A A A A A

अतिरिक्त: [प्रतिभा]


इफिसी 2:10
किएक तँ अपना सभ परमेश्‍वरेक हाथक कारीगरी छी—ओ अपना सभ केँ मसीह यीशु मे संयुक्‍त कऽ कऽ अपना सभक नव सृष्‍टि कयलनि, आ से एहि लेल जे अपना सभ ओ नीक काज सभ करी, जे काज ओ अपना सभक लेल पहिने सँ तैयार कयने छथि।

याकूब 1:17
प्रत्‍येक नीक आ उत्तम दान जे अछि, से ऊपर सँ अबैत अछि। सूर्य, चन्‍द्रमा आ तारा सभक रचनिहार, पिता, जे छाया जकाँ नहि बदलैत छथि, तिनके सँ ई दान सभ भेटैत अछि।

1 कोरिन्‍थी 12:5-6
[5] सेवाक काज सेहो अनेक प्रकारक अछि मुदा एकेटा प्रभु छथि जिनकर सेवा कयल जाइत अछि।[6] काज अनेक तरीका सँ होइत अछि मुदा सभ लोक मे एकेटा परमेश्‍वर ओहि सभ काज मे क्रियाशील छथि।

1 पत्रुस 4:10-11
[10] अहाँ सभ मे सँ प्रत्‍येक गोटे केँ परमेश्‍वर सँ वरदान भेटल अछि। आब परमेश्‍वरक विश्‍वस्‍त सेवक जकाँ हुनकर कृपाक विभिन्‍न गुणक वरदान सभ केँ एक-दोसराक सेवा मे लगाउ।[11] जे केओ उपदेश दैत छथि, से एना देथि जेना परमेश्‍वरेक बात सभ बाजि रहल छथि। जे दोसराक सहायता करैत छथि, से ओहि बल सँ करथि जे परमेश्‍वर दैत छथि, जाहि सँ सभ बात मे यीशु मसीहक माध्‍यम सँ परमेश्‍वरक स्‍तुति होनि। महिमा आ सामर्थ्‍य युगानुयुग परमेश्‍वरेक छनि। आमीन।

मत्ती 5:14-16
[14] “अहाँ सभ संसारक प्रकाश छी। पहाड़ परक नगर नुकायल नहि रहि सकैत अछि।[15] लोक डिबिया लेसि कऽ पथिया सँ नहि झँपैत अछि, बल्‍कि लाबनि पर रखैत अछि, और ओ डिबिया घर मे सभक लेल प्रकाश दैत छैक।[16] एहि तरहेँ अहूँ सभ अपन प्रकाश लोकक बीच चमकाउ, जाहि सँ लोक अहाँ सभक नीक काज देखि कऽ, अहाँक पिताक, जे स्‍वर्ग मे छथि, तिनकर स्‍तुति करनि।

मत्ती 6:1-4
[1] “होसियार रहू, लोक केँ देखयबाक लेल अपन ‘धर्म-कर्म’ नहि करू, नहि तँ अहाँ केँ अपन पिता सँ, जे स्‍वर्ग मे छथि, कोनो फल नहि भेटत।[2] “अहाँ जखन गरीब सभ केँ दान दैत छी तखन तकर ढोल नहि पिटू, जेना पाखण्‍डी लोक सभाघर मे और रस्‍ता सभ मे करैत रहैत अछि, जाहि सँ लोक ओकर प्रशंसा करैक। हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, लोकक प्रशंसा पाबि ओ सभ ओहि सँ बेसी कोनो इनामक बाट बेकार ताकत।[3] “मुदा अहाँ जखन दान करी तखन अहाँक ई काज एतेक गुप्‍त होअय जे अहाँक बामा हाथ सेहो नहि जानय जे अहाँक दहिना हाथ की कऽ रहल अछि। तखन अहाँक पिता जे गुप्‍त काज केँ सेहो देखैत छथि, से अहाँ केँ तकर प्रतिफल देताह।[4] ***

रोमी 12:3-8
[3] हम ओहि वरदानक अधिकार सँ जे प्रभु अपना कृपा सँ हमरा देलनि, अहाँ सभ मे सँ प्रत्‍येक केँ ई कहैत छी जे, केओ अपना केँ जतेक बुझक चाही, ताहि सँ बेसी महत्‍वपूर्ण नहि बुझू, बल्‍कि परमेश्‍वर सँ देल गेल विश्‍वासक नाप सँ प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अपन सन्‍तुलित मूल्‍यांकन करू।[4] किएक तँ जहिना अपना सभ गोटे केँ एकटा शरीर अछि जाहि मे अनेक अंग होइत अछि आ सभ अंगक काज एक समान नहि होइत अछि,[5] तहिना अपनो सभ अनेक होइतो मसीह मे एके शरीर छी आ सभ अंग एक-दोसराक अछि।[6] अपना सभ पर कयल गेल कृपाक अनुसार अपना सभ केँ भेटल वरदान सेहो भिन्‍न-भिन्‍न अछि। जँ किनको परमेश्‍वर सँ सम्‍बाद पाबि सुनयबाक वरदान भेटल होनि तँ ओ अपना विश्‍वासक अनुरूप तकर ठीक-ठीक उपयोग करथु,[7] जँ सेवा करबाक तँ सेवाक काज मे लागल रहथु। जँ किनको शिक्षा देबाक वरदान भेटल होनि तँ शिक्षा देबाक काज मे लागल रहथु,[8] आ जँ दोसर केँ विश्‍वास मे उत्‍साहित करबाक वरदान भेटल होनि, तँ उत्‍साह दैत रहथु। दान देबऽ वला हृदय खोलि कऽ देथु। अगुआ सभ कर्मठ भऽ कऽ अगुआइ करथु, आ दया करऽ वला सभ खुशी मोन सँ उपकार करथु।

1 कोरिन्‍थी 12:1-11
[1] यौ भाइ लोकनि, हम चाहैत छी जे अहाँ सभ आत्‍मिक वरदान सभक विषय मे ठीक सँ बुझी।[2] अहाँ सभ केँ बुझले अछि जे जखन अहाँ सभ प्रभु सँ अपरिचित छलहुँ तखन कोनो ने कोनो तरहेँ प्रभावित भऽ अहाँ सभ बौक मुरुत सभक दिस भटकाओल जाइत छलहुँ।[3] एहि लेल हम अहाँ सभ केँ कहि दैत छी जे परमेश्‍वरक आत्‍माक प्रेरणा सँ बाजऽ वला केओ एना नहि कहैत अछि जे, “यीशु सरापित होओ” आ ने पवित्र आत्‍माक प्रेरणा बिना केओ ई कहि सकैत अछि जे, “यीशुए प्रभु छथि।”[4] वरदान विभिन्‍न प्रकारक अछि मुदा वरदान देबऽ वला पवित्र आत्‍मा एकेटा छथि।[5] सेवाक काज सेहो अनेक प्रकारक अछि मुदा एकेटा प्रभु छथि जिनकर सेवा कयल जाइत अछि।[6] काज अनेक तरीका सँ होइत अछि मुदा सभ लोक मे एकेटा परमेश्‍वर ओहि सभ काज मे क्रियाशील छथि।[7] सभक हितक लेल एक-एक व्‍यक्‍ति मे पवित्र आत्‍माक उपस्‍थिति कोनो ने कोनो रूप मे प्रगट कयल जाइत अछि।[8] पवित्र आत्‍मा द्वारा किनको बुद्धिपूर्ण बात बजबाक आ किनको ओही पवित्र आत्‍मा द्वारा ज्ञानक बात बजबाक वरदान भेटैत अछि।[9] किनको ओही पवित्र आत्‍मा द्वारा विशेष विश्‍वास आ किनको ओही पवित्र आत्‍मा द्वारा बिमार लोक केँ स्‍वस्‍थ करबाक वरदान सभ देल जाइत अछि,[10] किनको चमत्‍कारक काज सभ करबाक वरदान, किनको प्रभुक दिस सँ सम्‍बाद पयबाक आ सुनयबाक वरदान, किनको ई चिन्‍हबाक वरदान जे कोनो बात परमेश्‍वरक आत्‍माक दिस सँ अछि वा दोसर आत्‍माक दिस सँ, किनको अनजान भाषा बजबाक वरदान आ किनको ओहि भाषा सभक अर्थ बुझयबाक वरदान देल जाइत अछि।[11] ई सभ ओही एक पवित्र आत्‍माक काज छनि जे अपन इच्‍छाक अनुसार एक-एक व्‍यक्‍ति केँ वरदान बँटैत छथि।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT