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اردو بائبل 2017

مکاشفہ ۳

۱
और सरदीस की कलीसिया के फ़रिश्ते को ये लिख कि जिसके पास ख़ुदा की सात रूहें और सात सितारे हैं
۲
जागता रहता, और उन चीज़ों को जो बाक़ी है और जो मिटने को थीं मज़बूत कर, क्यूँकि मैंने तेरे किसी काम को अपने ख़ुदा के नज़दीक पूरा नहीं पाया |
۳
पस याद कर कि तू ने किस तरह ता'लीम पाई और सुनी थी, और उस पर क़ायम रह और तौबा कर | और अगर तू जागता न रहेगा तो मैं चोर की तरह आ जाऊँगा, और तुझे हरगिज़ मा'लूम न होगा कि किस वक़्त तुझ पर आ पडूँगा |
۴
अलबत्ता, सरदीस में तेरे यहाँ थोड़े से ऐसे शख़्स हैं जिहोने अपनी पोशाक आलूदा नहीं की | वो सफ़ेद पोशाक पहने हुए मेरे साथ सैर करेंगे, क्यूँकि वो इस लायक़ हैं |
۵
जो ग़ालिब आए उसे इसी तरह सफ़ेद पोशाक पहनाई जाएगी, और मैं उसका नाम किताब-ए-हयात से हरगिज़ न काटूँगा, बल्कि अपने बाप और उसके फ़रिश्तों के सामने उसके नाम का इक़रार करूँगा |
۶
जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है |
۷
और फिलदिल्फिया की कलीसिया के फ़रिश्ते को ये लिख: जो क़ुद्दूस और बरहक़ है, और दाऊद की कुन्जी रखता है, जिसके खोले हुए को कोई बन्द नहीं करता और बन्द किए हुए को कोई खोलता नहीं, वो ये फ़रमाता है कि
۸
“मैं तेरे कामों को जानता हूँ (देख, मैंने तेरे सामने एक दरवाज़ा खोल रख्खा है, कोई उसे बन्द नहीं कर सकता) कि तुझ में थोड़ा सा ज़ोर है और तू ने मेरे कलाम पर “अमल किया और मेरे नाम का इन्कार नहीं किया |
۹
देख, मैं शैतान की उन जमा'त वालों को तेरे क़ाबू में कर दूँगा, जो अपने आपको यहूदी कहते हैं और है नहीं, बल्कि झूट बोलते हैं - देख, मैं ऐसा करूँगा कि वो आकर तेरे पावँ में सिज्दा करेंगे, और जानेंगे कि मुझे तुझ से मुहब्बत है |
۱۰
चूँकि तू ने मेरे सब्र के कलाम पर 'अमल किया है, इसलिए मैं भी आज़माइश के उस वक़्त तेरी हिफ़ाज़त करूँगा जो ज़मीन के रहनेवालों के आज़माने के लिए तमाम दुनियाँ पर आनेवाला है |
۱۱
मैं जल्द आनेवाला हूँ | जो कुछ तेरे पास है थामे रह, ताकि कोई तेरा ताज न छीन ले |
۱۲
जो ग़ालिब आए, मैं उसे अपने ख़ुदा के मक़्दिस में एक सुतून बनाउँगा | वो फिर कभी बाहर न निकलेगा, और मैं अपने ख़ुदा का नाम और अपने ख़ुदा के शहर, या'नी उस नए यरूशलीम का नाम जो मेरे ख़ुदा के पास से आसमान से उतरने वाला है, और अपना नया नाम उस पर लिखूँगा |
۱۳
जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है |
۱۴
“और लौदीकिया की कलीसिया के फ़रिश्ते को ये लिख : “जो आमीन और सच्चा और बरहक़ गवाह और ख़ुदा की कायनात की शुरुआत है, वो ये फ़रमाता है कि
۱۵
“मैं तेरे कामों को जानता हूँ कि न तू सर्द है न गर्म | काश कि तू सर्द या गर्म होता !
۱۶
पस चूँकि तू न तो गर्म है न सर्द बल्कि नीम गर्म है, इसलिए मैं तुझे अपने मुँह से निकाल फेंकने को हूँ |
۱۷
और चूँकि तू कहता है कि मैं दौलतमन्द हूँ और मालदार बन गया हूँ और किसी चीज़ का मोहताज नहीं; और ये नहीं जानता कि तू कमबख़्त और आवारा और ग़रीब और अन्धा और नंगा है |
۱۸
इसलिए मैं तुझे सलाह देता हूँ कि मुझ से आग में तपाया हुआ सोना ख़रीद ले, ताकि तू उसे पहन कर नंगे पन के ज़ाहिर होने की शर्मिन्दगी न उठाए; और आँखों में लगाने के लिए सुर्मा ले, ताकि तू बीना हो जाए |
۱۹
मैं जिन जिन को 'अज़ीज़ रखता हूँ, उन सब को मलामत और हिदायत करता हूँ; पस सरगर्म हो और तौबा कर |
۲۰
देख, मैं दरवाज़े पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; अगर कोई मेरी आवाज़ सुनकर दरवाज़ा खोलेगा, तो मैं उसके पास अन्दर जाकर उसके साथ खाना खाऊँगा और वो मेरे साथ |
۲۱
जो ग़ालिब आए मैं उसे अपने साथ तख़्त पर बिठाऊँगा, जिस तरह मैं ग़ालिब आकर अपने बाप के साथ उसके तख़्त पर बैठ गया |
۲۲
जिसके कान हों वो सुने कि रूह कलीसियाओं से क्या फ़रमाता है |
مکاشفہ ۳:1
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مکاشفہ 2 / مکاشفہ 2
مکاشفہ 3 / مکاشفہ 3
مکاشفہ 4 / مکاشفہ 4
مکاشفہ 5 / مکاشفہ 5
مکاشفہ 6 / مکاشفہ 6
مکاشفہ 7 / مکاشفہ 7
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مکاشفہ 9 / مکاشفہ 9
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مکاشفہ 12 / مکاشفہ 12
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مکاشفہ 15 / مکاشفہ 15
مکاشفہ 16 / مکاشفہ 16
مکاشفہ 17 / مکاشفہ 17
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مکاشفہ 22 / مکاشفہ 22