A A A A A

अतिरिक्त: [टैटू]


1 कोरिन्‍थी 6:18-20
[18] अनैतिक सम्‍बन्‍ध सँ दूर रहू। आरो सभ पाप जे मनुष्‍य करैत अछि, से शरीर सँ हटल अछि, मुदा जे ककरो संग अनैतिक सम्‍बन्‍ध रखैत अछि से अपना शरीरेक विरुद्ध पाप करैत अछि।[19] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभक शरीर परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍माक मन्‍दिर अछि, जे आत्‍मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि आ जे अहाँ सभ केँ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त भेल छथि? अहाँ सभ अपन नहि छी।[20] अहाँ सभ दाम दऽ कऽ किनल गेल छी। एहि लेल अपना शरीर द्वारा परमेश्‍वरक सम्‍मान करू।

प्रकाशित-वाक्‍य 19:16
हुनका वस्‍त्र आ हुनका जाँघ पर ई नाम लिखल अछि, “राजा सभक राजा आ प्रभु सभक प्रभु।”

1 कोरिन्‍थी 10:23-31
[23] “सभ किछु करबाक स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा सभ किछु हितकर नहि अछि। “सभ किछु करबाक स्‍वतन्‍त्रता अछि”—मुदा सभ किछु लाभदायक नहि अछि।[24] सभ केँ अपन नहि, बल्‍कि दोसर लोकक हितक ध्‍यान रखबाक चाही।[25] बजार मे जे माँसु बिकाइत अछि तकरा अहाँ निश्‍चिन्‍ततापूर्बक खा सकैत छी। ओ माँसु चढ़ाओल अछि वा नहि तकर पूछ-ताछ नहि करऽ लागू,[26] किएक तँ धर्मशास्‍त्र मे लिखल अछि जे “पृथ्‍वी आ ओहि परक जे किछु अछि से सभ प्रभुक छनि।”[27] जँ अविश्‍वासी सभ मे सँ केओ अहाँ केँ निमन्‍त्रण दय आ अहाँ जाय चाही तँ जाउ आ ओतऽ जे किछु अहाँ केँ परसल जाइत अछि तकरा निश्‍चिन्‍ततापूर्बक बिनु कोनो प्रश्‍न कयने खाउ।[28] मुदा जँ केओ कहय जे, “ओ प्रसाद अछि,” तँ कहनिहारक हितक लेल आ जाहि सँ विवेक केँ हानि नहि पहुँचय ओ वस्‍तु नहि खाउ।[29] हमर कहबाक अर्थ अहाँक विवेक सँ नहि, बल्‍कि ओहि दोसर आदमीक विवेक सँ अछि। किएक तँ हमर स्‍वतन्‍त्रता दोसराक विवेकक अनुसार किएक दोषी ठहरय?[30] जँ हम धन्‍यवाद दऽ कऽ भोजन करैत छी तँ जाहि वस्‍तुक लेल हम परमेश्‍वर केँ धन्‍यवाद देने छी ताहि सँ हमर निन्‍दा किएक होअय?[31] अहाँ सभ खाइ वा पिबी वा जे किछु करी, सभ किछु एहि लेल करू जाहि सँ परमेश्‍वरक महिमा प्रगट होनि।

इफिसी 5:10
ई सिखबाक कोशिश करैत रहू जे कोन-कोन बात सँ प्रभु प्रसन्‍न होइत छथि।

1 कोरिन्‍थी 3:16-17
[16] की अहाँ सभ नहि जनैत छी जे अहाँ सभ गोटे मिलि कऽ परमेश्‍वरक मन्‍दिर छी आ परमेश्‍वरक आत्‍मा अहाँ सभ मे वास करैत छथि?[17] जँ केओ परमेश्‍वरक मन्‍दिर केँ नष्‍ट करत तँ परमेश्‍वर ओकरा नष्‍ट कऽ देथिन, किएक तँ परमेश्‍वरक मन्‍दिर पवित्र अछि आ ओ मन्‍दिर अहाँ सभ छी।

1 कोरिन्‍थी 9:27
हम अपना शरीर केँ कष्‍ट दऽ कऽ वश मे रखैत छी। नहि तँ कतौ एना नहि भऽ जाय जे दोसर लोक केँ उपदेश देलाक बाद हम स्‍वयं पुरस्‍कार पयबाक लेल अयोग्‍य ठहरी।

रोमी 12:1
तेँ यौ भाइ लोकनि, हम अहाँ सभ सँ आग्रह करैत छी जे, परमेश्‍वरक अपार दयाक कारणेँ जे ओ अपना सभ पर कयने छथि, अहाँ सभ अपना शरीर केँ जीवित, पवित्र आ परमेश्‍वर द्वारा ग्रहणयोग्‍य बलिदानक रूप मे हुनका अर्पित करू। यैह भेल अहाँ सभक लेल परमेश्‍वरक असली आत्‍मिक आराधना कयनाइ।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT