پرانے عہد نامہ
نیا عہد نامہ
اردو بائبل 2017

۲ پطر س ۳

۱

ऐ 'अज़ीज़ो! अब मैं तुम्हें ये दूसरा ख़त लिखता हूँ, और याद दिलाने के तौर पर दोनों ख़तों से तुम्हारे साफ़ दिलों को उभारता हूँ,

۲

कि तुम उन बातों को जो पाक नबियों ने पहले कहीं, और ख़ुदावन्द और मुन्जी के उस हुक्म को याद रख्खो जो तुम्हारे रसूलों की ज़रिये आया था |

۳

और पहले जान लो कि आख़िरी दिनों में ऐसी हँसी ठटठा करनेवाले आएँगे जो अपनी ख़्वाहिशों के मुवाफ़िक़ चलेंगे,

۴

और कहेंगे, “उसके आने का वा'दा कहाँ गया? क्यूँकि जब से बाप-दादा सोए हैं, उस वक़्त से अब तक सब कुछ वैसा ही है जैसा दुनिया के शुरू' से था।”

۵

वो तो जानबूझ कर ये भूल गए कि ख़ुदा के कलाम के ज़री'ए से आसमान पहले से मौजूद है, और ज़मीन पानी में से बनी और पानी में क़ायम है;

۶

इन ही के ज़री'ए से उस ज़माने की दुनिया डूब कर हलाक हुई |

۷

मगर इस वक़्त के आसमान और ज़मीन उसी कलाम के ज़री'ए से इसलिए रख्खे हैं कि जलाए जाएँ ; और वो बेदीन आदमियों की 'अदालत और हलाकत के दिन तक महफ़ूज़ रहेंगे

۸

ऐ 'अज़ीज़ो ! ये ख़ास बात तुम पर पोशीदा न रहे कि ख़ुदावन्द के नज़दीक एक दिन हज़ार बरस के बराबर है, और हज़ार बरस एक दिन के बराबर |

۹

ख़ुदावन्द अपने वा'दे में देर नहीं करता, जैसी देर कुछ लोग समझते है; बल्कि तुम्हारे बारे में हलाकत नहीं चाहता बल्कि ये चाहता है कि सबकी तौबा तक नौबत पहुँचे |

۱۰

लेकिन खुदावन्द का दिन चोर की तरह आ जाएगा, उस दिन आसमान बड़े शोर-ओ-ग़ुल के साथ बर्बाद हो जाएँगे, और अजराम-ए-फ़लक हरारत की शिद्दत से पिघल जाएँगे, और ज़मीन और उस पर के काम जल जाएँगे |

۱۱

जब ये सब चीज़ें इस तरह पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पाक चाल-चलन और दीनदारी में कैसे कुछ होना चाहिए,

۱۲

और ख़ुदा के उस दिन के आने का कैसा कुछ मुन्तज़िर और मुश्ताक़ रहना चाहिए, जिसके ज़रिये आसमान आग से पिघल जाएँगे, और अजराम-ए- फ़लक हरारत की शिद्दत से गल जाएँगे।

۱۳

लेकिन उसके वादे के मुवाफ़िक़ हम नए आसमान और नई ज़मीन का इन्तज़ार करते हैं, जिनमें रास्तबाज़ी बसी रहेगी |

۱۴

पस ऐ 'अज़ीज़ो ! चूँकि तुम इन बातों के मुन्तज़िर हो, इसलिए उसके सामने इत्मीनान की हालत में बेदाग़ और बे-ऐब निकलने की कोशिश करो,

۱۵

और हमारे ख़ुदावन्द के तहम्मुल को नजात समझो, चुनाँचे हमारे प्यारे भाई पौलूस ने भी उस हिकमत के मुवाफ़िक़ जो उसे 'इनायत हुई, तुम्हें यही लिखा है

۱۶

और अपने सब ख़तों में इन बातों का ज़िक्र किया है, जिनमें कुछ बातें ऐसी हैं जिनका समझना मुश्किल है, और जाहिल और बे-क़याम लोग उनके मा'नों को और सहीफ़ो की तरह खींच तान कर अपने लिए हलाकत पैदा करते हैं |

۱۷

पस ऐ 'अज़ीज़ो ! चूँकि तुम पहले से आगाह हो, इसलिए होशियार रहो, ताकि बे-दीनों की गुमराही की तरफ़ खिंच कर अपनीं मज़बूती को छोड़ न दो |

۱۸

बल्कि हमारे ख़ुदावन्द और मुन्जी ईसा' मसीह के फ़ज़ल और 'इरफ़ान में बढ़ते जाओ | उसी की बड़ाई अब भी हो,और हमेशा तक होती रहे | आमीन |

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