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मराठी बायबल 2015

स्तोत्र ७५



मुख्य गवयासाठी अल्तश्केथ (नष्ट करू नको) ह्या चालीवर गायचे आसाफाचे संगीतस्तोत्र. हे देवा, आम्ही तुझे उपकारस्मरण करतो; तुझे उपकारस्मरण करतो; कारण तुझे नाव समीप आहे; तुझ्या अद्भुत कृत्यांचे वर्णन लोक करतात.
नेमलेली वेळ आली म्हणजे मी यथार्थ न्याय करीन.
पृथ्वी व तिच्यावर राहणारे सर्व भेदरून गेले. तरी तिचे स्तंभ मीच स्थापले आहेत. (सेला)
फुशारकी मारणार्‍यांना मी म्हणालो, “फुशारकी मारू नका;” आणि दुर्जनांना म्हणालो, “आपल्या बळाचा तोरा मिरवू नका;
तुम्ही आपले नाक वर करू नका; ताठ मानेने बोलू नका.”
कारण उन्नती ही पूर्वेकडून नव्हे, पश्‍चिमेकडून नव्हे, व अरण्याकडूनही नव्हे;
तर न्याय करणारा देव आहे; तो एकाला खाली पाडतो व दुसर्‍याला वर चढवतो.
पाहा, परमेश्वराच्या हाती प्याला आहे व त्यात द्राक्षारस फेसाळत आहे; त्यात मसाला मिसळला आहे आणि त्यातून तो ओतून देतो; पृथ्वीवरील सर्व दुर्जनांना तो खातरीने गाळासकट प्यावा लागेल.
मी तर सदा आनंद करीन, याकोबाच्या देवाची स्तोत्रे गाईन.
१०
दुर्जनांचा ध्वज मी खाली ओढीन,1 पण नीतिमानाचा ध्वज फडकत राहील.2











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