी तँ अधलाहे काज हमरा सँ होइत अछि।[22] हम अपना अन्‍तरात्‍मा मे परमेश्‍वरक धर्म-नियम केँ तँ सहर्ष स्‍वीकार करैत छी,[23] मुदा हमरा अपना शरीर मे एक दोसरे नियम काज करैत देखाइ दैत अछि, जे ताहि नियम सँ संघर्ष करैत अछि जे हमर बुद्धि स्‍वीकार करैत अछि। हमरा शरीरक अंग मे क्रियाशील ओ नियम पाप-नियम अछि और ओ हमरा अपन बन्‍दी बना लैत अछि।[24] हम कतेक अभागल मनुष्‍य छी! एहि मृत्‍युक अधीन रहऽ वला शरीर सँ हमरा के छुटकारा दियाओत?[25] परमेश्‍वरक धन्‍यवाद होनि! वैह अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक द्वारा हमरा छुटकारा दिऔताह। अतः एक दिस तँ हम अपना बुद्धि सँ परमेश्‍वरक नियमक दास छी, मुदा दोसर दिस अपना मानवीय पाप-स्‍वभाव सँ पाप-नियमक दास छी।

मत्ती 13:36-43
[36] तकरबाद यीशु लोकक भीड़ केँ छोड़ि कऽ घर मे चल अयलाह। शिष्‍य सभ हुनका लग आबि कऽ कहलथिन, “खेत मे बाउग कयल जंगलिआ बीयाक दृष्‍टान्‍त वला बात केँ हमरा सभ केँ बुझा दिअ।”[37] ओ हुनका सभ केँ उत्तर देलथिन, “नीक बीया बाउग कयनिहार छथि मनुष्‍य-पुत्र।[38] खेत अछि संसार, आ नीक बीया अछि परमेश्‍वरक राज्‍यक सन्‍तान सभ। जंगलिआ बीया अछि दुष्‍ट शैतानक सन्‍तान सभ।[39] जंगलिआ बीया बाउग करऽ वला दुश्‍मन अछि शैतान। कटनीक समय अछि संसारक अन्‍त आ कटनी कयनिहार सभ छथि स्‍वर्गदूत सभ।[40] “जाहि तरहेँ जंगलिआ घास केँ जमा कऽ कऽ आगि मे जराओल जाइत अछि तहिना संसारक अन्‍त मे सेहो कयल जायत।[41] मनुष्‍य-पुत्र अपना स्‍वर्गदूत सभ केँ पठौताह आ ओ सभ हुनका राज्‍य मे सँ सभ प्रकारक पाप मे फँसाबऽ वला बात सभ केँ उखाड़ि कऽ आ कुकर्मी सभ केँ जमा कऽ कऽ[42] आगिक भट्ठी मे फेकि देताह, जतऽ लोक कानत आ दाँत कटकटाओत।[43] तखन धर्मी सभ अपना पिताक राज्‍य मे सूर्य जकाँ चमकताह। जकरा कान होइक, से सुनओ।

1 तिमुथियुस 6:2-10
[2] जाहि दासक मालिक प्रभु यीशु पर विश्‍वास कयनिहार छथि, से एहि कारणेँ अपन मालिकक कम आदर नहि करनि जे, ई मालिक तँ विश्‍वासक दृष्‍टिएँ हमर भाये अछि, बल्‍कि ओहि मालिक केँ आओर बढ़ियाँ सँ सेवा करनि, कारण, जाहि आदमी केँ ओकर सेवा सँ लाभ भऽ रहल अछि, से विश्‍वासी आ ओकर प्रिय भाय छथि। अहाँ विश्‍वासी सभ केँ एहि बात सभक शिक्षा दैत रहिऔक, आ ओकरा सभ सँ आग्रह करैत रहू जे एहि आज्ञा सभक पालन करओ।[3] एहि सिद्धान्‍त सभ सँ हटि कऽ जँ केओ कोनो आन शिक्षा दैत अछि आ अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक सत्‍य सिद्धान्‍त सभ केँ नहि मानैत अछि और ओहि शिक्षा सँ सहमत नहि अछि जे असली भक्‍ति उत्‍पन्‍न करैत अछि,[4] तँ ओ अहंकारी आ अज्ञानी अछि। ओकरा झगड़ा करबाक आ शब्‍द सभक विषय मे निरर्थक वाद-विवाद करबाक रोग लागल छैक। एहि प्रकारक वाद-विवाद सँ ईर्ष्‍या, दुश्‍मनी, निन्‍दा आ दोसर लोक सभ पर अधलाह सन्‍देह होमऽ लगैत अछि,[5] और ओहन लोक सभक बीच हरदम झगड़ा होमऽ लगैत छैक, जकर सभक बुद्धि भ्रष्‍ट भऽ गेल छैक, जे सभ सत्‍य सँ वंचित भऽ गेल अछि आ जे सभ भक्‍ति कयनाइ केँ लाभ कमयबाक साधन मानैत अछि।[6] भक्‍ति सँ अवश्‍य पैघ लाभ होइत अछि, मुदा तकरे, जे अपन स्‍थिति सँ सन्‍तुष्‍ट रहैत अछि।[7] किएक तँ अपना सभ एहि संसार मे ने किछु लऽ कऽ आयल छी आ ने एतऽ सँ किछु लऽ कऽ जायब।[8] तेँ जँ अपना सभ केँ भोजन आ वस्‍त्र अछि तँ ताही सँ सन्‍तुष्‍ट रही।[9] मुदा जे केओ धन जमा करऽ चाहैत अछि, से प्रलोभन मे पड़ि जाइत अछि और एहन मूर्खतापूर्ण आ हानिकारक लालसाक जाल मे फँसि जाइत अछि जे लोक सभ केँ पतन आ विनाशक खधिया मे खसा दैत छैक।[10] कारण, धनक लोभ सभ प्रकारक अधलाह बातक जड़ि अछि। एही लोभ मे पड़ि कऽ कतेको लोक सत्‍यक बाट सँ भटकि कऽ अपन विश्‍वास त्‍यागि देने अछि आ अपन मोन केँ विभिन्‍न दुःख-कष्‍ट सँ बेधि लेने अछि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT