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Maithili Bible 2010

मत्ती 8

1
यीशु जखन पहाड़ पर सँ नीचाँ उतरलाह तँ लोकक बड़का भीड़ हुनका पाछाँ चलऽ लगलनि।
2
एक कुष्‍ठ-रोगी हुनका लग अयलनि आ निंघुड़ि कऽ प्रणाम करैत कहलकनि, “यौ प्रभु, अहाँ जँ चाही तँ हमरा शुद्ध कऽ सकैत छी।”
3
यीशु हाथ बढ़ा कऽ ओकरा छुबैत कहलथिन, “हम अवश्‍य चाहैत छिअह, तोँ शुद्ध भऽ जाह।” और ओ तुरत अपन रोग सँ शुद्ध भऽ गेल।
4
यीशु ओकरा कहलथिन, “सुनह, ककरो किछु कहिअहक नहि। जाह, अपना केँ पुरोहित केँ देखाबह, आ धर्म-नियम मे लिखल मूसाक आदेश अनुसार जे चढ़ौना चढ़यबाक अछि, से चढ़ाबह। एहि तरहेँ सभक लेल गवाही रहत जे तोँ शुद्ध भऽ गेल छह।”
5
यीशु जखन कफरनहूम नगर मे प्रवेश कयलनि तँ रोमी सेनाक एकटा कप्‍तान आबि हुनका सँ विनती कयलथिन,
6
“हे प्रभु, हमर नोकर लकवा सँ पीड़ित भऽ घर मे पड़ल अछि आ महा कष्‍ट मे अछि।”
7
यीशु हुनका कहलथिन, “हम आबि ओकरा स्‍वस्‍थ कऽ देबैक।”
8
सेनाक कप्‍तान उत्तर देलथिन, “यौ प्रभु, हम एहि जोगरक नहि छी जे अपने हमरा घर पर आबी। अपने मात्र कहि देल जाओ आ हमर नोकर स्‍वस्‍थ भऽ जायत।
9
कारण हमहूँ शासनक अधीन मे छी, और हमरा अधीन मे सैनिक सभ अछि। हम एकटा केँ कहैत छिऐक, ‘जाह’ तँ ओ जाइत अछि आ दोसर केँ कहैत छिऐक, ‘आबह’ तँ ओ अबैत अछि। हम अपना नोकर केँ कहैत छिऐक, ‘ई काज करह’ तँ ओ करैत अछि।”
10
हुनकर बात सुनि यीशु केँ आश्‍चर्य भेलनि आ ओ अपना पाछाँ चलऽ वला लोक सभ केँ कहलथिन, “हम अहाँ सभ केँ सत्‍य कहैत छी, हम इस्राएली सभ मे एहन विश्‍वास ककरो मे नहि देखलहुँ।
11
हम अहाँ सभ केँ कहैत छी, पूब आ पश्‍चिम सँ बहुत लोक आओत और अब्राहम, इसहाक आ याकूबक संग स्‍वर्गक राज्‍य मे भोज खयबाक लेल बैसत,
12
मुदा जे सभ ⌞अब्राहमक वंशज होयबाक कारणेँ⌟ राज्‍यक उत्तराधिकारी होयबाक चाही, से सभ बाहर अन्‍हार मे भगाओल जायत, जतऽ लोक कानत आ दाँत कटकटाओत।”
13
तकरबाद यीशु सेनाक कप्‍तान केँ कहलथिन, “जाउ, जेहन विश्‍वास अहाँ कयलहुँ अछि, अहाँक लेल ओहिना होयत।” ओही घड़ी हुनकर नोकर स्‍वस्‍थ भऽ गेलनि।
14
यीशु जखन पत्रुसक घर मे अयलाह तँ देखैत छथि जे पत्रुसक सासु बोखार सँ पीड़ित भऽ ओछायन पर पड़ल छथि।
15
यीशु हुनकर हाथ केँ छुबि देलथिन आ हुनकर बोखार उतरि गेलनि। ओ उठि कऽ हिनकर सेवा-सत्‍कार करऽ लगलीह।
16
साँझ पड़ला पर लोक सभ बहुतो लोक केँ जकरा मे दुष्‍टात्‍मा छलैक यीशु लग अनलकनि। यीशु आज्ञा दऽ कऽ ओकरा सभ मे सँ दुष्‍टात्‍मा सभ केँ निकालि देलथिन और सभ रोगी केँ स्‍वस्‍थ कऽ देलथिन,
17
जाहि सँ परमेश्‍वरक प्रवक्‍ता यशायाहक ई वचन पूरा होअय जे, “ओ हमर सभक रोग-बिमारी अपना पर लऽ हमरा सभ सँ दूर हटा देलनि।”
18
जखन यीशु अपना चारू कात लोकक बड़का भीड़ देखलनि तँ अपना शिष्‍य सभ केँ झीलक ओहि पार चलबाक आदेश देलथिन।
19
तखन एकटा धर्मशिक्षक हुनका लग आबि कऽ कहलथिन, “गुरुजी, जतऽ कतौ अपने जायब, ततऽ हमहूँ अपनेक संग चलब।”
20
यीशु हुनका उत्तर देलथिन, “नढ़िया केँ सोन्‍हि छैक और आकाशक चिड़ै केँ खोंता, मुदा मनुष्‍य-पुत्र केँ मूड़िओ नुकयबाक जगह नहि छैक।”
21
केओ दोसर, हुनकर एकटा शिष्‍य, हुनका कहलकनि, “प्रभु, हमरा पहिने जा कऽ अपना बाबूक लास केँ गाड़ि आबऽ दिअ।”
22
यीशु ओकरा कहलथिन, “अहाँ हमरा पाछाँ आउ, आ मुरदा सभ केँ अपन मुरदा गाड़ऽ दिऔक।”
23
यीशु नाव पर चढ़लाह तँ शिष्‍य सभ सेहो हुनका संग विदा भेलथिन।
24
एकाएक झील मे बहुत बड़का अन्‍हड़-बिहारि उठल आ नाव लहरिक पानि सँ भरऽ लागल। मुदा यीशु सुतल छलाह।
25
शिष्‍य सभ आबि कऽ हुनका जगबैत कहलथिन, “प्रभु, हमरा सभ केँ बचाउ! हम सभ डुबऽ-डुबऽ पर छी!”
26
यीशु शिष्‍य सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभक विश्‍वास एतेक कम किएक अछि? अहाँ सभ एतेक डेरायल किएक छी?” तकरबाद यीशु उठि कऽ अन्‍हड़-बिहारि आ लहरि केँ डँटलथिन। अन्‍हड़-बिहारि थम्‍हि गेल आ सभ किछु एकदम शान्‍त भऽ गेल।
27
शिष्‍य सभ आश्‍चर्यित भऽ कहऽ लगलाह, “ई केहन मनुष्‍य छथि? अन्‍हड़-बिहारि आ लहरिओ हिनकर आदेश मानैत छनि!”
28
जखन यीशु झीलक ओहि पार गदरेनी सभक इलाका मे पहुँचलाह तँ दुष्‍टात्‍मा सँ ग्रसित दू व्‍यक्‍ति कबरिस्‍तान वला क्षेत्र सँ बहरा कऽ हुनका भेटलनि। ओ दूनू व्‍यक्‍ति एतेक उग्र छल जे लोक सभ डरेँ ओहि बाटे चलनाइ छोड़ि देने छल।
29
ओ दूनू चिचिया उठल, “यौ परमेश्‍वरक पुत्र, हमरा सभ सँ अपने केँ कोन काज? की समय सँ पहिनहि अपने हमरा सभ केँ सतयबाक लेल एतऽ आयल छी?”
30
ओहिठाम सँ कनेक दूर पर सुगरक बड़का झुण्‍ड चरि रहल छल।
31
दुष्‍टात्‍मा सभ यीशु सँ विनती कयलकनि, “जँ अहाँ हमरा सभ केँ भगाइए रहल छी तँ हमरा सभ केँ ओहि सुगरक झुण्‍ड मे पठा दिअ।”
32
यीशु ओकरा सभ केँ कहलथिन, “जो!” दुष्‍टात्‍मा सभ दूनू व्‍यक्‍ति मे सँ निकलि कऽ सुगरक झुण्‍ड मे प्रवेश कऽ गेल। सुगरक पूरा झुण्‍ड दौड़ि कऽ पहाड़ पर सँ झील मे खसल और डुबि कऽ मरि गेल।
33
तखन सुगर चराबऽ वला सभ भागल आ ई सभ समाचार नगर मे जा कऽ सुनाबऽ लागल। ओहि दूनू दुष्‍टात्‍मा लागल व्‍यक्‍ति केँ की भेलैक, सेहो सुनौलकैक।
34
एहि पर नगरक सभ लोक यीशु सँ भेँट करबाक लेल नगर सँ बाहर आबि गेल। यीशु केँ देखि ओ सभ हुनका सँ विनती करऽ लगलनि जे, “अहाँ हमरा सभक इलाका सँ चल जाउ।”
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