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अतिरिक्त: [नफरत]


दानिय्येल ११:३१
फिर उत्तर का वह राजा यरूशलेम के मन्दिर को अशुद्ध करने के लिये अपनी सेना भेजेगा। वे लोगों को दैनिक बलि समर्पित करने से रोकेंगे। इसके बाद वे वहाँ कुछ ऐसा भयानक घृणित वस्तु स्थापित करेंगे जो सचमुच विनाशक होगा। वे ऐसा भयानक काम शुरू करेंगे जो विनाश को जन्म देता है।

दानिय्येल १२:११
“जब दैनिक बलियाँ रोक दी जायेंगी तब से अब तक, जब वहाँ कुछ ऐसी भयानक घृणित वस्तु स्थापित होगा जो सचमुच विनाशक होगा, एक हजार दो सौ नब्बे दिनों का समय बीत चुका होगा।

व्यवस्था विवरण २२:५
“किसी स्त्री को किसी पुरुष के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए और किसी पुरुष को किसी स्त्री के वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर उससे घृणा करता है जो ऐसा करता है।

व्यवस्था विवरण २३:१८
देवादस या देवदासी का कमाया हुआ धन यहोवा तुम्हारे परमेश्वर के मन्दिर में नहीं लाया जाना चाहिए। कोई व्यक्ति दिये गए वचन के कारण यहोवा को दी जाने वाली चीज के लिए इस धन का उपयोग नहीं कर सकता। यहोवा तुम्हारा परमेश्वर सभी मन्दिरों के देवदास-देवदासियों से घृणा करता है।

व्यवस्था विवरण २४:४
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यशायाह १:१३
“बेकार की बलियाँ तुम मुझे मत चढ़ाते रहो। जो सुगंधित सामग्री तुम मुझे अर्पित करते हो, मुझे उससे घृणा है। नये चाँद की दावतें, विश्राम और सब्त मुझ से सहन नहीं हो पाते। अपनी पवित्र सभाओं के बीच जो बुरे कर्म तुम करते हो, मुझे उनसे घृणा है।

लैव्यव्यवस्था ७:१८
यदि कोई व्यक्ति मेलबलि का माँस तीसरे दिन खाता है तो यहोवा उस व्यक्ति से प्रसन्न नहीं होगा। यहोवा उस बलि को उसके लिए महत्व नहीं देगा। यह बलि घृणित वस्तु बन जाएगी औ यदि कोई व्यक्ति उस माँस का कुछ भी खाता है तो वह अपने पाप के लिए उत्तरदायी होगा।

लैव्यव्यवस्था १८:२२
“तुम्हें किसी पुरुष के साथ वैसा ही यौन सम्बन्ध नहीं करना चाहिए जैसा किसी स्त्री के साथ किया जाता है। यह भयंकर पाप है!

नीतिवचन ११:१
यहोवा छल के तराजू से घृणा करता है, किन्तु उसका आनन्द सही नाप-तौल है।

नीतिवचन ११:२०
कुटिल जनों से, यहोवा घृणा करता है किन्तु वह उनसे प्रसन्न होता है जिनके मार्ग सर्वदा सीधे होते हैं।

नीतिवचन १२:२२
ऐसे होठों को यहोवा घृणा करता है जो झूठ बोलते हैं, किन्तु उन लोगों से जो सत्य से पूर्ण हैं, वह प्रसन्न रहता है।

नीतिवचन १५:८
यहोवा दुष्ट के चढ़ावे से घृणा करता है किन्तु उसको सज्जन की प्रार्थना ही प्रसन्न कर देती है।

नीतिवचन १५:२६
दुष्टों के विचारों से यहोवा को घृणा है, पर सज्जनों के विचार उसको सदा भाते हैं।

नीतिवचन १६:५
जिनके मन में अहंकार भरा हुआ है, उनसे यहोवा घृणा करता है। इसे तू सुनिश्चित जान, कि वे बिना दण्ड पाये नहीं बचेगें।

