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Maithili Bible 2010

प्रकाशित-वाक्‍य 17

1
जाहि सात स्‍वर्गदूत लग सातटा कटोरा छलनि ताहि मे सँ एकटा स्‍वर्गदूत हमरा लग आबि कऽ कहलनि, “एतऽ आउ, हम अहाँ केँ देखायब जे ओहि महावेश्‍या केँ कोना कऽ दण्‍डित कयल जायत जे बहुतो नदी-नहरिक पानि पर बैसल अछि।
2
ओकरा संग पृथ्‍वीक राजा सभ कुकर्म कयलक आ पृथ्‍वीक निवासी सभ ओकर कुकर्मक मदिरा पिबि कऽ माति गेल अछि।”
3
तकरबाद ओ स्‍वर्गदूत हमरा प्रभुक आत्‍माक नियन्‍त्रण मे राखि कऽ मरुभूमि मे लऽ गेलाह। हम ओतऽ एक स्‍त्रीगण केँ एक लाल जानबर पर बैसल देखलहुँ। जानबरक सम्‍पूर्ण शरीर पर परमेश्‍वरक निन्‍दा करऽ वला नाम सभ लिखल छल। ओकरा सातटा मूड़ी आ दसटा सीँग छलैक।
4
ओ स्‍त्री बैगनी आ लाल रंगक वस्‍त्र पहिरने छलि आ सोन, बहुमूल्‍य पाथर आ मोती सभ सँ सुसज्‍जित छलि। ओ हाथ मे सोनाक लोटा लेने छलि जे घृणित वस्‍तु सभ सँ आ ओकर वेश्‍यावृत्तिक अशुद्धता सँ भरल छलैक।
5
ओकरा कपार पर एक रहस्‍यमय नाम अंकित छलैक—“महान् बेबिलोन, पृथ्‍वीक वेश्‍या सभ आ घृणित वस्‍तु सभक माय।”
6
हम देखलहुँ जे ओ स्‍त्री परमेश्‍वरक लोक सभक खून पिबि कऽ माति गेल अछि। ओ तिनका सभक खून पिबि लेने छल, जे सभ यीशुक लेल गवाही देबाक कारणेँ मारल गेल छलाह। हम ओकरा देखि कऽ अत्‍यन्‍त चकित भऽ गेलहुँ।
7
तखन ओ स्‍वर्गदूत हमरा कहलनि, “अहाँ किएक चकित होइत छी? हम अहाँ केँ ओहि स्‍त्रीक रहस्‍य बुझा दैत छी आ ओहि जानबरक सेहो, जाहि पर ओ सवार अछि, जकरा सातटा मूड़ी आ दसटा सीँग छैक।
8
जाहि जानबर केँ अहाँ देखलहुँ से पहिने छल, आब नहि अछि, आ अथाह कुण्‍ड मे सँ निकलऽ वला अछि; ओ निकलत आ नष्‍ट कयल जायत। मुदा पृथ्‍वीक ओ निवासी सभ जकरा सभक नाम सृष्‍टिक आरम्‍भहि सँ जीवनक पुस्‍तक मे नहि लिखल गेल अछि, से सभ ई देखि कऽ आश्‍चर्य मे पड़ि जायत जे ओ जानबर पहिने छल, तखन नहि छल, और फेर आबि गेल अछि।
9
एकरा बुझबाक लेल विवेकपूर्ण बुद्धिक आवश्‍यकता अछि। ओ सातटा मूड़ी सातटा पहाड़ अछि जाहि पर ओ स्‍त्री बैसल अछि।
10
ओ सभ सातटा राजा सेहो अछि जाहि मे सँ पाँचटाक पतन भऽ गेल अछि, एकटा एखन अछि आ दोसर एखनो आयल नहि अछि, मुदा जखन ओ आओत तँ किछुए समय तक रहि पाओत।
11
ओ जानबर जे पहिने छल आ आब नहि अछि, से आठम राजा अछि। मुदा वास्‍तव मे ओ ओही सात राजाक समूह मेहक अछि, और ओकर विनाश निश्‍चित अछि।
12
“अहाँ जे दस सीँग देखलहुँ, से दसटा राजा अछि। ओकरा सभ केँ एखन तक राज्‍य-सत्ता नहि भेटल छैक, मुदा ओकरा सभ केँ घड़ी भरिक लेल मात्रे ओहि जानबरक संग राज्‍याधिकार देल जयतैक।
13
ओकरा सभक एकेटा उद्देश्‍य छैक और तकरा लेल ओ सभ अपन शक्‍ति आ अधिकार ओहि जानबर केँ सौंपि देतैक।
14
ओ सभ बलि-भेँड़ाक संग युद्ध करत आ बलि-भेँड़ा ओकरा सभ पर विजयी भऽ जयताह, किएक तँ ओ प्रभु सभक प्रभु आ राजा सभक राजा छथि। हुनका संग ओ लोक सभ रहत जे सभ हुनकर बजाओल गेल, चुनल गेल आ विश्‍वासयोग्‍य लोक सभ अछि।”
15
तकरबाद स्‍वर्गदूत हमरा कहलनि, “नदी-नहरि सभक ओ पानि जे अहाँ देखलहुँ आ जाहि पर वेश्‍या बैसल अछि, से सभ अनेक राष्‍ट्र, विशाल जनसमूह, जाति-जातिक लोक आ विभिन्‍न भाषाक लोक सभ अछि।
16
अहाँ जाहि जानबर केँ आ दसटा सीँग केँ देखलहुँ से सभ ओहि वेश्‍याक शत्रु बनि जायत। ओ सभ ओकरा उजाड़ कऽ कऽ नाङट कऽ देतैक। ओकर माँसु खा जयतैक आ ओकरा आगि मे जरा देतैक।
17
किएक तँ जाबत तक परमेश्‍वरक कहल बात पूरा नहि भऽ जानि, ताबत तक परमेश्‍वर अपन उद्देश्‍य पूरा करयबाक लेल ओहि राजा सभ केँ एहि बात मे एकमत रहबाक भावना देथिन जे हम सभ अपन राजकीय अधिकार जानबर केँ सौंपने रहब।
18
अहाँ जाहि स्‍त्री केँ देखलहुँ, से ओ महानगर अछि जे पृथ्‍वीक राजा सभ पर राज्‍य करैत अछि।”
प्रकाशित-वाक्‍य 17:1
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प्रकाशित-वाक्‍य 17:3
प्रकाशित-वाक्‍य 17:4
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प्रकाशित-वाक्‍य 17:6
प्रकाशित-वाक्‍य 17:7
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प्रकाशित-वाक्‍य 17:17
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