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अतिरिक्त: [नरभक्षण का]


2 कोरिन्‍थी 5:8
हँ, हम सभ साहस रखैत छी आ एहि देह सँ अलग भऽ कऽ प्रभुक लग वला “घर पर” रहनाइ केँ सभ सँ उत्तम मानैत छी।

लूका 16:19-26
[19] “एक धनिक आदमी छल जे मलमल आ दामी-दामी वस्‍त्र पहिरैत छल। ओ सभ दिन भोज सनक भोजन करैत छल आ सुख-विलास सँ रहैत छल।[20] ओकरा दुआरि पर लाजर नामक गरीब आदमी केँ, जकर सम्‍पूर्ण शरीर घाव सँ भरल छलैक, राखि देल जाइत छलैक।[21] ओ गरीब आदमी आशा करैत छल जे धनिकक टेबुल सँ खसल टुकड़ा-टुकड़ी पाबि कऽ पेट भरब। कुकुर सभ आबि कऽ ओहि दुखिताह केँ घाव सेहो चाटि लैत छलैक।[22] “एक दिन गरीब लाजर मरि गेल आओर स्‍वर्गदूत सभ ओकरा स्‍वर्ग मे अब्राहम लग पहुँचौलनि। धनिक आदमी सेहो मरल आ माटि मे गाड़ल गेल।[23] नरक मे ओ अत्‍यन्‍त पीड़ा सहैत ऊपर दिस ताकि बहुत दूर अब्राहम केँ आ हुनका लग लाजर केँ देखलकनि।[24] ओ सोर पारलकनि जे, ‘यौ पिता अब्राहम! हमरा पर दया कऽ कऽ एहिठाम लाजर केँ पठा दिअ, जे ओ अपन आङुरक नऽह पानि मे डुबा कऽ हमर जीह केँ कनेक शीतल कऽ दिअय, हमरा एहि आगि मे बड्ड पीड़ा भऽ रहल अछि!’[25] “मुदा अब्राहम उत्तर देलथिन, ‘हौ बेटा! मोन पाड़ह जे तोँ अपना जीवन मे नीक-नीक वस्‍तु सभ पौलह, जहिना लाजर खराब वस्‍तु। आब ओ एतऽ आनन्‍द मे अछि आओर तोँ पीड़ा मे।[26] आओर एतबे नहि—हमरा सभक आ तोरा बीच मे बड़का दरारि बनाओल गेल अछि, जाहि सँ जँ केओ एतऽ सँ तोरा ओहिठाम जाय चाहत तँ नहि जा सकत, आ ने तोँ जतऽ छह, ततऽ सँ केओ हमरा सभक ओहिठाम आबि सकत।’

प्रकाशित-वाक्‍य 20:11-15
[11] तकरबाद हम एक विशाल उज्‍जर सिंहासन आ ओहि पर विराजमान व्‍यक्‍ति केँ देखलहुँ। हुनका सोझाँ सँ पृथ्‍वी आ आकाश लुप्‍त भऽ गेल और ओकर कोनो नामो-निशान नहि रहल।[12] तखन हम छोट-पैघ, सभ मरल लोक केँ सिंहासनक सम्‍मुख ठाढ़ देखलहुँ आ पुस्‍तक सभ खोलल गेल। तकरबाद एक आओर पुस्‍तक खोलल गेल जे जीवनक पुस्‍तक अछि। मरल सभक कयल कर्म, जे पुस्‍तक सभ मे लिखल गेल छलैक, ताहि अनुसार ओकरा सभक न्‍याय कयल गेलैक।[13] समुद्र ओहि मरल सभ केँ जे ओकरा मे छल, प्रस्‍तुत कयलक। तखन मृत्‍यु आ पाताल अपन-अपन मरल सभ केँ प्रस्‍तुत कयलक। ओकरा सभ मे सँ प्रत्‍येक व्‍यक्‍तिक न्‍याय ओकरा कर्मक अनुसार कयल गेलैक।[14] तकरबाद मृत्‍यु आ पाताल, दूनू केँ आगिक कुण्‍ड मे फेकि देल गेलैक। ई आगिक कुण्‍ड दोसर मृत्‍यु अछि।[15] जकरा सभक नाम जीवनक पुस्‍तक मे लिखल नहि भेटलैक तकरा सभ केँ आगिक कुण्‍ड मे फेकि देल गेलैक।

1 कोरिन्‍थी 14:34-35
[34] तहिना अहूँ सभक सभा सभ मे स्‍त्रीगण सभ केँ चुप रहबाक चाहियनि। हुनका सभ केँ बजबाक अनुमति नहि अछि, बल्‍कि धर्म-नियमक कथनानुसार ओ सभ अधीनता मे रहथु।[35] जँ ओ सभ कोनो बातक बारे मे बुझऽ चाहैत होथि तँ घर पर अपन-अपन पति सँ पुछथु, किएक तँ मण्‍डलीक सभा मे स्‍त्रीगण सभ केँ बजनाइ लाजक बात अछि।

