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अतिरिक्त: [उदासी]


मत्ती 5:4
धन्‍य अछि ओ सभ जे शोक करैत अछि, किएक तँ ओ सभ सान्‍त्‍वना पाओत।

मत्ती 11:28
“हे थाकल आ बोझ सँ पिचायल लोक सभ, हमरा लग आउ। हम अहाँ सभ केँ विश्राम देब।

1 पत्रुस 5:7
अपन सम्‍पूर्ण चिन्‍ता हुनका पर राखि दिअ, किएक तँ हुनका अहाँ सभक चिन्‍ता छनि।

1 कोरिन्‍थी 10:13
अहाँ सभ कहियो कोनो एहन परीक्षा मे नहि पड़लहुँ जे मनुष्‍य सभ केँ नहि होइत रहैत अछि। परमेश्‍वर विश्‍वासयोग्‍य छथि। ओ अहाँ सभ केँ एहन परीक्षा मे नहि पड़ऽ देताह जे अहाँ सभक सहनशक्‍ति सँ बाहर होअय। ओ परीक्षाक समय मे तकरा सहबाक साहस दैत अहाँ सभ केँ पार कऽ निकलबाक उपाय सेहो उपलब्‍ध करौताह।

1 पत्रुस 5:6-7
[6] एहि लेल परमेश्‍वरक सामर्थी हाथक नीचाँ नम्र बनू, जाहि सँ ओ अहाँ सभ केँ उचित समय पर सम्‍मानित करथि।[7] अपन सम्‍पूर्ण चिन्‍ता हुनका पर राखि दिअ, किएक तँ हुनका अहाँ सभक चिन्‍ता छनि।

रोमी 12:2
अहाँ सभ एहि संसारक अनुरूप आचरण नहि करू, बल्‍कि परमेश्‍वर केँ अहाँक सोच-विचार केँ नव बनाबऽ दिऔन आ तहिना अहाँ केँ पूर्ण रूप सँ बदलि देबऽ दिऔन। एहि तरहेँ परमेश्‍वर अहाँ सभ सँ की चाहैत छथि, अर्थात् हुनका नजरि मे की नीक अछि, की ग्रहणयोग्‍य अछि आ की सर्वोत्तम अछि, तकरा अहाँ सभ अनुभव सँ जानि जायब।

प्रकाशित-वाक्‍य 21:3-4
[3] तखन हमरा सिंहासन सँ एक आवाज जोर सँ ई कहैत सुनाइ पड़ल, “देखू, परमेश्‍वरक निवास आब मनुष्‍यक बीच मे छनि। परमेश्‍वर ओकरा सभक संग निवास करताह। ओ सभ हुनकर प्रजा होयत आ परमेश्‍वर अपने ओकरा सभक बीच रहि कऽ ओकरा सभक परमेश्‍वर होयथिन।[4] ओ ओकरा सभक आँखिक सभ नोर पोछि देथिन। तकरबाद ने मृत्‍यु रहत, ने शोक, ने विलाप आ ने कष्‍ट, किएक तँ पहिलुका बात सभ समाप्‍त भऽ गेल अछि।”

रोमी 12:15
जे केओ आनन्‍दित अछि, तकरा संग आनन्‍द मनाउ, आ जे केओ शोकित अछि तकरा संग शोक।

प्रकाशित-वाक्‍य 7:16-17
[16] एकरा सभ केँ ने तँ कहियो फेर भूख लगतैक आ ने पियास। एकरा सभ केँ ने तँ प्रचण्‍ड रौद सँ कष्‍ट होयतैक आ ने लू लगतैक।[17] किएक तँ बलि-भेँड़ा जे सिंहासनक बीच विद्यमान छथि, से एकरा सभक चरबाह रहथिन आ एकरा सभ केँ जीवनक जलक झरना लग लऽ जयथिन। और परमेश्‍वर एकरा सभक आँखिक सभ नोर पोछि देथिन।”

इफिसी 4:30
परमेश्‍वरक पवित्र आत्‍मा केँ दुखी नहि करिऔन, किएक तँ पवित्र आत्‍मा स्‍वयं अहाँ सभ पर परमेश्‍वरक लगाओल छाप छथि जे एहि बात केँ पक्‍का करैत अछि जे छुटकाराक दिन मे अहूँ सभक छुटकारा होयत।

2 कोरिन्‍थी 7:10
किएक तँ परमेश्‍वरक सम्‍मुख जे श्रद्धापूर्ण दुःख होइत अछि से पापक लेल एहन पश्‍चात्ताप और हृदय-परिवर्तन उत्‍पन्‍न करबैत अछि, जकर परिणाम होइत अछि उद्धार, आ ओहि सँ लोक केँ पछताय नहि पड़ैत छैक, मुदा सांसारिक दुःखक परिणाम मृत्‍यु होइत अछि।

मत्ती 27:46
करीब तीन बजे मे यीशु बहुत जोर सँ बजलाह जे, “एली, एली, लामा सबक्‍तनी”, जकर अर्थ ई अछि, “हे हमर परमेश्‍वर, हे हमर परमेश्‍वर, हमरा अहाँ किएक छोड़ि देलहुँ?”

1 पत्रुस 1:6-7
[6] ई अहाँ सभक लेल बड़का आनन्‍दक विषय अछि, ओना तँ भऽ सकैत अछि जे एखन किछु समयक लेल अहाँ सभ अनेक प्रकारक कष्‍ट मे पड़ि कऽ दुखी होइ।[7] ई कष्‍ट सभ एहि लेल अबैत अछि जाहि सँ अहाँ सभक विश्‍वास परीक्षा द्वारा असली प्रमाणित होअय। सोन, नष्‍ट होमऽ वला होइतो, आगि मे तपा कऽ शुद्ध कयल जाइत अछि, आ अहाँ सभक विश्‍वास तँ सोन सँ कतेक मूल्‍यवान अछि। तहिना अहाँ सभक विश्‍वास असली प्रमाणित भऽ कऽ यीशु मसीह जहिया फेर औताह, तहिया प्रशंसा, सम्‍मान आ आदरक कारण होयत।

फिलिप्‍पी 4:7
तखन परमेश्‍वरक शान्‍ति, जकरा मनुष्‍य केँ बुझि पौनाइ असम्‍भव अछि, से अहाँ सभक हृदय आ अहाँ सभक बुद्धि केँ मसीह यीशु मे सुरक्षित राखत।

रोमी 8:18
हम ई मानैत छी जे, जे महिमा अपना सभ मे प्रगट होमऽ वला अछि तकरा तुलना मे वर्तमान समयक कष्‍ट किछु नहि अछि।

इब्रानी 10:24-25
[24] प्रेम आ भलाइक काज करऽ मे अपना सभ एक-दोसर केँ कोना प्रेरित कऽ सकी ताहि पर ध्‍यान राखी।[25] अपना सभ एक संग जमा भेनाइ नहि छोड़ी जेना कि किछु लोकक आदत अछि, बल्‍कि एक-दोसर केँ प्रोत्‍साहित करैत रही, विशेष कऽ आब जखन देखैत छी जे ओ दिन लगचिआ गेल अछि जहिया यीशु फेर औताह।

2 कोरिन्‍थी 1:3-4
[3] अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक जे परमेश्‍वर आ पिता छथि, तिनकर स्‍तुति होनि, जे दया करऽ वला पिता छथि आ सभ प्रकारक सान्‍त्‍वना देबऽ वला परमेश्‍वर छथि।[4] ओ अपना सभ केँ सभ प्रकारक दुःख-तकलीफ मे सान्‍त्‍वना दैत छथि जाहि सँ अपनो सभ परमेश्‍वर सँ प्राप्‍त एहि सान्‍त्‍वना द्वारा सभ प्रकारक दुःख मे पड़ल लोक सभ केँ सान्‍त्‍वना दऽ सकिऐक।

मत्ती 22:36-40
[36] “यौ गुरुजी, धर्म-नियमक सभ सँ पैघ आज्ञा कोन अछि?”[37] यीशु उत्तर देलथिन, “ ‘तोँ अपन प्रभु-परमेश्‍वर केँ अपन सम्‍पूर्ण मोन सँ, अपन सम्‍पूर्ण आत्‍मा सँ आ अपन सम्‍पूर्ण बुद्धि सँ प्रेम करह।’[38] यैह पहिल आ सभ सँ पैघ आज्ञा अछि।[39] आ दोसर सेहो ओही जकाँ अछि जे, ‘तोँ अपना पड़ोसी केँ अपने जकाँ प्रेम करह।’[40] सम्‍पूर्ण धर्म-नियम आ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता सभक लेख एही दू आज्ञा पर केन्‍द्रित अछि।”

यूहन्‍ना 10:10
चोर खाली चोरी करबाक, जान मारबाक, और नष्‍ट करबाक उद्देश्‍य सँ अबैत अछि। मुदा हम एहि लेल आयल छी जे मनुष्‍य जीवन प्राप्‍त करय और परिपूर्णता सँ प्राप्‍त करय।

प्रकाशित-वाक्‍य 21:4
ओ ओकरा सभक आँखिक सभ नोर पोछि देथिन। तकरबाद ने मृत्‍यु रहत, ने शोक, ने विलाप आ ने कष्‍ट, किएक तँ पहिलुका बात सभ समाप्‍त भऽ गेल अछि।”

इब्रानी ۱۳:۵
अहाँ सभ धनक लोभ सँ मुक्‍त रहू। जे किछु अहाँ लग अछि ताहि सँ सन्‍तुष्‍ट रहू, कारण परमेश्‍वर कहने छथि, “हम तोहर संग कहियो नहि छोड़बह कहियो तोरा नहि त्‍यागबह।”

फिलिप्‍पी 4:6-7
[6] कोनो बातक चिन्‍ता-फिकिर नहि करू, बल्‍कि प्रत्‍येक परिस्‍थिति मे परमेश्‍वर सँ प्रार्थना आ निवेदन करू; अपन विनती धन्‍यवादक संग हुनका सम्‍मुख प्रस्‍तुत करू।[7] तखन परमेश्‍वरक शान्‍ति, जकरा मनुष्‍य केँ बुझि पौनाइ असम्‍भव अछि, से अहाँ सभक हृदय आ अहाँ सभक बुद्धि केँ मसीह यीशु मे सुरक्षित राखत।

Maithili Bible 2010
©2010 The Bible Society of India and WBT