नीतिवचन १७:१५
यहोवा इन दोनों ही बातों से घृणा करता है, दोषी को छोड़ना, और निर्दोष को दण्ड देना।

नीतिवचन २०:१०
इन दोनों से, खोटे बाटों और खोटी नापों से यहोवा घृणा करता है।

नीतिवचन २०:२३
यहोवा खोटे-झूठे बाटों से घृणा करता है और उसको खोटे नाप नहीं भाते हैं।

नीतिवचन २८:९
यदि व्यवस्था के विधान पर कोई कान नहीं देता तो उसको विनतियाँ भी घृणा के .योग्य होगी।

प्रकाशित वाक्य 21:27
कोई अपवित्र वस्तु तो उसमें प्रवेश तक नहीं कर पायेगी और न ही लज्जापूर्ण कार्य करने वाले और झूठ बोलने वाले उसमें प्रवेश कर पाएँगे उस नगरी में तो प्रवेश बस उन्हीं को मिलेगा जिनके नाम मेमने की जीवन की पुस्तक में लिखे है।

मरकुस १३:१४
“जब तुम ‘भयानक विनाशकारी वस्तुओं को,’ जहाँ वे नहीं होनी चाहियें, वहाँ खड़े देखो” (पड़ने वाला स्वयं समझ ले कि इसका अर्थ क्या है) “तब जो लोग यहूदिया में हों, उन्हें पहाड़ों पर भाग जाना चाहिये और

मत्ती २४:१५
“इसलिए जब तुम लोग भयानक विनाशकारी वस्तु को, जिसका उल्लेख दानिय्येल नबी द्वारा किया गया था, मंदिर के पवित्र स्थान पर खड़े देखो,” (पढ़ने वाला स्वयं समझ ले कि इसका अर्थ क्या है)

रोमियों १:२६-२७
[२६] इसलिए परमेश्वर ने उन्हें तुच्छ वासनाओं के हाथों सौंप दिया। उनकी स्त्रियाँ स्वाभाविक यौन सम्बन्धों की बजाय अस्वाभाविक यौन सम्बन्ध रखने लगी।[२७] इसी तरह पुरुषों ने स्त्रियों के साथ स्वाभाविक संभोग छोड़ दिया और वे आपस में ही वासना में जलने लगे। और पुरुष परस्पर एक दूसरे के साथ बुरे कर्म करने लगे। उन्हें अपने भ्रष्टाचार का यथोचित फल भी मिलने लगा।

लैव्यव्यवस्था २०:१२-१३
[१२] “यदि कोई व्यक्ति अपनी पुओत्रवधू के साथ यौनसम्बन्ध करता है तो दोनों को मार डालना चचाहिए। उन्होंने बहुत बुरा यौन पाप किया है। उन्हें दण्ड अवश्य मिलना चाहिए।[१३] “यदि कोई व्यक्ति किसी पुरुष के साथ स्त्री जैसा यौन सम्बन्ध करता है तो दोनों को मार डालना चाहिए। उन्होंने बहुत बुरा यौन पाप किया है। उन्हें दण्ड अवश्य मिलना चाहिए।

नीतिवचन ६:१६-२०
[१६] ये हैं छ: बातें वे जिनसे यहोवा घृणा रखता और ये ही सात बातें जिनसे है उसको बैर:[१७] गर्वीली आँखें, झूठ से भरी वाणी, वे हाथ जो अबोध के हत्यारे हैं।[१८] ऐसा हृदय जो कुचक्र भरी योजनाएँ रचता रहताहै, ऐसे पैर जो पाप के मार्ग पर तुरन्त दौड़ पड़ते हैं।[१९] वह झूठा गवाह, जो निरन्तर झूठ उगलता है और ऐसा व्यक्ति जो भाईयों के बीच फूट डाले।[२०] हे मेरे पुत्र, अपने पिता की आज्ञा का पालन कर और अपनी माता की सीख को कभी मत त्याग।

Hindi ERV 2010
Easy-to-Read Version Copyright © 2010 World Bible Translation Center