लूका 1:37
परमेश्‍वरक लेल कोनो बात असम्‍भव नहि छनि।”

यूहन्‍ना 1:1
शुरू मे वचन रहथि। वचन परमेश्‍वरक संग छलाह, और अपने परमेश्‍वर छलाह।

1 तिमुथियुस 2:11-15
[11] स्‍त्रीगण सभ मण्‍डलीक सभा मे शान्‍त रहि कऽ अधीनताक संग सिखथि।[12] हम एहि बातक अनुमति नहि दैत छी जे स्‍त्रीगण सभ उपदेश देथि अथवा पुरुष पर हुकुम चलबथि; हुनका सभ केँ चुप रहबाक चाहियनि।[13] कारण, पहिने आदमक सृष्‍टि भेलनि, आ बाद मे हव्‍वाक।[14] दोसर बात, आदम नहि ठकयलाह, बल्‍कि हव्‍वा ठका कऽ पाप मे पड़ि गेलीह।[15] मुदा तैयो जँ स्‍त्रीगण सभ शालीनताक संग विश्‍वास, प्रेम आ पवित्रता मे स्‍थिर रहतीह, तँ अपन मातृत्‍वक कर्तव्‍य पूरा करैत उद्धार पौतीह।

1 तिमुथियुस 5:3-16
[3] ओहन विधवा सभक सम्‍मान और सहायता करू जे सभ वास्‍तव मे निःसहाय छथि।[4] जँ कोनो विधवा केँ बेटा-बेटी वा नाति-पोता सभ अछि, तँ ओहि बेटा-बेटी नाति-पोता सभ केँ सभ सँ पहिने ई सिखबाक चाही जे माय-बाबू, दाइ-बाबा सभ जे हमरा सभक पालन-पोषण कयलनि, तकरा बदला मे हुनका सभक प्रति जे हमर कर्तव्‍य अछि, से हुनका सभक देख-रेख कऽ कऽ हमरा पूरा करबाक अछि। एहन बात सँ परमेश्‍वर प्रसन्‍न होइत छथि।[5] जे विधवा वास्‍तव मे निःसहाय छथि, जिनका केओ देखऽ वला नहि छनि, से परमेश्‍वर पर भरोसा राखि राति-दिन हुनका सँ विनती करैत प्रार्थना मे लागल रहैत छथि।[6] मुदा जे विधवा भोग-विलास मे लिप्‍त भऽ गेल अछि, से जीवित होइतो मरल अछि।[7] अहाँ एहि बात सभक सम्‍बन्‍ध मे मण्‍डलीक लोक सभ केँ ई आज्ञा सभ दिऔक, जाहि सँ एहि क्षेत्र मे ओ सभ निन्‍दा सँ बाँचल रहि सकय।[8] जे केओ अपन सम्‍बन्‍धी सभक आ विशेष कऽ अपने परिवारक सदस्‍य सभक देख-रेख नहि करैत अछि, से विश्‍वास त्‍यागि देने अछि और अविश्‍वासिओ सँ भ्रष्‍ट अछि।[9] जखन ओहि विधवा सभक नाम लिखऽ लागब, जिनका सभ केँ मण्‍डली द्वारा मदति भेटबाक चाही, तँ मात्र ओही विधवा सभक नाम लिखब जे सभ साठि वर्ष सँ कम वयसक नहि होथि, पतिव्रता रहल होथि,[10] और भलाइक काज कयनिहारिक रूप मे चिन्‍हल-जानल जाइत होथि, अर्थात् अपन बाल-बच्‍चा सभक नीक सँ पालन-पोषण कयने होथि, अतिथि सभक सत्‍कार कयने होथि, प्रभुक लोक सभक पयर धोने होथि, दीन-दुखी सभक सहायता कयने होथि आ सभ प्रकारक भलाइक काज मे अपना केँ समर्पित कयने होथि।[11] मुदा जबान विधवा सभक नाम विधवा-सूची मे सम्‍मिलित नहि कयल जाय। किएक तँ यीशु मसीहक लेल जे ओकरा सभक समर्पण अछि ताहि सँ तेज जखन ओकरा सभक शारीरिक काम-वासना होमऽ लगैत छैक तँ विवाह करऽ चाहैत अछि[12] और एहि तरहेँ ओ सभ अपन पहिने कयल प्रतिज्ञा केँ तोड़ि दोषी बनि जाइत अछि।[13] एतबे नहि, समय बरबाद कयनाइ आ अङने-अङने घुमनाइ ओकरा सभक आदत भऽ जाइत छैक। एहि तरहेँ ओ सभ मात्र आलसिए नहि, बल्‍कि ओहन-ओहन बात बाजि जे नहि बजबाक चाही, महा बजक्‍करि, आ दोसराक काज मे टाँग अड़ौनिहारि बनि जाइत अछि।[14] तेँ हम चाहैत छी जे जबान विधवा सभ विवाह करय, सन्‍तान उत्‍पन्‍न करय आ अपन घर-व्‍यवहार चलाबय, जाहि सँ विरोधी केँ मण्‍डलीक निन्‍दा करबाक अवसर नहि भेटैक,[15] कारण, एखनो तँ किछु विधवा भटकि कऽ शैतानक बाट पर चलि गेल अछि।[16] जँ कोनो विश्‍वासी स्‍त्रीगणक परिवार मे विधवा सभ छथि, तँ ओ हुनका सभक सहायता करथि। ओहन विधवाक भार मण्‍डली पर नहि राखल जाय, जाहि सँ मण्‍डली ताहि विधवा सभक सहायता कऽ सकय जिनका केओ नहि छनि।

1 कोरिन्‍थी 11:2-16
[2] हम अहाँ सभक प्रशंसा करैत छी जे अहाँ सभ प्रत्‍येक बात मे हमर ध्‍यान रखैत छी आ हमरा सँ जे शिक्षा अहाँ सभ केँ भेटल अछि ताहि मे दृढ़ बनल रहैत छी।[3] मुदा हम चाहैत छी जे अहाँ सभ ई बुझी जे प्रत्‍येक पुरुषक ⌞प्रमुख, अर्थात्‌,⌟ “सिर”, मसीह छथि, स्‍त्रीक “सिर” पुरुष छथि आ मसीहक “सिर” परमेश्‍वर छथि।[4] कोनो पुरुष जे सिर झाँपि कऽ प्रार्थना करैत अछि वा परमेश्‍वर सँ भेटल सम्‍बाद सुनबैत अछि से अपन सिरक अपमान करैत अछि।[5] कोनो स्‍त्री जे सिर उघाड़ि कऽ प्रार्थना करैत अछि वा परमेश्‍वर सँ भेटल सम्‍बाद सुनबैत अछि से अपन सिरक अपमान करैत अछि किएक तँ ओ एहन बात होइत जेना ओ पूरा मूड़ीक केश छिलौने रहैत।[6] कारण, जँ स्‍त्री अपन सिर नहि झाँपय तँ ओ अपन केश कटबा लओ। मुदा जँ स्‍त्रीक लेल पूरा मूड़ीक केश कटौनाइ वा छिलौनाइ लाजक बात अछि तँ ओ अपन सिर झाँपओ।[7] पुरुष केँ अपन सिर नहि झँपबाक चाहिऐक, किएक तँ पुरुष परमेश्‍वरक प्रतिरूप आ हुनकर गौरव अछि। तहिना स्‍त्री पुरुषक गौरव अछि[8] किएक तँ स्‍त्री सँ पुरुष नहि बनाओल गेल, बल्‍कि पुरुष सँ स्‍त्री,[9] आ स्‍त्रीक लेल पुरुषक सृष्‍टि नहि भेल, बल्‍कि पुरुषक लेल स्‍त्रीक।[10] एहि कारणेँ, आ स्‍वर्गदूत सभक कारणेँ सेहो, स्‍त्रीगण सभ केँ अधिकारक चिन्‍ह केँ अपना सिर पर रखबाक चाही।[11] तैयो प्रभुक विधानक अनुसार स्‍त्री आ पुरुष दूनू एक-दोसर पर निर्भर रहैत अछि।[12] कारण, जहिना पुरुष सँ स्‍त्रीक सृष्‍टि भेल तहिना पुरुषक जन्‍म स्‍त्री सँ होइत अछि आ सभ बातक मूलस्रोत परमेश्‍वरे छथि।[13] अहीं सभ विचार करू—की ई उचित अछि जे स्‍त्री बिनु सिर झँपने परमेश्‍वर सँ प्रार्थना करय?[14] जे स्‍वभाविक बात सभ अछि, की ताहि सँ अहाँ सभ केँ ई शिक्षा नहि भेटैत अछि जे पुरुषक लेल लम्‍बा केश रखनाइ लाजक बात अछि?[15] मुदा स्‍त्रीक लेल लम्‍बा केश ओकर शोभा छैक। किएक तँ ओकर झापनक रूप मे ओकरा लम्‍बा केश देल गेल छैक।[16] मुदा जँ केओ एहि विषय मे विवाद करऽ चाहय तँ ओ ई जानि लओ जे ने तँ हमरा सभक बीच कोनो दोसर प्रथा प्रचलित अछि आ ने परमेश्‍वरक मण्‍डली सभ मे।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT