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Maithili Bible 2010

प्रकाशित-वाक्‍य 21

1
तखन हम एक नव आकाश आ एक नव पृथ्‍वी देखलहुँ। पुरान आकाश आ पुरान पृथ्‍वी, दूनू लुप्‍त भऽ गेल छल आ आब समुद्रो नहि रहल।
2
तकरबाद हम पवित्र नगर, नव यरूशलेम, केँ स्‍वर्ग सँ परमेश्‍वर लग सँ उतरैत देखलहुँ। ओ अपन वरक लेल श्रृंगार कयल गेल नव कनियाँ जकाँ सजाओल गेल छल।
3
तखन हमरा सिंहासन सँ एक आवाज जोर सँ ई कहैत सुनाइ पड़ल, “देखू, परमेश्‍वरक निवास आब मनुष्‍यक बीच मे छनि। परमेश्‍वर ओकरा सभक संग निवास करताह। ओ सभ हुनकर प्रजा होयत आ परमेश्‍वर अपने ओकरा सभक बीच रहि कऽ ओकरा सभक परमेश्‍वर होयथिन।
4
ओ ओकरा सभक आँखिक सभ नोर पोछि देथिन। तकरबाद ने मृत्‍यु रहत, ने शोक, ने विलाप आ ने कष्‍ट, किएक तँ पहिलुका बात सभ समाप्‍त भऽ गेल अछि।”
5
तकरबाद सिंहासन पर जे विराजमान छलाह, से व्‍यक्‍ति हमरा कहलनि, “देखू, सभ किछु हम नव बना दैत छी।” तखन ओ हमरा कहलनि, “ई बात सभ लिखू, किएक तँ ई सत्‍य अछि और एहि पर भरोसा राखल जा सकैत अछि।”
6
ओ हमरा फेर कहलनि, “पूर्ण भऽ गेल! हम अल्‍फा और ओमेगा, अर्थात् शुरुआत आ अन्‍त छी। जे केओ पियासल होअय तकरा हम मङनी मे जीवनक जलक सोता सँ पिअयबैक।
7
जे सभ विजयी होयत, से सभ ई बात सभ प्राप्‍त करबाक अधिकारी होयत। हम ओकरा सभक परमेश्‍वर होयबैक आ ओ सभ हमर पुत्र होयत।
8
मुदा डरपोक सभक, अविश्‍वासी सभक, घृणित लोकक, हत्‍यारा सभक, अनैतिक शारीरिक सम्‍बन्‍ध राखऽ वला सभक, जादू-टोना कयनिहार सभक, मुरुतक पूजा कयनिहार सभक आ सभ झूठ बजनिहारक स्‍थान ओहि आगिक कुण्‍ड मे होयतैक जे गन्‍धक सँ धधकैत रहैत अछि। यैह अछि दोसर मृत्‍यु।”
9
तकरबाद जाहि सात स्‍वर्गदूत सभ लग सातटा अन्‍तिम विपत्ति सँ भरल सात कटोरा छलनि, तिनका सभ मे सँ एक गोटे हमरा लग आबि कऽ कहलनि, “एतऽ आउ, हम अहाँ केँ दुल्‍हिन, अर्थात् बलि-भेँड़ाक स्‍त्रीक दर्शन करायब।”
10
तखन ओ हमरा प्रभुक आत्‍माक नियन्‍त्रण मे राखि कऽ एक विशाल आ उँचगर पहाड़ पर लऽ जा कऽ पवित्र नगर, अर्थात् यरूशलेम, देखौलनि। ओ नगर परमेश्‍वर लग सँ स्‍वर्ग सँ उतरि रहल छल।
11
ओ परमेश्‍वरक महिमाक तेज सँ प्रकाशित छल आ बहुमूल्‍य पाथरक समान, सूर्यकान्‍त वा आर-पार देखाय वला सीसा जकाँ चमकि रहल छल।
12
ओकर चारू कात एक पैघ आ उँचगर छहरदेवाली छल जाहि मे बारहटा फाटक छल आ प्रत्‍येक फाटक पर एक-एकटा स्‍वर्गदूत ठाढ़ छलाह। सभ फाटक पर इस्राएलक बारहो कुल मे सँ एक-एक कुलक नाम लिखल छल।
13
पूब दिस तीन फाटक, उत्तर दिस तीन फाटक, दक्षिण दिस तीन फाटक आ पश्‍चिम दिस तीन फाटक छल।
14
नगरक छहरदेवाली बारहटा न्‍योक पाथर पर बनाओल गेल छल जाहि पर बलि-भेँड़ाक बारहो मसीह-दूतक नाम लिखल छल।
15
जे स्‍वर्गदूत हमरा सँ बात कऽ रहल छलाह तिनका लग नगर आ ओकर फाटक सभ आ नगरक छहरदेवाली केँ नपबाक लेल सोनाक एकटा नापऽ वला लग्‍गा छलनि।
16
नगर चौखूट छल। ओकर लम्‍बाइ आ चौराइ बराबरि छल। ओ लग्‍गा सँ नगर केँ जखन नपलनि तँ ओकर लम्‍बाइ 800 कोस भेल। ओकर लम्‍बाइ, चौराइ आ उँचाइ एके रंग छलैक।
17
नगरक छहरदेवाली केँ जखन नपलनि, तँ ओकर मोटाइ मनुष्‍य सभक नापक अनुसार, जे नाप स्‍वर्गदूत सेहो प्रयोग कयलनि, 144 हाथ भेल।
18
नगरक छहरदेवाली सूर्यकान्‍त पाथर सँ बनल छल, आ नगर शुद्ध सोन सँ बनल छल, जे साफ सीसा जकाँ आर-पार देखाइ दैत छल।
19
ओहि नगरक न्‍यो हर प्रकारक बहुमूल्‍य पाथर सँ सुसज्‍जित छल। न्‍योक पहिल पाथर सूर्यकान्‍तक, दोसर नीलमक, तेसर गोदन्‍तीक, चारिम मरकतक,
20
पाँचम सुलेमानीक, छठम गोमेदक, सातम स्‍वर्णमणिक, आठम पेरोजक, नवम पुखराजक, दसम लहसनियांक, एगारहम धूम्रकान्‍तक आ बारहम चन्‍द्रकान्‍तक छल।
21
बारहो फाटक बारह मोती सँ बनल छल। प्रत्‍येक फाटक एक-एकटा मोतीक बनल छल। ओहि नगरक मुख्‍य सड़क आर-पार देखाय वला सीसा जकाँ शुद्ध सोन सँ बनल छल।
22
हम ओहि नगर मे कोनो मन्‍दिर नहि देखलहुँ, किएक तँ सर्वशक्‍तिमान प्रभु-परमेश्‍वर आ बलि-भेँड़ा ओकर मन्‍दिर छथि।
23
नगर मे सूर्य आ चन्‍द्रमाक प्रकाशक आवश्‍यकता नहि अछि, किएक तँ परमेश्‍वरक महिमाक तेज ओकर इजोत होइत अछि आ बलि-भेँड़ा ओकर डिबिया छथि।
24
जाति-जातिक लोक सभ नगरक इजोत मे चलत आ पृथ्‍वीक राजा सभ अपन वैभव केँ ओहि मे लाओत।
25
नगरक फाटक कखनो दिन मे बन्‍द नहि कयल जायत आ राति ओतऽ होयबे नहि करत।
26
ओहि नगर मे जाति-जातिक लोक सभक वैभव आ सम्‍मान लाओल जायत।
27
मुदा कोनो अपवित्र वस्‍तु आ घृणित काज कयनिहार अथवा झूठ पर आचरण कयनिहार व्‍यक्‍ति ओहि नगर मे प्रवेश नहि कऽ पाओत, बल्‍कि मात्र ओ लोक सभ जिनकर नाम बलि-भेँड़ाक जीवनक पुस्‍तक मे लिखल छनि।
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